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Pratidin Ek Kavita

Arts HI ↓ 1195 episodes

कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।

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Jul 11, 2026

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Episodes

Rajdhani | Vishwanath Prasad Tiwari 06.06.2025

राजधानी | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी  इतना आतंक था मन पर कि चौथाई तो मर चुका था उतरने के पहले ही राजधानी के प्लेटफॉर्म पर मेरा महानगर प्रवेश नववधू के गृह प्रवेश की तरह था मगर साथियों के साथ दौड़ते, लड़खड़ाते और धक्के खाते सीख ही लिये मैंने भी सारे काट लँगड़ी और धोबिया- पाट एक से एक क़िस्से थे वहाँ परियों और विजेताओं आलिमों और शाइरों के प्याले टकराते हुए मैं भी बोलता था सिकंदर और ग़ालिब के अंदाज़ में हाला...

Amaltaash | Anjana Varma 05.06.2025

अमलताश / अंजना वर्मा  (1) उठा लिया है भार इस भोले अमलताश ने दुनिया को रोशन करने का बिचारा दिन में भी जलाये बैठा है करोड़ों दीये!  (2) न जाने किस स्त्री ने टाँग दिये अपने सोने के गहने अमलताश की टहनियों पर और उन्हें भूलकर चली गई    (3) पीली तितलियों का घर है अमलताश या सोने का शहर है अमलताश दीवाली की रात है अमलताश या जादुई करामात है अमलताश!

Peehar Ka Birwa | Amarnath Srivastava 04.06.2025

पीहर का बिरवा / अमरनाथ श्रीवास्तव पीहर का बिरवा छतनार क्या हुआ, सोच रही लौटी ससुराल से बुआ । भाई-भाई फरीक पैरवी भतीजों की, मिलते हैं आस्तीन मोड़कर क़मीज़ों की झगड़े में है महुआ डाल का चुआ । किसी की भरी आँखें  जीभ ज्यों कतरनी है,  किसी के सधे तेवर हाथ में सुमिरनी है कैसा-कैसा अपना ख़ून है मुआ । खट्टी-मीठी यादें अधपके करौंदों की, हिस्से-बँटवारे में  खो गए घरौंदों की बिच्छू-सा आँगन दालान ने छुआ ।  पु...

Deewanon Ki Hasti | Bhagwati Charan Varma 03.06.2025

दीवानों की हस्ती | भगवतीचरण वर्मा हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले, मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले। आए बनकर उल्लास अभी, आँसू बनकर बह चले अभी, सब कहते ही रह गए, अरे, तुम कैसे आए, कहाँ चले? किस ओर चले? यह मत पूछो, चलना है, बस इसलिए चले, जग से उसका कुछ लिए चले, जग को अपना कुछ दिए चले, दो बात कही, दो बात सुनी; कुछ हँसे और फिर कुछ रोए। छककर सुख-दु:ख के घूँटों को हम एक भा...

Saath Ka Hona | Madan Kashyap 02.06.2025

साठ का होना | मदन कश्यप तीस साल अपने को सँभालने में और तीस साल दायित्वों को टालने में कटे इस तरह साठ का हुआ मैं आदमी के अलावा शायद ही कोई जिनावर इतना जीता होगा कद्दावर हाथी भी इतनी उम्र तक नहीं जी पाते कुत्ते तो बमुश्किल दस-बारह साल जीते होंगे बैल और घोड़े भी बहुत अधिक नहीं जीते उन्हें तो काम करते ही देखा है हल खींचते-खींचते जल्दी ही बूढ़े हो जाते हैं बैल और असवार के लगाम खींचने पर दो टाँगों पर खड़...

Atmalochan | Trilochan 01.06.2025

आत्मालोचन | त्रिलोचन शब्द, मालूम है, व्यर्थ नहीं जाते हैं पहले मैं सोचता था उत्तर यदि नहीं मिले तो फिर क्या लिखा जाए किंतु मेरे अंतरनिवासी ने मुझसे कहा— लिखा कर तेरा आत्मविश्लेषण क्या जाने कभी तुझे एक साथ सत्य शिव सुंदर को दिखा जाए अब मैं लिखा करता हूँ अपने अंतर की अनुभूति बिना रंगे चुने काग़ज़ पर बस उतार देता हूँ।

