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Pratidin Ek Kavita

Arts HI ↓ 1195 episódios

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

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Episódios

Mausiyan | Dr Anamika 09.11.2023

मौसियाँ | डॉ अनामिका  वे बारिश में धूप की तरह आती हैं—  थोड़े समय के लिए और अचानक!  हाथ के बुने स्वेटर, इंद्रधनुष, तिल के लड्डू  और सधोर की साड़ी लेकर  वे आती हैं झूला झुलाने  पहली मितली की ख़बर पाकर  और गर्भ सहलाकर  लेती हैं अंतरिम रपट  गृहचक्र, बिस्तर और खुदरा उदासियों की!  झाड़ती हैं जाले, सँभालती हैं बक्से,  मेहनत से सुलझाती हैं भीतर तक उलझे बाल,  कर देती हैं चोटी-पाटी  और डाँटती भी जाती हैं कि प...

Meri Bansuri Meri Bhasha Hai | Shahanshah Alam 08.11.2023

मेरी बाँसुरी मेरी भाषा है | शहंशाह आलम | शहंशाह आलम सुबह उठा तो देर शाम को घर पहुँचा सूरज चाँद था कि रात भर जागा क़बीले में अथक हम दिन भर शहरी हुए और रात को आदिवासी यह मेरी भाषा की आवाज़ थी जो पहुँच रही थी आदमी के झुंड में पूरी तरह साफ़ सुनी जाने वाली इतनी साफ़ भाषा कि हम लड़ सकें अपने शत्रुओं से मेरी भाषा मेरी बाँसुरी है और बाँसुरी मेरी आवाज़ इसी भाषा के सहारे बादलों पर चलता-फिरता हुआ तुम तक पहुँ...

Naak | Viren Dangwal 07.11.2023

नाक | वीरेन डंगवाल  हस्ती की इस पिपहरी को यों ही बजाते रहियो मौला! आवाज़ बनी रहे आख़िर तक साफ-सुथरी-निष्कंप

Likhne Ka Arth | Vishwanath Prasad Tiwari 06.11.2023

लिखने का अर्थ | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी  तुम किसे तलाश रहे हो इस ढिबरी की रौशनी में, लिखता था प्रेमचंद इस बेंच पर जाड़े की रातों में, नंगे सोता था निराला और ये है असंख्य शैया वाला अस्पताल इसके बेड नंबर 101 पर, मरा था मुक्तिबोध 102 पर राजकमल, 103 पर धूमिल बेड नंबर 104, 105, 106 तुम कौनसे बेड पर मरना पसंद करोगे ज़िन्दा रहना और मरते जाना, एक ही बात है कविता की दुनिया में

Ab Wahan Ghonsle Hain | Damodar Khadse 05.11.2023

अब वहाँ घोंसले हैं | दामोदर खड़से  एक सूखा पेड़ खड़ा था  नदी के किनारे विरक्त  पतझड़ की विभूति लगाए  काल का साक्षी  अंतिम घड़ियों के ख़याल में... नदी, वैसे अर्से से इस इलाके से  बहती है  नदी ने कभी ध्यान नहीं दिया पेड़ के पत्ते सूख कर  इसी नदी में बह लेते थे... इस बरसात में जब वह जवान हुई तब उसका किनारा पेड़ तक पहुँचा  सावन का संदेशा पाकर  लहरों ने बाँध दिया एक झूला  पेड़ के पाँवों में... पेड़ हरि...

Intezaar | Sahir Ludhianvi 04.11.2023

इंतिज़ार | साहिर लुधियानवी  चाँद मद्धम है आसमाँ चुप है  नींद की गोद में जहाँ चुप है  दूर वादी में दूधिया बादल  झुक के पर्बत को प्यार करते हैं  दिल में नाकाम हसरतें ले कर  हम तिरा इंतिज़ार करते हैं  इन बहारों के साए में आ जा  फिर मोहब्बत जवाँ रहे न रहे  ज़िंदगी तेरे ना-मुरादों पर  कल तलक मेहरबाँ रहे न रहे!  रोज़ की तरह आज भी तारे  सुब्ह की गर्द में न खो जाएँ  आ तिरे ग़म में जागती आँखें  कम से कम एक...

Pani Ko Kya Soojhi | Bhawani Prasad Mishra 03.11.2023

पानी को क्या सूझी | भवानीप्रसाद मिश्र  मैं उस दिन  नदी के किनारे पर गया  तो क्या जाने  पानी को क्या सूझी  पानी ने मुझे  बूँद-बूँद पी लिया  और मैं  पिया जाकर पानी से  उसकी तरंगों में  नाचता रहा  रात-भर  लहरों के साथ-साथ  बाँचता रहा!

