Diksha Goyal
OPD Diaries
"OPD Diaries — because every encounter leaves a mark." OPD Diaries is a storytelling podcast where real moments from the doctor’s clinic turn into thought-provoking narratives. Through heartfelt encounters with patients, it captures emotions, dilemmas, and the human side of medicine — sometimes moving, sometimes ironic, always leaving listeners with a question to reflect on.
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साथ 10.05.2026 1:12
84 साल की एक महिला आज ओपीडी में आई थीं। जांच के बीच अचानक अपने पति का ज़िक्र करते हुए उनकी आँखें भर आईं। वो कुछ पल रोईं, खुद को संभाला, अल्ट्रासाउंड करवाया और चली गईं। पूरी बात बस इतनी सी थी — लेकिन उनके जाने के बाद देर तक महसूस होता रहा कि कुछ लोग उम्र के इस पड़ाव पर बीमारी से नहीं, अकेलेपन से लड़ रहे होते हैं।
मेहंदी से Modernity तक 20.02.2026 2:37
त्योहारों की रौनक के बीच एक 70 साल की आंटी का प्यारा सा सवाल एक डॉक्टर को सोच में डाल देता है—क्या शादीशुदा होना काफी है, या उसे रोज़ दिखाना भी ज़रूरी है?
चमत्कार 03.02.2026 2:24
एक व्यस्त OPD में डरी-सहमी रज़िया और उसके पति को लगता है कि भारी bleeding के बाद उनका बच्चा नहीं बचा। अल्ट्रासाउंड मशीन पर जब धड़कन गूंजती है, तो डर आस्था में बदल जाता है। यह कहानी सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि उस उम्मीद की है जो डर, अज्ञान और अफवाहों के बीच भी ज़िंदा रहती है—और हमें सिखाती है कि हर bleeding अंत नहीं होती, कभी-कभी वह चमत्कार की शुरुआत भी होती है।
POCSO 05.11.2025 2:18
एक छोटे शहर की डॉक्टर की नज़र से दिखती समाज की सच्चाई — जब 15 साल की गर्भवती बच्ची अपने “पति” के साथ स्कैन करवाने आती है। यह कहानी सिर्फ कानून की नहीं, बल्कि ज़मीर, ज़िम्मेदारी और उस जंग की है जो हर जागरूक इंसान को बाल विवाह के ख़िलाफ़ लड़नी चाहिए।
आहुति 29.10.2025 1:43
एक छोटा सा किस्सा, जहाँ एक महिला हमेशा परिवार के लिए खुद को पीछे रखती हैं, लेकिन एक साधारण चेकअप उन्हें याद दिला देता है—अपनी सेहत का ख्याल रखना सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार की ताक़त के लिए ज़रूरी है।
टीवीएस - डर से दोस्ती तक का सफ़र 22.10.2025 3:02
टीवीएस के नाम से सहमी अनीता जी जब आखिरकार टेस्ट के लिए तैयार हुईं, तो डर हवा हो गया और चेहरे पर मुस्कान लौट आई — डर से दोस्ती तक का ये सफ़र हुआ साकार l
Cake 14.10.2025 2:00
एक पिता का दर्द, एक बेटी की याद… और एक छोटा-सा केक जिसने फिर से मुस्कुराना सिखा दिया और ज़िंदगी में उम्मीद का स्वाद घोल दिया।
Gen-Z 14.10.2025 2:36
एक अल्ट्रासाउंड के दौरान 18 साल की प्रिया का आत्मविश्वास डॉक्टर को सोचने पर मजबूर कर गया — क्या जेनज़ की ‘मैं सब जानती हूँ’ वाली सोच अहंकार है, या ये वही आग है जो आने वाले वक्त को नया रूप देगी?
