Sukhnandan Bindra

What's up zindagi

Society HI ↓ 55 episodes

What's up zindagi........ छोटी - छोटी कहानियां जो हम पढ़ते है सोशल मीडिया के बड़े बड़े प्लेटफ़ॉर्मस पर, वो कहानियां जो शेयर की जाती है व्हाट्सएप पर...ये कहानियां हमारे जीवन का आईना होती हैं... इनमें हमारा अक्स दिखता है। बड़ी बड़ी सीख देती हैं ..छोटी -छोटी कहानियां। ( सोशल मीडिया में बड़े पैमाने पर शेयर की जाने वाली ये कहानियां कहाँ से आती हैं , इन्हें किसने लिखा है, लेखक का क्या नाम है ? यदि ज्ञात हो तो प्रमाण सहित अवश्य बताएं। डिस्क्रिप्शन में लेखक को क्रेडिट दिया जाएगा)

Author

Sukhnandan Bindra

Category

Society

Podcast website

hubhopper.com

Latest episode

Jun 25, 2026

Where to listen?

Podcasts in the app Replaio Radio Coming soon

Podcasts are coming to the app soon. Install now and be the first to see a whole new take on podcasts

Get it on Google Play Install for free Android 5M+ downloads · 4.8 rating iOS soon

Episodes

क्या करे सकीना?? 25.06.2026

Here’s an episode that will keep you waiting for tसकीना हमारे आसपास का ही अफ़साना है ,सुनिए सकीना की सिलसिलेवार कहानी और अपनी राय दीजिए कि सकीना क्या करे ? किस्मत नेे एक बार फिर अशराफ़ के सामने ला खड़ा किया है , क्या सकीना अशराफ़ के साथ चली जाए ? या उसे आईना दिखाए ? किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले 1 से 8 तक "सकीना" मक़सद ज़िंदगी का ,अफ़साना की सिलसिले वार किस्त जरूर सुनें अपनी राय भेजें Humhongekamyab900@...

Epi- 8 "सकीना" मक़सद ज़िंदगी का 22.06.2026

आज एक बार फिर अशराफ़ सकीना के सामने था ॥ क्या करेगी सकीना ?

Epi -7 "सकीना" मक़सद-ए-ज़िंदगी 03.05.2026

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद ऐसा क्या हुआ जिससे सकीना के लिए सारे रास्ते बंद हो गए थे , मैडम रायज़ादा ने क्या किया कि 10 साल के भीतर सकीना कुछ और ही बन गई .... क्या था सुभान साहब के मेल में जो सकीना को मुसलसल बेचैन किए हुए था , कौन था वो शख्स जो सुभान साहब के साथ स्कूल के जलसे में आने वाला था ......

Epi- 6"सकीना" मक़सद - ए -ज़िंदगी (छठी किस्त ) 21.04.2026

सामाइन क्या सोचते हैं आप सकीना के बारे में ? हालात ने सकीना को उस दायरे में ला खाद्य किया हैं जहां से कोई राह नहीं निकलती । क्या करे सकीना ? हमें इंतजार है आपके खयाल का , कमेन्ट में अपनी राय दीजिए

Epi- 5"सकीना"-- मक़सद- ए- ज़िंदगी (पाँचवीं किस्त ) 18.04.2026

कम तलीमयाफ़्ता सकीना के सामने एक मौका था , उसने अशरफ़ से पूछना मुनासिब समझा ..

Epi- 4"सकीना" मक़सद- ए-ज़िंदगी (चौथी किस्त ) 17.04.2026

क्या करे साकीना !! उसने जब से होश सम्हाला था घर में धमा चौकड़ी ,चूल्हा चौका और गुरबत ही देखी थी घर के काम से कभी फ़ुर्सत नहीं मिली दुनियादारी कभी देखी नहीं ,आदाब अखलाक कभी सीखी नहीं ,17 साल की उम्र में किस्मत ने पलटा खाया और उसकी शादी मलोमाल खानदान में हुई लेकिन ..........

Epi- 3"सकीना" मक़सद -ए -ज़िंदगी (तीसरी क़िस्त ) 04.04.2026

वक़्त जैसा भी हो, बदलता ज़रूर है। बेहद मुफ़लिसी में पली , कम तालीमयाफ़्ता, यतीम सकीना निकाह के बाद उस दुनिया में थी जिसके बारे में उसने कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था। आलीशान हवेली के इकलौते वारिस से निकाह कर जहाँ बेशुमार दौलत और ऐश-ओ-आराम मयस्सर था, वहीं अशरफ़ का रवैया कुछ खिंचा-खिंचा सा था। वक़्त ने क्या करवट बदली ? सकीना और अशरफ़ के ताल्लुक़ात कितनी हसीन हक़ीक़त में बदले........

Epi- 2"सकीना " मक़सद-ए-ज़िन्दगी (दूसरी क़िस्त ) 23.03.2026

स्कूल के ट्रस्ट्री सुभान साहब ने सकीना को एक मेल भेजा ,मेल पढ़ कर सकीना यक -ब -यक पत्थर सी हो गयी ,उसने आँखें बंद कर लीं, गुज़िश्ता यादों के हुज़ूम ने उसे घेर लिया , कौन थी सकीना ,क्या था उस मेल में कि सब कुछ फिल्म की मानिंद उसकीआँखों के सामने से गुज़रने लगा था........

