Himanshu Bhagat

Sambandh Ka Ke Ki

Arts HI ↓ 49 episodes

A conversation on books, conducted in Hindi.

Author

Himanshu Bhagat

Category

Arts

Podcast website

podcasters.spotify.com

Latest episode

Jun 16, 2026

Where to listen?

Podcasts in the app Replaio Radio Coming soon

Podcasts are coming to the app soon. Install now and be the first to see a whole new take on podcasts

Get it on Google Play Install for free Android 5M+ downloads · 4.8 rating iOS soon

Episodes

एपिसोड 24: ‘सर्कल्स ऑफ़ फ्रीडम’ – टी. सी. ए. राघवन 31.12.2024

आज हम गाँधी, नेहरू, सरदार पटेल, और भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता संग्राम के बड़े नेताओं और क्रांतिकारिओं के जीवन से वाकिफ तो हैं, मगर आसफ अली जैसे स्वतंत्रता सैनानि व नेताओं के जीवन का ज्ञान हमको प्रायः नहीं के बराबर होता है। दिल्ली में, भले ही हम आसफ़ अली रोड, अरुना आसफ अली रोड, अंसारी रोड, मौलाना मोहम्मद अली मार्ग जैसे सडकों पर चलते हों, मगर कौन थे ये लोग जिनके यादगार में इन सड़कों का नाम रखा गया है, क्...

एपिसोड 23: 'आइकोनिक ट्रीज़ ऑफ़ इंडिया' — एस. नटेश 18.11.2024

शहंशाह शाहजहाँ, टीपू सुल्तान, और मराठा साम्राज्य के आखरी पेशवा, बाजी राओ द्वितीय – इन्होंने कौन से पेड़ लगाए थे, जो आज भी जीवित हैं? भारत में कहाँ है दुनिया का सबसे बड़ा पेड़ जिसके नीचे एक बार में २०,००० आदमी खड़े हो सकते हैं? कहाँ है भारत का सबसे पुराना वृक्ष, जिसकी उम्र है २०२३ साल? किस पेड़ के नीचे गुरु नानक बैठे थे, और किसके नीचे रबिन्द्रनाथ टैगोर बैठे? किस पेड़ को महात्मा गाँधी ने लगाया था और किसको...

एपिसोड 22: 'राष्ट्र और नैतिकता − नए भारत से उठते 100 सवाल' − राजीव भार्गव 09.10.2024

दिल्ली के रिंग-रोड सड़क पर जब राजीव भार्गव की गाड़ी एक अन्य गाड़ी से टकराते-टकराते बची, तो अपनी गाड़ी से उतरकर उन्होंने दूसरी गाड़ी के ड्राइवर से पूछा, 'क्या आपको मालूम है कि साइड रोड पर चलती गाड़ी को मेन रोड पर आती हुई गाड़ी के लिए रुकना होता है?' दुसरे ड्राइवर ने जवाब दिया, ‘जो गाड़ी जिस रोड पर होती है, उसके लिए वही मेन रोड होता है।' ऐसे ही व्यक्तिगत अनुभव, एवं देश और समाज की खबरें, इतिहास से लिए गए उदा...

एपिसोड 21: 'द रिपब्लिक रीलर्न्ट − रीन्यूइंग इंडियन डेमोक्रेसी − 1947 टू 2024' − राधा कुमार 16.09.2024

अपनी किताब में राधा कुमार कहती हैं कि भारत में पहले गणराज्य की स्थापना हुई थी १९४७ में, जब देश को आज़ादी मिली। वे ये भी कहती हैं कि २०१९ में − जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोबारा एन. डी. ए. (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) की सरकार सत्ता में आई − तब भारत में 'सेकंड रिपब्लिक', यानी दूसरे गणराज्य की स्थापाना हो गई। वो इसलिए, क्योंकि इस प्रशासन के लक्ष्य, और उन लक्ष्यों को हासिल करने के तरीकों...