Main Koi Kavita Likh Raha Hunga | Kailash Manhar 31.05.2025

मैं कोई कविता लिख रहा हूँगा | कैलाश मनहर मैं कोई कविता लिख रहा हूँगा जब संसद में चल रही होगी बहस कि क्यों और कितना ज़रूरी है बचाना कानून को ? कविता से, होने वाले खतरे पर चिन्तित सत्ता और प्रतिपक्ष के सांसद कानून की मज़बूती के बारे में सोच रहे होंगे, वातानुकूलित सदन में बाहर की उमस और गर्मी से बेख़बर । मन्दिरों में गूँज रहे होंगे शंख और घड़ियाल मस्जिदों में अज़ानें कि शैतान अब कविता की शक़्ल में आया...

Kahin Baarish Ho Chuki Hai | Zeeshan Sahil 30.05.2025

कहीं बारिश हो चुकी है | ज़ीशान साहिल मकान और लोग बहुत ख़ुश और नए नज़र आ रहे हैं रास्ते और दरख़्त ख़ुद को धुला हुआ महसूस कर रहे हैं दरख़्त: पेड़ फूल और परिंदे तेज़ धूप में फैले हुए हैं ख़्वाब और आवाज़ें शायद पानी में डूबे हुए हैं उदासी और ख़ुशी ओस की तरह बिछी है ऐसा लगता है मेरे दिल से बाहर या तुम्हारी आँखों के पास कहीं बारिश हो चुकी है

Pao Bhar Kaddu Se Bana Leti Hai Raita | Mamta Kalia 29.05.2025

पाव भर कद्दू से बना लेती है रायता | ममता कालिया एक नदी की तरह सीख गई है घरेलू औरत दोनों हाथों में बर्तन थाम चौकें से बैठक तक लपकना जरा भी लड़खड़ाए बिना एक साँस में वह चढ़ जाती है सीढ़ियाँ‌ और घुस जाती है लोकल में धक्का मुक्की की परवाह किए बिना राशन की कतार उसे कभी लम्बी नहीं लगी रिक्शा न मिले तो दोनों हाथों में झोले लटका वह पहुँच जाती है अपने घर एक भी बार पसीना पोंछे बिना एक कटोरी दही से तीन कटोरी...

O Prithvi Tumhara Ghar Kahan Hai | Kedarnath Singh 28.05.2025

ओ पृथ्वी तुम्हारा घर कहाँ है | केदारनाथ सिंह  जीने के अथाह खनिजों से लदी और प्रजनन की अपार इच्छाओं से भरी हुई ओ पृथ्वी ओ किसी पहले आदमी की पहली गोल लिट्टी कहीं अपने ही भीतर के कंडे पर पकती हुई ओ अग्निगर्भा ओ भूख ओ प्यास ओ हल्दी ओ घास ओ एक रंगारंग भव्य नश्वरता जिसकी हर आवृत्ति में वही उदग्रता वही पहलापन ओ पृथ्वी ओ मेरी हमरक़्स तुम्हारा घर कहाँ है!

Kavita Mein | Amita Prajapati 27.05.2025

कविता में | अमिता प्रजापति कितना कुछ कह लेते हैं कविता में सोच लेते हैं कितना कुछ प्रतीकों के गुलदस्तों में सजा लेते हैं विचारों के फूल कविता को बाँध कर स्केटर्स की तरह बह लेते हैं हम अपने समय से आगे वे जो रह गए हैं समय से पीछे उनका हाथ थाम साथ हो लेती है कविता ज़िन्दगी जब बिखरती है माला के दानों-सी फ़र्श पर कविता हो जाती है काग़ज़ का टुकड़ा सम्भाल लेती है बिखरे दानों को दुख और उदासी को हटा देती ह...

