Dr. Sumit Kumar Pandey
Sumit Kumar Pandey: The Inner Voice
Welcome to "The Inner Voice", a transformative podcast hosted by Sumit Kumar Pandey, a seasoned media professional and academic. Tune in for insightful discussions on spirituality, motivation, life lessons, literature, and more. Listen to Sumit's thought-provoking talks and engage with him on "The Inner Voice" podcast, exploring the depths of human experience and inspiring personal growth. About Sumit:Former RJ at Gyanvani FM & All India Radio, with research and journalism background. Currently Assistant Professor at Manipal University Jaipur. Inspiring conversations ahead!
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Autor
Dr. Sumit Kumar Pandey
Categoria
Site do podcast
Último episódio
9 de nov de 2025
Onde ouvir?
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Episódios
कुछ अपनी कुछ जग की 09.11.2025 1:30
ये सेगमेंट ऐसा है जिसमें कुछ अपनी लिखित और कुछ दुनिया के अन्य कवियों की रचित कविताओं को प्रस्तुत किया जाएगा
उसको अच्छा नहीं लगूँगा मैं, अगले मौसम नहीं खिलूँगा मैं 10.08.2025 1:34
अपनी मर्ज़ी से कुछ चुनूँगा मैं हर अदा पर नहीं मरूँगा मैं वो अगर ऐसे देख ले मुझको उसको अच्छा नहीं लगूँगा मैं बाग़ में दिल नहीं लगा अब के अगले मौसम नहीं खिलूँगा मैं उससे आगे नहीं निकलना पर उसके पीछे नहीं चलूँगा मैं कह गए थे वो याद रक्खेंगे याद ही तो नहीं रहूँगा मैं - Vishal Bagh
इक तुम हो कि शोहरत की हवस ही नहीं जाती इक हम हैं कि हर शोर से उकताए हुए हैं 04.08.2025 2:25
सब जिनके लिए झोलियां फैलाए हुए हैं वो रंग मेरी आंख के ठुकराए हुए हैं इक तुम हो कि शोहरत की हवस ही नहीं जाती इक हम हैं कि हर शोर से उकताए हुए हैं दो चार सवालात में खुलने के नहीं हम ये उक़दे तेरे हाथ के उलझाए हुए हैं अब किसके लिए लाए हो ये चांद सितारे हम ख़्वाब की दुनिया से निकल आए हुए हैं हर बात को बेवजह उदासी पे ना डालो हम फूल किसी वजह से कुम्हलाए हुए हैं कुछ भी तेरी दुनिया में नया ही नहीं लगता लग...
मेरे दोस्त, तुम मुझसे कुछ भी कह सकते हो… 13.07.2024 1:58
क्या तुम्हारा नगर भी दुनिया के तमाम नगरों की तरह किसी नदी के पाट पर बसी एक बेचैन आकृति है? क्या तुम्हारे शहर में जवान सपने रातभर नींद के इंतज़ार में करवट बदलते हैं? क्या तुम्हारे शहर के नाईं गानों की धुन पर कैंची चलाते हैं और रिक्शेवाले सवारियों से अपनी ख़ुफ़िया बात साझा करते हैं? तुम्हारी गली के शोर में क्या प्रेम करने वाली स्त्रियों की चीखें घुली हैं? क्या तुम्हारे शहर के बच्चे भी अब बच्चे नहीं...
रूह तक रास्ता बनाया जा रहा है, ज़िस्म को ज़रिया बनाया जा रहा है 13.07.2024 1:09
रूह तक रास्ता बनाया जा रहा है, ज़िस्म को ज़रिया बनाया जा रहा है। ज़ख्म पर नहीं आँख पर बाँधी है पट्टी, चोट को अंधा बनाया जा रहा है॥ नस्ल (generation) को भीड़ का आदी बना कर, अस्ल (real) में तनहा बनाया जा रहा है। पाप को अंजाम देने के लिए अब, धर्म को जरिया बनाना जा रहा है॥ स्वरस्वर: डॉडॉ. सुमिसुमित कुमारकुमार पाण्पाण्डेय शायराशायरा: कीर्तिकीर्ति
Meaning of Life (जीवन का अर्थ) 28.07.2020 7:56
स्वर: सुमित कुमार पाण्डेय, सामग्री: सुमित एवं हिन्दीजेन.कॉम
स्वयं की शक्ति को पहचानें 12.07.2020 3:48
सामग्री: सरल मनोज, स्वर: सुमित कुमार पाण्डेय
भीड़तन्त्र: सच बोलने वाला अपराधी है 12.07.2020 3:55
सामग्री: अमित मंडलोई, स्वर: सुमित कुमार पाण्डेय
जीवन का मतलब, अपने होने का मतलब 11.07.2020 3:47
Know yourself and your inner power.
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