Dr. Sudhanshu Kumar

Kalam (Hindi Poetry)

Arts HI ↓ 84 episódios

Presented podcasts will feature spoken lines of Hindi poems written and narrated by Dr. Sudhanshu Kumar. The episodes are a trial to reach out various sentiments and thoughts through words.

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Autor

Dr. Sudhanshu Kumar

Categoria

Arts

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Último episódio

12 de ago de 2024

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Episódios

वीणापाणि 04.02.2022

इस बसंती बयार में आइए हम लोग देवि सरस्वती को हमारी कविता " वीणापाणि " के माध्यम से याद करते हैं।

माया की छाया 30.01.2022

भौतिक जगत माया की छाया है। इस छाया में जीवन के संचरण के लिए काया आधार है। काया के पोषण के लिए माया ने संसार सागर को पदार्थों से भर दिया। इन पदार्थों को पाने की लालसा व्यक्ति के चित्त में वृत्तियों के रूप में पैदा की। यही वृत्तियाँ हमें भौतिक जगत से जोड़ती हैं और आजीवन संसार सागर से हम कभी मुक्त नहीं हो पाते। हमारी दृष्टि में भौतिक पदार्थ माया की छाया है। व्यक्ति माया के प्रभाव से कैसे बच सकता है?...

स्वाधीन 26.01.2022

आज गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को बधाई और शुभकामना संदेश देने के लिए प्रस्तुत है हमारी कविता 'स्वाधीन '। पराधीनता से मुक्ति के लिए जिन स्वतंत्रता सेनानियों नें अपने प्राणों की आहुति दी उन सभी के लिए यह एक श्रद्धांजलि है।

क्या करें शिक्षक 23.01.2022

आप ने यह कहावत अवश्य सुनी होगी। भइ गति साँप छछूंदर केरी। वही स्थिति आज सभी गुरुजनों की है। एक ही समय में उन्हें बच्चों को पढ़ाना है, वैक्सिनेशन करवाना है और राशन भी बटवाना है। वे कैसे कर पायेंगे इसे सोचने का समय किसी के पास नहीं है। इनमें से किसी एक काम में शिथिलता के कारण वे कामचोर समझे जाते हैं। चाहे उनका कोई व्यक्तिगत काम हो या उनके द्वारा किया गया काम हो सबकी उपेक्षा होती है। आइये इस व्यंग्य क...

शीतलहर में शिक्षक 16.01.2022

आज के कविता के माध्यम से हम जानेंगे कि शीतलहर लहर की स्थिति वर्तमान समय में कैसी है? और इस समय  में शिक्षकों के साथ शासन का रवैया कैसा है? आइये हमारे साथ इस व्यंग्य का आनंद लीजिए और हो सके तो शासन तक शिक्षकों की समस्याओं को अवश्य पहुँचाइये।

प्रधान सेवक 06.01.2022

यह व्यंग्य हमारे छद्म नेता जी के अलग - अलग रूपों को उजागर करेगा। उनके गुणों और अवगुणों को शालीनता से प्रतिबिंबित करेगा। आइए हमारे साथ इस कविता का आनंद लीजिए।

नित नूतन 01.01.2022

सभी श्रोताओ का नव वर्ष पर हम हार्दिक स्वागत वन्दन और अभिनन्दन करते है। ग्रामीण भारत में इस नये वर्ष की नूतनता किन किन प्राकृतिक पदार्थों में दृष्टिगत हो रही है। आइए हमारी नई कविता नित नूतन के माध्यम से उस पर दृष्टिपात करते हैं।

Trailer: Second Season 31.12.2021

इस नए साल की शुरुआत एपिसोड्स की एक नई शुरुआत के साथ।

पहरेदार 26.12.2021

देश के लिए पहरा देते देते वह सपत्नीक शहीद हुए। जल सीमा हो या थल सीमा अथवा वायु सीमा,  सभी सीमाओं को न केवल उन्होंने सुरक्षित कि अपितु सीमा पार जाकर भी दुश्मनों का संहार किया। वे हम सभी के लिए आज भी प्रेरणा श्रोत है। उन्ही की याद में लिखी गई कविता पहरेदार आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है।

भाग्य 23.12.2021

भाग्य कर्मों का का परिणाम है। हमारे कर्मों की गठरी भाग्य को आधार देती है। कभी कभी व्यक्ति कार्य करता है किन्तु उसे मन वांछित फल नहीं मिलता। उसे लगता है कि उसका भाग्य उससे रूठ गया है। लेकिन वास्तविकता कुछ और है। इसी वास्तविकता को प्रदर्शित करती हुई,  प्रस्तुत है हमारी नई कविता भाग्य  -------