Ajnabi Sham | Jaun Elia 26.05.2025

अजनबी शाम | जौन एलिया धुँद छाई हुई है झीलों पर उड़ रहे हैं परिंद टीलों पर सब का रुख़ है नशेमनों की तरफ़ बस्तियों की तरफ़ बनों की तरफ़ अपने गल्लों को ले के चरवाहे सरहदी बस्तियों में जा पहुँचे दिल-ए-नाकाम मैं कहाँ जाऊँ अजनबी शाम मैं कहाँ जाऊँ नशेमनों: आश्रय रुख़: दिशा गल्लों: झुण्ड

Der Ho Jayegi | Ashok Vajpeyi 25.05.2025

देर हो जाएगी | अशोक वाजपेयी देर हो जाएगी- बंद हो जाएगी समय से कुछ मिनिट पहले ही उम्मीद की खिड़की यह कहकर कि गाड़ी में अब कोई सीट ख़ाली नहीं। देर हो जाएगी कड़ी धूप और लू के थपेड़ों से राहत पाने के लिए किसी अनजानी परछी में जगह पाने में, एक प्राचीन कवि के पद्य में नहीं स्वप्न में उमगे रूपक को पकड़ने में, हरे वृक्ष की छाँह में प्यास से दम तोड़ती चिड़िया तक पानी ले जाने में देर हो जाएगी- घूरे पर पड़े सपन...

Sau Baaton Ki Ek Baat | Ramanath Awasthi 24.05.2025

सौ बातों की एक बात - रमानाथ अवस्थी  सौ बातों की एक बात है. रोज़ सवेरे रवि आता है दुनिया को दिन दे जाता है लेकिन जब तम इसे निगलता होती जग में किसे विकलता सुख के साथी तो अनगिन हैं लेकिन दुःख के बहुत कठिन हैं सौ बातो की एक बात है. अनगिन फूल नित्य खिलते हैं हम इनसे हँस-हँस मिलते हैं लेकिन जब ये मुरझाते हैं तब हम इन तक कब जाते हैं जब तक हममे साँस रहेगी तब तक दुनिया पास रहेगी सौ बातों की एक बात है. सुन्...

Aanch | Vandana Mishra 23.05.2025

आँच | वंदना मिश्रा गर्मियों में तेज़ आँच देखकर माँ कहती थी : 'आग अपने मायके आई है' और फिर चूल्हे की लकड़ियाँ कम कर दी जाती थीं मैं कहती थी : 'मायके में तो उसे अच्छे से रहने दो माँ कम क्यों कर रही हो?' माँ कहती थी : 'ये लड़की प्रश्न बहुत पूछती है।' बाद में समझ आया प्रश्न पूछने से मना करना आग कम करने की तरफ़ बढ़ा पहला क़दम होता है।

Zooming | Ashfaq Hussain 22.05.2025

ज़ूमिंग |अशफ़ाक़ हुसैन देखूँ जो आसमाँ से तो इतनी बड़ी ज़मीं इतनी बड़ी ज़मीन पे छोटा सा एक शहर छोटे से एक शहर में सड़कों का एक जाल सड़कों के जाल में छुपी वीरान सी गली वीराँ गली के मोड़ पे तन्हा सा इक शजर तन्हा शजर के साए में छोटा सा इक मकान छोटे से इक मकान में कच्ची ज़मीं का सहन कच्ची ज़मीं के सहन में खिलता हुआ गुलाब खिलते हुए गुलाब में महका हुआ बदन महके हुए बदन में समुंदर सा एक दिल उस दिल की वुसअ'तों...

Pagli Arzoo | Nasira Sharma 21.05.2025

पगली आरज़ू | नासिरा शर्मा कहा था मैंने तुमसे उस गुलाबी जाड़े की शुरुआत में उड़ना चाहती हूँ मैं तुम्हारे साथ खुले आसमान में चिड़ियाँ उड़ती हैं जैसे अपने जोड़ों के संग नापतीं हैं आसमान की लम्बाई और चौड़ाई नज़ारा करती हैं धरती का, झांकती हैं घरों में पार करती हैं पहाड़, जंगल और नदियाँ फिर उतरती हैं ज़मीन पर, चुगती हैं दाना सुस्ताती किसी पेड़ की शाख़ पर अलापतीं हैं कोई गीत  प्रेम का जब उमड़ता है प्यार त...

Hanso Ek Bachhe Ki Tarah | Amita Prajapati 20.05.2025

हँसो एक बच्चे की तरह | अमिता प्रजापति तुम प्यार को पृथ्वी मान कर मत घूमो हर्क्यूलिस की तरह मत झुकाओ इसके वज़न से अपनी गर्दन धीरे से सरका के इसे गिरा लो अपने पैरों में उछालो गेंद की तरह हँसो एक बच्चे की तरह...

