Himanshu Bhagat

Sambandh Ka Ke Ki

Arts HI ↓ 49 episodes

A conversation on books, conducted in Hindi.

Author

Himanshu Bhagat

Category

Arts

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Jun 16, 2026

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Episodes

एपिसोड 49: 'द ओरिजिन्स ऑफ़ अ डिस्प्यूट − कश्मीर १९४७' − प्रेम शंकर झा 16.06.2026

किन हालात में जम्मू और कश्मीर की रियासत सन १९४७ में भारत से जुड़ी,ये विषय आज भी विवादों में घिरा है। कश्मीर के भारत में विलय में ब्रिटैन, भारत, पाकिस्तान, और कश्मीर रियासत की क्या भूमिका रही? इसमें पंडित नेहरू, लार्ड मौन्टबेटन, मोहम्मद अली जिन्नाह, सरदार पटेल, कश्मीर के राजा हरी सिंह व कई अन्य किरदारों की क्या भूमिका रही? इन सवालों पर एक नई रोशनी डालती है, प्रेम शंकर झा की किताब 'द ओरिजिन्स ऑफ़...

एपिसोड 48: 'हिंदी हार्टलैंड − अ स्टडी' − ग़ज़ाला वहाब 20.05.2026

उत्तर और मध्य भारत के एक बड़े हिस्से को अंग्रेज़ी में 'हिंदी हार्टलैंड' कहते हैं। यहाँ के अधिकांश वासी हिंदी बोलते हैं और भारत की संस्कृति, इतिहास और राजनीति में इस क्षेत्र का भारी प्रभाव रहा है। आज़ाद भारत के सात राज्य हिंदी पट्टी में स्थित हैं − उत्तर-प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, और राजस्थान। इन राज्यों में गरीबी, पिछड़ापन, और बहुसंख्यक-धार्मिक-कट्टरता सबसे चरम प...

एपिसोड 47: 'गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस' − मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी 26.04.2026

भारत के आज़ादी के दो साल पहले से ही देश के बँटवारे की सम्भावना बढ़ने लगी और सांप्रदायिक तनाव फैलने लगा। अगस्त १९४६ से देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगे छिड़ गए। महात्मा गांधी बंगाल (कलकत्ता व नोआखाली), बिहार, और दिल्ली जा के शांति के लिए सत्याग्रह करने लगे। अपने जीवन के आखिरी पंद्रह महीनों में गांधी शांति का सन्देश ले के पैदल गाँव-गाँव गए। मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी की किताब, 'गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस...

एपिसोड 46: 'उमर ख़ालिद एंड हिज़ वर्ल्ड' − शुद्धब्रता सेनगुप्ता 23.03.2026

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र उमर ख़ालिद को साल २०१६ में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। आने वाले सालों में, उमर बहुसंख्यकवादी हिंदुत्व, बेलगाम पूंजीवाद, और सत्तारूढ़ ताक़तों के निर्भीक और बेबाक आलोचक के रूप में उभरे। सी.ए.ए.−एन.आर.सी. क़ानून-विरोधी शाहहीन बाघ आंदोलन का उमर ने खुलकर समर्थन किया। सितम्बर २०२० में आतंक-विरोधी यू.ए.पी.ए. क़ानून के तहत, २०२० के दिल्ली दंगो को भड़काने क...

एपिसोड 45: 'द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट − द अनमेकिंग ऑफ़ अ डेमोक्रेसी' − राहुल भाटिया 05.03.2026

वर्ष २०१३-१४ में पत्रकार राहुल भाटिया ने पाया कि उनके प्रियजन बदल गए हैं। उनकी सोच, उनकी भाषा में बदलाव आ गया है − समाज में एक धर्मविशेष लोगों के प्रति। यह देख के राहुल कुछ हतप्रभ, कुछ परेशान हुए, और इसी परेशानी से उबरने के लिए उन्होंने लिखा है, 'द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट'। इस किताब का पहला भाग हिंदुत्व और हिन्दू राष्ट्रवाद का अध्यन है − आज के भारत में उनके दुष्प्रभाव का, उनके जड़ों, और उनके उद...

