nalini varshney

"कहानी सुनोगे?"- Panchatantra Ki Kahaniyaan

Arts HI ↓ 43 episodios

I love stories ! And this podcast is all about stories as well as their backgrounds. Starting with Panchatantra, we will move on to other traditional/mythological tales.

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Autor

nalini varshney

Categoría

Arts

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Último episodio

28 de abr. de 2024

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Episodios

शेर की खाल में गधा 28.04.2024

बंदर अब भी मगरमच्छ से क्रोधित है और मगरमच्छ उसे मानने का पूरा प्रयास कर रहा है। बंदर गुस्से में मगरमच्छ को "शेर की खाल में गधा" कहानी का उदाहरण देते हुए डांट लगता है, कि उसी गाढ़े की तरह मगर ने भी अपनी असलियत स्वयं ही उजागर कर दी है।

कृतघ्न पत्नी 14.12.2023

रक्तमुख बंदर बहुत दुखी भी है और क्रोधित भी। वह करालमुख मगरमच्छ को डांटता कि पत्नी प्रेम में अपने मित्र से छल करना उचित नहीं। रक्तमुख का यह मानना है कि स्त्रियां स्वभाव से ही अविश्वसनीय होती हैं और अपनी बात को गहराई से समझने के लिए को कृतघ्न पत्नी की कहानी सुनाना शुरू करता है।

गीदड़ गीदड़ है और शेर शेर 11.10.2023

इस कहानी में राजा, युधिष्ठिर कुम्हार का सच जानने के बाद, उसे तुरंत राज्य से चले जाने की सलाह देते हैं। वे उसे समझाते हैं कि 'जो जिसका काम है वही उसे पूर्ण रूप से कर सकता है, अन्यथा मुसीबत हो सकती है' ।

शूरवीर कुम्हार 08.09.2023

लब्धप्रणाश के चौथे एपिसोड में आप देखेंगे कि इस कहानी में भी "हाथ आई वस्तु का हाथ से निकल जाना" कितनी सरलता और सुंदरता से दर्शाया गया है। युधिष्ठिर नामक कुम्हार , पांडव पुत्र युधिष्ठिर की भांति सच बोलता है, किंतु यह उसका सिद्धांत नहीं था। अपना सत्य व्यक्त कर के वो राजा से पाया सम्मान और नौकरी दोनों से ही हाथ धो देता है।

शेर, गीदड़ और मूर्ख गधा 22.08.2023

करालमुख मगरमच्छ अब भी इसी प्रयास में है कि किसी प्रकार रक्तमुख बंदर उसके साथ उसके घर चलने को फिर मान जाए। बंदर उसे लंबकर्ण गढ़े गधे की कथा का उदाहरण दे कर समझा रहा है कि वो जान बूझ कर मृत्यु के सामने नहीं जायेगा।

जान बची लाखों पाए 03.07.2023

बंदर और मगरमच्छ की कहानी आगे बढ़ती है। मगरमच्छ को अपनी भूल का आभास हो रहा है। बंदर, उसकी नीयत समझ चुका है। अब मगर कितने भी प्रयास करे, बंदर मानने वाला नहीं। वो अपनी बात समझाने के लिए गंगादत्त मेंढक की कथा सुनाता है।

बंदर और मगरमच्छ 31.05.2023

पंचतंत्र का चौथा विषय- लब्धप्रनाश यहीं से आरंभ होता है। हाथ आई वस्तु का हाथ से निकल जाना। बंदर और मगरमच्छ की कथा इसी बात को अनेक कथाओं के माध्यम से आप तक पहुंचती है। बंदर और मगरमच्छ की कहानी तो सब जानते हैं, किंतु उस कहानी के अंदर और कितनी कहानियां है यह देखने वाली बात है।

वंश की रक्षा और काकोलुकियम का अंत 21.02.2023

स्थिरजीवी, मेघवर्ण को, शत्रु किले में बिताए अपने समय के बारे में बता रहा है। मेघवर्ण और स्थिरजीवी कुशल शासक एवं कुशल शासन के गुणों पर चर्चा करते हैं, रणनीति, राजनीति और कूटनीति के सिद्धांतों का महत्व क्या है, इस पर वार्तालाप करते हैं। इसी संदर्भ में स्थिरजीवी दो कथाएं भी सुनता है।