Dhaar | Arun Kamal 19.05.2025

धार | अरुण कमल कौन बचा है जिसके आगे इन हाथों को नहीं पसारा यह अनाज जो बदल रक्त में टहल रहा है तन के कोने-कोने यह क़मीज़ जो ढाल बनी है बारिश सर्दी लू में सब उधार का, माँगा-चाहा नमक-तेल, हींग-हल्दी तक सब क़र्ज़े का यह शरीर भी उनका बंधक अपना क्या है इस जीवन में सब तो लिया उधार सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धार

Us Plumber Ka Naam Kya Hai | Rajesh Joshi 18.05.2025

उस प्लम्बर का नाम क्या है | राजेश जोशी  मैं दुनिया के कई तानाशाहों की जीवनियाँ पढ़ चुका हूँ कई खूँखार हत्यारों के बारे में भी जानता हूँ बहुत कुछ घोटालों और यौन प्रकरणों में चर्चित हुए कई उच्च अधिकारियों के बारे में तो बता सकता हूँ ढेर सारी अंतरंग बातें  और निहायत ही नाकारा क़िस्म के राजनीतिज्ञों के बारे में घंटे भर तक बोल सकता हूँ धारा प्रवाह लेकिन घंटे भर से कोशिश कर रहा हूँ पर याद नहीं आ रहा है इ...

Rang Is Mausam Mein Bharna Chahiye | Anjum Rehbar 17.05.2025

रंग इस मौसम में भरना चाहिए | अंजुम रहबर रंग इस मौसम में भरना चाहिए सोचती हूँ प्यार करना चाहिए ज़िंदगी को ज़िंदगी के वास्ते रोज़ जीना रोज़ मरना चाहिए दोस्ती से तज्रबा ये हो गया दुश्मनों से प्यार करना चाहिए प्यार का इक़रार दिल में हो मगर कोई पूछे तो मुकरना चाहिए

Kavi Ka Ghar | Ramdarash Mishra 16.05.2025

कवि का घर | रामदरश मिश्र गेन्दे के बड़े-बड़े जीवन्त फूल बेरहमी से होड़ लिए गए और बाज़ार में आकर बिकने लगे बाज़ार से ख़रीदे जाकर वे पत्थर के चरणों पर चढ़ा दिए गए फिर फेंक दिए गए कूड़े की तरह मैं दर्द से भर आया और उनकी पंखुड़ियाँ रोप दीं अपनी आँगन-वाटिका की मिट्टी में अब वे लाल-लाल, पीले-पीले, बड़े-बड़े फूल बनकर दहक रहे हैं मैं उनके बीच बैठकर उनसे सम्वाद करता हूँ वे अपनी सुगन्ध और रंगों की भाषा में...

Tumne Mujhe | Shamsher Bahadur Singh 15.05.2025

तुमने मुझे | शमशेर बहादुर सिंह तुमने मुझे और गूँगा बना दिया  एक ही सुनहरी आभा-सी  सब चीज़ों पर छा गई  मै और भी अकेला हो गया  तुम्हारे साथ गहरे उतरने के बाद  मैं एक ग़ार से निकला  अकेला, खोया हुआ और गूँगा  अपनी भाषा तो भूल ही गया जैसे  चारों तरफ़ की भाषा ऐसी हो गई  जैसे पेड़-पौधों की होती है  नदियों में लहरों की होती है  हज़रत आदम के यौवन का बचपना  हज़रत हौवा की युवा मासूमियत  कैसी भी! कैसी भी!  ऐस...

Aadat | Gulzar 14.05.2025

आदत | गुलज़ार साँस लेना भी कैसी आदत है जिए जाना भी क्या रिवायत है कोई आहट नहीं बदन में कहीं कोई साया नहीं है आँखों में पाँव बेहिस हैं चलते जाते हैं इक सफ़र है जो बहता रहता है कितने बरसों से कितनी सदियों से जिए जाते हैं जिए जाते हैं आदतें भी अजीब होती हैं

Auratein | Shubha 13.05.2025

औरतें | शुभा औरतें मिट्टी के खिलौने बनाती हैं मिट्टी के चूल्हे और झाँपी बनाती हैं औरतें मिट्टी से घर लीपती हैं मिट्टी के रंग के कपड़े पहनती हैं और मिट्टी की तरह गहन होती हैं औरतें इच्छाएँ पैदा करती हैं और ज़मीन में गाड़ देती हैं औरतों की इच्छाएँ बहुत दिनों में फलती हैं

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