फ़ैसला 27.09.2025 3:34
जब अल्ट्रासाउंड स्क्रीन पर एक अनमैरिड लड़की की नन्हीं धड़कन सामने आई, तो डॉक्टर को न सिर्फ़ उसके दर्द बल्कि समाज के कलंक और सिस्टम की संवेदनशीलता के बीच भी रास्ता तलाशना पड़ा।
पुरानी जीन्स 27.09.2025 2:31
कपड़ों वाली jeans तो आसानी से बदल जाती है, लेकिन ज़िंदगी वाली genes की गुत्थी कितनी उलझी हो सकती है—ये नज़मा की कहानी बताती है।
बाढ़ 27.09.2025 1:25
इस साल की बाढ़ सब कुछ बहा ले गई, पर एक बुज़ुर्ग महिला की मुस्कान ने याद दिलाया कि इंसान का हौसला हर लहर से गहरा होता है।
आधा-अधूरा 12.09.2025 3:05
उस स्त्री की कहानी, जिसने मासिक धर्म का अनुभव कभी नहीं किया और उसी अभाव को छुपाते हुए जीवन के कठिन सच का सामना किया।
बीयर बाबा का श्राप 05.09.2025 1:57
एक मज़ेदार OPD किस्सा, जहाँ हरजस नाम का नौजवान अपने किडनी स्टोन को ‘बीयर बाबा’ का श्राप मान लेता है। हँसी-ठिठोली के बीच कहानी सिखाती है कि पत्थरी का इलाज बीयर नहीं, पानी है।
अनफ़ेयर ज़िंदगी 31.08.2025 4:38
एक ऐसी कहानी जो हमें दिखाती है कि दर्द, संघर्ष और अन्याय से जूझती एक साधारण-सी लड़की सारा के भीतर कितनी गहरी ताक़त छुपी है। पहली मोहब्बत खोकर, बेटी से बिछड़कर, दूसरी शादी में मारपीट और बेबसी सहकर भी वह हार नहीं मानती। अब पति की बीमारी और ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबकर भी उसके होंठों पर सिर्फ़ एक सवाल है — ‘क्यों हमेशा मेरे साथ ही?’ यह कहानी सिर्फ़ सुनाई नहीं जाती, महसूस कराई जाती है, ताकि हम सब उस...
बाबाजी का Foley's 25.08.2025 2:50
इलाज से ज़्यादा दर्द सहना मंज़ूर था… लेकिन बेटी से ऐसा काम करवाना पाप!” मेरी ओपीडी में बाबाजी की ये सोच मुझे चौंका गई। आज जब औरतें रोज़ अपमान और हिंसा झेल रही हैं, क्या हमें इस ‘संस्कार’ से कुछ सीखना चाहिए?
सफाई – आखिर किसकी ज़िम्मेदारी? 17.08.2025 2:24
आज OPD में एक छोटी-सी घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया—क्या सफाई सिर्फ़ क्लीनर का काम है? हम अपने घर में गंदगी नहीं सहते, लेकिन बाहर आते ही सड़कों, नहरों और पार्कों को कचरे का डिब्बा क्यों बना देते हैं? धरती को माँ कहते हैं, फिर उसके पैरों पर रोज़ कचरा क्यों फेंकते हैं? असली समस्या गंदगी नहीं, हमारी सोच है—“ये मेरा काम नहीं।” सफाई कोई काम नहीं, बल्कि इंसानियत की आदत है। अब तय हमें करना है—क्या हम आन...
बुढ़ापा 02.08.2025 3:46
बुढ़ापा बीमारी नहीं, पर अकेलापन एक अनकही पीड़ा है। हर दिन मेरी ओपीडी में आते हैं बुज़ुर्ग — कुछ स्कैन के लिए, ज़्यादातर किसी बात के लिए। उनकी आँखों में कहानियाँ हैं, जो रिपोर्ट में नहीं, महसूस करने में मिलती हैं। यह कहानी उन ख़ामोश लम्हों की है — जिन्हें दवाएं नहीं, थोड़ा वक़्त और सम्मान राहत देता है।
कुदरत का इम्तिहान 26.07.2025 4:04
हर दिन एक डॉक्टर की ओपीडी में उम्मीदें आती हैं — कभी धड़कन के रूप में, कभी ख़ामोशी के साथ। कोई माँ बनने का सपना लिए आता है, कोई अनजाने में उसे खो देता है, और कोई बोझिल दिल से उसे टाल देता है। स्कैन मशीन से सिर्फ तसवीरें नहीं, अधूरी कहानियाँ बनती हैं — दर्द, प्यार और कुदरत के फ़ैसलों से भरी हुई।
गूगल से पहले डॉक्टर 20.07.2025 3:37
जब इंटरनेट ने डर दिखाया और एक डॉक्टर ने भरोसा दिलाया — एक गूढ़ दर्द से निकली एक सच्ची मुस्कान की कहानी
किडनी कहाँ गई? 13.07.2025 3:19
एक साधारण से लगने वाले रूटीन चेकअप ने उस दिन मेरी ओपीडी को यादगार बना दिया। चालीस वर्षीय शांत चेहरे वाले मरीज के शरीर में एक अनोखी सच्चाई छुपी थी — दोनों किडनियाँ एक ही तरफ थीं। जब स्क्रीन पर बाईं किडनी न दिखी, तो घबराहट हुई, लेकिन खोज ने मुस्कुराहट में बदल दिया। ये एक मेडिकल चमत्कार था, लेकिन उससे भी बड़ा चमत्कार था मरीज का भरोसा और उस सच्चाई को सहजता से अपनाना। कभी-कभी शरीर खुद अपनी कहानी लिखता...