पावन परिणय 21.11.2021

क्षण में जीवन क्षण में अन्त क्षण में जग जीवन अनन्त। इस  क्षण भंगुर संसार में जीवन के प्रवाह को अनन्त काल तक बनाए रखने के लिए पावन परिणय एक सामाजिक संस्कार है। इस संस्थान के विभिन्न आयामों और उसके सहचरों को प्रस्तुत कविता पावन परिणय में प्रतिबिंबित करने का प्रयास किया गया है। प्रस्तुत है पावन परिणय की पंक्तियाँ

जिन्दगी के प्लेट में 14.11.2021

प्राणिमात्र को जीवन जीने के लिए सकल पदारथ प्रकृति प्रदत्त है। हम इसका उपयोग करते हैं या उपभोग अथवा दुरुपयोग ये हमारी प्रवृत्ति पर निर्भर करता है। ईश्वर ने जो छप्पन भोग हम सबको भेंट किया है उसी पर आधारित आज की हमारी कविता है जिन्दगी के प्लेट में

अपेक्षा 05.11.2021

एक पत्नी की पति से क्या अपेक्षा रहती है ? उस अपेक्षा की उपेक्षा होने पर अपने कष्ट को कैसे व्यक्त करती है? इस उपेक्षा के प्रतिरोध को हमारी कविता अपेक्षा में प्रेम और माधुर्य से दर्शाने का प्रयास किया गया है। प्रस्तुत है हमारी कविता अपेक्षा की पंक्तियाँ।

जीवन धारा 02.11.2021

जीवन प्रवाह है और उसकी गतिशीलता प्रवाहिनी के समान है । जिस प्रकार सरिता को प्रवाह के लिए पृथ्वी के आधार की आवश्यकता पड़ती है उसी प्रकार जीवन के संचरण के लिए शरीर का आधार आवश्यक है। जीवन और मृत्यु का संसार में स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है। यह तो काया के जन्म और अन्त का प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है। इन्हीं प्रतिबिंबों का दर्शन करायेगी हमारी कविता जीवन धारा।  प्रस्तुत है जीवन धारा की पंक्तियाँ

अन्तस श्राव 20.10.2021

व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण उसके अन्स्तल में ही सन्निहित है। उसकी सोच जैसी होती है उसी के अनुसार उसके अन्दर ऊर्जा का संचार होता है। यह ऊर्जा उसके भौतिक और आध्यात्मिक जीवन का निर्माण करती है। जी हां आप का अनुमान सही है आज हमारी कविता की विषय वस्तु है endocrine gland का हम सबके जीवन पर प्रभाव। आशा ही नहीं हमें पूर्ण विश्वास है कि ये एपीसोड भी आप सभी को अवश्य पसन्द आयेगा। प्रस्तुत है हमारी कविता...

प्रेम 03.10.2021

आज के कविता की विषय वस्तु है प्रेम।  इस जगत में प्रेम अनुभूति का विषय है किन्तु इस अनुभूति के लिए भी स्थूल हृदय आवश्यक है।  प्रेम और हृदय मिलकर संसार सागर में क्या रास लीला करते हैं। शरीर को इस लीला में आनंद आता है या पीड़ा होती है।  यह भी मृग मरीचिका के भ्रम जैसा है।  क्या प्रेम का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है? प्रेम को व्यक्त करने का क्या कोई और माध्यम हो सकता है? इन्ही अनबूझ प्...

सुन्दरता 21.09.2021

आप सभी का इस शो मे स्वागत है। आज के कविता की विषय वस्तु है सुन्दरता।  इस जगत में सुन्दरता को स्थूल चर अथवा अचर सापेक्षता के साथ देखा जाता है। क्या सुन्दरता का निरपेक्ष अस्तित्व नहीं है? सुन्दर भाव को व्यक्त करने का क्या कोई और माध्यम हो सकता है? इन्ही अनबूझ प्रश्नों को समेटे हुए प्रस्तुत है हमारी कविता सुन्दरता।

हिन्दी 14.09.2021

आज हिन्दी दिवस के शुभ अवसर पर हम, हमें अक्षरों का ज्ञान देने वाली देवि अक्षरा को साष्टांग प्रणाम करते हैं। इस दिन हम खरी बोली से प्रारंभ करके खड़ी बोली हिन्दी गद्य और पद्य के विकास के लिए भरतेन्दु युग को अवश्य याद करते हैं। इसके बाद लगातार हिन्दी साहित्य और व्याकरण का विकास होता रहा है और होता रहेगा।  भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात 14 सितंबर 1949 को हिन्दी भाषा को भारत के आधिकारिक भाषा...