एपिसोड 44: 'गोलवलकर' − धीरेन्द्र झा 20.01.2026

भारत को आज़ादी मिलने के तीन हफ्ते बाद, ४ सितम्बर १९४७ को, दिल्ली में दंगे शुरू हो गए। शहर के करोल बाग़ इलाके में एक हाई-स्कूल में छात्र परीक्षा दे रहे थे। इसी समय स्कूल में एक भीड़ घुस गई और उसने परीक्षा देते हुए मुसलमान छात्रों का क़त्ल कर दिया। तीन दिनों में दिल्ली के ८,००० से १०,००० मुसलमान निवासी मारे गए। इसके एक महीने बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर ने शहर के तीन इलाक...

एपिसोड 43: 'पुलिसिंग एंड वायलेंस इन इंडिया' − जिनी लोकनीता व डीना हीथ 24.12.2025

जब अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड नाम के एक निहत्थे अश्वेत व्यक्ति की एक गोरे पुलिसकर्मी ने हत्या कर दी तब इस निर्मम हत्या के विरोध में हज़ारों अमेरिकी नागरिक सड़क पर उतर आये। देखते-देखते 'ब्लैक लाइव्स मैटर' के नाम से ये विरोध पुरे विश्व में फ़ैल गया। वहीं भारतीय पुलिस द्वारा हिंसा का प्रयोग और संदिग्ध अपराधियों को यातना देना, उनकी हत्या कर देना आम है। मगर इस हकीक़त से यहाँ की आवाम को कोई फ़र्क़ नहीं...

एपिसोड 42: 'एवरीडे रीडिंग' − आकृति मंधवानी 05.12.2025

आज़ादी के ठीक बाद, १९५० व १९६० के दशक में छपने वाली लोकप्रिय हिंदी पत्रिकाओं में से दो थीं -- 'सरिता' और 'धर्मयुग'। क्या था रिश्ता और क्या असर रहा इन पत्रिकाओं का -- और साथ-साथ, हिन्द पॉकेट बुक्स की बहुत किफायती दरों वाली किताबों का -- अपने उत्तर-भारतिय हिंदी-भाषी मध्यम-वर्गिय पाठकों पर, इसका आकलन और विश्लेषण आपको मिलेगा डॉ आकृति मंधवानी की किताब 'एवरीडे रीडिंग' में। और साथ...

एपिसोड 41: 'आदिवासी ऑर वनवासी' − कमल नयन चौबे 20.11.2025

ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत के आदिवासियों के बीच ईसाई धर्म के प्रसार को रोकने के लिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने १९५२ में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण की स्थापना की। वनवासी कल्याण आश्रम ने आदिवासियों के बीच हिन्दू धर्म व संस्कृति के प्रचार और समाज सेवा के राह को अपनाया। समय के साथ, वनवासी कल्याण आश्रम ने सत्तारूढ़ ताकतों द्वारा आदिवसीययों के शोषण के खिलाफ भी आवाज़ उठाई। मगर जैसा डॉ कमल नयन चौबे अपनी कित...

एपिसोड 40: 'राइटर, रेबेल, सोल्जर, लवर − द मेनी लाईव्स ऑफ़ अज्ञेय' − अक्षय मुकुल 14.10.2025

कई लोगों का मानना है कि प्रेमचंद के 'गोदान' के बाद हिंदी साहित्य का सर्वोच्च उपन्यास है, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' की कृति 'शेखर : एक जीवनी'। सच्चिदानंद वात्स्यायन को 'अज्ञेय' उपनाम स्वयं प्रेमचंद ने दिया था और, आगे चल के, फणीश्वर नाथ रेणु ने एक लेख में उनको − 'अलख, अचल, अगम, अगोचर, अजब, अकेला, अज्ञेय' कहा था। अपने जीवन काल में अज्ञेय ने कविताएं...

