Diksha Goyal

OPD Diaries

"OPD Diaries — because every encounter leaves a mark." OPD Diaries is a storytelling podcast where real moments from the doctor’s clinic turn into thought-provoking narratives. Through heartfelt encounters with patients, it captures emotions, dilemmas, and the human side of medicine — sometimes moving, sometimes ironic, always leaving listeners with a question to reflect on.

Autor

Diksha Goyal

Categoría

Society

Web del podcast

hubhopper.com

Último episodio

10 de may. de 2026

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Episodios

साथ 10.05.2026

84 साल की एक महिला आज ओपीडी में आई थीं। जांच के बीच अचानक अपने पति का ज़िक्र करते हुए उनकी आँखें भर आईं। वो कुछ पल रोईं, खुद को संभाला, अल्ट्रासाउंड करवाया और चली गईं। पूरी बात बस इतनी सी थी — लेकिन उनके जाने के बाद देर तक महसूस होता रहा कि कुछ लोग उम्र के इस पड़ाव पर बीमारी से नहीं, अकेलेपन से लड़ रहे होते हैं।

मेहंदी से Modernity तक 20.02.2026

त्योहारों की रौनक के बीच एक 70 साल की आंटी का प्यारा सा सवाल एक डॉक्टर को सोच में डाल देता है—क्या शादीशुदा होना काफी है, या उसे रोज़ दिखाना भी ज़रूरी है? 

चमत्कार 03.02.2026

एक व्यस्त OPD में डरी-सहमी रज़िया और उसके पति को लगता है कि भारी bleeding के बाद उनका बच्चा नहीं बचा। अल्ट्रासाउंड मशीन पर जब धड़कन गूंजती है, तो डर आस्था में बदल जाता है। यह कहानी सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि उस उम्मीद की है जो डर, अज्ञान और अफवाहों के बीच भी ज़िंदा रहती है—और हमें सिखाती है कि हर bleeding अंत नहीं होती, कभी-कभी वह चमत्कार की शुरुआत भी होती है।

POCSO 05.11.2025

एक छोटे शहर की डॉक्टर की नज़र से दिखती समाज की सच्चाई — जब 15 साल की गर्भवती बच्ची अपने “पति” के साथ स्कैन करवाने आती है। यह कहानी सिर्फ कानून की नहीं, बल्कि ज़मीर, ज़िम्मेदारी और उस जंग की है जो हर जागरूक इंसान को बाल विवाह के ख़िलाफ़ लड़नी चाहिए।

आहुति 29.10.2025

एक छोटा सा किस्सा, जहाँ एक महिला हमेशा परिवार के लिए खुद को पीछे रखती हैं, लेकिन एक साधारण चेकअप उन्हें याद दिला देता है—अपनी सेहत का ख्याल रखना सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार की ताक़त के लिए ज़रूरी है।

टीवीएस - डर से दोस्ती तक का सफ़र 22.10.2025

टीवीएस के नाम से सहमी अनीता जी जब आखिरकार टेस्ट के लिए तैयार हुईं, तो डर हवा हो गया और चेहरे पर मुस्कान लौट आई — डर से दोस्ती तक का ये सफ़र हुआ साकार l

Cake 14.10.2025

एक पिता का दर्द, एक बेटी की याद… और एक छोटा-सा केक जिसने फिर से मुस्कुराना सिखा दिया और ज़िंदगी में उम्मीद का स्वाद घोल दिया।

Gen-Z 14.10.2025

एक अल्ट्रासाउंड के दौरान 18 साल की प्रिया का आत्मविश्वास डॉक्टर को सोचने पर मजबूर कर गया — क्या जेनज़ की ‘मैं सब जानती हूँ’ वाली सोच अहंकार है, या ये वही आग है जो आने वाले वक्त को नया रूप देगी?

