nalini varshney
"कहानी सुनोगे?"- Panchatantra Ki Kahaniyaan
I love stories ! And this podcast is all about stories as well as their backgrounds. Starting with Panchatantra, we will move on to other traditional/mythological tales.
Author
nalini varshney
Category
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Latest episode
Apr 28, 2024
Where to listen?
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Episodes
शेर की खाल में गधा 28.04.2024 7:26
बंदर अब भी मगरमच्छ से क्रोधित है और मगरमच्छ उसे मानने का पूरा प्रयास कर रहा है। बंदर गुस्से में मगरमच्छ को "शेर की खाल में गधा" कहानी का उदाहरण देते हुए डांट लगता है, कि उसी गाढ़े की तरह मगर ने भी अपनी असलियत स्वयं ही उजागर कर दी है।
कृतघ्न पत्नी 14.12.2023 9:51
रक्तमुख बंदर बहुत दुखी भी है और क्रोधित भी। वह करालमुख मगरमच्छ को डांटता कि पत्नी प्रेम में अपने मित्र से छल करना उचित नहीं। रक्तमुख का यह मानना है कि स्त्रियां स्वभाव से ही अविश्वसनीय होती हैं और अपनी बात को गहराई से समझने के लिए को कृतघ्न पत्नी की कहानी सुनाना शुरू करता है।
गीदड़ गीदड़ है और शेर शेर 11.10.2023 6:31
इस कहानी में राजा, युधिष्ठिर कुम्हार का सच जानने के बाद, उसे तुरंत राज्य से चले जाने की सलाह देते हैं। वे उसे समझाते हैं कि 'जो जिसका काम है वही उसे पूर्ण रूप से कर सकता है, अन्यथा मुसीबत हो सकती है' ।
शूरवीर कुम्हार 08.09.2023 6:01
लब्धप्रणाश के चौथे एपिसोड में आप देखेंगे कि इस कहानी में भी "हाथ आई वस्तु का हाथ से निकल जाना" कितनी सरलता और सुंदरता से दर्शाया गया है। युधिष्ठिर नामक कुम्हार , पांडव पुत्र युधिष्ठिर की भांति सच बोलता है, किंतु यह उसका सिद्धांत नहीं था। अपना सत्य व्यक्त कर के वो राजा से पाया सम्मान और नौकरी दोनों से ही हाथ धो देता है।
शेर, गीदड़ और मूर्ख गधा 22.08.2023 12:18
करालमुख मगरमच्छ अब भी इसी प्रयास में है कि किसी प्रकार रक्तमुख बंदर उसके साथ उसके घर चलने को फिर मान जाए। बंदर उसे लंबकर्ण गढ़े गधे की कथा का उदाहरण दे कर समझा रहा है कि वो जान बूझ कर मृत्यु के सामने नहीं जायेगा।
जान बची लाखों पाए 03.07.2023 13:29
बंदर और मगरमच्छ की कहानी आगे बढ़ती है। मगरमच्छ को अपनी भूल का आभास हो रहा है। बंदर, उसकी नीयत समझ चुका है। अब मगर कितने भी प्रयास करे, बंदर मानने वाला नहीं। वो अपनी बात समझाने के लिए गंगादत्त मेंढक की कथा सुनाता है।
बंदर और मगरमच्छ 31.05.2023 14:36
पंचतंत्र का चौथा विषय- लब्धप्रनाश यहीं से आरंभ होता है। हाथ आई वस्तु का हाथ से निकल जाना। बंदर और मगरमच्छ की कथा इसी बात को अनेक कथाओं के माध्यम से आप तक पहुंचती है। बंदर और मगरमच्छ की कहानी तो सब जानते हैं, किंतु उस कहानी के अंदर और कितनी कहानियां है यह देखने वाली बात है।
वंश की रक्षा और काकोलुकियम का अंत 21.02.2023 14:34
स्थिरजीवी, मेघवर्ण को, शत्रु किले में बिताए अपने समय के बारे में बता रहा है। मेघवर्ण और स्थिरजीवी कुशल शासक एवं कुशल शासन के गुणों पर चर्चा करते हैं, रणनीति, राजनीति और कूटनीति के सिद्धांतों का महत्व क्या है, इस पर वार्तालाप करते हैं। इसी संदर्भ में स्थिरजीवी दो कथाएं भी सुनता है।
