Sukhnandan Bindra
What's up zindagi
What's up zindagi........ छोटी - छोटी कहानियां जो हम पढ़ते है सोशल मीडिया के बड़े बड़े प्लेटफ़ॉर्मस पर, वो कहानियां जो शेयर की जाती है व्हाट्सएप पर...ये कहानियां हमारे जीवन का आईना होती हैं... इनमें हमारा अक्स दिखता है। बड़ी बड़ी सीख देती हैं ..छोटी -छोटी कहानियां। ( सोशल मीडिया में बड़े पैमाने पर शेयर की जाने वाली ये कहानियां कहाँ से आती हैं , इन्हें किसने लिखा है, लेखक का क्या नाम है ? यदि ज्ञात हो तो प्रमाण सहित अवश्य बताएं। डिस्क्रिप्शन में लेखक को क्रेडिट दिया जाएगा)
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Autor
Sukhnandan Bindra
Categoria
Site do podcast
Último episódio
25 de jun de 2026
Onde ouvir?
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Episódios
क्या करे सकीना?? 25.06.2026 1:08
Here’s an episode that will keep you waiting for tसकीना हमारे आसपास का ही अफ़साना है ,सुनिए सकीना की सिलसिलेवार कहानी और अपनी राय दीजिए कि सकीना क्या करे ? किस्मत नेे एक बार फिर अशराफ़ के सामने ला खड़ा किया है , क्या सकीना अशराफ़ के साथ चली जाए ? या उसे आईना दिखाए ? किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले 1 से 8 तक "सकीना" मक़सद ज़िंदगी का ,अफ़साना की सिलसिले वार किस्त जरूर सुनें अपनी राय भेजें Humhongekamyab900@...
Epi- 8 "सकीना" मक़सद ज़िंदगी का 22.06.2026 6:31
आज एक बार फिर अशराफ़ सकीना के सामने था ॥ क्या करेगी सकीना ?
Epi -7 "सकीना" मक़सद-ए-ज़िंदगी 03.05.2026 5:44
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद ऐसा क्या हुआ जिससे सकीना के लिए सारे रास्ते बंद हो गए थे , मैडम रायज़ादा ने क्या किया कि 10 साल के भीतर सकीना कुछ और ही बन गई .... क्या था सुभान साहब के मेल में जो सकीना को मुसलसल बेचैन किए हुए था , कौन था वो शख्स जो सुभान साहब के साथ स्कूल के जलसे में आने वाला था ......
Epi- 6"सकीना" मक़सद - ए -ज़िंदगी (छठी किस्त ) 21.04.2026 6:43
सामाइन क्या सोचते हैं आप सकीना के बारे में ? हालात ने सकीना को उस दायरे में ला खाद्य किया हैं जहां से कोई राह नहीं निकलती । क्या करे सकीना ? हमें इंतजार है आपके खयाल का , कमेन्ट में अपनी राय दीजिए
Epi- 5"सकीना"-- मक़सद- ए- ज़िंदगी (पाँचवीं किस्त ) 18.04.2026 5:37
कम तलीमयाफ़्ता सकीना के सामने एक मौका था , उसने अशरफ़ से पूछना मुनासिब समझा ..
Epi- 4"सकीना" मक़सद- ए-ज़िंदगी (चौथी किस्त ) 17.04.2026 5:19
क्या करे साकीना !! उसने जब से होश सम्हाला था घर में धमा चौकड़ी ,चूल्हा चौका और गुरबत ही देखी थी घर के काम से कभी फ़ुर्सत नहीं मिली दुनियादारी कभी देखी नहीं ,आदाब अखलाक कभी सीखी नहीं ,17 साल की उम्र में किस्मत ने पलटा खाया और उसकी शादी मलोमाल खानदान में हुई लेकिन ..........
Epi- 3"सकीना" मक़सद -ए -ज़िंदगी (तीसरी क़िस्त ) 04.04.2026 5:20
वक़्त जैसा भी हो, बदलता ज़रूर है। बेहद मुफ़लिसी में पली , कम तालीमयाफ़्ता, यतीम सकीना निकाह के बाद उस दुनिया में थी जिसके बारे में उसने कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था। आलीशान हवेली के इकलौते वारिस से निकाह कर जहाँ बेशुमार दौलत और ऐश-ओ-आराम मयस्सर था, वहीं अशरफ़ का रवैया कुछ खिंचा-खिंचा सा था। वक़्त ने क्या करवट बदली ? सकीना और अशरफ़ के ताल्लुक़ात कितनी हसीन हक़ीक़त में बदले........
Epi- 2"सकीना " मक़सद-ए-ज़िन्दगी (दूसरी क़िस्त ) 23.03.2026 6:44
स्कूल के ट्रस्ट्री सुभान साहब ने सकीना को एक मेल भेजा ,मेल पढ़ कर सकीना यक -ब -यक पत्थर सी हो गयी ,उसने आँखें बंद कर लीं, गुज़िश्ता यादों के हुज़ूम ने उसे घेर लिया , कौन थी सकीना ,क्या था उस मेल में कि सब कुछ फिल्म की मानिंद उसकीआँखों के सामने से गुज़रने लगा था........