मित्र 08.09.2021

सभी श्रोताओ का इस शो में हम स्वागत करते है। आज बचपन के मित्रों की यादें ताजा हो गईं। उन्हीं यादों की एक भाव प्रवण प्रस्तुति है हमारी कविता मित्र। उनके साथ खेलना कूदना लड़ना झगड़ना फिर सब भूलकर नई सुबह नई सुरुआत करना । मित्रों के इन्ही यादों को समेटे हुए प्रस्तुत है हमरी कविता मित्र। हमे पूर्ण विश्वास है कि अन्य कविताओ की तरह ये भी आप सभी को पसन्द आयेगी।

गुरु 05.09.2021

शिक्षक दिवस पर ज्ञान गंगा से भरी हुई पावन बेला में हम सभी गुरुजनों को शाष्टांग प्रणाम करते हैं। इस शुभ अवसर पर हम अपनी कविता गुरु को गुरुजनों को समर्पित करते हैं। इस कविता में गुरु की गुरुता का हॄद्स्पर्शी बिंब प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। हमँ पूर्ण विश्वास है कि ये कविता भी आप के अन्तसतल को अवश्य स्पर्श करेगी। प्रस्तुत है गुरु की पंक्तियाँ।

बधाई 30.08.2021

आप की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं हमारे अन्दर नई ऊर्जा का संचार करती हैं। आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मन में विचार आया कि कितनी विषम परिस्थित में मनमोहन मुरलीधर का जन्म हुआ। लेकिन उनका वसुधावतरण होते ही सारी प्रतिकूल परिस्थितियाॅ अनुकूल हो गयी। कैसे उन्होंने अपने कर्मों से अशुभ को शुभ कर दिया अर्थात प्राणियों के कर्म ही अशुभ को शुभ करते हैं। आज के इस पावन अवसर पर आप सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक...

अभिलाषा 15.08.2021

स्वतंत्रता दिवस के नव प्रभात पर सभी श्रोताओ का इस शो में हम स्वागत करते है। आज हम सभी इस अवसर पर अमर शहीदों के बलिदान को याद करके श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं । देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा को अक्षुण रखने के लिए सैनिकों के त्याग और तपस्या को भुलाया नहीं जा सकता । देश की सीमा पर पहरा देने वाला सैनिक मात्रिभूमि के लिए क्या सोचता है? इसी भावना की भावप्रवण प्रस्तुति है हमारी कविता अभिलाषा । हमें...

महादेव 11.08.2021

सभी श्रोताओ का इस शो में हम स्वागत करते है। सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद हम सभी को प्राप्त हो, इसी कामना के साथ हम एक बार फिर एक नई कविता '' हर हर महादेव'' के साथ प्रस्तुत हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि अन्य कविताओ की तरह ये भी आप सभी को पसन्द आयेगी।

कवि की पीड़ा 31.07.2021

सभी श्रोताओ का इस शो में हम हृदय से स्वागत करते है। कवि के जब संघर्ष के दिन होते हैं, उस समय वह लोगों को जव अपनी कवितयें सुनाता है तो उसे कई विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके कारण उसे अत्यधिक पीड़ा होती है। कवि इस वेदना का कैसे सकारात्मक उपयोग करके अपनी रचना धर्मिता को बढ़ाता है । इसी  विषय वस्तु को केन्द्र बिन्दु बनाकर कवि की पीड़ा शीर्षक से यह कविता लिखी गई है। हमें विश्वास है...

हरीतिमा 28.07.2021

सभी श्रोताओ का इस शो में हम हृदय से स्वागत करते है। पृथ्वी पर जीवन अनन्त काल तक बना रहे इसके लिए पौधों की हरियाली और पानी का संयोग आवश्यक है। इस कविता में हरीतिमा और जल का मानवीकरण किया गया है । पौधों में भोजन का निर्माण प्राणिमात्र के जीवन के लिए आवश्यक है । जीवन और जीव की अनन्तता वास्तव में क्लोरोफिल और पानी में निहित है। इन्हीं दोनों को आधार बनाकर हमारी कविता हरीतिमा लिखी गई है। हमें विश्वास है...

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