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28 sept. 2026

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Episoade

Gen-Z के वोट पर ECINet की लटकी रहेगी तलवार! 28.09.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 में अगर सबसे ज्यादा किसी के मताधिकार के प्रभावित होने की आशंका है तो वो है भारत के जेन जी की..और ऐसा उस SIR प्रक्रिया की वजह से जिसे लेकर एक नहीं कई सवाल वो भी चौतरफा..इसी लिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है Gen-Z के वोट पर ECINet की लटकी रहेगी तलवार!

ओह! टाटा, मोदी-शाह की लगी नजर! 27.09.2026

नमस्कार, मैं हरिशकंर व्यास, हाल के कुछ दिनों या कहें तो सालों में टाटा में जो कुछ देखने को मिल रहा है वो कई तरह की चिंता पैदा करता है..आखिर बीते बारह वर्षों के मोदी-शाह के शासन के दौरान जिसतरह देश की तमाम संस्थाओं, संस्थानों की पहचान और साख पर सवाल उठ रहे हैं उसे देखते हुए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है ओह! टाटा, मोदी-शाह की लगी नजर!

इस्लाम का भय-भारत में सच और झूठ 14.09.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, क्या यूरोप के तमाम देश वाकई इस्लामिक कट्टरपंथ का सामना कर रहे हैं या फिर ये उनके जेहन में बैठा एक डर भर है क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि आखिर 6 से 10 फीसदी मुस्लिम आबादी कैसे कई यूरोपीय देशों के लिए खतरा बन सकती है..तभी ‘द इकोनॉमिस्ट’ पत्रिका के कवर पेज पर छपे यूरोप में इस्लाम के बारे में सच और झूठ के शीर्षक को लेकर हंगामा मच गया..जैसा कि इसी शीर्षक को अगर भारत के संदर्भ...

मोदी से नाराज हिंदू जाएगा कहां? 07.09.2026
राहुल के बारह साल: बार-बार बदला शब्दकोश 03.09.2026
राजीव से राहुल: कांग्रेस भूल गई हिंदू को पढ़ना 02.09.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के बाद आज अगर कांग्रेस की सियासत कहां से कहां पहुंच गई है तो इसके लिए जिम्मेदार कोई और नहीं उसके वही  नेतागण हैं जो भले ही भारत को आधुनिक बनाने निकले थे लेकिन धीरे-धीरे वो भी दिल्ली के सेकुलर-प्रगतिशील सत्ता-बौद्धिक संसार के प्रभाव में आए गए…इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे के स्पेशल एडिशन के तीसरे एपिसोड में मेरे विचार...

सत्ता किसी की भी, खमीर लेफ्ट का ही! 01.09.2026

नमस्कार मैं हरिशकंर व्यास, भारत में कम्युनिस्ट छाप राजनीति ने देश का कबाड़ा करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रहे दिया है…निजी जीवन में सादगी का लबादा ओड़कर इन कम्युनिस्टों ने देश के सत्ता और सियासत गलियारे में ऐसे विचार और बौद्धिकता की बुनावट को गढ़ा है जिससे अलग सोचना या उससे बाहर निकल पाना कतई आसान नहीं…तभी कॉलम अपन तो कहेंगे के इस स्पेशल एडिशन के दूसरे एपिसोड में मेरे विचार का शीषर्क...

कांग्रेस (राहुल) की दीमक है लेफ्ट 31.08.2026

नमस्कार मैं हूं हरिशंकर व्यास..लेफ्ट कहें, वामपंथ कहें या कम्युनिस्ट भी इनका अपना सियासी वजूद भारत में भले ही संघर्ष करता रहा है..यानी ये कभी भी देश की सत्ता में पूरी तरह तो नहीं रहे लेकिन इसमें भी कोई शक  नहीं कि इनकी सोच, भाषा और शब्दावली ने समाज से लेकर सियासत तक पर जबरदस्त असर छोड़ा है…तभी हाल के कुछ दशकों में सरकारें किसी की भी रही हो खासकर कांग्रेस की तो वो इनकी सोच से खुद को अलग ही नह...

हिंदू राष्ट्र बना रहे थे, कॉकरोच राष्ट्र बनाया! 27.07.2026

नमस्कार, मैं  हरिशंकर व्यास, कहां तो दावा था देश को विश्व गुरु और विकसित भारत बनाने का और ये नहीं भी तो कम से कम हिंदू राष्ट्र तो बनाना ही था लेकिन देखते ही देखते अब इन्होंने इस भारत राष्ट्र को कॉकरोच राष्ट्र बना दिया…इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है हिंदू राष्ट्र बना रहे थे, कॉकरोच राष्ट्र बनाया!