फ़ैसला 27.09.2025

जब अल्ट्रासाउंड स्क्रीन पर एक अनमैरिड लड़की की नन्हीं धड़कन सामने आई, तो डॉक्टर को न सिर्फ़ उसके दर्द बल्कि समाज के कलंक और सिस्टम की संवेदनशीलता के बीच भी रास्ता तलाशना पड़ा।

पुरानी जीन्स 27.09.2025

कपड़ों वाली jeans तो आसानी से बदल जाती है, लेकिन ज़िंदगी वाली genes की गुत्थी कितनी उलझी हो सकती है—ये नज़मा की कहानी बताती है।

बाढ़ 27.09.2025

इस साल की बाढ़ सब कुछ बहा ले गई, पर एक बुज़ुर्ग महिला की मुस्कान ने याद दिलाया कि इंसान का हौसला हर लहर से गहरा होता है।

आधा-अधूरा 12.09.2025

उस स्त्री की कहानी, जिसने मासिक धर्म का अनुभव कभी नहीं किया और उसी अभाव को छुपाते हुए जीवन के कठिन सच का सामना किया।

बीयर बाबा का श्राप 05.09.2025

एक मज़ेदार OPD किस्सा, जहाँ हरजस नाम का नौजवान अपने किडनी स्टोन को ‘बीयर बाबा’ का श्राप मान लेता है। हँसी-ठिठोली के बीच कहानी सिखाती है कि पत्थरी का इलाज बीयर नहीं, पानी है।

अनफ़ेयर ज़िंदगी 31.08.2025

एक ऐसी कहानी जो हमें दिखाती है कि दर्द, संघर्ष और अन्याय से जूझती एक साधारण-सी लड़की सारा के भीतर कितनी गहरी ताक़त छुपी है। पहली मोहब्बत खोकर, बेटी से बिछड़कर, दूसरी शादी में मारपीट और बेबसी सहकर भी वह हार नहीं मानती। अब पति की बीमारी और ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबकर भी उसके होंठों पर सिर्फ़ एक सवाल है — ‘क्यों हमेशा मेरे साथ ही?’ यह कहानी सिर्फ़ सुनाई नहीं जाती, महसूस कराई जाती है, ताकि हम सब उस...

बाबाजी का Foley's 25.08.2025

इलाज से ज़्यादा दर्द सहना मंज़ूर था… लेकिन बेटी से ऐसा काम करवाना पाप!” मेरी ओपीडी में बाबाजी की ये सोच मुझे चौंका गई। आज जब औरतें रोज़ अपमान और हिंसा झेल रही हैं, क्या हमें इस ‘संस्कार’ से कुछ सीखना चाहिए?

सफाई – आखिर किसकी ज़िम्मेदारी? 17.08.2025

आज OPD में एक छोटी-सी घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया—क्या सफाई सिर्फ़ क्लीनर का काम है? हम अपने घर में गंदगी नहीं सहते, लेकिन बाहर आते ही सड़कों, नहरों और पार्कों को कचरे का डिब्बा क्यों बना देते हैं? धरती को माँ कहते हैं, फिर उसके पैरों पर रोज़ कचरा क्यों फेंकते हैं? असली समस्या गंदगी नहीं, हमारी सोच है—“ये मेरा काम नहीं।” सफाई कोई काम नहीं, बल्कि इंसानियत की आदत है। अब तय हमें करना है—क्या हम आन...

बुढ़ापा 02.08.2025

बुढ़ापा बीमारी नहीं, पर अकेलापन एक अनकही पीड़ा है। हर दिन मेरी ओपीडी में आते हैं बुज़ुर्ग — कुछ स्कैन के लिए, ज़्यादातर किसी बात के लिए। उनकी आँखों में कहानियाँ हैं, जो रिपोर्ट में नहीं, महसूस करने में मिलती हैं। यह कहानी उन ख़ामोश लम्हों की है — जिन्हें दवाएं नहीं, थोड़ा वक़्त और सम्मान राहत देता है।

कुदरत का इम्तिहान 26.07.2025

हर दिन एक डॉक्टर की ओपीडी में उम्मीदें आती हैं — कभी धड़कन के रूप में, कभी ख़ामोशी के साथ। कोई माँ बनने का सपना लिए आता है, कोई अनजाने में उसे खो देता है, और कोई बोझिल दिल से उसे टाल देता है। स्कैन मशीन से सिर्फ तसवीरें नहीं, अधूरी कहानियाँ बनती हैं — दर्द, प्यार और कुदरत के फ़ैसलों से भरी हुई।

गूगल से पहले डॉक्टर 20.07.2025

जब इंटरनेट ने डर दिखाया और एक डॉक्टर ने भरोसा दिलाया — एक गूढ़ दर्द से निकली एक सच्ची मुस्कान की कहानी

किडनी कहाँ गई? 13.07.2025

एक साधारण से लगने वाले रूटीन चेकअप ने उस दिन मेरी ओपीडी को यादगार बना दिया। चालीस वर्षीय शांत चेहरे वाले मरीज के शरीर में एक अनोखी सच्चाई छुपी थी — दोनों किडनियाँ एक ही तरफ थीं। जब स्क्रीन पर बाईं किडनी न दिखी, तो घबराहट हुई, लेकिन खोज ने मुस्कुराहट में बदल दिया। ये एक मेडिकल चमत्कार था, लेकिन उससे भी बड़ा चमत्कार था मरीज का भरोसा और उस सच्चाई को सहजता से अपनाना। कभी-कभी शरीर खुद अपनी कहानी लिखता...

