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अपन तो कहेंगे
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Mar 8, 2026
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महान राष्ट्र हमेशा गैंगस्टरों जैसे, छोटे राष्ट्र वेश्याओं की तरह 08.03.2026 8:34
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, अपने यहां हिंदी पट्टी में तो एक कहावत है कि जिसकी लाठी उसकी भैंस और इन दिनों दुनिया पर अपनी धौंस जमाने के लिए नेतन्याहू से लेकर ट्रंप और शी जिनपिंग जो तौर तरीका अपना रहे है उसे देखकर अपन तो कहेंगे कॉलम में इस का शीर्षक बहुत सटीक और मौजू है मसलन, महान राष्ट्र हमेशा गैंगस्टरों जैसे, छोटे राष्ट्र वेश्याओं की तरह
नेतन्याहू ने दुनिया बदली! 02.03.2026 8:10
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, इजरायल और अमेरिका या कहें तो नेतान्याहू और ट्रंप की रणनीति ईरान पर हमला कर सिर्फ उसे सबक सिखाना नहीं बल्कि वहां की मौजूदा सत्ता का खात्मा करना भी है..लेकिन इस काम को अंजाम देने के लिए नेतान्याहू ने जिसतरह से जाल बुना उसकी समीक्षा या कहे तो पड़ताल भी जरुरी है..इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है नेतन्याहू ने दुनिया बदली!
तभी अमेरिकी लोकतंत्र है बेजोड़ निर्भयता-बुद्धि का असली विश्वगुरु 23.02.2026 8:41
नमस्कार, मैं हरिशंकर, एक तरफ भारत के संविधान में तमाम संस्थाओं को मिली ताकत के इस्तेमाल का अपना ही तौर तरीका तो दूसरी तरफ अमेरिकी संविधान में संवैधानिक संतुलन का वह बेजोड़ सिस्टम जिससे ट्रंप जैसी अहंकारी, मनमानी और बेलगाम शक्तियां भी खुद ब खुद नियंत्रण में रहे…इसलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है तभी अमेरिकी लोकतंत्र है बेजोड़ निर्भयता-बुद्धि का असली विश्वगुरु
वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने? 09.02.2026 9:57
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, क्या हम भय में नहीं जी रहे हैं और इसकी तस्दीक भारत का रक्षा बजट में बढ़ोतरी से लेकर पश्चिमी देशों के साथ ट्रेड डील करना यानी सैन्य क्षमता बढ़ाने के साथ साथ आर्थिकी को और खोलना..ऐसे में सवाल यही कि ऐसा क्यों…कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है… वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?
25 वर्षों का भारत चिट्ठा 12.01.2026 10:50
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, 21वीं सदी के पहले 25 वर्षों में एक तरफ दुनिया भर के तमाम देशों और उसमें रह रहे लोगों और समाज ने न जाने कितने मुकाम हासिल किए लेकिन इसी दौरान भारत भीड़, झूठ, प्रपंच, अंधभक्ति और बाजार का पर्याय नजर आया…कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है 25 वर्षों का भारत चिट्ठा
अंग्रेजों का एक नमक टैक्स और मोदी राज में हवा, पानी, सड़क, बिजली सब पर टैक्स! 29.12.2025 9:21
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, क्या टैक्स वसूली के मामले में मोदी राज ने अंग्रेजी राज को पीछे छोड़ दिया है..लोगों के जेहन में ये सवाल बड़ा तो है लेकिन किसकी हिम्मत जो सवाल उठाए..इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में आज मेरे विचार का शीर्षक है.. अंग्रेजों का एक नमक टैक्स और मोदी राज में हवा, पानी, सड़क, बिजली सब पर टैक्स!
हम बांझ हो रहे हैं! 10.11.2025 9:30
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, आखिर हम हिंदू कर क्या रहे हैं..क्या हम आने वाले खतरे को जानबूझ कर नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं…हिंदुओं का लिंगानुपात बिगड़ता जा रहा है..अब लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है..रचनात्मकता और मेहनत की बयाज नकल ने हमें नाकाबिल तो बनाया ही है और अब सोशल मीडिया, एआई, डेटिंग ऐप्स के मकड़ या कहे तो मायाजाल ने युवाओं को कल्पना लोक में पहुंचा दिया है और अब...
भारत अब सिर्फ बाजार! 29.09.2025 10:17
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, हमारे प्रधानमंत्री और उनकी अंध भक्ति में लीन भारतीय चाहे जितना भी स्वदेशी का राग अलापे। लेकिन भारत सिर्फ बाजार है। यहां मेहनत, ईमानदारी और पुरुषार्थ की बजाय सभ्यता-संस्कृति से लेकर राजनीति तक हर जगह धंधे यानी पैसे और फायदे वाली ही सोच। इसीलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है…भारत अब सिर्फ बाजार!
मोदी क्यों नहीं अमेरिकी गूगल, मेटा, एक्स, अमेज़न जैसी कंपनियों को भारत से बाहर करते? 21.09.2025 11:19
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, यही समय है जब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मनमानेपन और घमंड को एक झटके में चूर-चूर कर सकते हैं। लेकिन मोदी में क्या ऐसा करने की हिम्मत है ये तो वक्त बताएगा। फिलहाल ट्रंप ने भारतीय आईटी कंपनियों और युवा आईटी कर्मियों के साथ जो क्रूर सुलूक किया है उसका एक ही रास्ता है जैसे को तैसा। यानी अमेरिकी गूगल, अमेज़न, फेसबुक, व्हाट्सऐप, को भारत से बाहर का रास्ता दि...
बातूनी भारत को नई मशीन! 15.09.2025 9:16
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, सोशल मीडिया ने पहले ही भारत में लोगों को भाषा से दूर, बुद्धिहीन और बातूनी बना दिया है और अब एप्पल का एक ऐसा नया एयरपॉड जो किसी भी भाषा का सेकेंड भर अनुवाद सुना देगा। यानी हिंदी भाषा का अब पूरी तरह बंटाधार तय है क्योंकि हमने तो पहले से ही हजार शब्दों की कौन कहे खुद को 280 शब्दों की सीमा में बांध रखा है और अब ये नयी तकनीक, जो दुनिया के तमाम देशों के लिए तो वरदान होगी लेकि...
चीन को दोस्त बताना, मानना, कहना देशद्रोह है 01.09.2025 8:25
नमस्कार मैं हरिशंकर व्यास, खुद को भारत माता का स्वंयसेवक कहने वाले। खुद को स्वंभू राष्ट्रवादी बताने वाले अचानक चीन को अपना दोस्त कहने लगे तो मामला गंभीर भी और गड़बड़ भी।
हिंदू कभी चरित्रवान थे! 10.08.2025 10:06
नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, हिंदूओं की डिक्शनरी से चरित्र और चरित्रवान जैसे शब्दों मानो डिलीट हो गए हो। हिंदू अब उपनिषद् के उस सूत्र ऋतस्य पथ को भूलता जा रहा है जिसका अर्थ सत्य, धर्मं और आत्मसंयम हैं। लेकिन आज के माहौल में वो मनसा, वाचा, कर्मणा से झूठ फरेब और अहंकार के दलदल में फंसता जा रहा है। इसलिए कॉलम अपन तो कहेंगे में आज मेरे विचार का शीर्षक है। हिंदू कभी चरित्रवान थे!
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