Dr. Sudhanshu Kumar

Kalam (Hindi Poetry)

Arts HI ↓ 84 episodes

Presented podcasts will feature spoken lines of Hindi poems written and narrated by Dr. Sudhanshu Kumar. The episodes are a trial to reach out various sentiments and thoughts through words.

Author

Dr. Sudhanshu Kumar

Category

Arts

Podcast website

podcasters.spotify.com

Latest episode

Aug 12, 2024

Where to listen?

Podcasts in the app Replaio Radio Coming soon

Podcasts are coming to the app soon. Install now and be the first to see a whole new take on podcasts

Get it on Google Play Install for free Android 5M+ downloads · 4.8 rating iOS soon

Episodes

निरपेक्ष काल की सापेक्षता 12.08.2024

संसार सागर में समय की सापेक्षता सबके साथ सन्निहित है। स्वयं में निरपेक्ष होते हुए भी वह शाश्वत सापेक्ष है। अगर हम यह मान लें कि वक्त ही जगत में हमें लाया है और कालांतर में वही लेकर जायेगा तो इस कबूतर की तरह हम भी दुनियाभर के झंझावातों से भयमुक्त हो जायेंगे। क्या स्थूल वस्तुओं के साथ हम निरपेक्ष रह सकते हैं। आइए निरपेक्षता के पाठ को पढ़ते हैं इस कबूतर के जोड़े से।

मनोहर 28.06.2024

मनोहर का मस्तिष्क अनियन्त्रित हो गया है। सामान्य जन की भाषा में उसे हम पागल कह सकते हैं। मनोहर जीवन के उस तिराहे पर हैं जहाँ उनका अतीत अच्छा नहीं था लेकिन वर्तमान और भविष्य तो अन्धकार के सागर में गोते लगा रहा है। मानव जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का उनके लिए क्या महत्व है? इस पर विचार करते हुए सुनते हैं हमारी कविता " मनोहर "।

चिकित्सक का धर्म 01.06.2024

पेशेवर डॉक्टर सेवक है या व्यापारी? क्या सेवक को व्यापार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए या व्यापारी को सेवा नहीं करनी चाहिए? जैसे अच्छे और बुरे विचार शरीर के अभिन्न अंग हैं वैसे ही जगत के बाजार में सेवा, व्यापार का अभिन्न अंग है। सेवा में कितना व्यापार होना चाहिए यह वाद-विवाद का विषय है। इस विवाद में न पड़ते  हुए डाक्टर के कर्म को सुनते हैं हमारी कविता " चिकित्सक का धर्म " से।

अवसर 27.04.2024

अवसर मिलने पर उसका लाभ लेना मानवीय स्वभाव है। अवसर का लाभ लेना अगर हमारे लिये अच्छा है तो हमारे जन प्रतिनिधियों के लिये भी अच्छा होना चाहिए क्योंकि वे आखिरकार हमारा ही तो प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। चुनाव के पहले गठजोड़ का अवसर सभी दलों को मिला हुआ है। गठबन्धन के अवसर को राजनीतिक दल कैसे भुना रहे हैं? सुनिए हमारी कविता " अवसर " से।

काँपती काया 07.04.2024

जीवन के जीव से अलग होने के पहले शरीर किन-किन भौतिक, रासायनिक और मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं से होकर गुजरता है? काया की गति और गतिविधियों में क्रमिक ह्रास काल जनित है। तन की इस अवस्था में उसके शरीर में स्थित अंगतंत्र ही उसका साथ नहीं देते। इसी अवस्था की अनुभूति करयेगी हमारी कविता " काँपती काया " ।

चौराहे पर राजनीतिक चर्चा 15.03.2024

एक बार फिर चुनाव का मौसम आने वाला है। सत्ता की चाहत रखने वाले नेतागण अपनी बाजीगरी दिखाने लगे हैं। उनके गठजोड़ पर गाँव के चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गरम है। आइए इस गर्मागर्म माहौल में अपना हाथ सेंकते हैं हमारी कविता " चौराहे पर राजनीतिक चर्चा " से।

