Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'

'Wah! Ye Diariyaan' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!'

Arts HI ↓ 115 episódios

'Wah! Ye Diariyaan' 'वाह! ये डायरियॉं' (स्वरचित १००+ गज़लें, नज़्में, और कविताऐं)!

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Autor

Mahesh Vallabh Pandey 'ऐ दर्द!'

Categoria

Arts

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2 de set de 2025

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Episódios

15. S02 - E05 जब भी निकलें हैं हम सफर के लिए!🙂 14.05.2022

ए मेरे आश्नाओं! तीन दिन पहले, मेरा एक मित्र इस जहॉं से चला गया !😢

14. S02 - E04 जिन दरख्तों पर कभी, मैंने बनाया था किला🌴 08.05.2022

मेरे पाक रेहनुमाओं, आज मैं अपनी डायरी के चौदहव्वें पन्ने को खोल कर बैठा हूं📜

13. S02 - E03 किसको बला कहें यहॉं, किसको खुदा कहें!🤔 30.04.2022

जिंदगी इतनी खूबसूरत है की हर एक पल में दो पहलू होते हैं!💕

12. S02 - E02 बादशाह कहता है कि कर दो हर सर कलम!😡 24.04.2022

आजकल कुछ मुल्क़ और कुछ इंसान अपनी बादशाहियत बनाए रखने के लिए, इस दुनिया को अपनी मुट्ठी में करना चाहते हैं😲

11. S02 - E01 दोस्तों, 'वाह! ये डाएरीयॉं' के सीज़न-२ में आपका तहे दिल से स्वागत है!🤩 17.04.2022

अगर किसी एक दिन, वो नूर किसीको बिना बतायें कहीं चला जाए, तो उस मोहल्ले के बाशिंदे क्या सोचते और करते होंगे?😜

10. S01 - E10 ए हिज्र के गज़र, तेरा कोई नाम ना लेता!😍 02.04.2022

कभी ऐसा हुआ है आपके साथ, की जब ग़म-ए-जुदाई इतनी ज्यादा हो गई हो, की आपको, जमीन के दो टुकड़े करने का दिल करे!😇 -ऐ हिज़्र के गजर, तेरा कोई नाम न लेता, मैं गर वस्ल में मेहबूब को सलाम न देता, न वो लेकर बेज़ार दिल, आह भरते रातों में, न मैं अपने बिस्तर को सिलवट की सजा देता! -दूर हैं वो, ना जाने अब किस हाल में होंगे, गर पास होते तो उन्हें, सीने से लगा लेता! -ऐ हिज़्र के गजर, तेरा कोई नाम न लेता, मैं गर...

9. S01 - E09 कल मेरी, मेरे मुकद्दर से मुलाकात हो गई!☺️ 02.04.2022

मुकद्दर है ऐसा हसी़न, की कब क्या कर दे, कुछ पता ही नहीं!🥰 - कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई, चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई, वो चल रहा था साथ मेरे, पर क्यूँ पता नहीं, जैसे ही मैं जल गया पूरा, बरसात हो गई! -मुझको यक़ीं था हर गज़र, पर मेरे मुकद्दर को नहीं, मैंने छूने की कोशिश जो की, मेरी सारी क़ायनात हो गई! -कल मेरी मेरे मुक़द्दर से मुलाकात हो गई, चमचमती सुबह से, स्याह रात हो गई, वो चल रहा...

8. S01 - E08 जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के!🤺 29.03.2022

हर रोज़ हम अपने अपने घर से निकलते हैं, जिंदगी की उस जंग में शामिल होने!😀 -जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के, जान ले ली दुश्मनों की, बिना सिपहसालार के, आखिरी जंग काश ये हो, बस यही सोचा किए, अब नहीं होता गुज़र, बिना सिपहसालार के! -ख़ाक में मिल जाए, या सर क़लम हो जाए चाहे, कुछ तो कर गुजरेंगे हम, बिना सिपहसालार के! -जंग में निकले अकेले, बिना सिपहसालार के, जान ले ली दुश्मनों की, बिना सिपहसालार के...

7. S01 - E07 इज़ादे तहजी़ब करने वाले, बद्जुबानी के शहनशाह!👌 29.03.2022

ये पूरी कायनात, एक ऐसे फरेब़ पर चल रही है की जिसे, समझना तो दूर, गिरफ़्त में लाने को कोई कायदा ही नहीं है! 👌 -ईज़ाद-ए-तहज़ीब करने वाले, बदज़ुबानी के शहंशाह, ईज़ाद-ए-ज़मीं करने वाले, बदगुमानी के शहंशाह, न जिक्र है, न फ़िक्र है, कुछ खास मेहमानों की यहां, ईज़ाद-ए-नवाज़ी करने वाले, बदनवाज़ी के शहंशाह! -अश्क बहते ही चले, कोई तो रोको इन्हें, ईज़ाद-ए-हसीं करने वाले, बदगुज़ारी के शहंशाह! -ईज़ाद-ए-तहज़ीब...

