Sutradhar

इतिहास पुराण की कथाएं Itihas Puran Ki Kathaye

History HI ↓ Odcinki: 63

नमस्कार श्रोताओं ! सूत्रधार आपके लिए लेकर आया है, इतिहास पुराण पोडक्स्ट। इस पॉडकास्ट के माध्यम से हम आप सभी को अनेकों पौराणिक कथाओं से जोड़ने वाले है। ये कथाएं महाभारत, शिव पुराण, रामायण जैसे अनेकों ग्रंथों से ली गयी हैं। हमारे इस पॉडकास्ट को आप सुन पाएंगे हर बुधवार वो भी अपने पसंदीदा ऑडियो प्लेटफार्म पर ! इसी के साथ आप सूत्रधार द्वारा बनाये गए और पोडकास्टस भी सुन सकते हैं। जैसे की नल-दमयंती प्रेम कथा, मिनी टेल्स पॉडकास्ट, श्री राम कथा और वेद व्यास की महाभारत। मिलते हैं बुधवार में हमारे पहले एपिसोड के साथ। Millions of listeners seek out Bingepods (Ideabrew Studios Network content) every day. Ge...

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Autor

Sutradhar

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History

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12 lis 2023

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Odcinki

कौआ चला हंस की चाल | Kauwa Chala Hans Ki Chal 04.01.2023

द्रोणाचार्य की मृत्यु के बाद दुर्योधन ने कर्ण को कौरव सेना का सेनापति नियुक्त किया। कर्ण ने दुर्योधन से वादा किया कि वह अर्जुन का वध करेगा और युद्ध में दुर्योधन की जीत सुनिश्चित करेगा। उसने दुर्योधन को बताया कि कैसे वह हर पहलू में अर्जुन से बेहतर है सिवाय एक को छोड़कर। कर्ण ने कहा कि अर्जुन के पास सारथी के रूप में श्रीकृष्ण हैं। उसने प्रस्ताव दिया कि यदि दुर्योधन शल्य को उसका सारथी बनने के लिए मना...

सुनहरा नेवला | The Golden Mongoose 28.12.2022

कुरुक्षेत्र का युद्ध जीतने के बाद, युधिष्ठिर हस्तिनापुर के राजा बने और उन्होंने अश्वमेध यज्ञ करने का फ़ैसला किया। यज्ञ अविस्मर्णीय और अत्यन्त ही विशाल पैमाने पर हुआ जिसकी महिमा चारों ओर फैली हुई थी। यज्ञ वैदिक अनुष्ठानों के अनुसार विद्वान ब्राह्मणों के मार्गदर्शन में किया गया और दान भी उस पैमाने पर दिया गया जो दुनिया ने कभी नहीं देखा था।   यज्ञ के अन्त में एक नेवला वहाँ आया। उसके शरीर का आधा हिस्सा...

नारदमुनि के नाम की कथा ( How Narad Muni Got His Name? ) 21.12.2022

एक बार नारदमुनि मनु के पुत्र प्रियव्रत से मिलने गए। प्रियव्रत ने नारद जैसे ज्ञानी ऋषि का स्वागत पूरे सम्मान और आतिथ्य के साथ किया जिसके पश्चात प्रियव्रत ने नारदमुनि से कई प्रश्न किए। परन्तु ज्ञान की प्यास लगातार बढ़ती चली गई और प्रियव्रत ने पूछा, "मुनिवर ! जब भी कुछ घटित होने वाला होता है, देवों को पूर्वानुमान हो जाता है लेकिन मैं किसी ऐसी घटना के विषय में जानना चाहता हूँ  जो विचित्र और अद्भुत हो।...