राजनीति में राम 25.01.2024

एक समय था जब भाजपा को अयोध्या के श्रीराम मन्दिर आन्दोलन के कारण साम्प्रदायिक पार्टी कहा जाता था। लेकिन उसी समय जनता ने भाजपा सरकार चुनकर यह बता दिया कि जनभावना का सम्मान करने वाली पार्टी साम्प्रदायिक नहीं हो सकती। आज राम नाम की शक्ति का ही परिणाम है कि भारत देश का शासन राम नाम का जप करने वालों के हाथ में है। विपक्षियों के किसी नेता में उन्हें साम्प्रदायिक कहने का साहस नहीं है। राम राज्य का अर्थ यह...

सत्ता का खेल 01.01.2024

राजनीति का अर्थ है सत्ता के लिए संघर्ष। येन केन प्रकारेण सत्ता मिलनी चाहिए। सत्ता मिल जाने के बाद तो कुर्सी बचाने के लिए संघर्ष होता है। राज्य की नीतियों का निष्पादन तो नौकरशाह करते हैं जो सैद्धांतिक रूप में राजनीति नहीं करते। व्यावहारिक रूप में राजनीति तो हम सभी कहीं न कहीं करते ही हैं। राजनीतिज्ञों के आपसी सम्बन्धों की व्यंगात्मक प्रस्तुति है हमारी नयी कविता " सत्ता का खेल "।

आखिरी सन्देश 18.12.2023

व्यक्ति का जीवन संघर्षों की कहानी है। इन्हीं संघर्षों में ही शारीरिक तथा मानसिक पीड़ा और आनंद सन्निहित है। शरीर की जीवन यात्रा में इन अनुभूतियों से प्राणिमात्र का चोली-दामन का साथ है। श्मशान मानव जीवन यात्रा का अन्तिम सत्य है। काया से किए हुए सारे कर्म और धर्म का बन्धन यहीं टूट जाता है। पीड़ा देने वाले आग के अंगारे यहाँ पीड़ा का अंत करते हुए प्रतीत होते हैं।

तारिणी 12.11.2023

प्राणिमात्र का जीवन सरल और सहज है। हम मनोविकारों के प्रभाव में आकर ही इसे दुरूह और आडम्बरयुक्त बना देते हैं।वाह्य आडम्बरों के कारण ही समस्यायें आती हैं। ढोंग ही समाज में फैले समस्त कुत्सित मनोविकारों का मूल है। आइये इन्हीं विचारों पर कुठाराघात करते हैं हमारी कविता      " तारिणी " से।

प्राचीन से अर्वाचीन 13.08.2023

जिस प्रकार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या को बताया नहीं जा सकता उसी प्रकार सबसे प्राचीन और आधुनिक को हम नहीं बता सकते। प्रत्येक प्राचीन काल का अगला समय आधुनिक होता है और आज का आधुनिकीकरण कल प्राचीन हो जायेगा तथा भविष्य आज की तुलना में आधुनिक होगा। प्राचीन से अर्वाचीन के इन्हीं संदर्भों को ध्यान में रखते हुए मानव जीवन मूल्यों पर काल के प्रभाव को देखते हैं हमारी कविता " प्राचीन से अर्वाचीन &quot...

