Nikhil kapoor
Lamhe zindagi ke
जिंदगी के छोटे छोटे संभले हुए लम्हे , कुछ मेरे , कुछ आपके । बस यूँही बतियाते हुए ।
Não deixe de visitar o site do podcast e apoiar quem o produz: nikhilkapoor.me
Autor
Nikhil kapoor
Categoria
Site do podcast
Último episódio
20 de mar de 2024
Onde ouvir?
Podcasts no app Replaio Radio Em breveOs podcasts estão chegando ao app. Instale agora e seja o primeiro a descobrir um jeito totalmente novo de curtir podcasts
Episódios
“Khol do” sahadat ali Manto. “खोल दो” सहादत अली मंटो 20.03.2024 6:27
एक ऐसे कहानी जिसे सुनने के बाद आपको आदमजात से नफ़रत हो जाएगी ।
“ पाँच बरस लंबी सड़क” अमृता प्रीतम जी की कहानी 18.03.2024 22:00
रिश्तों की एक छोटी सी , सच्ची सी मगर कच्ची सी कहानी
“एक जब्तशुता किताब” अमृता प्रीतम 16.03.2024 11:01
प्रेम को समझाना तभी संभव है जब समझने वाला स्वयं प्रेम हो जाये ।
कल ज़िंदगी गई 28.02.2023 14:22
Few lines from my book पीले काग़ज़ सूखी श्याही
Lag ja gale 19.06.2022 14:10
Ek sarki hui Prem kahaani , Sur aur aarambh ki
औलाद 27.01.2022 1:38
जाने कब कुछ पगडंडियाँ........... दरख़्त हो गयीं.......... और उनकी जड़ें मेरे जिस्म के उस कमरे में फैल गयीं........... जिसे सदी की क़ब्रें जाने कब से........... सिर्फ़ एक गुनाह के लिए पाक रखती हैं......... और इश्क़ के लोबान की रूह भी....... जहाँ कुफ्र होती है......... धीरे धीरे उन जड़ों की काई उस कमरे से बाहर निकल......... मेरे जिस्म के मकान तक फैल गयी.......... और हर आते जाते जिस्म की आँख....... उ...
जंगली बूटी : अमृता प्रीतम जी कलम से 23.06.2021 15:12
क्या कह सकते हैं अमृता जी की लेखनी के लिए
Imroz | 23.06.2021 4:27
Small tribute to amrita pritam n imroz ji .
अभी अभी लफ़्ज़ों ने 26.05.2021 2:57
एक उदास शाम , कुछ फूंका हुआ वक़्त , कुछ बिखरे हुए लफ्ज़
Fees /फीस 26.05.2021 11:33
एक और शाम , एक और महफ़िल , चाय की प्याली और एक नई कहानी के साथ आपका दोस्त निखिल
रेल की पटरी और बरगद , अंतिम भाग । rail ki patri aur bargad last part 14.05.2021 8:41
Just listen to it .
Short story rail ki patri aur bargad part 3/ रेल की पटरी और बरगद पार्ट 3 , लघु कहानी 12.05.2021 12:20
पार्ट 3
रेल की पटरी और बरगद :भाग २ / rail ki patri aur bargad part 2 11.05.2021 13:02
दास्ताँ को कुछ आगे ले जाते हुए
Short story : rail ki patri aur bargad part 1 / लघु कहानी : रेल की पटरी और बरगद भाग १ 11.05.2021 9:33
Shabd shaayad byaan na kar payein jo ehsaas is kahaani mein gundhe hue hai .
Short story "chutaki""छूटकी"एक छोटी सी कहानी 10.05.2021 11:44
जाने अनजाने कभी कभी अपने चारों तरफ देख कर मन बहुत घबराने लगा है । जिंदगी जैसे किसी फिल्म के एक सीन की तरह हो गई है ।
Lamhe zindagi ke by nikhil / short story / aur nisha beet gai 28.04.2021 13:17
आज आपका अपना निखिल अपनी एक छोटी सी कहानी ले कर आपके साथ , कुछ लम्हे गुज़ारना चाहता है ।। "और निशा बीत गई "
किस किस से कहें / kis kis se kahain 25.04.2021 2:14
Its so easy to forget , not to forget / बहुत आसान होता है भूलना और न भूल पाना ।
फलसफे दोस्ती के /falsafe dosti ke 25.04.2021 2:37
Tribute to all my friendships . You will be part of my existence always .
Lamhe zindagi ke by nikhil kapoor 25.04.2021 1:03
जिंदगी की गठरी में से निकाल कर लाया हूँ कुछ लम्हे ज़िंदगी के , जो कभी खिलखिलाते हैं , कभी रुलाते हैं ,कभी बस बीतते जाते हैं । चाय की एक प्याली के साथ आपका अपना निखिल कपूर
Lamhe zindagi ke by nikhil kapoor 25.04.2021 2:07
जिंदगी की गठरी में बटोरे हुए कुछ लम्हे , कुछ खिलखिलाते , कुछ उदास , कुछ अकेले कुछ साथ साथ । आज आपके साथ बांटने आया हूँ इन्हें , चाय की एक प्याली के साथ । आपका , अपना दोस्त निखिल कपूर
Podcasts parecidos
O Replaio não é o publicador dos podcasts; os nomes dos programas, as capas e o áudio pertencem aos seus autores e são distribuídos por feeds RSS públicos