एपिसोड 20: 'द पावर प्लांट − फ़्रैगमेन्ट्स इन टाइम' − रवि अगरवाल 02.08.2024

दिल्ली में महात्मा गाँधी की समाधी 'राजघाट' के निकट यमुना नदी के तट से सटा एक पावर प्लांट हुआ करता था जिसका उद्घटान पंडित जवाहरलाल नेहरू ने १९६३ में किया था। पचास साल से ऊपर देश की राजधानी को बिजली प्रदान करने के बाद इस बिजली घर को बंद कर दिया गया। कारण था, शहर में प्रदुषण का प्रकोप, जिसमे योगदान था इसके चिमनियों से निकलते कोयले के धुंए का। रवि अगरवाल तेरह साल की उम्र में ही, हाथ में कैमरा...

एपिसोड 19: 'द कलर्स ऑफ़ नैशनलिज़्म' − नंदिता हक्सर 11.07.2024

नंदिता हक्सर का जन्म नए-नए आज़ाद भारत के एक कुलीन परिवार में हुआ। उनके पिता आला सरकारी अफसर थे और नेहरू परिवार से उनके करीबी रिश्ते थे। मगर, कम उम्र से ही सत्ता से दूरी रखते हुए, नंदिता ने वक़ालत की पढ़ाई की और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता बन गईं। आज़ादी के सात साल बाद जन्मी नंदिता के सपनों का भारत, सदैव पंडित नेहरू के समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष आदर्शों का भारत रहा है। इन आदर्शों से प्रेरित हो, वे मानवाधिका...

एपिसोड 18: 'कास्ट प्राइड − बैटल्स फॉर इक्वालिटी इन हिन्दू इंडिया' − मनोज मित्ता 09.06.2024

११ जून १९९७ को मुंबई के घाटकोपर इलाके के रमाबाई नगर नाम के बस्ती में, पुलिस ने १० दलितों की गोली मर के हत्या कर दी। बस्ती में बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति को किसी ने चप्पल की माला पहना दी थी और वहाँ के दलित निवासी इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं, १५ जून २००२ को, हरयाणा में दुलीना नाम के कस्बे में 'गोरक्षक' पाँच घायल दलितों को पुलिस चौकी में लाते हैं और गोहत्या के 'जुर्म' में...

एपिसोड 17: 'बीइंग हिन्दू, बीइंग इंडियन' − वन्या वैदेही भार्गव 10.05.2024

अंग्रेजी हुकूमत के पुलिस के डंडों के निर्मम प्रहार ने लाला लाजपत राय की जान ले ली। इसका बदला लेने के लिए भगत सिंह और राजगुरु ने अंग्रेजी पुलिस अफसर जे. पी. सॉन्डर्स की गोली मार के हत्या कर दी, और फांसी पर चढ़ के देश के लिए शहीद हो गए। आज, लाला लाजपत राय की स्मृति शायद भगत सिंह के स्मृति के साये में रह गयी है। मगर लाजपत राय स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, राज नेता, विचारक, और लेखक थे। वे आज़ाद भारत क...

एपिसोड 16: 'द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ़ जॉर्ज फर्नांडेस' — राहुल रामगुंडम 10.04.2024

जॉर्ज फर्नांडेस की छवि है, एक निर्भीक, प्रखर, बेबाक नेता की जिसने अपना राजनितिक सफर आरम्भ किया मात्र १९ वर्ष की उम्र में, समाजवाद के आदर्शों से प्रेरित हो, कामगारों के हक़ की लड़ाई लड़ते हुए। और, साठ वर्ष पश्चात, उस सफर का अंत किया उन हिन्दूवादी राजनितिक ताकतों से पूरी तरह जुड़े हुए, जो भारत के राजनैतिक नक़्शे पर छाये हुए थे। एक अति-साधारण युवा जिसने सत्ता को निर्भीकता से ललकारा और उससे लोहा लिया, और ए...