योग 20.06.2023

योग जीवन जीने की कला है।यह शरीर, चित्तवृत्तियाँ, मनोविकार और मस्तिष्क के परिशोधन का संस्थान है। भारतीय सनातन परंपरा का यह संस्थान भारतीयता का धरोहर है। विश्व को उद्देश्यपूर्ण शांति से जीवन जीने की कला योगसूत्र ने ही दी है। योग के विभिन्न आयामों पर सुनते हैं हमारी कविता " योग "।

पर्यावरण 05.06.2023

स्वस्थ शरीर में स्वच्छ मन का निवास होता है और हमारा स्वास्थ्य हमारे पर्यावरण पर निर्भर करता है। विकास की अन्धी दौड़ में हमने अपने परिवेश का न केवल दोहन किया है अपितु इसे प्रदूषित करके अपने ही पैर पर कुठाराघात कर लिया है। प्रदूषण की विभीषिका और समस्या के समाधान पर सुनते हैं हमारी कविता " पर्यावरण "।

व्यापारिक विद्यापीठ 15.05.2023

आधुनिक शिक्षा का नया फलसफा है कि शिक्षक पेशेवर हों और अपने पेशे के लिए कुछ भी करें। पेशेवर व्यक्ति अपने कार्य में दक्ष तो होता है इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता लेकिन पेशा व्यापार का अनुगामी होता है, इसे भी स्वीकार करना पड़ेगा। शिक्षक होने के लिए पहली शर्त होनी चाहिए कि वह व्यापारी न हो क्योंकि पेशे में जैसे ही व्यापार हावी होता है पेशा नेपथ्य में चला जाता है और फिर व्यापार ही व्यापार रह जाता है। व्...

रंग 06.05.2023

रंग का प्राणिमात्र के जीवन में अत्यधिक महत्व है। रंग से ही उनकी रंगत है और रंग से ही वे बेरंग हो जाते हैं। रंग शब्द को अनेक अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है। हमारे रग रग में रंग की भूमिका को प्रकट करेगी हमारी कविता " रंग "।

जन प्रतिनिधि 14.04.2023

हम भारत के लोग अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से देश का शासन करते हैं। हमारा प्रतिनिधि जब पार्टी प्रतिनिधि बन जाय तो हमारा क्या होगा? आज हमारे नेता जी हमारी समस्याओं को सुलझाने के बजाय पार्टी की समस्याओं को सुलझाने में उलझे रहते हैं। हमारे हित में उनका हित उन्हें क्यों नहीं समझ आता? आइए समस्याओं के इसी भँवर जाल को सुनते हैं हमारी कविता " जन प्रतिनिधि " से।

जीवन और जीव 02.04.2023

क्या जगत में जीव का अस्तित्व जीवन से है या जीवन का जीव से अथवा दोनों की सम्भूति एक दूसरे के साहचर्य में ही निहित है? नर और नारी युगल से ही नवल सृजन होता है जिससे जीवन और जीव की निरंतरता जगत में अनन्तकाल से बनी हुई है और बनी रहेगी। पत्नी स्वयं में पूर्ण है पर पति के दिवंगत होने पर अपूर्णता का आभास करती है। मन के इसी भ्रम के साथ-साथ क्षण भंगुर संसार में जीव और जीवन की अनन्तता का दर्शन करायेगी हमारी...

देह के पैंतीस टुकड़े 23.03.2023

अक्सर शारीरिक संबंधों में प्रगाढ़ता को ही प्रेम समझ लिया जाता है। नवयुवक और युवतियाँ शारीरिक आकर्षण को ही प्रेम समझने की भूल कर जाते हैं जिसका वीभत्स परिणाम काया के पैंतीस टुकड़ों के रूप में आता है। हमारे संस्कार, नैतिक मूल्य वास्तव में प्रेम और आकर्षण के अन्तर को बताते हैं और हमें मानवीय मूल्यों की ओर ले जाते हैं। व्यक्ति की विचारधारा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। व्यक्तिगत अहंनिष्ठ आकर्ष...

आधुनिक नारी 10.02.2023

परंपरा और आधुनिकता प्रत्येक समाज की पहचान है। समय के साथ हर किरदार में परिवर्तन हो रहा है। वर्तमान समय में ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे सदियों की परम्पराओं को छोड़कर भारतीय नारी, पुरुष से समानता के लिए तथाकथित देवी स्वरूप को छोड़कर सामान्य नारी ही बने रहना चाहती है। आधुनिक नारी यही चाहती है कि पति और पत्नी दोनों को समान अधिकार प्राप्त हो। आइये इसी समानता की आकांक्षा को सुनते है हमारी कविता " आधुनिक न...