Geet | Gopaldas Neeraj 02.11.2023

गीत - गोपालदास नीरज विश्व चाहे या न चाहे,  लोग समझें या न समझें,  आ गए हैं हम यहाँ तो गीत गाकर ही उठेंगे।  हर नज़र ग़मगीन है, हर होंठ ने धूनी रमाई,  हर गली वीरान जैसे हो कि बेवा की कलाई,  ख़ुदकुशी कर मर रही है रोशनी तब आँगनों में  कर रहा है आदमी जब चाँद-तारों पर चढ़ाई,  फिर दियों का दम न टूटे,  फिर किरन को तम न लूटे,  हम जले हैं तो धरा को जगमगा कर ही उठेंगे।  विश्व चाहे या न चाहे॥  हम नहीं उनमें ह...

Tumhare Bheetar | Mangesh Dabral 01.11.2023

तुम्हारे भीतर - मंगलेश डबराल एक स्त्री के कारण तुम्हें मिल गया एक कोना तुम्हारा भी हुआ इंतज़ार एक स्त्री के कारण तुम्हें दिखा आकाश और उसमें उड़ता चिड़ियों का संसार एक स्त्री के कारण तुम बार-बार चकित हुए तुम्हारी देह नहीं गई बेकार एक स्त्री के कारण तुम्हारा रास्ता अंधेरे में नहीं कटा रोशनी दिखी इधर-उधर एक स्त्री के कारण एक स्त्री बची रही तुम्हारे भीतर।

Kutta | Udayan Vajpeyi 31.10.2023

कुत्ता | उदयन वाजपेई  कुत्ता होने वाली मृत्यु पर रोता है।  देर रात किसी गली से निकल कर किसी घर के दरवाज़े पर ठिठकती मृत्यु को देखकर  पहले वह भौंकता है फिर यह पाकर कि वह उसकी ओर ध्यान दिए बिना  घर के भीतर जा रही है,  वह रोना शुरू करता है दरअसल उसका भौंकना ही पिघलकर रोने में तब्दील हो जाता है उसका भौंकना उसका रोना ही है, झटकों में बाहर आता हुआ कुत्ता रोए या भौंके,  वह किसी  आसन्न मृत्यु की ख़बर ही प...

Tum Rehna Nayan | Ajay Jugran 30.10.2023

तुम रहना नयन | अजय जुगरान  जीवन के अंतिम क्षण में जब काल बाँधें हथेलियाँ एकटक जब हों पुतलियाँ एकांत शयन में तुम रहना नयन में! जब टूटता श्वास खोले नई पहेलियाँ और मन लौटे विस्मृत बचपन में खेलने संग ले सब सखा सहेलियाँ उस खेल के अंतिम क्षण में तुम रहना नयन में! जब यम अथक बहेलिया जाल डाल घर उपवन में ले जाए तन की सब तितलियाँ सूदूर गगन में तुम रहना नयन में! जीवन के अंतिम क्षण में जब क्षण की चमक हो क्षण म...

Gendh | Rajesh Joshi 29.10.2023

गेंद | राजेश जोशी एक बच्चा करीब सात-आठ के लगभग अपनी छोटी-छोटी हथेलियों में गोल-गोल घुमाता एक बड़ी गेंद इधर ही चला आ रहा है और लो उसने गेंद को हवा में उछाल दिया! सूरज, तुम्हारी उम्र क्या रही होगी उस वक़्त!

Ve Isi Prithvi Par Hain | Bhagwat Rawat 28.10.2023

वे इसी पृथ्वी पर हैं | भगवत रावत | कार्तिकेय खेतरपाल इस पृथ्वी पर कहीं न कहीं कुछ न कुछ लोग हैं ज़रूर जो इस पृथ्वी को अपनी पीठ पर कच्छपों की तरह धारण किए हुए हैं बचाए हुए हैं उसे अपने ही नरक में डूबने से वे लोग हैं और बेहद नामालूम घरों में रहते हैं इतने नामालूम कि कोई उनका पता ठीक-ठीक बता नहीं सकता उनके अपने नाम हैं लेकिन वे इतने साधारण और इतने आमफहम हैं कि किसी को उनके नाम सही-सही याद नहीं रहते उन...

