Dr. Sumit Kumar Pandey

Sumit Kumar Pandey: The Inner Voice

Society HI ↓ 10 episodes

Welcome to "The Inner Voice", a transformative podcast hosted by Sumit Kumar Pandey, a seasoned media professional and academic. Tune in for insightful discussions on spirituality, motivation, life lessons, literature, and more. Listen to Sumit's thought-provoking talks and engage with him on "The Inner Voice" podcast, exploring the depths of human experience and inspiring personal growth. About Sumit:Former RJ at Gyanvani FM & All India Radio, with research and journalism background. Currently Assistant Professor at Manipal University Jaipur. Inspiring conversations ahead!

Author

Dr. Sumit Kumar Pandey

Category

Society

Podcast website

muj.irins.org

Latest episode

Nov 9, 2025

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Episodes

कुछ अपनी कुछ जग की 09.11.2025

ये सेगमेंट ऐसा है जिसमें कुछ अपनी लिखित और कुछ दुनिया के अन्य कवियों की रचित कविताओं को प्रस्तुत किया जाएगा

उसको अच्छा नहीं लगूँगा मैं, अगले मौसम नहीं खिलूँगा मैं 10.08.2025

अपनी मर्ज़ी से कुछ चुनूँगा मैं हर अदा पर नहीं मरूँगा मैं वो अगर ऐसे देख ले मुझको उसको अच्छा नहीं लगूँगा मैं बाग़ में दिल नहीं लगा अब के अगले मौसम नहीं खिलूँगा मैं उससे आगे नहीं निकलना पर उसके पीछे नहीं चलूँगा मैं कह गए थे वो याद रक्खेंगे याद ही तो नहीं रहूँगा मैं - Vishal Bagh

इक तुम हो कि शोहरत की हवस ही नहीं जाती इक हम हैं कि हर शोर से उकताए हुए हैं 04.08.2025

सब जिनके लिए झोलियां फैलाए हुए हैं वो रंग मेरी आंख के ठुकराए हुए हैं इक तुम हो कि शोहरत की हवस ही नहीं जाती इक हम हैं कि हर शोर से उकताए हुए हैं दो चार सवालात में खुलने के नहीं हम ये उक़दे तेरे हाथ के उलझाए हुए हैं अब किसके लिए लाए हो ये चांद सितारे हम ख़्वाब की दुनिया से निकल आए हुए हैं हर बात को बेवजह उदासी पे ना डालो हम फूल किसी वजह से कुम्हलाए हुए हैं कुछ भी तेरी दुनिया में नया ही नहीं लगता लग...

मेरे दोस्त, तुम मुझसे कुछ भी कह सकते हो… 13.07.2024

क्या तुम्हारा नगर भी दुनिया के तमाम नगरों की तरह किसी नदी के पाट पर बसी एक बेचैन आकृति है? क्या तुम्हारे शहर में जवान सपने रातभर नींद के इंतज़ार में करवट बदलते हैं? क्या तुम्हारे शहर के नाईं गानों की धुन पर कैंची चलाते हैं और रिक्शेवाले सवारियों से अपनी ख़ुफ़िया बात साझा करते हैं? तुम्हारी गली के शोर में क्या प्रेम करने वाली स्त्रियों की चीखें घुली हैं? क्या तुम्हारे शहर के बच्चे भी अब बच्चे नहीं...

रूह तक रास्ता बनाया जा रहा है, ज़िस्म को ज़रिया बनाया जा रहा है 13.07.2024

रूह तक रास्ता बनाया जा रहा है, ज़िस्म को ज़रिया बनाया जा रहा है। ज़ख्म पर नहीं आँख पर बाँधी है पट्टी, चोट को अंधा बनाया जा रहा है॥ नस्ल (generation) को भीड़ का आदी बना कर, अस्ल (real) में तनहा बनाया जा रहा है। पाप को अंजाम देने के लिए अब, धर्म को जरिया बनाना जा रहा है॥ स्वरस्वर: डॉडॉ. सुमिसुमित कुमारकुमार पाण्पाण्डेय शायराशायरा: कीर्तिकीर्ति

Meaning of Life (जीवन का अर्थ) 28.07.2020

स्वर: सुमित कुमार पाण्डेय, सामग्री: सुमित एवं हिन्दीजेन.कॉम

स्वयं की शक्ति को पहचानें 12.07.2020

सामग्री: सरल मनोज, स्वर: सुमित कुमार पाण्डेय

भीड़तन्त्र: सच बोलने वाला अपराधी है 12.07.2020

सामग्री: अमित मंडलोई, स्वर: सुमित कुमार पाण्डेय

जीवन का मतलब, अपने होने का मतलब 11.07.2020

Know yourself and your inner power.

Sumit Kumar Pandey: The Inner Voice (Trailer) 11.07.2020

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