वाल्मीकि जी को श्रीरामकथा सुनाने की प्रेरणा 14.12.2022

रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि अर्थात प्रथम कवि भी कहते हैं और उनके द्वारा रचित श्रीरामकथा को प्रथम महाकाव्य। देखिए कैसे मिली वाल्मीकि जी को रामायण की रचना करने की प्रेरणा।  एक बार तपस्वी वाल्मीकि ऋषि की भेंट तीनों लोकों में भ्रमण करने वाले त्रिलोकज्ञाता देवर्षि नारद ने हुई। वाल्मीकि जी ने नारद मुनि से पूछा, “देवर्षि! इस समय विश्व में गुणवान, वीर्यवान, धर्मज्ञ, कृतज्ञ, सत्यवादी, धर्मान...

च्यवन ऋषि (Chyavan Rishi) 07.12.2022

ब्रह्मदेव के मानस पुत्र भृगु ऋषि के पुत्र च्यवन ऋषि की कथा अत्यंत रोचक है। उनकी गर्भवती माता का अपहरण करने वाला राक्षस उनके जन्म लेते ही उनके तेज से भस्म हो गया। सदा हरिभक्ति में लीन रहने वाले ऋषि च्यवन का विवाह एक राजकुमारी से हुआ और उनके पतिव्रत के कारण ऋषि को सुंदर काया प्राप्त हुई। देवताओं के चिकित्सक और सूर्यदेव के पुत्रों अश्विनी कुमारों को देवराज इन्द्र के विरोध के बाद भी देवत्व प्रदान करने...

भ्रुशुंडी ऋषि की कथा | Story of Bhrushundi Rishi 30.11.2022

भ्रुशुंडी गणेश मन्दिर महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित गणपति के अष्टविनायक मंदिरों में एक है। देखिये किस प्रकार अपने भक्त के नामजप से प्रसन्न होकर गणपति ने उसे साक्षात अपना ही स्वरूप प्रदान कर दिया।  दंडकारण्य नाम के एक घने जंगल में नामा नाम का एक मछुआरा और उसका परिवार रहता था। नामा मछुआरा जंगल के रास्ते से गुजरने वाले लोगों को लूट कर उनकी हत्या कर देता था और उसी से अपना और अपने परिवार का पे...

शेषनाग की और आस्तिक मुनि की कथा | Story of Sheshnag & Astik Muni 23.11.2022

गरुड़ का लाया हुआ अमृत पात्र नागों के अमृत पीने से पहले ही इन्द्र ले गए और नाग बिना अमृत के ही रह गए। अब माता के शाप से बचने का कोई और उपाय सोचने लगे।  इन सर्पों में एक शेषनाग ने अपने भाइयों के बर्ताव से परेशान होकर उनसे अलग जीवन बिताने की सोची। शेषनाग ने अपना मन ब्रह्मा की आराधना में लगाया और वर्षों तक केवल हवा पीकर कठिन तपस्या की। अंत में ब्रह्मा जी उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उनको दर्शन दिए।  ब्...

गरुड़ की जन्मकथा | Story of Garuda's Birth 16.11.2022

अपने नाग पुत्रों की सहायता से कद्रू ने छलपूर्वक विनता से बाजी जीत ली और विनता उसकी दासी बनकर रहने लगी। अपने पहले पुत्र अरुण के शाप के कारण दासत्व का जीवन व्यतीत करती हुई विनता उस शाप से मुक्ति पाने के लिए अपने दूसरे पुत्र के जन्म की प्रतीक्षा करने लगी।   समय आने पर विनता के दूसरे अंडे से महाशक्तिशाली गरुड़ पैदा हुए। उनकी शक्ति, गति, दीप्ति और वृद्धि विलक्षण थीं। आँखे बिजली की तरह पीली और शरीर अग्नि...

सूर्यदेव के सारथी - अरुण | Suryadev's charioteer - Arun 09.11.2022

सतयुग के प्रारम्भ में ब्रह्माजी के आशीर्वाद से दक्ष प्रजापति की तेरह पुत्रियों का विवाह प्रजापति मरीचि के पुत्र कश्यप ऋषि के साथ हुआ। कश्यप ऋषि और उनकी पत्नियों से संसार में अनेक प्रजातियों और वनस्पतियों की उत्पत्ति हुई। यह प्रसंग इन्हीं में से दो पत्नियों कद्रू और विनता के बारे में है। कद्रू के गर्भ से नागों और विनता से पक्षीराज गरुड़ और सूर्यदेव के सारथी अरुण का जन्म हुआ। क्या है इनके जन्म की कथा...