Neembu Maangkar | Chandrakant Devtale 27.10.2023

नीम्बू माँगकर | चन्द्रकान्त देवताले बेहद कोफ़्त होती है इन दिनों इस कॉलोनी में रहते हुए जहाँ हर कोई एक-दूसरे को जासूस कुत्ते की तरह सूँघता है अपने-अपने घरों में बैठे लोग वहीं से कभी-कभार टेलीफोन के ज़रिये अड़ोस-पड़ोस की तलाशी लेते रहते हैं पर चेहरे पर एक मुस्कान चिपकी रहती है जो एक-दूसरे को कह देती है — " हम स्वस्थ हैं और सानंद और यह भी की तुम्हें पहचानते हैं, ख़ुश रहो ", यहाँ तक भी ठीक है पर अजीब...

Chand Tanha Hai Aasman Tanha | Meena Kumari Naaz 26.10.2023

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा - मीना कुमारी नाज़ चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा  दिल मिला है कहाँ कहाँ तन्हा  बुझ गई आस छुप गया तारा  थरथराता रहा धुआँ तन्हा  ज़िंदगी क्या इसी को कहते हैं  जिस्म तन्हा है और जाँ तन्हा  हम-सफ़र कोई गर मिले भी कहीं  दोनों चलते रहे यहाँ तन्हा  जलती-बुझती सी रौशनी के परे  सिमटा सिमटा सा इक मकाँ तन्हा  राह देखा करेगा सदियों तक  छोड़ जाएँगे ये जहाँ तन्हा 

Ek Aurat Ka Pehla Rajkiya Pravas | Anamika 25.10.2023

एक औरत का पहला राजकीय प्रवास | अनामिका  वह होटल के कमरे में दाख़िल हुई! अपने अकेलेपन से उसने बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया। कमरे में अंधेरा था। घुप्प अंधेरा था कुएँ का उसके भीतर भी! सारी दीवारें टटोली अंधेरे में, लेकिन ‘स्विच’ कहीं नहीं था! पूरा खुला था दरवाज़ा, बरामदे की रोशनी से ही काम चल रहा था! सामने से गुज़रा जो ‘बेयरा’ तो आर्त्तभाव से उसे देखा! उसने उलझन समझी, और बाहर खड़े-ही-खड़े दरवाज़ा बंद...

Main Raaste Bhoolta Hun | Chandrakant Devtale 24.10.2023

मैं रास्ते भूलता हूँ और इसीलिए नए रास्ते मिलते हैं | चंद्रकांत देवताले  मैं रास्ते भूलता हूँ और इसीलिए नए रास्ते मिलते हैं मैं अपनी नींद से निकल कर प्रवेश करता हूँ किसी और की नींद में इस तरह पुनर्जन्म होता रहता है एक जिंदगी में एक ही बार पैदा होना और एक ही बार मरना जिन लोगों को शोभा नहीं देता मैं उन्हीं में से एक हूँ फिर भी नक्शे पर जगहों को दिखाने की तरह ही होगा मेरा जिंदगी के बारे में कुछ कहना ब...

Sab Tumhe Nahi Kar Sakte Pyar | Kumar Ambuj 23.10.2023

सब तुम्हें नहीं कर सकते प्यार | कुमार अंबुज  यह मुमकिन ही नहीं कि सब तुम्हें करें प्यार  यह तुम बार-बार नाक सिकोड़ते हो  और माथे पर जो बल आते हैं  हो सकता है किसी एक को इस पर आए प्यार  लेकिन इसी वजह से कई लोग चले जाएँगे तुमसे दूर  सड़क पार करने की घबराहट खाना खाने में जल्दबाज़ी  या ज़रा-सी बात पर उदास होने की आदत  कई लोगों को तुम्हें प्यार करने से रोक ही देगी  फिर किसी को पसंद नहीं आएगी तुम्हारी चाल ...

Ab Lautna Sambhav Nahi Hai | Ajay Jugran 22.10.2023

अब लौटना संभव नहीं है | अजय जुगरान तुम्हारे साथ की यात्रा में  अब लौटना संभव नहीं है।  क्यों सब कुछ हो रीति में  जब प्रीति कम नहीं है? तुम्हारे साथ की यात्रा में  अब लौटना संभव नहीं है। चलो सीमापार स्वप्न में  जहाँ रूढ़ि बंध नहीं है।  क्यों यहाँ रहे नीति में बंद  जब श्वास छंद वहीं है? तुम्हारे साथ की यात्रा में  अब लौटना संभव नहीं है। यूँ देखो झाँक मुझमें हृदय बुद्धि संग यहीं है।  नहीं सब कुछ काम...