एपिसोड 39: 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' − रक्षंदा जलील 01.10.2025

क़रीब एक हज़ार साल से, दिल्ली हिन्द-उपमहाद्वीप के बड़े हिस्सों पर शासन करने वाले अलग-अलग साम्राज्यों की राजधानी रही है। रक्षंदा जलील अपने आप को पक्की दिल्ली-वाली मानती हैं और वे संपादक हैं 'बस्ती एंड दरबार – अ सिटी इन स्टोरीज' की। इस किताब में ३२ कहानियाँ हैं – जो, या तो लघु कथाएँ हैं या उपन्यास का अंश हैं। इन कहानियाँ को पढ़ के हम वाक़िफ़ होते हैं सन 1857 से लेकर आज तक की दिल्ली के अच्छे-बुरे,...

एपिसोड 38: 'आवर राइस टेस्ट्स ऑफ़ स्प्रिंग' − अनुमेहा यादव 08.09.2025

आज़ादी के बाद, १९५० और १९६० के दशकों में, भारत को अपनी आबादी को भुखमरी से बचाने के लिए अक्सर अमरीकी अनाज पर निर्भर होना पड़ता था। फिर 'हरित क्रांति' यानी 'ग्रीन रेवोलुशन' के बदौलत, वर्ष १९७१ तक भारत अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया। ये संभव हुआ, नए किस्म के उपजाऊ अनाज, सिंचाई व्यवस्था में बढ़ोत्तरी, और रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाइयों के व्यापक इस्तेमाल से। लेकिन आत्मानिर्भरता के लिए...

एपिसोड 37: 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' − संघमित्रा चक्रवर्ती 14.08.2025

फिल्म जगत की एक मशहूर 'एक्टर-डायरेक्टर' जोड़ी थी, सत्यजीत रे और शौमित्रो चटर्जी की। शौमित्रो ने रे की २८ फिल्मों में से १४ में मुख्य किरदार निभाया। इन १४ फिल्मों के अलावा शौमित्रो ने और भी बहुत कुछ किया। अपने ६० साल के करियर में उन्होंने पुरे ३०० फिल्मों में काम किया। साथ-साथ, वे एक 'थिएटर-एक्टर', नाटककार, लेखक, कवि, संपादक, और चित्रकार भी थे। जनवरी 2020 में शौमित्रो ८५ साल के हो गय...

एपिसोड 36: 'अपरूटेड' − ईता मेहरोत्रा 03.08.2025

विश्व भर में विकास के नाम पर जंगल काट कर ख़त्म किये जा रहे हैं। ऐसे में, अगर सरकार जंगल के एक टुकड़े को नेशनल पार्क घोषित कर देती है और वहाँ आदमी के निवास व आवाजाही को वर्जित कर देती है, तो इस को अच्छा ही माना जायेगा। मगर सदियों से इन्ही जंगलों का एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं, इनमे वास करने वाले आदिवासी। अगर वन संरक्षण के नाम पर उनको किसी नेशनल पार्क से जबरन निकाल दिया जाय, तो क्या ये उचित होगा? आज, उत्...

एपिसोड 35: 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी' − प्रेम शंकर झा 10.07.2025

प्रेम शंकर झा की नई किताब का नाम है − 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी'; हिंदी में कहें तो, 'भारतीय लोकतंत्र का विध्वंस'। झा को पत्रकारिता करते हुए पचास से ज़्यादा साल हो चुके हैं और वे देश के प्रतिष्ठित अखबारों में संपादक रह चुके हैं। उनका मानना है कि आज भारत में लोकतंत्र अपने अंतिम चरण पर है। इसके चारों स्तम्भ − कार्यपालिका (एक्सीक्यूटिव), विधान मंडल (लेजिस्लेचर), न्यायप...