चित्रकेतु के वृत्रासुर बनने की कथा | Chitraketu 02.11.2022

जो भी ऋषि दधीचि की कथा से परिचित है उसे पता है कि किस प्रकार असुर वृत्त्र किसी भी धातु से बने हुए अस्त्र से अवध्य था और उसका संहार करने के लिए ऋषि दधीचि ने अपने प्राणों का परित्याग कर अपनी अस्थियाँ देवराज इन्द्र को दान कर दी थीं। यह कहा उसी वृत्त्र के पूर्व जन्म की है।  शूरसेन देश में चित्रकेतु नामक एक राजा हुए जिन्होंने पूरी पृथ्वी पर विजय प्राप्त की। राजा की शक्ति इतनी थी कि उनके राज्य में रहने...

भाई दूज | Bhai Dooj Story 27.10.2022

एक बार की बात है, एक गाँव में एक माँ अपने बेटे के साथ रहा करती थी। एक बार भाई दूज के दिन बेटे ने अपनी माँ से बहन के घर जाकर उससे टीका लगवाने की बात कही। माँ ने कहा, “ठीक है। चले जाओ।“ भाई अपने घर से अपनी बहन से मिलने के लिए निकल पड़ा। रास्ते में उसे नदी मिली। नदी ने उससे कहा, “मैं तुम्हें डुबाऊँगी।“ भाई ने नदी से कहा, “आज भाई दूज के दिन मैं अपनी बहन से तिलक कराने जा रहा हूँ। वो मेरी बाट जोह रही होग...

Govardhan Pooja | गोवर्धन पूजा 25.10.2022

एक बार, कृष्ण और बलराम जंगल में कुछ मजेदार समय बिताने के बाद पुनः बृज आए। बृज पहुँचते ही उन्होंने देखा इन्द्रोत्सव को लेकर सभी गोप बहुत हर्षित और उत्साहित थे। यह देखकर कृष्ण को उत्सुकता हुई और उन्होंने पूछा, "यह उत्सव किस बारे में है?"   कृष्ण की बात सुन एक वृद्ध गोप ने कहा, “इन्द्रदेव बादलों के स्वामी है, वह पूरे विश्व के रक्षक है। उनके कारण ही बारिश आती है। बारिश के कारण, हमारी सभी फसलें हरी-भरी...

नरकासुर वध | Narkasur 23.10.2022

भूदेवी का पुत्र नरकासुर अत्यंत पराक्रमी था जिससे देवता भी भयभीत रहते थे। इन्द्र से शत्रुता के चलते वह देवताओं और ऋषियों के प्रतिकूल आचरण करता था और उनके धार्मिक अनुष्ठानों में विघ्न डालता रहता था। भूमिपुत्र होने के कारण भौम नाम से भी जाने जाने वाले उस असुर ने एक बार हाथी का वेश धारण कर त्वष्टा की पुत्री कशेरु का अपहरण कर अपने राज्य प्राग्ज्योतिषपुर ले गया। उसने अनेक देवताओं, मनुष्यों और गन्धर्वों...

समुद्र मंथन | Samudra Manthan 22.10.2022

भगवान् विष्णु के दस प्रमुख अवतारों में दूसरा अवतार था कूर्म या कच्छप अवतार। इसके पहले विष्णु भगवान् ने एक मछली के रूप में अवतरित होकर इस सृष्टि को प्रलय से बचाया था। आज की इस कथा में देखिये क्यों भगवान को एक कछुए के रूप में अवतरित होना पड़ा।    एक बार भगवान् शिव के क्रोध से जन्मे दुर्वासा ऋषि पृथ्वी लोक में भ्रमण कर रहे थे। घूमते-घूमते उन्होंने एक विद्याधरी के हाथों में सुगन्धित पुष्पों की एक माला...