सरोगेसी: एक अनकहा सच 01.07.2025 4:14
OPD में आई कविता अपने भीतर एक नन्ही जान की उम्मीद लेकर आई थी — दो हल्की लकीरों ने उसे मां बना दिया था, और शायद किसी और के लिए त्याग की देवी भी। पर अल्ट्रासाउंड की स्क्रीन ने उसकी उम्मीदें चुपचाप मिटा दीं। कुछ दिन बाद आई सुनिता — पेट में धड़कता जीवन, पर आंखों में खालीपन। दोनों औरतें अलग थीं, पर उनकी कहानियाँ एक जैसी थीं: अपने शरीर, अपनी मर्ज़ी, और अपने बच्चे पर भी हक़ नहीं। पंजाब के गांवों में फैली...
बंद दरवाज़े 25.06.2025 3:54
पठानकोट की एक ओपीडी में आई कमला—एक शिक्षिका, एक माँ—के चेहरे पर सिर्फ दर्द नहीं, वर्षों की चुप्पी थी। घरेलू हिंसा की मार खाकर भी वह जिंदा थी, पर टूट चुकी थी। जब डॉक्टर दीक्षा ने उसकी सिसकी सुनी, तो उन्होंने सिर्फ इलाज नहीं किया—उन्होंने एक दरवाज़ा खोला। ये कहानी है उन अनगिनत महिलाओं की जिनकी ज़िंदगी बंद दरवाज़ों में कैद है… जिन्हें बस एक उम्मीद की दरार चाहिए, एक आवाज़, जो कहे—अब और नहीं।
हार्ट अटैक 20.06.2025 4:05
ड्यूटी और बेटी के धर्म के बीच झूलती एक डॉक्टर — जब अपने ही पिता को हार्ट अटैक आता है, तो अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करती उसकी आँखों से आँसू बह निकलते हैं। मरीज़ समझती है, साथी बनती है, और इंसानियत रास्ता दिखाती है। Pathankot की OPD में उस दिन सिर्फ स्कैन नहीं रुके — एक बेटी की जद्दोजहद, एक पिता की पुकार, और समाज की संवेदना ने मिलकर ये साबित कर दिया कि जब दिल टूटते हैं, तब दिलवाले ही साथ खड़े मिलते ह...
बैटल ऑफ BLADDER 14.06.2025 3:38
बैटल ऑफ ब्लैडर” एक रेडियोलॉजिस्ट की ओपीडी डायरी से निकली सच्ची और मज़ेदार कहानी है, जहाँ अल्ट्रासाउंड से ज़्यादा चुनौती बन जाता है ‘बाथरूम का प्रेशर’। एक बुज़ुर्ग अंकल, जिनका प्रोस्टेट स्कैन होना है, बार-बार कहते हैं ‘प्रेशर बन गया’, लेकिन ब्लैडर हर बार धोखा दे देता है। कई बार लिटाने, समझाने और पानी पिलाने के बाद जो हुआ, वो डॉक्टर और स्टाफ — सबकी हँसी रोक नहीं पाया! ये कहानी दिखाती है कि मेडिकल सा...
ड्यूटी इन टाइम्स ऑफ़ वॉर - Operation Sindoor 09.06.2025 4:33
एक डॉक्टर की सच्ची और मार्मिक कहानी है, जो पठानकोट की सरहद पर, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्लैकआउट और डर के माहौल में भी अपनी ड्यूटी निभाती है। जब पूरा शहर खामोश था, अस्पताल की रौशनी और इंसानियत की धड़कन ज़िंदा थी। इस कहानी में एक गर्भवती महिला की आशा, एक डॉक्टर का समर्पण, और एक पिता का देशभक्ति से भरा वचन — सब कुछ एक साथ गूँजता है। यह सिर्फ युद्ध की नहीं, मानवता, विश्वास और नयी ज़िंदगी की भी कहानी है...
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