Epi- 1"सकीना"मक़सद -ए -ज़िंदगी 15.03.2026 4:44
क्या था सुभान साहब के ई मेल में कि सकीना यक बा यक पत्थर सी हो गई थी? जानने के लिए सुनियेगा अगली किस्त
कैसे सारी दौलत साथ ले जाएँ 26.01.2026 6:26
How to take your Wealth with you after Death
पराअर्थी (ALTRUISTIC) 09.01.2026 3:12
GIVING TO THE NEEDY HAS BLESSES THE GIVER MORE THAN THE RECEIVER. ज़रूरतमंदों को देने से , लेने वाले से ज़्यादा देने वाले को आशीर्वाद मिलता है
भारत का लाल (BHARAT KA LAAL) 03.10.2025 4:47
Bharat ka laal is the memoir of Shri LAL BAHADUR SHASTRI when He was serving as a Railway minister. This memoir reflects his principled behavior. Lal Bahadur Shastri (2 October 1904 – 11 January 1966) was an Indian politician and statesman who served as the a prime minister of India from 1964 to 1966.
.ज़ुबान (ZUBAN) 11.03.2025 3:05
तल्ख़ कर दी है ज़िंदगी जिस ने कितनी मीठी ज़बान है प्यारे जंग छिड़ जाए हम अगर कह दें ये हमारी ज़बान है प्यारे
अंतरात्मा की आवाज़ 07.03.2025 4:52
ज़रूर सुनना ज़रा अपनी रूह को क्या कहती है लोगों का क्या है आएंगे और तमाशा कर चल देंगे ....
गांठें (GANTHEN ) 27.02.2025 3:42
बौद्ध दर्शन के अनुसार हर समस्या अपने साथ हल भी लेकर आती है है जो कि समस्या के अंदर ही छिपा रहता है। समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता है कि उस समस्या के कारण के प्रति सोच औए नज़रिया कैसा है।
धीरे चलो ! (Dheere Chalo !) 17.10.2024 3:21
दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग जीवन जीवन हम ने जग में खेल यही होते देखा धीरे धीरे जीती दुनिया धीरे धीरे हारे लोग वक़्त सिंघासन पर बैठा है अपने राग सुनाता है संगत देने को पाते हैं साँसों के उक्तारे लोग नेकी इक दिन काम आती है हम को क्या समझाते हो हम ने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग इस नगरी में क्यूँ मिलती है रोटी सपनों के बदले जिन की...
जीवनपथ (Jiwanpath) 13.10.2024 3:13
मान लिया करो कभी मना लिया करो इस तरह ज़िन्दगी को सुलझा लिया करो Maan liya karo kabhi mnaa liya karo Is Tarh Zindahi ko Suljha liya karo
नन्हें मन की इच्छा ( Nanhe man ki ichha) 08.09.2024 3:30
यहाँ शोर बच्चे मचाते नहीं हैं परिंदे भी अब गीत गाते नहीं हैं
क्या आप ठीक हैं ? ( Kya Aap Theek Hain ?) 06.09.2024 3:30
दुनिया में वही शख़्स है ताज़ीम के काबिल जिस शख़्स ने हालात का रुख मोड़ दिया हो
सन्देश !!!!! (A Message to Everyone!!!) 11.07.2024 3:49
अब इस घर की आबादी मेहमानों पर है कोई आ जाये तो वक़्त गुज़र जाता है
सकारात्मक रहें -सकारात्मक जियें (Think positive-live positive) 21.06.2024 2:38
जलाने वाले जलाते ही है चराग़ आखिर ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की
आओ ! ख़ुशी खोजें (Aao Khushi Khojen) 21.03.2024 4:10
उदासियों की वजह तो बहुत हैं ज़िंदगी में , पर बेवजह खुश रहने का मज़ा ही कुछ और है
ऊँट की कहानी (Story of a Camle ) 21.03.2024 3:57
सुना करते थे अब तक रेगज़ारों में कहीं भी दूर तक पानी नहीं मिलता मगर इक बार जब हम रेत के जलते हुए ज़र्रों पे नंगे पाँव चल कर लहू बरसाते सूरज से निगाहें चार करते पाँव में छाले सजाए पानी के चंद एक क़तरे ढूँडते क़दम आगे बढ़ाए जा रहे थे लहू की तेज़ बढ़ती गर्दिशें मद्धम से मद्धम-तर ही होती जा रही थीं ज़िंदगी मादूम होती जा रही थीं अचानक हैरतों में डूब कर हम ने ये देखा इक बड़ी जादू भरी सी झील है जिस में क...
क्या दुख हमारी अपनी खोज है ? (Kya Dukh Hamari Apni Khoj Hai) story by Reena singh bhardwaj 28.02.2024 4:17
kaun kisi ki khatir rota hai ai dost sab ko apni hi kisi baat pe rona aya
मन्त्र - मंत्रणा (Mantr-Mantrna) 29.01.2024 4:39
मिरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो'तबर कर दे मैं जिस मकान में रहता हूँ उसको घर कर दे
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