उल्लुओं का अंत 13.01.2023 7:38
स्थिरजीवी को अपनी अंतिम योजना लागू करने का अवसर मिल गया है और रक्ताक्ष के चले जाने के पश्चात यह काम और भी आसान हो गया। उल्लुओं और कौवों की शत्रुता का कारण इस एपिसोड में पूर्ण रूप से समझ आ जाता है और स्थिरजीवी से राजनैतिक ज्ञान भी प्राप्त होता है।
बोलती गुफ़ा 03.12.2022 7:46
रक्ताक्ष अपने साथियों को बोलती गुफ़ा की कथा सुनाता है, जिससे वह उनको समझना चाहता है कि जो जीव जागरूक रहते हैं और हर स्तिथि के लिए तैयार रहते हैं, वे सुखमयी जीवन जीते हैं।
मूर्खमंडली 28.11.2022 7:10
उल्लुमंत्री रक्ताक्ष समझ चुका है कि अब बहुत देर हो चुकी है। उसे मूर्खमंडली की कथा याद आती है जिसमें हाथ आए स्वर्ण को, मूर्खता के कारण गंवा दिया जाता है; जैसे वे स्वयं कर रहे थे, हाथ आए शत्रु मंत्री का सही लाभ न उठा कर !
चुहिया का स्वयंवर 19.10.2022 8:56
रक्ताक्ष, अन्य उल्लुओं को सही मार्ग दिखाने का एक अंतिम प्रयास कर रहा है। उसका ज्ञान और अनुभव उसे बता रहे हैं कि कोई भी जीव या प्राणी कभी न कभी, कहीं न कहीं अपना मूल स्वभाव प्रकट कर ही देता है। उसे स्थिरजीवी पर विश्वास नहीं है और इस कथा द्वारा वह यही समझने का प्रयास कर रहा है।
मूर्ख रथ निर्माता 08.10.2022 11:31
उल्लूराज के निर्णय से रक्ताक्ष बहुत विचलित है। वो अन्य मंत्रियों को समझाने का प्रयास कर रहा है कि वे खुली आंखों से गलती कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वह उनको मूर्ख रथ निर्माता की कथा सुनाता है।
ब्राह्मण,चोर और राक्षस 27.09.2022 14:12
उल्लूराज अरिमर्दन, अब अपने चौथे और पांचवें मंत्री की सलाह सुन रहा है। शत्रु पक्ष के पकड़े गए मंत्री के साथ क्या करना चाहिए? वक्रनास और प्रकारकर्ण दोनों ही काक मंत्री को जीवन दान देने के पक्ष में हैं और अपने अपने दृष्टिकोण को समझाने के लिए कथाओं का सहारा लेते हैं।
बलिदानी कबूतर 14.09.2022 13:33
क्रुरक्ष, उल्लुराज अरिमर्दन को समझाने का प्रयास करता है कि शरण में आए जीव को मारना अनुचित है। इसी संदर्भ में वह अरिमर्दन को बलिदानी कबूतर की कथा सुनाता है।
नाग और स्वर्ण मुद्राएं 22.08.2022 10:08
रक्ताक्ष, उल्लू राज का मंत्री उन्हें नाग और स्वर्ण मुद्राओं की कथा सुनाता है जिसके द्वारा वो उल्लू राज को समझना चाहता है की हाथ आए अवसर को खोना नहीं चाहिए। इस कथा के द्वारा वो यह भी व्यक्त करता की शत्रु का मंत्री हाथ लगना कोई छोटी बात नहीं है। इस अवसर का उन्हें पूर्ण रूप से लाभ उठाना चाहिए।
स्थिरजीवी की चाल 07.07.2022 11:01
इस एपिसोड में स्थिरजीवी एक ऐसे विकल्प का प्रयोग करता है जिससे उसकी मान्यता अनुसार, उल्लुराजा को हराया जा सकता है। वो विकल्प क्या है ? यह जानने के लिए एपिसोड सुनिए और देखिए कि ऐसे विकल्प उस समय से लेकर आज तक चले आ रहे हैं।
ब्राह्मण और तीन ठग 30.06.2022 10:10