कुबेर की भगवान शिव से मैत्री की कथा 19.10.2022

कुबेर को धन-संपत्ति के देवता के रूप में सभी जानते हैं, परन्तु उनके पूर्व जन्मों की कथा बहुत कम लोगों को पता होगी। शिव पुराण के इस प्रसंग में सुनिए किस प्रकार मंदिर में चोरी करने वाले एक चोर ने, जाने-अनजाने किये गए अपने कर्मों के कारण कुबेर के पद को प्राप्त करने के साथ-साथ भगवान शंकर के समीप स्थान भी प्राप्त किया। काम्पिल्य नगर में यज्ञदत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उनके एक पुत्र हुआ जिसका नाम गु...

अजगरोपाख्यान - नहुष उद्धार 12.10.2022

अपने अहंकार के कारण अगस्त्य ऋषि के शाप का भागी बने नहुष ने वर्षों पृथ्वी पर एक अजगर के रूप में व्यतीत किए। नहुष की कथा के इस भाग में हम देखेंगे अंततः कैसे हुआ नहुष का उद्धार। एक समय इंद्र रह चुके नहुष का सर्प बनकर धरा लोक पर पतन हुए हजारों वर्ष बीत चुके थे। महर्षि अगस्त्य के श्राप के कारण इतने वर्षों के उपरांत भी नहुष को सब कुछ पूरी तरह से याद था। वह जानते थे कि वह चन्द्रवंशी सम्राट आयु के पुत्र त...

देवराज नहुष 05.10.2022

पृथ्वीलोक पर वर्षों तक धर्मपूर्वक राज्य करने और शौर्य और वैभव अर्जित करने के बाद, ऐसा क्या हुआ कि महाराज नहुष को देवराज बनाना पड़ा। देखिये कैसा रहा देवराज नहुष का कार्यकाल?   युगों तक स्वर्गलोक पर शासन करने के बाद इंद्र को ऐश्वर्य का मोह लग चुका था और उनके मन में इस बात को लेकर के घमंड जाग गया। एक बार की बात है, इंद्रलोक में हमेशा की तरह ही उत्सव का माहौल था, देवी शची के साथ अपने आसन पर बैठे इंद्र...

नहुष - जन्म और देवी अशोकसुंदरी से विवाह 21.09.2022

वैवस्वत मनु की प्रथम संतान इला और चन्द्रपुत्र बुध के पुत्र पुरुरवा ने चन्द्रवंश की स्थापना की और वर्षों धर्मपूर्वक प्रजापालन किया। महाराज पुरुरवा और अप्सरा उर्वशी के पुत्र आयु ने उनके बाद चन्द्रवंश की बागडोर सम्हाली। आयु अपने पिता के अनुरूप ही राजधर्म का पालन करने वाले प्रतापी व प्रजावत्सल राजा थे। इतना ऐश्वर्य और वैभव पाने के बाद भी आयु का मन हमेशा निसंतान होने के दुःख में डूबा रहता था। उनके पश्च...

अहिल्या 14.09.2022

गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर॥ देवी अहिल्या का नाम वैदिक भारत की असीम सुंदरियों में लिया जाता है। सृष्टि के रचयिता ब्रह्मदेव की मानस पुत्री अहिल्या को उनके पति गौतम महर्षि ने जड़ हो जाने का श्राप दे दिया था। अपने पति के श्राप के कारण वर्षों तक अहिल्या एक पत्थर की मूर्ति बनकर रहीं और अंततः त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने अपने स्पर्श से उनका उद्धार किया। क्यों द...

स्यमन्तक मणि की कथा 08.09.2022

स्यमन्तक मणि की कथा - जब भगवान् श्रीकृष्ण पर लगा चोरी का आरोप सूत्रधार की इस कहानी में हम सुनेंगे स्यमन्तक मणि के बारे में। स्यमन्तक मणि एक ऐसी मणि थी जिसमें स्वयं भगवान् सूर्यदेव का तेज समाहित था। वो मणि जिस भी राज्य में रहती उस राज्य में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती। अब ऐसी मणि को कौन नहीं पाना चाहेगा। स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण के मन में उस मणि को पाने की इच्छा जागी। बचपन में गोपियों से माखन चु...