एपिसोड 15: 'द डायरी ऑफ़ गुल मोहम्मद' – हुमरा कुरैशी 14.03.2024

चौदह-वर्षीय गुल मुहम्मद अपने माँ-बाप, दादी, और भाई गुलज़ार के साथ स्रीनगर में रहता है। साल २०१६ है, और हालात ठीक नहीं हैं। पिता का शॉल बेचने का काम है, मगर शॉल खरीदने वाले ग्राहक बचे ही नहीं हैं। फिर, गुल मुहम्मद के भाई गुलज़ार की एक आँख में सुरक्षा-कर्मियों के बन्दूक से दागे छर्रे लगते हैं और उस आँख की रौशनी ख़त्म हो जाती है। बिगड़ते हालात और आर्थिक तंगी से परेशान, गुल मुहम्मद के घर वाले उसको दिल्ली...

एपिसोड 14: 'सिटी ऑन फायर – अ बॉयहुड इन अलीगढ़' – ज़ेयाद मसरूर खान 17.02.2024

ज़ेयाद मसरूर खान की किताब 'सिटी ऑन फायर--अ बॉयहुड इन अलीगढ़' उनके अलीगढ़ के पुराने इलाके, ऊपर कोट, में पलने-बढ़ने की कहानी है। उत्तर प्रदेश के शहर अलीगढ़ के इस कोने में, हिन्दू और मुसलमान एक दुसरे के अगल-बगल पुराने समय से रह रहे हैं। और शायद, हमको ये सुनके बहुत आश्चर्य नहीं होगा कि हिन्दू-मुस्लिम दंगे भी यहाँ समय-समय पर होते रहे हैं। इसी सांप्रदायिक तनाव—जो जब-तब जानलेवा हिंसा का रूप ले लेता था...

एपिसोड 13: 'स्टार्री स्टार्री नाईट' – नंदिता बासु 31.01.2024

अपनी माँ के देहांत के बाद, कुनाल पहाड़ों में स्थित बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने आता है, और वहाँ पहले कुछ महीने अपनी 'आंटी' तारा के साथ ठहरता है। तारा उसी स्कूल में म्यूज़िक टीचर है और वो खुद अभी तक अपनी प्रिय सखी, नीसा, के मौत से उबरी नहीं है। अपने प्रियजनों की मृत्यु से शोकागुल दो लोगों की कहानी है, लेखक नंदिता बासु की कृति, 'स्टार्री स्टार्री नाईट', यानि 'तारों से जगमगाती रात'।...

एपिसोड 11: 'नार्थ-ईस्ट इंडिया – अ पोलिटिकल हिस्ट्री' – सम्राट चौधरी 25.01.2024

जब १९८० के दशक में सम्राट चौधरी मेघालय की राजधानी शिलांग में पल-बढ़ रहे थे तो वहाँ के विधान-सभा भवन के दीवार पर किसी ने बड़े अक्षरों में लिख दिया था ' खासी बाय ब्लड, इंडियन बाय एक्सीडेंट '। मतलब -- 'मेरी पहचान, मेरा नस्ल, खासी है; हिंदुस्तानी तो महज इत्तेफ़ाक़ से हूँ।' जब उनके दोस्त नागालैंड या मणिपुर से कलकत्ता, दिल्ली, या मुंबई आ रहे होते थे तो वे कहते थे, 'हम इंडिया जा रहे हैं।&...

एपिसोड 12: 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' – रक्षंदा जलील 17.01.2024

अगर कहीं उर्दू भाषा का ज़िक्र हो जाय, तो लोग उसकी तारीफ़ तो करते हैं, मगर अक्सर लगता है कि ये उर्दू-प्रेम महज शब्दों तक सीमित है। डॉक्टर रक्षंदा जलील अपनी किताब 'उर्दू – द बेस्ट स्टोरीज़ ऑफ़ आवर टाइम्स' के शुरुआती पन्नों में हिंदुस्तान में उर्दू के हाल पर सवाल तो उठाती हैं, मगर साथ-साथ हमको आश्स्वत भी करती हैं कि यहाँ उर्दू आज भी एक जीती-जागती, फलती-फूलती भाषा है। सादत हसन मंटो, इस्मत चुगताई,...

