Janvi Kapdi

BHAGWAT GITA

Arts HI ↓ 7 episodios

महाभारत युद्ध आरम्भ होने के ठीक पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया वह श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से प्रसिद्ध है। यह महाभारत के भीष्मपर्व का अंग है। गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं।आज से (सन 2022) लगभग 5560 वर्ष पहले गीता जी का ज्ञान बोला गया था|

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Autor

Janvi Kapdi

Categoría

Arts

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Último episodio

30 de jul. de 2024

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Episodios

आत्म संयम योग 30.07.2024

अध्याय 5 – आत्मसंयम योग (कर्म संन्यास और योग)1. संन्यास और कर्मयोग में अंतर अर्जुन पूछते हैं: “हे कृष्ण! कर्म त्याग (संन्यास) श्रेष्ठ है या कर्मयोग (कर्म करते हुए योग)?” कृष्ण बताते हैं: संन्यास: दुनिया के कर्मों से मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग। कर्मयोग: दुनिया में रहते हुए, अपने कर्तव्य को बिना आसक्ति किए निभाने का मार्ग। निष्काम कर्मयोग संन्यास से भी श्रेष्ठ है, क्योंकि इसमें मन और इन्द्रियाँ सक्...

Gyan karm sanyas yog 02.08.2023

अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग1. गीता ज्ञान की परंपरा श्रीकृष्ण बताते हैं कि यह योग अमर है। पहले सूर्यदेव (विवस्वान) को, फिर मनु को, और उसके बाद राजऋषियों को यह ज्ञान दिया गया। समय के साथ यह परंपरा लुप्त हो गई, इसलिए अब कृष्ण स्वयं अर्जुन को वही दिव्य ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। कृष्ण कहते हैं: “जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अवतार लेता हूँ।” धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश...

Karm yog 10.08.2022

अध्याय 3 – कर्म योग (निष्काम कर्म का योग)1. अर्जुन का प्रश्न अर्जुन पूछते हैं – “हे कृष्ण! यदि ज्ञान (सांख्य) को श्रेष्ठ मानते हैं, तो मुझे युद्ध (कर्म) के लिए क्यों प्रेरित करते हैं?” यहाँ अर्जुन का भ्रम है कि क्या केवल ज्ञान ही मोक्ष का मार्ग है या कर्म भी आवश्यक है। कृष्ण स्पष्ट करते हैं: केवल कर्म-त्याग से मुक्ति नहीं मिलती। हर कोई कर्म करने को बाध्य है, क्योंकि प्रकृति हमें कर्म करने के लिए प...

Sankhya yog part 2 04.05.2022

सांख्य योग – भाग 2 (अध्याय 2 का उत्तरार्ध)1. निष्काम कर्म का सिद्धांत (Karma Yoga का बीज) कृष्ण अर्जुन से कहते हैं – 👉 “तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों पर कभी नहीं।” कर्म करना मनुष्य का कर्तव्य है। फल की आसक्ति (लालच या भय) मन को बाँध लेती है। जब हम केवल कर्म पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो मन स्थिर और शांत होता है। कृष्ण बताते हैं कि स्थितप्रज्ञ पुरुष (जिसका ज्ञान स्थिर हो गया हो) कै...

Sankhya yog 02.05.2022

अध्याय 2 – सांख्य योग (ज्ञान योग)स्थिति अर्जुन युद्ध न करने का निश्चय कर चुके हैं और अपने धनुष को नीचे रखकर श्रीकृष्ण से कहते हैं – "हे कृष्ण! मैं आपका शिष्य बनकर आपसे पूछता हूँ, कृपया मुझे निश्चित रूप से बताइए कि मेरे लिए क्या श्रेयस्कर है।" यहीं से कृष्ण उन्हें दिव्य ज्ञान देना प्रारम्भ करते हैं। आत्मा अमर है आत्मा (आत्मन्) न जन्म लेती है और न मरती है। शरीर नश्वर है लेकिन आत्मा शाश्वत...

Arjun vishad yog 02.05.2022

स्थिति: महाभारत युद्ध शुरू होने वाला है। दोनों सेनाएँ कुरुक्षेत्र के मैदान में आमने-सामने खड़ी हैं। अर्जुन अपने रथ पर खड़े होकर जब युद्धभूमि को देखते हैं, तो उन्हें अपने ही गुरु, बंधु, कुटुंब और मित्र शत्रु पक्ष में दिखाई देते हैं। क्या हुआ: अर्जुन अपने धनुष को थामे खड़े हैं, परंतु उनका हृदय करुणा और मोह से भर जाता है। वे सोचते हैं कि जिनके लिए युद्ध करना है, यदि वही लोग मारे गए तो राज्य, सुख और व...

Shree mad bhagwat geeta 11.03.2021

🎙️ “नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका इस पॉडकास्ट में। आज हम बात करेंगे उस दिव्य ग्रंथ की, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर अर्जुन को सुनाया था – श्रीमद्भगवद्गीता। इसमें कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, और हर अध्याय जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर गहरी शिक्षा देता है। आने वाले एपिसोड्स में मैं आपको इन्हीं 18 अध्यायों के बारे में विस्तार से बताऊँगी—किस अध्याय में क्या संदेश है, और वे हमारी र...

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