गणपति के जन्म की कथा 31.08.2022

श्रीगणेश पुराण के अनुसार गणेश जी के जन्म और उनके हाथी के सर की कथा कुछ इस प्रकार है।  देवी पार्वती की दो सखियाँ थीं – जया और विजया। दोनों अत्यंत सदाचारिणी और विवेकमयी थीं, और देवी पार्वती उनका बहुत आदर करती थीं। एक दिन उन सखियों ने पार्वती जी से कहा, “सखी! शिवजी के इतने सारे गण हैं और आपका एक भी नहीं। आपका कम से कम एक गण तो होना चाहिये।“  उमा ने आश्चर्यपूर्वक कहा, “क्या कह रही हो सखियों? हमारे पास...

जरासन्ध वध 24.08.2022

श्रीकृष्ण और अर्जुन ने अग्नि देव की सहायता से खाण्डवप्रस्थ के जंगलों में लगी आग को बुझा लिया और उस आग से अपनी जान बचाए जाने के कारण मायासुर राक्षस ने पाण्डवों को इन्द्रप्रस्थ में अपनी राजधानी और एक शानदार महल बनाने में मदद की। मयासुर रावण का ससुर और एक बहुत ही कुशल वास्तुकार था।   सभी देवता, गन्धर्व, राजा और ऋषि इस शानदार महल को देखने के लिए आए और युधिष्ठिर ने उनका सत्कार किया। देवर्षि नारद जी की...

जरासन्ध का मथुरा पर हमला 17.08.2022

श्री कृष्ण के हाथों कंस की हत्या का बदला लेने के लिए क्रोध में अंधे होकर जरासन्ध ने मथुरा पर हमला करने का निर्णय लिया।    जरासन्ध ने अपनी सेना के साथ मथुरा को घेर लिया और श्रीकृष्ण तथा बलराम को युद्ध के लिए ललकारा। मथुरा की जनता ने श्रीकृष्ण और बलराम का पराक्रम पहले भी देखा था इसलिए वो सभी निश्चिन्त थे।   श्रीकृष्ण और बलराम ने अपनी यदु सेना को जरासन्ध की सेना के समक्ष लाकर खड़ा कर दिया। इतनी बड़ी सं...

जरासन्ध का जन्म और कंस से उसका रिश्ता 10.08.2022

जरासन्ध मगध का शासक था और श्रीकृष्ण के जीवन से उसका गहरा सम्बन्ध था। इस कहानी में हम जरासन्ध के बारे में जानेंगे और पता लगाएँगे कि उसका श्रीकृष्ण से क्या रिश्ता था। मगध पर जब राजा बृहद्रथ का राज्य था तब उसकी प्रजा बहुत खुश थी। बृहद्रथ का विवाह काशी की जुड़वा राजकुमारियों से हुआ और वो एक आनंदमय गृहस्थ जीवन में बँध गया। जैसे-जैसे समय बीतता गया राजा के मन में पुत्र प्राप्ति की कामना तीव्र होती गई। अन्...

कावड़ यात्रा की पौराणिक कथा 05.08.2022

 कावड़ यात्रा वेद पुराणों में शिवजी का अन्य नाम आशुतोष बताया गया है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार महादेव को यह नाम इसीलिए मिला क्योंकि वह भक्तों और साधकों की निष्काम तथा कठोर साधना से तुरन्त प्रसन्न हो जाया करते हैं। इसी कारण के चलते प्राचीन काल से देवता, गन्धर्व, असुर तथा साधारण मानव आदि भोले की आराधना कर अनेक शक्तिशाली एवं असाधारण वर प्राप्त किया करते थे। आजके समय में शैव उपासना की इस अनन्य परम्पर...

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