दलबदलू 16.01.2023

सत्ता राजनीति के दलदल का कमल है। सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति सेवा के माध्यम से सत्ता तक पहुँचता है। विचारधारा और सिद्धांत राजनीतिज्ञ का दाहिना और बाँया हाथ हुआ करता था लेकिन वर्तमान समय में ऐसा प्रतीत होता है जैसे उसके दोनों हाथ कट चुके हैं। सेवा के नाम पर सत्ता के लिए दलबदल आम बात हो गई है। आइए सुनिये दलबदल पर हमारी कविता  "दलबदलू "।

नूतनता 31.12.2022

नूतनता और परिवर्तन का चोली दामन का सम्बन्ध है। वास्तव में परिवर्तन और नूतनता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। आज जो नवीन है कल प्राचीन होगा और प्राचीन भी कल ही रूपांतरित होकर अर्वाचीन हो जाता है। हम हर पल भविष्य को तलाशते रहते हैं किन्तु अगले ही क्षण भूत के गर्त में चले जाते हैं। आइए इस क्षण भंगुर संसार में पल में प्रलय और सृजन को पल में हमारी कविता " नूतनता " से महसूस करते हैं।

रिश्ते 05.12.2022

जीवन में रिश्तों का अपना महत्व है। समय के साथ इनमें गर्मी आती है और कालांतर में ये ठंडे पड़ जाते हैं। रिश्ते रक्त सम्बंध से बने हों, मानवीय अथवा अमानवीय सम्बन्ध से, जीवन में मिठास अथवा खटास सम्बन्धों के कारण ही होते हैं। सम्बन्धों पर चाटुकारों और रायबहादुरों का विशेष प्रभाव पड़ता है। आइये इन्हीं प्रभावों को महसूस करते हैं हमारी कविता " रिश्ते " से।

राजनीति का पप्पू 10.11.2022

राजनीति में उपनाम और जुमले खूब प्रचलित है। ये नाम राजनीतिज्ञों के व्यक्तित्व और कृतित्व को सटीक दर्शाते हैं। आइये राजनीतिक दाँव पेंच का आनन्द लेते हैं हमारी कविता " राजनीति का पप्पू " से।

प्रारब्ध 27.10.2022

मनुष्य के जीवन में कुछ विषय ऐसे हैं जिन पर उसका वश नहीं चलता जैसे व्यक्ति का जन्म, उसकी धड़कन, साँसो की संख्या, कंठ से उत्पन्न ध्वनियों की संख्या , शारीरिक संरचना, मृत्यु इत्यादि। इन गतिविधियों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है और यही गतिविधियाँ जीवन आधार हैं। इन्हीं गतिविधियों के सहारे जीवन प्रवाह के पक्षों को सुनते और समझते हैं हमारी कविता " प्रारब्ध " से।

अजनबी 13.10.2022

सोते हुए स्वप्न देखना आम बात है। सपनों में हम कभी परेशान होते हैं तो कभी प्रशन्न होते हैं। कभी डरते हैं तो कभी साहस के साथ लड़ते हैं। क्या स्वप्न में कभी किसी अजनबी से आप की मुलाकात हुई है? जिसके लिए आप बेचैन हुए हों। आइए ऐसे ही एक स्वप्न को देखते हैं हमारी कविता " अजनबी " के माध्यम से।

Listen to the Kalam (Hindi Poetry) podcast in Replaio

Radio and podcasts in one app - free, with no sign-up. Install today and do not miss the launch

Get it on Google Play

Replaio is not a podcast publisher; show names, artwork and audio belong to their authors and are distributed through public RSS feeds.