उल्लुओं का अंत 13.01.2023

स्थिरजीवी को अपनी अंतिम योजना लागू करने का अवसर मिल गया है और रक्ताक्ष के चले जाने के पश्चात यह काम और भी आसान हो गया। उल्लुओं और कौवों की शत्रुता का कारण इस एपिसोड में पूर्ण रूप से समझ आ जाता है और स्थिरजीवी से राजनैतिक ज्ञान भी प्राप्त होता है।

बोलती गुफ़ा 03.12.2022

रक्ताक्ष अपने साथियों को बोलती गुफ़ा की कथा सुनाता है, जिससे वह उनको समझना चाहता है कि जो जीव जागरूक रहते हैं और हर स्तिथि के लिए तैयार रहते हैं, वे सुखमयी जीवन जीते हैं।

मूर्खमंडली 28.11.2022

उल्लुमंत्री रक्ताक्ष समझ चुका है कि अब बहुत देर हो चुकी है। उसे मूर्खमंडली की कथा याद आती है जिसमें हाथ आए स्वर्ण को, मूर्खता के कारण गंवा दिया जाता है; जैसे वे स्वयं कर रहे थे, हाथ आए शत्रु मंत्री का सही लाभ न उठा कर !

चुहिया का स्वयंवर 19.10.2022

रक्ताक्ष, अन्य उल्लुओं को सही मार्ग दिखाने का एक अंतिम प्रयास कर रहा है। उसका ज्ञान और अनुभव उसे बता रहे हैं कि कोई भी जीव या प्राणी कभी न कभी, कहीं न कहीं अपना मूल स्वभाव प्रकट कर ही देता है। उसे स्थिरजीवी पर विश्वास नहीं है और इस कथा द्वारा वह यही समझने का प्रयास कर रहा है।

मूर्ख रथ निर्माता 08.10.2022

उल्लूराज के निर्णय से रक्ताक्ष बहुत विचलित है। वो अन्य मंत्रियों को समझाने का प्रयास कर रहा है कि वे खुली आंखों से गलती कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वह उनको मूर्ख रथ निर्माता की कथा सुनाता है।

ब्राह्मण,चोर और राक्षस 27.09.2022

उल्लूराज अरिमर्दन, अब अपने चौथे और पांचवें मंत्री की सलाह सुन रहा है। शत्रु पक्ष के पकड़े गए मंत्री के साथ क्या करना चाहिए? वक्रनास और प्रकारकर्ण दोनों ही काक मंत्री को जीवन दान देने के पक्ष में हैं और अपने अपने दृष्टिकोण को समझाने के लिए कथाओं का सहारा लेते हैं।

बलिदानी कबूतर 14.09.2022

क्रुरक्ष, उल्लुराज अरिमर्दन को समझाने का प्रयास करता है कि शरण में आए जीव को मारना अनुचित है। इसी संदर्भ में वह अरिमर्दन को बलिदानी कबूतर की कथा सुनाता है।

नाग और स्वर्ण मुद्राएं 22.08.2022

रक्ताक्ष, उल्लू राज का मंत्री उन्हें नाग और स्वर्ण मुद्राओं की कथा सुनाता है जिसके द्वारा वो उल्लू राज को समझना चाहता है की हाथ आए अवसर को खोना नहीं चाहिए। इस कथा के द्वारा वो यह भी व्यक्त करता की शत्रु का मंत्री हाथ लगना कोई छोटी बात नहीं है। इस अवसर का उन्हें पूर्ण रूप से लाभ उठाना चाहिए।

स्थिरजीवी की चाल 07.07.2022

इस एपिसोड में स्थिरजीवी एक ऐसे विकल्प का प्रयोग करता है जिससे उसकी मान्यता अनुसार, उल्लुराजा को हराया जा सकता है। वो विकल्प क्या है ? यह जानने के लिए एपिसोड सुनिए और देखिए कि ऐसे विकल्प उस समय से लेकर आज तक चले आ रहे हैं।