सपनों को गाते-गाते बना अमेरिका 06.07.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, अमेरिका अगर दुनिया की महाशक्ति है तो यूं ही नहीं, बल्कि उसका वो अलग अंदाज है जिसका मूलमंत्र ही यहीं कि कभी भी कहीं भी सीमाओं को तोड़ो, उम्मीद मत छोड़ो और सपने देखों और उसे पूरा करने के लिए विश्वास बनाए रखो और अपना भविष्य खुद गढ़ो और ढाई सौ वर्षों के अमेरिका में उसके गीत संगीत भी यही संदेश देते रहे है…इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है&#82...

उफ! 75 वर्ष बाद ही भारत बूढ़ा, बांझ और बेकार! 08.06.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, भारत को गणतंत्र यानी औपचारिक तौर पर एक देश बने अभी 75 साल ही हुए है ..लेकिन इन 75 सालों में वो भी हाल फिलहाल के डेढ़ दशकों में हमारे हुक्मरानों की नीति-रणनीति से देश की आगे की दशा-दिशा समझिए की लगभग तय सी हो गई उसपर से हमारी युवा पीढ़ी की सोच और आदतों को देखते हुए सन् 2100 में भारत कहां होगा इसकी कल्पना भर से डर लगता है क्योंकि जब आज का भारत 75 सालों में ही मानो बेदम सा...

भारत का हर अवसर जाया है! भारत अभिशप्त है, श्रापित है! 25.05.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, भारत में जब जब सत्ता बदली लोगों में उम्मीद जगी कि अब तो उनके अच्छे दिन आएंगे..लेकिन झूठ फरेब, कुर्सी से चिपके रहने का लालच देश का बंटाधार करता रहा और मई 2014 में तो ऐसी उम्मीद जगी थी मानो युग बदल जाएगा..लेकिन हकीकत में हुआ क्या..वहीं जो पहले हुआ..इसलिए अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है…. भारत का हर अवसर जाया है! भारत अभिशप्त है, श्रापित है!

महान राष्ट्र हमेशा गैंगस्टरों जैसे, छोटे राष्ट्र वेश्याओं की तरह 08.03.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, अपने यहां हिंदी पट्टी में तो एक कहावत है कि जिसकी लाठी उसकी भैंस और इन दिनों दुनिया पर  अपनी धौंस जमाने के लिए नेतन्याहू से लेकर ट्रंप और शी जिनपिंग जो तौर तरीका अपना रहे है उसे देखकर अपन तो कहेंगे कॉलम में इस का शीर्षक बहुत सटीक और मौजू है मसलन, महान राष्ट्र हमेशा गैंगस्टरों जैसे, छोटे राष्ट्र वेश्याओं की तरह

नेतन्याहू ने दुनिया बदली! 02.03.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, इजरायल और अमेरिका या कहें तो नेतान्याहू और ट्रंप की रणनीति ईरान पर हमला कर सिर्फ उसे सबक सिखाना नहीं बल्कि वहां की मौजूदा सत्ता का खात्मा करना भी है..लेकिन इस काम को अंजाम देने के लिए नेतान्याहू ने जिसतरह से जाल बुना उसकी समीक्षा या कहे तो पड़ताल भी जरुरी है..इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है नेतन्याहू ने दुनिया बदली!

तभी अमेरिकी लोकतंत्र है बेजोड़ निर्भयता-बुद्धि का असली विश्वगुरु 23.02.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर, एक तरफ भारत के संविधान में तमाम संस्थाओं को मिली ताकत के इस्तेमाल का अपना ही तौर तरीका तो दूसरी तरफ अमेरिकी संविधान में संवैधानिक संतुलन का वह बेजोड़ सिस्टम जिससे ट्रंप जैसी अहंकारी, मनमानी और बेलगाम शक्तियां भी खुद ब खुद नियंत्रण में रहे…इसलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है तभी अमेरिकी लोकतंत्र है बेजोड़ निर्भयता-बुद्धि का असली विश्वगुरु

वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने? 09.02.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, क्या हम भय में नहीं जी रहे हैं और इसकी तस्दीक भारत का रक्षा बजट में बढ़ोतरी से लेकर पश्चिमी देशों के साथ ट्रेड डील करना यानी सैन्य क्षमता बढ़ाने के साथ साथ आर्थिकी को और खोलना..ऐसे में सवाल यही कि ऐसा क्यों…कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है… वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?