Epi- 1"सकीना"मक़सद -ए -ज़िंदगी 15.03.2026

क्या था सुभान साहब के ई मेल में कि सकीना यक बा यक पत्थर सी हो गई थी? जानने के लिए सुनियेगा अगली किस्त

कैसे सारी दौलत साथ ले जाएँ 26.01.2026

How to take your Wealth with you after Death

पराअर्थी (ALTRUISTIC) 09.01.2026

GIVING TO THE NEEDY HAS BLESSES THE GIVER MORE THAN THE RECEIVER. ज़रूरतमंदों को देने से , लेने वाले से ज़्यादा देने वाले को आशीर्वाद मिलता है 

भारत का लाल (BHARAT KA LAAL) 03.10.2025

Bharat ka laal is the memoir of Shri LAL BAHADUR SHASTRI when He was serving as a Railway minister. This memoir reflects his principled behavior. Lal Bahadur Shastri (2 October 1904 – 11 January 1966) was an Indian politician and statesman who served as the a prime minister of India  from 1964 to 1966.

.ज़ुबान (ZUBAN) 11.03.2025

तल्ख़ कर दी है ज़िंदगी जिस ने  कितनी मीठी ज़बान है प्यारे  जंग छिड़ जाए हम अगर कह दें  ये हमारी ज़बान है प्यारे 

अंतरात्मा की आवाज़ 07.03.2025

ज़रूर सुनना ज़रा अपनी रूह को क्या कहती है  लोगों का क्या है  आएंगे और तमाशा कर चल देंगे ....

गांठें (GANTHEN ) 27.02.2025

बौद्ध दर्शन के अनुसार हर समस्या अपने साथ हल भी लेकर आती है है जो कि समस्या के अंदर ही छिपा रहता है। समस्या  का समाधान इस बात पर निर्भर करता है कि उस समस्या के कारण के प्रति सोच औए नज़रिया कैसा है। 

धीरे चलो ! (Dheere Chalo !) 17.10.2024

दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग जीवन जीवन हम ने जग में खेल यही होते देखा धीरे धीरे जीती दुनिया धीरे धीरे हारे लोग वक़्त सिंघासन पर बैठा है अपने राग सुनाता है संगत देने को पाते हैं साँसों के उक्तारे लोग नेकी इक दिन काम आती है हम को क्या समझाते हो हम ने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग इस नगरी में क्यूँ मिलती है रोटी सपनों के बदले जिन की...

जीवनपथ (Jiwanpath) 13.10.2024

मान लिया करो कभी मना लिया करो  इस तरह ज़िन्दगी को सुलझा लिया करो  Maan liya karo kabhi mnaa liya karo  Is Tarh Zindahi ko Suljha liya karo 

नन्हें मन की इच्छा ( Nanhe man ki ichha) 08.09.2024

यहाँ शोर बच्चे मचाते नहीं हैं  परिंदे भी अब गीत गाते नहीं हैं  

क्या आप ठीक हैं ? ( Kya Aap Theek Hain ?) 06.09.2024

दुनिया में वही शख़्स  है ताज़ीम के काबिल  जिस शख़्स ने हालात का रुख मोड़ दिया हो 

सन्देश !!!!! (A Message to Everyone!!!) 11.07.2024

अब इस घर की आबादी मेहमानों पर है  कोई आ जाये तो वक़्त गुज़र जाता है 

सकारात्मक रहें -सकारात्मक जियें (Think positive-live positive) 21.06.2024

जलाने वाले जलाते ही है चराग़ आखिर  ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की  

आओ ! ख़ुशी खोजें (Aao Khushi Khojen) 21.03.2024

उदासियों की वजह तो बहुत हैं ज़िंदगी में , पर बेवजह खुश रहने का मज़ा ही कुछ और है 

ऊँट की कहानी (Story of a Camle ) 21.03.2024

सुना करते थे अब तक रेगज़ारों में कहीं भी दूर तक पानी नहीं मिलता मगर इक बार जब हम रेत के जलते हुए ज़र्रों पे नंगे पाँव चल कर लहू बरसाते सूरज से निगाहें चार करते पाँव में छाले सजाए पानी के चंद एक क़तरे ढूँडते क़दम आगे बढ़ाए जा रहे थे लहू की तेज़ बढ़ती गर्दिशें मद्धम से मद्धम-तर ही होती जा रही थीं ज़िंदगी मादूम होती जा रही थीं अचानक हैरतों में डूब कर हम ने ये देखा इक बड़ी जादू भरी सी झील है जिस में क...

क्या दुख हमारी अपनी खोज है ? (Kya Dukh Hamari Apni Khoj Hai) story by Reena singh bhardwaj 28.02.2024

kaun kisi ki khatir rota hai ai dost sab ko apni hi kisi baat pe rona aya 

मन्त्र - मंत्रणा (Mantr-Mantrna) 29.01.2024

मिरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो'तबर कर दे  मैं जिस मकान में रहता हूँ उसको घर कर दे

Listen to the What's up zindagi podcast in Replaio

Radio and podcasts in one app - free, with no sign-up. Install today and do not miss the launch

Get it on Google Play

Replaio is not a podcast publisher; show names, artwork and audio belong to their authors and are distributed through public RSS feeds.