Ummeed | Damodar Khadse 21.10.2023

उम्मीद | दामोदर खड़से  कभी-कभी लगता रहा मुझे  समय कैसे कटेगा जिंदगी का  जब होगा नहीं कोई फूल  बहेगी नहीं कोई नदी  पहाड़ हो जाएँगे निर्वसन  मौसम में न होगा कोई त्योहार  हवाओं में होगी नहीं गंध  समुद्र होगा खोया-खोया उदास  शामें गुमसुम-गुमसुम  और सुबह में न कोई उल्लास  कैसे कटेगा तब समय जिंदगी का? सोच-सोच मैं  होता रहता सदा अकेला  पर आ जाती है ऐसे में  कोई आवाज़ भीतर से  मंदिर की घंटी की तरह  ज्यों ज...

Main Kyun Likhta Hun | Bhavani Prasad Mishra 20.10.2023

मैं क्यों लिखता हूँ / भवानीप्रसाद मिश्र मैं कोई पचास-पचास बरसों से कविताएँ लिखता आ रहा हूँ अब कोई पूछे मुझसे कि क्या मिलता है तुम्हें ऐसा कविताएँ लिखने से जैसे अभी दो मिनट पहले जब मैं कविता लिखने नहीं बैठा था तब काग़ज़ काग़ज़ था मैं मैं था और कलम कलम मगर जब लिखने बैठा तो तीन नहीं रहे हम एक हो गए

Katthai Gulab | Shamsher Bahadur Singh 19.10.2023

कत्थई गुलाब - शमशेर बहादुर सिंह कत्थई गुलाब  दबाए हुए हैं  नर्म नर्म  केसरिया साँवलापन मानो  शाम की  अंगूरी रेशम की झलक,  कोमल  कोहरिल  बिजलियाँ-सी  लहराए हुए हैं  आकाशीय  गंगा की  झिलमिली ओढ़े  तुम्हारे  तन का छंद  गतस्पर्श  अति अति अति नवीन आशाओं भरा  तुम्हारा  बंद बंद  “ये लहरें घेर लेती हैं  ये लहरें...  उभरकर अर्द्धद्वितीया  टूट जाता है...”  किसका होगा यह पद  किस कवि-मन का  किस सरि-तट पर सुना...

Tukde Tukde Din Beeta | Meena Kumari Naaz 18.10.2023

टुकड़े टुकड़े दिन बीता | मीना कुमारी नाज़ टुकड़े टुकड़े दिन बीता  धज्जी धज्जी रात मिली  जिस का जितना आँचल था  उतनी ही सौग़ात मिली  रिम-झिम रिम-झिम बूंदों में  ज़हर भी है अमृत भी है  आँखें हँस दीं दिल रोया  ये अच्छी बरसात मिली  जब चाहा दिल को समझें  हँसने की आवाज़ सुनी  जैसे कोई कहता हो  ले फिर तुझ को मात मिली  मातें कैसी घातें क्या  चलते रहना आठ पहर  दिल सा साथी जब पाया  बेचैनी भी साथ मिली  होंटों...

Ishwar Ke Saamne Nirvastra | Shraddha Upadhyay 17.10.2023

ईश्वर के सामने निर्वस्त्र | श्रद्धा उपाध्याय तांबे के ईश्वर सपरिवार जिनको मैंने अमेजन से खरीदा मेरी किताबों के आगे स्थापित एक बुझे हुए दीपक के पीछे उन पर समर्पित पुष्प, न ताज़े, न सूखे मेरे साथ रहते हैं मेरे एकाकी एक कमरे के अस्तित्व में सामान्यतः न पूजेl कभी कभी न सुमिरे फिर भी रहते हैं सुस्त साथी की तरह और कुछ दिन मैं देखती हूं मुझे देखते हुए निर्वस्त्र कपड़े पहनने से पहले कपड़े उतारने के बाद मै...

Kaala | Koduram Dalit 16.10.2023

काला | कोदूराम दलित काला अच्छा है, काले में है अच्छाई दुनियावालों! काले की मत करो बुराई सुनो ध्यान से काले की गुणभरी कहानी बड़ी चटपटी, बड़ी अटपटी, बड़ी सुहानी प्रथम पूज्य है जो गणेश जग में जन-जन का वह है काला मैल, मातु के तन का गोरस काली गैया का अच्छा होता है पूजन काली मैया का अच्छा होता है चार किसम के बादल आसमान में छाते लेकिन काले बादल ही जल बरसा जाते काली कोयल की मधुर वाणी मन हरती अधिक अन्न पैद...

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