6. S01 - E06 इतनी गुरब़त में मुस्कुराना हुनर है!🙏 29.03.2022

क्या आपको चारों तरफ गुरब़त ही गुरब़त नज़र आती है दोस्तों? क्या आप भी ऐसी गुरब़त में रहना चाहते हैं?🤞 -इतनी ग़ुरबत में मुस्कुराना, हुनर है, पास हो तुम, फिर भी बुलाना, हुनर है, क़त्ल करके, साफ़ करके दीवारों को, हर सुबह अदालत को जाना, हुनर है! -देखते ही देखते, दिल में हुए कई छेद, उस पर भी दिल का कसमसाना, हुनर है! -इतनी ग़ुरबत में मुस्कुराना, हुनर है, पास हो तुम, फिर भी बुलाना, हुनर है, क़त्ल करके, स...

5. S01 - E05 ना हो परेशां, इस शहर से नादां! 🙏 29.03.2022

इंसान कुदरती, परेशानियों में रहने का आदी है; परेशानियां ना हों, तो लगता है, जिंदगी ठहर सी गई है!🙏 -न हो परेशॉं, इस शहर से नादां, ना जाने कहां सुकूं मिल जाए, न जाने कहां मंजिल हो तेरी, या तुझमें किसी को मंजिल मिल जाए! -वो तेरा शहर पुराना, भीड़ में भी है अकेला, क्या पता तेरी पनाहों को यहाँ, महफ़िल मिल जाए! -न हो परेशॉं, इस शहर से नादां, ना जाने कहां सुकूं मिल जाए, न जाने कहां मंजिल हो तेरी, या तुझम...

4. S01 - E04 दोस्तों, आपका स्वागत, एहतराम है मेरे इस नए घर में! 🥰 29.03.2022

आई कुछ बातें करते हैं; कुछ एक-दूसरे की सुनते, और कुछ अपनी सुनाते हैं!🤗 -हमसफ़र हैं, हमकदम हैं, हमनज़र हों, तो है बात, एक दूजे की पनाहों का असर हो, तो है बात, यूं तो हम मिलते हैं, जब नसें गुलजार हों, पर ख़िज़ाँ में साथ हों हम अगर, तो है बात! -छोड़ दें कुछ देर को, अपनी बेईमानी लतें, मुस्कुरा कर ढायें क़हर, हर किसी पर, तो है बात! -हमसफ़र हैं, हमकदम हैं, हमनज़र हों, तो है बात, एक दूजे की पनाहों का अस...

3. S01 - E03 लगभग तीस साल की होने जा रहीं थीं मेरी डायरियॉं!🥰 29.03.2022

इ्न्हें पाल-पोस के बड़ा करना कोई मज़ाक की बात नहीं थी; अपने डैडी, मम्मी, भाईयों और बहनों से छुपते-छुपाते लिखी गईं थीं ये डाएरियॉं!🥰 -मेरी हर किताब का मसला एक है, आख़िर में लिखा मिलेगा, खुदा एक है! -ग़म नहीं मुझे, मिले हर दौर में सज़ा, जानता हूं मैं कि मेरा काम नेक है! -मेरी हर किताब का मसला एक है, आख़िर में लिखा मिलेगा, खुदा एक है! -सोचता रहा हमेशा, कभी तो वक्त आएगा, और कहेगा, कि लिजिये, हालात पे...

2. S01 - E02 आज मैंने अपनी ऐसी ही कुछ डायरियॉं निकालीं आलमारी से! 😊 29.03.2022

जब मैं उनको निकालने गया, तो एक शेल्फ में सारी की सारी आराम से सो रहीं थीं; दराज़ के खुलने की आवाज़ सुनते ही, दो तीन डायरियों ने तो करवट बदल के मुझे देखा और मुस्कुराईं!😊 -आ पास आ, न दूर जा, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ, न तोड़ कर, न फोड़ कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ, मेरे भी अंदर आग है, मेरा लहू भी लाल है, न रंग कर, न भंग कर, कि मैं भी तेरे जैसा हूँ! -मुझको भी हंसी आती है, जब देखता हूँ आईना, न चेहरा बना...

1. S01 - E01 यादें सिमटतीं हैं ऐसे, कि जैसे झुलसीं हुईं हैं!🤗 28.03.2022

🤗क्या आपने कभी डायरी लिखी है दोस्तों? क्या आपने कभी अपनी यादों को किसी डायरी के पन्नों में छुपा के रखा है? -यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है, किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख़्त सी है, खुले न खुले ये साफ़ा, कौन जाने, मुसन्निस दिलचस्प सा, कहानी मस्त सी है! -हमें न उससे कोई गिला, न एहतराम कोई, वो भी हमसे नाखुश, और न कोई खुशी सी है! -यादें पन्ने जैसी, ज़िल्द वक़्त सी है, किताबें अरमां जैसी, सिलाई सख...

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