एपिसोड 10: अनदर सॉर्ट ऑफ़ फ्रीडम – गुरचरन दास 01.12.2023

अगर आप की माँ आपसे कहती हों, बेटा, मेक अ लिविंग , मतलब अच्छा खाओ-कमाओ और इज़्ज़त-हैसियत के साथ जियो। और, उसके विपरीत, आपके पिता जी आपसे कहते हों, बेटा, मेक अ लाइफ , मतलब सार्थक ज़िन्दगी जियो, पैसे और प्रतिष्ठा के पीछे मत भागो। तो आप क्या करेंगे? अगर आप गुरचरन दास हैं तो आप दोनों चीज़ करते हैं। व्यस्क ज़िन्दगी के पहले तीन दशकों में मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करके एक बेहद सफल करियर बनाते हैं। फिर ५२ साल...

एपिसोड 9: 'टाल टेल्स बाय अ स्माल डॉग' – ओमैर अहमद 16.11.2023

दिल्ली से पूरब की ओर की ट्रेन या बस पकड़ने पर कानपूर-लखनऊ के आस-पास पहुँचने पर एक बॉर्डर आता है, मैप पर नहीं दिखता है -- 'मैं' और 'हम' का बॉर्डर। इस सीमा को पार करने के बाद लोग 'मैं' की जगह 'हम' का प्रयोग करने लगते हैं और आप जान जाते हैं कि अब आप उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग को छोड़ कर राज्य के पूर्वी भाग में आ गए हैं। लखनऊ, कानपूर, बनारस और ईलाहबाद के अलावा ये क्षेत्र...

एपिसोड 8: 'द ब्रोकन स्क्रिप्ट' – स्वप्ना लिडल 01.11.2023

ईस्ट इंडिया कंपनी ने ११ सितम्बर सन १८०३ में पटपड़गंज की लड़ाई में मराठा ताकतों को हरा कर दिल्ली और उसके आसपास के छेत्रों पर कब्ज़ा पा लिया और इसके साथ ही दिल्ली के इतिहास में अंग्रेजी हुकूमत का दौर आरम्भ हुआ। एक तरफ लाल किले पर तख्तनशीन मुग़ल बादशाह शाह आलम, अकबर और बहादुर शाह ज़फर, और एक तरफ डेविड ऑक्टरलोनी, चार्ल्स मेटकाफ, और विलियम फ़्रेज़र जैसे अंग्रेजी रेजिडेंट हुक्मरान। एक तरफ मिर्ज़ा ग़ालिब, मोमिन,...

एपिसोड 7: अक्रॉस द यूनिवर्स -- द बीटल्स इन इंडिया - अजोय बोस 14.10.2023

जॉन लेनन, पॉल मक्कार्टनी, जॉर्ज हैरिसन, रिंगो स्टार -- क्या आज से ५०० साल बाद, एक आम इंसान रॉक म्यूजिक के बैंड 'द बीटल्स' के सदस्यों का नाम से वाकिफ होगा? शायद ये सवाल इतना अटपटा भी नहीं है। ये तो हक़िकत है कि आज एक सत्रह साल का युवक बीटल्स के गानों को सुन के ठीक उसी तरह झूमता है, जिस तरह ६० साल पहले उसके दादा-दादी इन्हीं गानों को सुन के झूमा करते थे। महज २५ साल के उम्र में इंग्लैंड के लिवर...

एपिसोड 6: 'अमंग द चैटराटी' – कनिका गहलौत 30.09.2023

साल १९९९, अप्रैल महीने का आखिरी दिन -- दिल्ली में, क़ुतुब मीनार से सटे हुए, टामारिंड कोर्ट नाम के रेस्त्रां में एक पेज-३ पार्टी चल रही थी। पार्टी में, जेसिका लाल जो कभी फैशन-मॉडल हुआ करती थीं, 'सेलिब्रिटी बारटेंडर' बनी हुई थीं। रात के दो बजे, जब जेसिका ने एक नेता जी के लड़के को ड्रिंक्स देने से इंकार कर दिया तो उसने गोली चला कर जेसिका को वहीं मार डाला। इस सनसनीखेज हत्याकाण्ड को कल्पित रूप दे...