सरोगेसी: एक अनकहा सच 01.07.2025

OPD में आई कविता अपने भीतर एक नन्ही जान की उम्मीद लेकर आई थी — दो हल्की लकीरों ने उसे मां बना दिया था, और शायद किसी और के लिए त्याग की देवी भी। पर अल्ट्रासाउंड की स्क्रीन ने उसकी उम्मीदें चुपचाप मिटा दीं। कुछ दिन बाद आई सुनिता — पेट में धड़कता जीवन, पर आंखों में खालीपन। दोनों औरतें अलग थीं, पर उनकी कहानियाँ एक जैसी थीं: अपने शरीर, अपनी मर्ज़ी, और अपने बच्चे पर भी हक़ नहीं। पंजाब के गांवों में फैली...

बंद दरवाज़े 25.06.2025

पठानकोट की एक ओपीडी में आई कमला—एक शिक्षिका, एक माँ—के चेहरे पर सिर्फ दर्द नहीं, वर्षों की चुप्पी थी। घरेलू हिंसा की मार खाकर भी वह जिंदा थी, पर टूट चुकी थी। जब डॉक्टर दीक्षा ने उसकी सिसकी सुनी, तो उन्होंने सिर्फ इलाज नहीं किया—उन्होंने एक दरवाज़ा खोला। ये कहानी है उन अनगिनत महिलाओं की जिनकी ज़िंदगी बंद दरवाज़ों में कैद है… जिन्हें बस एक उम्मीद की दरार चाहिए, एक आवाज़, जो कहे—अब और नहीं।

हार्ट अटैक 20.06.2025

ड्यूटी और बेटी के धर्म के बीच झूलती एक डॉक्टर — जब अपने ही पिता को हार्ट अटैक आता है, तो अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करती उसकी आँखों से आँसू बह निकलते हैं। मरीज़ समझती है, साथी बनती है, और इंसानियत रास्ता दिखाती है। Pathankot की OPD में उस दिन सिर्फ स्कैन नहीं रुके — एक बेटी की जद्दोजहद, एक पिता की पुकार, और समाज की संवेदना ने मिलकर ये साबित कर दिया कि जब दिल टूटते हैं, तब दिलवाले ही साथ खड़े मिलते ह...

बैटल ऑफ BLADDER 14.06.2025

बैटल ऑफ ब्लैडर” एक रेडियोलॉजिस्ट की ओपीडी डायरी से निकली सच्ची और मज़ेदार कहानी है, जहाँ अल्ट्रासाउंड से ज़्यादा चुनौती बन जाता है ‘बाथरूम का प्रेशर’। एक बुज़ुर्ग अंकल, जिनका प्रोस्टेट स्कैन होना है, बार-बार कहते हैं ‘प्रेशर बन गया’, लेकिन ब्लैडर हर बार धोखा दे देता है। कई बार लिटाने, समझाने और पानी पिलाने के बाद जो हुआ, वो डॉक्टर और स्टाफ — सबकी हँसी रोक नहीं पाया! ये कहानी दिखाती है कि मेडिकल सा...

ड्यूटी इन टाइम्स ऑफ़ वॉर - Operation Sindoor 09.06.2025

एक डॉक्टर की सच्ची और मार्मिक कहानी है, जो पठानकोट की सरहद पर, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्लैकआउट और डर के माहौल में भी अपनी ड्यूटी निभाती है। जब पूरा शहर खामोश था, अस्पताल की रौशनी और इंसानियत की धड़कन ज़िंदा थी। इस कहानी में एक गर्भवती महिला की आशा, एक डॉक्टर का समर्पण, और एक पिता का देशभक्ति से भरा वचन — सब कुछ एक साथ गूँजता है। यह सिर्फ युद्ध की नहीं, मानवता, विश्वास और नयी ज़िंदगी की भी कहानी है...

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