इस कहानी में स्थिरजीवी, मेघवर्ण को समझने का प्रयास कर रहे हैं कि किस प्रकार सामान्य ज्ञान और सामान्य बुद्धि को चालाकी से प्रयोग कर अपना काम निकाला जा सकता है। वह मेघवर्ण को यह भी समझता है कि निर्बल जीवों की शत्रुता हानिकारक हो सकती है और यह दर्शाने के लिए वो सर्प और चींटियों की कथा भी सुनाता है।
बिल्ली का न्याय 19.06.2022 14:10
कौवा हर प्रयास कर रहा है कि किसी तरह अन्य पक्षी समझ जाएं की उल्लू के पक्षीराज का चयन सही नहीं है। इस बात को और गहराई से समझने के लिए वो पक्षियों को बिल्ली के न्याय की कथा सुनाता है। पक्षी तो उसकी बात मान लेते हैं किंतु जब उल्लू को ज्ञात होता है कि कौवे ने उसके बारे में अन्य पक्षियों को भड़काया है तो वो बहुत क्रोधित हुआ । और इसी तरह कौवों और उल्लुओं में शत्रुता आरंभ हुई।
गजराज और चंद्रताल 09.06.2022 16:46
पक्षीराज का चयन होने जा रहा है। किंतु कौवे को उल्लू का चयन पसंद नहीं। वह उदाहरण स्वरूप यह कथा सुनाता है, जिससे अन्य पक्षी यह समझ सकें कि एक शक्तिशाली व्यक्तित्व वाला राजा, जैसे महाराज गरुड़ हैं, उनके नाम मात्र से ही शत्रु पीछे हट जाता है । यही बात दर्शाने के लिए कौवा , गजराज और चंद्रताल की कथा सुनाता है।
काकोलुकीयम 28.05.2022 14:31
काकोलुकीयम, अर्थात कौवे और उल्लुओं की कहानी। उन दोनो में शत्रुता कैसे और क्यों उत्पन्न हुई। इन कहानियों में युद्ध और शांति के लिए छह प्रकार की नीतियां बताई गई हैं। विष्णु शर्मा बहुत ही सोच समझ के ऐसे जीवों द्वारा नीतियां प्रस्तुत करते हैं, जो उस विचार और विचारधारा के लिए उपयुक्त होते हैं।
गजराज और मूषकराज और मित्रलाभ का अंत 05.05.2022 21:03
चितरंगा हिरण के आने से चार मित्रों की चौकड़ी पूरी हुई। कहानियों के दौरान यह बात स्पष्ट हो जाती है कि मित्र, मित्र होता है। मित्रता का रूप, आकार, धन, वैभव से कोई लेना देना नहीं। मित्रता के लिए केवल आपसी स्नेह, प्रेम और एक दूसरे के प्रति आदर सम्मान होना आवश्यक है। अच्छे और सच्चे मित्र अनमोल होते हैं।
अभागा बुनकर 02.04.2022 15:52
मंधारक कछुआ, हिरण्यका को उसकी निराशावादी स्तिथि से बाहर निकालने के लिए अभागे बुनकर की कहानी सुनाता है। कर्म और भाग्य की वार्तालाप आपके मन में कई विचार उत्पन्न कर सकते हैं। संचित धन और संचय रहित धन में क्या अंतर है और अभागे बुनकर के लिए कैसा धन सही रहेगा, इस पर भी विचार होगा।
व्यापारी पुत्र - प्राप्तव्य 20.03.2022 22:07
हिरण्यका चूहे की आगे की कहानी में सुनेंगे कि उसके और उसके परिवार जनों के साथ क्या क्या हुआ। हिरण्यका को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, और यह भी कि जब एक जीव अत्यंत कठिन समय से गुज़रता है, अपने अनुभवों पर चिंतन करता है तो उसे अंदर और उसके विचारों में क्या परिवर्तन होता है।
चूहा और साधु 27.01.2022 17:46
लघुपतंका और मंधारक जैसे मित्र पा कर, हिरण्यका अपना मन खाली करना शुरू करता है, अपना दुख बांटना शुरू करता है। हिरण्यका की कहानी सुनते समय यह समझ आने लगता है कि वो इतना समझदार कैसे बना होगा। जीवन के अनुभवों ने उसे बहुत कुछ सिखाया है जो अब उसके मित्रों के साथ साथ हमें भी प्राप्त हो रहा है !
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