25 वर्षों का भारत चिट्ठा 12.01.2026

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, 21वीं सदी के पहले 25 वर्षों में एक तरफ दुनिया भर के तमाम देशों और उसमें रह रहे लोगों और समाज ने न जाने कितने मुकाम हासिल किए लेकिन इसी दौरान भारत भीड़, झूठ, प्रपंच, अंधभक्ति और बाजार का पर्याय नजर आया…कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है 25 वर्षों का भारत चिट्ठा

अंग्रेजों का एक नमक टैक्स और मोदी राज में हवा, पानी, सड़क, बिजली सब पर टैक्स! 29.12.2025

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, क्या टैक्स वसूली के मामले में मोदी राज ने अंग्रेजी राज को पीछे छोड़ दिया है..लोगों के जेहन में ये सवाल बड़ा तो है लेकिन किसकी हिम्मत जो सवाल उठाए..इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में आज मेरे विचार का शीर्षक है.. अंग्रेजों का एक नमक टैक्स और मोदी राज में हवा, पानी, सड़क, बिजली सब पर टैक्स!

हम बांझ हो रहे हैं! 10.11.2025

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, आखिर हम हिंदू कर क्या रहे हैं..क्या हम आने वाले खतरे को जानबूझ कर नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं…हिंदुओं का लिंगानुपात बिगड़ता जा  रहा है..अब लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है..रचनात्मकता और मेहनत की बयाज नकल ने हमें नाकाबिल तो बनाया ही है और अब सोशल मीडिया, एआई, डेटिंग ऐप्स के मकड़ या कहे तो मायाजाल ने युवाओं को कल्पना लोक में पहुंचा दिया है और अब...

भारत अब सिर्फ बाजार! 29.09.2025

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, हमारे प्रधानमंत्री और उनकी अंध भक्ति में लीन भारतीय चाहे जितना भी स्वदेशी का राग अलापे। लेकिन भारत सिर्फ बाजार है। यहां मेहनत, ईमानदारी और पुरुषार्थ की बजाय सभ्यता-संस्कृति से लेकर राजनीति तक हर जगह धंधे यानी पैसे और फायदे वाली ही सोच। इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है…भारत अब सिर्फ बाजार! 

मोदी क्यों नहीं अमेरिकी गूगल, मेटा, एक्स, अमेज़न जैसी कंपनियों को भारत से बाहर करते? 21.09.2025

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, यही समय है जब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मनमानेपन और घमंड को एक झटके में चूर-चूर कर सकते हैं। लेकिन मोदी में क्या ऐसा करने की हिम्मत है ये तो वक्त बताएगा। फिलहाल ट्रंप ने भारतीय आईटी कंपनियों और युवा आईटी कर्मियों के साथ जो क्रूर सुलूक किया है उसका एक ही रास्ता है जैसे को तैसा। यानी अमेरिकी गूगल, अमेज़न, फेसबुक, व्हाट्सऐप, को भारत से बाहर का रास्ता दि...

बातूनी भारत को नई मशीन! 15.09.2025

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, सोशल मीडिया ने पहले ही भारत में लोगों को भाषा से दूर, बुद्धिहीन और बातूनी बना दिया है और अब एप्पल का एक ऐसा नया एयरपॉड जो किसी भी भाषा का सेकेंड भर अनुवाद सुना देगा। यानी हिंदी भाषा का अब पूरी तरह बंटाधार तय है क्योंकि हमने तो पहले से ही हजार शब्दों की कौन कहे खुद को 280 शब्दों की सीमा में बांध रखा है और अब ये नयी तकनीक, जो दुनिया के तमाम देशों के लिए तो वरदान होगी लेकि...

चीन को दोस्त बताना, मानना, कहना देशद्रोह है 01.09.2025

नमस्कार मैं हरिशंकर व्यास, खुद को भारत माता का स्वंयसेवक कहने वाले। खुद को स्वंभू राष्ट्रवादी बताने वाले अचानक चीन को अपना दोस्त कहने लगे तो मामला गंभीर भी और गड़बड़ भी।

हिंदू कभी चरित्रवान थे! 10.08.2025

नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, हिंदूओं की डिक्शनरी से  चरित्र और चरित्रवान जैसे शब्दों मानो डिलीट हो गए हो। हिंदू अब उपनिषद् के उस सूत्र ऋतस्य पथ को भूलता जा रहा है जिसका अर्थ सत्य, धर्मं और आत्मसंयम हैं। लेकिन आज के माहौल में वो मनसा, वाचा, कर्मणा से झूठ फरेब और अहंकार के दलदल में फंसता जा रहा है। इसलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में आज मेरे विचार का शीर्षक है। हिंदू कभी चरित्रवान थे!

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