ब्राह्मण और तीन ठग 30.06.2022

इस कहानी में स्थिरजीवी, मेघवर्ण को समझने का प्रयास कर रहे हैं कि किस प्रकार सामान्य ज्ञान और सामान्य बुद्धि को चालाकी से प्रयोग कर अपना काम निकाला जा सकता है। वह मेघवर्ण को यह भी समझता है कि निर्बल जीवों की शत्रुता हानिकारक हो सकती है और यह दर्शाने के लिए वो सर्प और चींटियों की कथा भी सुनाता है।

बिल्ली का न्याय 19.06.2022

कौवा हर प्रयास कर रहा है कि किसी तरह अन्य पक्षी समझ जाएं की उल्लू के पक्षीराज का चयन सही नहीं है। इस बात को और गहराई से समझने के लिए वो पक्षियों को बिल्ली के न्याय की कथा सुनाता है। पक्षी तो उसकी बात मान लेते हैं किंतु जब उल्लू को ज्ञात होता है कि कौवे ने उसके बारे में अन्य पक्षियों को भड़काया है तो वो बहुत क्रोधित हुआ । और इसी तरह कौवों और उल्लुओं में शत्रुता आरंभ हुई।

गजराज और चंद्रताल 09.06.2022

पक्षीराज का चयन होने जा रहा है। किंतु कौवे को उल्लू का चयन पसंद नहीं। वह उदाहरण स्वरूप यह कथा सुनाता है, जिससे अन्य पक्षी यह समझ सकें कि एक शक्तिशाली व्यक्तित्व वाला राजा, जैसे महाराज गरुड़ हैं, उनके नाम मात्र से ही शत्रु पीछे हट जाता है । यही बात दर्शाने के लिए कौवा , गजराज और चंद्रताल की कथा सुनाता है।

काकोलुकीयम 28.05.2022

काकोलुकीयम, अर्थात कौवे और उल्लुओं की कहानी। उन दोनो में शत्रुता कैसे और क्यों उत्पन्न हुई। इन कहानियों में युद्ध और शांति के लिए छह प्रकार की नीतियां बताई गई हैं। विष्णु शर्मा बहुत ही सोच समझ के ऐसे जीवों द्वारा नीतियां प्रस्तुत करते हैं, जो उस विचार और विचारधारा के लिए उपयुक्त होते हैं।

गजराज और मूषकराज और मित्रलाभ का अंत 05.05.2022

चितरंगा हिरण के आने से चार मित्रों की चौकड़ी पूरी हुई। कहानियों के दौरान यह बात स्पष्ट हो जाती है कि मित्र, मित्र होता है। मित्रता का रूप, आकार, धन, वैभव से कोई लेना देना नहीं। मित्रता के लिए केवल आपसी स्नेह, प्रेम और एक दूसरे के प्रति आदर सम्मान होना आवश्यक है। अच्छे और सच्चे मित्र अनमोल होते हैं।

अभागा बुनकर 02.04.2022

मंधारक कछुआ, हिरण्यका को उसकी निराशावादी स्तिथि से बाहर निकालने के लिए अभागे बुनकर की कहानी सुनाता है। कर्म और भाग्य की वार्तालाप आपके मन में कई विचार उत्पन्न कर सकते हैं। संचित धन और संचय रहित धन में क्या अंतर है और अभागे बुनकर के लिए कैसा धन सही रहेगा, इस पर भी विचार होगा।

व्यापारी पुत्र - प्राप्तव्य 20.03.2022

हिरण्यका चूहे की आगे की कहानी में सुनेंगे कि उसके और उसके परिवार जनों के साथ क्या क्या हुआ। हिरण्यका को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, और यह भी कि जब एक जीव अत्यंत कठिन समय से गुज़रता है, अपने अनुभवों पर चिंतन करता है तो उसे अंदर और उसके विचारों में क्या परिवर्तन होता है।

चूहा और साधु 27.01.2022

लघुपतंका और मंधारक जैसे मित्र पा कर, हिरण्यका अपना मन खाली करना शुरू करता है, अपना दुख बांटना शुरू करता है। हिरण्यका की कहानी सुनते समय यह समझ आने लगता है कि वो इतना समझदार कैसे बना होगा। जीवन के अनुभवों ने उसे बहुत कुछ सिखाया है जो अब उसके मित्रों के साथ साथ हमें भी प्राप्त हो रहा है !

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