एपिसोड 34: 'सेलिब्रेशन एंड प्रेयर' − अशोक वाजपेयी 01.07.2025

आज़ाद भारत के महान चित्रकार सय्यद हैदर रज़ा ने अपने लम्बे जीवन के ६० वर्ष फ्रांस में गुज़ारे, मगर उनकी कला का मुख्य प्रेरणा स्रोत भारत की संस्कृति रही। इस प्रेरणा का सबसे जाना-माना प्रतीक है 'बिंदु', वो काले या अन्य रंग का गोल घेरा जो रज़ा साहब के चित्रों में हमारी नज़र को अपनी ओर खींचता है। अपनी पुस्तक 'सेलिब्रेशन एंड प्रेयर' में अशोक वाजपेयी लिखते हैं, कि बिंदु − एक उत्पत्ति का बिंदु...

एपिसोड 33: 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेज़ेंट' — हिलाल अहमद 15.06.2025

जुलाई २०२३ में रेलवे पुलिस के एक सिपाही ने जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सफर करते तीन मुसलमान यात्रियों की गोली मारकर हत्या कर दी, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे मुसलमान थे। अपनी किताब में डॉ हिलाल अहमद लिखते हैं कि इस घटना से पता चलता है कि आज के भारत में हिंसात्मक मुस्लिम-विरोधी माहौल किस हद तक बढ़ चुका है। मगर उन्होंने पिछले दस वर्षों में भारत के मुसलमान नागरिकों के हालात और उनके मुस्लिम पहचान का...

एपिसोड 32: 'अ ड्रॉप इन द ओशन' − सईदा सईदैन हमीद 31.05.2025

पड़ोस के बच्चों ने सात साल की सईदा सईदैन के साथ खेलने से इंकार कर दिया क्योंकि वो मुसलमान थी। नन्ही सईदा ने इस घटना पर एक कहानी लिखी जो बहुत सराही गयी और एक किताब के रूप में छपी। किताब खूब चली और सईदा को तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित नेहरू के हाथों एक गुड़िया पुरूस्कार में मिली। आगे चल के डॉ सईदा हमीद ने पढ़ा-लिखा, घर बसाया, और घर के बाहर भी बहुत कुछ हासिल किया। वे योजना आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग क...

एपिसोड 31: 'द ग्रेट निकोबार बिट्रेयल' − पंकज सेखसरिया 20.05.2025

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी द्वीप 'द ग्रेट निकोबार' करीब-करीब पूरी तरह से घने जंगल से ढका हुआ है और आधुनिक सभ्यता से लगभग अछूता है। शोम्पेन और 'ग्रेट निकोबारी' आदिवासी समुदाय इस छोटे से द्वीप में सैकड़ों हज़ारों वर्षों से रह रहे हैं। यहाँ अनेकों दुर्लभ पशु-पक्षि, मछलियाँ, व अन्य प्राणी-प्रजातियां पाई जाती हैं। अब भारत सरकार 'द ग्रेट निकोबार' द्वीप में एक विशा...

एपिसोड 30: 'एच-पॉप' − कुनाल पुरोहित 07.05.2025

कुनाल पुरोहित की किताब में तीन किरदार हैं − गायिका कवि सिंह, लेखक व राजनैतिक ‘कमेंटेटर’ संदीप देओ, और कवि कमल अग्नेय। तीनों के कला और हुनर का, आजीविका और पेशे का, केंद्र है हिंदुत्व की विचारधारा; और तीनों अपने श्रोताओं तक पहुँचने के लिए निर्भर हैं इंटरनेट व 'ऑनलाइन' जगत पर। क़िताब में, कुनाल इनके सोच, परिवेश, काम-काज, और जीवन के उतराव-चढ़ाव को उजागर करते हैं। और इस तरह, 'एच-पॉप − द सेक्र...