एपिसोड 5: 'ज़िक्र -- इन द लाइट एंड शेड ऑफ़ टाइम' - मुज़फ्फर अली 15.09.2023

एडवरटाइजिंग के क्षेत्र में अफ़सर, चित्रकार, फिल्म निर्माता, फैशन डिज़ाइनर, सूफी-संगीत समारोह के आर्गेनाइजर, सूफी भक्त, शेरोशायरी के आशिक़, अवध के तालुकदार खानदान के वारिस – मुज़फ्फर अली ये सब कुछ हैं। अगर इन्होंने अपनी ज़िन्दगी के लम्बे सफर में बहुत कुछ देखा है, तो वो इसलिए क्योंकि इन्होंने बहुत कुछ किया, और इसलिए भी क्योंकि इन्होंने बहुत कुछ करने की कोशिश की। ये बात समझ में आती है इनके आत्मकथा, 'ज़...

एपिसोड 4: 1984 – जॉर्ज ऑरवेल, हिंदी अनुवाद – अभिषेक श्रीवास्तव 31.08.2023

'बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू' यानी 'बड़े भइया आपको देख रहे हैं -- आज   जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास '१९८४' की ये लाइन पुरे विश्व में एक चेतावनी के रूप में जानी जाती है। विचार, भाषा, सामाजिक और राजनैतिक संरचना -- इन सब के सम्बन्धो को एक भयावह, व तकनिकी रूप से उन्नत, आने-वाले कल में चित्रार्थ करने के लिए १९४८ में छपा ये उपन्यास आज भी दुनिया भर में पढ़ा जाता है। सुनिए '१९८४' पर एक चर्च...

एपिसोड 3: द पॉपुलेशन मिथ - इस्लाम, फैमिली प्लानिंग एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया - डॉ. एस. वाई. कुरैशी 13.08.2023

'भारत के मुसलमानों की जनसंख्या तेज गति से बढ़ रही है और इससे देश को खतरा है।' ये बात अक्सर सुनने को मिलती है। मगर जो 'मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि दर' प्रायः सांप्रदायिक तनाव और भय का कारण बन जाता है, उसकी सच्चाई क्या है? तथ्य और आंकड़ों के माध्यम से ये बात समझाते हैं, भारत के भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस. वाई. कुरैशी अपनी पुस्तक 'द पॉपुलेशन मिथ' में। सुनिए डॉ. कुरैशी के साथ...

एपिसोड 2: शैडो सिटी – अ वुमन वॉक्स काबुल - तरन खान 31.07.2023

वर्ष २००६, अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान हुकूमत को गिरे हुए पाँच साल हो चुके हैं — तरन खान पहली बार हिंदुस्तान से अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पहुँचती हैं तो उनको लगता है कि वे एक अजनबी शहर में आयी हैं, और साथ-साथ यह भी लगता है कि ऐसे शहर में आई हैं जिससे उनका पुराना परिचय हो। काबुल में उनकी पहचान शायरों, फिल्म निर्माताओं, पत्रकारों और शहर के अन्य बाशिंदो से होती है। वक़्त के साथ, वे पाती हैं कि उनकी कल्...

एपिसोड 1: अकबर ऑफ़ हिंदुस्तान - पार्वती शर्मा 14.07.2023

एक बेहतरीन योद्धा, कुशल प्रशासक, और दूरदृष्टिवान शासक — शहंशाह अकबर ने सम्पूर्ण उत्तरी हिन्द महाद्वीप में अपना साम्राज्य स्थापित किया और अपने बहुलवादी (प्लुरलिज़्म) एवं सहनशीलतावादी (टॉलरेंस) नीतियों द्वारा  वर्तमान और भविष्य के हिंदुस्तान के लिए 'विविधता में एकता' की मिसाल खड़ी की। एक १३ साल का लड़का जिसके पिता की मौत हो चुकी थी, और जो महत्वाकांक्षी दरबारियों, सिपहसालारों, और अमीरों से घिरा...

Listen to the Sambandh Ka Ke Ki podcast in Replaio

Radio and podcasts in one app - free, with no sign-up. Install today and do not miss the launch

Get it on Google Play

Replaio is not a podcast publisher; show names, artwork and audio belong to their authors and are distributed through public RSS feeds.