एपिसोड 29: 'नालंदा − हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड' − अभय कुमार 10.04.2025

नालंदा महाविहार का इतिहास शुरू होता है सम्राट अशोक के समय से, यानी ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से, और खत्म होता है — 1,500 साल बाद —बारहवीं शताब्दी में। 'नालंदा' किताब के लेखक अभय कुमार बताते हैं कि अपने समय में नालंदा ज्ञान का एक विश्वविख्यात केंद्र था जहाँ चीन, तिब्बत, कोरिया और जापान जैसे दूर-दराज़ देशों से लोग पढ़ने आते थे। मगर आज नालंदा एक रहस्य है। क्या है नालंदा का महत्व? क्यों आज की वैश्...

एपिसोड 28: 'द मेनी लाइव्स ऑफ़ सईदा एक्स' − नेहा दीक्षित 28.03.2025

नेहा दीक्षित की किताब 'द मेनी लाइव्स ऑफ़ सईदा एक्स' कहानी है सईदा की, जो बनारस के दंगो में सब कुछ खोने के बाद, आजीविका की तलाश में अपने पति और छोटे बच्चों के साथ १९९६ में दिल्ली आ जाती है। अगले २४ सालों में सईदा दिल्ली में ५० अलग-अलग तरह के काम करती है, जैसे साइकिल के पुर्जे बनाना, बादाम छीलना, डॉक्टर के क्लीनिक में सफाई करना, या गजक, खिलौने और अगरबत्ती बनाना। दिन में १६ से १८ घंटों काम करन...

एपिसोड 27: 'स्टिल, लाइफ़' − ईशान तन्खा 07.03.2025

सितम्बर २०१९ में शुरु हुआ एक घटनाक्रम, जिसकी चार मुख्य कड़ियाँ थीं।पहली कड़ी थी दिल्ली के शाहीन बाग़ इलाके में सी.ए.ए.−एन.आर.सी. कानूनों का विरोध-प्रदर्शन, जो यहाँ से देश के अन्य भागों में फैला। इसके बाद फ़रवरी २०२१ में दिल्ली में दंगे हुए और इन दंगों के तुरंत बाद पुरे देश में कोविड महामारी का लॉक-डाउन लगा। घटनाक्रम की आखिरी कड़ी थी किसान आंदोलन, जिसके केंद्र थे दिल्ली के बॉर्डर इलाके। ऐसा लगने लगा कि...

एपिसोड 26: 'सो सेज़ जन गोपाल' — पुरुषोत्तम अग्रवाल 06.02.2025

विश्वास नहीं होता कि आज से पाँच सौ साल पहले, कबीर व अन्य भक्ति काल के कवियों ने, ख़ास कर वे जो निर्गुण मार्गी थे, जाति प्रथा व अन्य सामाजिक कुरीतियों, और खोखले कर्मकाण्ड की कितनी तीखी आलोचना की थी। ये बातें उभर के आती हैं डॉ पुरुषोत्तम अग्रवाल की नवीनतम पुस्तक में, जिसका विषय है भक्ति काल के कवि, जन गोपाल। जन गोपाल, सोलहवीं और सत्रवीं शताब्दी के एक राजस्थानी कवि और लेखक थे, जो बृज भाषा में लिखते थे...

एपिसोड 25: 'बिफोर आई फॉरगेट' – एम. के. रैना 20.01.2025

ज़िन्दगी में उतराव-चढ़ाव को एक ही सिक्के के दो पहलु मानते हुए, प्रेम, सौहार्द, व भाईचारे के भावना को प्रधानता देते हुए, कार्यरत रहना चाहिए। ये बात समझ में आती है, भारत के थिएटर जगत और फिल्म जगत से जुड़े हुए जाने-माने हस्ती, एम. के. रैना के संस्मरण 'बिफोर आई फॉरगेट' को पढ़ के — चाहे वो आतंक के साये में घिरे, कर्फ्यू-ग्रस्त श्रीनगर में अपनी माँ की अंतिम क्रिया कर रहे हों; दिल्ली के १९८४ के दंगों...

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