Vivek Agarwal

Hindi Poems by Vivek (विवेक की हिंदी कवितायेँ)

Arts HI ↓ 96 episódios

This podcast presents Hindi poetry, Ghazals, songs, and Bhajans written by me. इस पॉडकास्ट के माध्यम से मैं स्वरचित कवितायेँ, ग़ज़ल, गीत, भजन इत्यादि प्रस्तुत कर रहा हूँ Awards StoryMirror - Narrator of the year 2022, Author of the month (seven times during 2021-22)Kalam Ke Jadugar - Three Times Poet of the Month. Sometimes I also collaborate with other musicians & singers to bring fresh content to my listeners. Always looking for fresh voices. Write to me at HindiPoemsByVivek@gmail.com#Hindi #Poetry #Shayri #Kavita #HindiPoetry #Ghazal

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Autor

Vivek Agarwal

Categoria

Arts

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Último episódio

26 de fev de 2025

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Episódios

हिंदी (Hindi) 09.01.2023

बड़ी पुत्री है संस्कृत की सरल भाषा तथा बोली। निरंतर सीखती रहती सभी से बन के हमजोली॥ अनेकों रूप लेकर भी बड़ी मीठी है अलबेली। भले अवधी या ब्रजभाषा खड़ी बोली या बुन्देली॥ ये जयशंकर महादेवी निराला जी की कविता है। मधुर मोहक सरस सुन्दर चपल चंचल सी सरिता है॥ .. .. हमें सर्वोच्च दुनिया में अगर भारत बनाना है। तो सोतों को जगाना है व हिंदी को बढ़ाना है॥ चलो हिंदी दिवस पर सब प्रतिज्ञा आज करते हैं। कि भारत देश उप...

परिवार का चूल्हा (Pariwar Ka Chulha) 05.01.2023

परिवार का चूल्हा परिवार का चूल्हा, मात्र प्रेम की अग्नि से नहीं चलता, ईंधन भी माँगता है। कर्तव्य की लकड़ियाँ आवश्यक हैं, चूल्हे के जलते रहने के लिए। कभी कभी त्याग का घी-तेल, भी डालना होता है, और व्यवहारिकता की फुँकनी से, समझौते की हवा भी फूँकनी होती है। असुविधाओं का धुँआ सहन करते हुए। Full poem is available for listening Write to me at HindiPoemsByVivek@Gmail.com

ब्रह्म-ज्ञान (Brahm-Gyaan) 30.12.2022

इस कविता में आत्मा के अजर अमर स्वरुप का वर्णन कर उसका अंतिम लक्ष्य ब्रह्म प्राप्ति बता कर उसके तीन अलग अलग मार्गों की परिचर्चा की गयी है। यही जीवन का सबसे बड़ा रहस्य है और यही सबसे बड़ा ज्ञान है। इसीलिए इसे ब्रह्मज्ञान भी कहा गया है आओ चलो एक गहरा राज तुम सबको बतलाता हूँ। जीवन का ये सत्य शाश्वत आज तुम्हें समझाता हूँ। पञ्च तत्व से बनी ये काया तन अपना ये नश्वर है। तो क्यूँ इससे मोह करें जब क्षणभंगुर य...

समर्पण (Samarpann) 22.12.2022

मुझे मोक्ष मत देना मोहन, मत करना मुक्ति मार्ग प्रशस्त। संध्या की जब बेला आये, और हो जीवन का सूर्य अस्त॥ नहीं कामना वैकुण्ठ की मुझको, न चाहूँ इंद्र का सिंहासन। सम्पूर्ण सृष्टि में नहीं बना कुछ, मेरी भारत भूमि सा पावन॥ श्वेत किरीट शोभित मस्तक पर, करे पयोधि पद-प्रक्षालन। सप्तसिंधु से सिंचित ये भूमि, सर्वोच्च सदा से रही सनातन॥ इस पुण्य भूमि में क्रीड़ा करने, ईश्वर स्वयं मनुज बन आते। सौभाग्य यहाँ आने का...

मेरे अल्फ़ाज़ और मित्रों की आवाज़ (My words & Friends' voice) 10.12.2022

आज की इस विशेष प्रस्तुति में मेरी कविताओं को आवाज़ दी है मेरे दो अज़ीज़ साथियों नरेश कुमार नरूला जी और वाचस्पति पांडेय जी ने। कवितायेँ हैं १ - मृगतृष्णा २ - मैं प्रलय हूँ  -------------------- You can write to me on HindiPoemsByVivek@gmail.com

ग़ज़ल - वो जो ज़िन्दगी थी मेरी कभी (Ghazal - Wo Jo Zindagi Thi Meri Kabhi) 08.12.2022

वो जो ज़िन्दगी थी मेरी कभी; वो जो पहला पहला ख़ुमार था। मुझे ज़िन्दगी में नहीं मिला; मेरी ज़िन्दगी का जो प्यार था। ये जो अश्क़ अपने ही पी रहा; ये जो क़िस्त क़िस्त में जी रहा, मैं चुका रहा हूँ वो आज भी; जो तेरा पुराना उधार था। मेरी ज़िन्दगी का उसूल है; जो तुझे ख़ुशी दे क़ुबूल है, क्यूँ शिकायतें मेरे दिल में हों; न कभी भी कोई क़रार था। जो नसीब में है लिखा नहीं; मुझे ख्वाब कोई दिखा नहीं, मैं अभी भी चैन से जी रह...

ट्रिक और ट्रीट? (Trick or Treat) 02.12.2022

ट्रिक और ट्रीट? मैं मूक स्तब्ध दरवाजे पर खड़ा था, सामने बच्चों का एक झुण्ड अड़ा था। कोई भूत कोई चुड़ैल कोई सुपर हीरो बना हुआ, पूरे आत्मविश्वास के साथ द्वार पर तना हुआ। एक एक कर मैंने सबके चेहरों को निहारा, कोई पापा की परी कोई माँ का राजदुलारा। कोई ड्रैकुला बना लाल दाँत दिखा रहा था, तो कोई हैरीपॉटर बन स्पेल्स सिखा रहा था। ऊँचा नुकीला हैट पहने एक कन्या विच बनी थी, और इलास्टी गर्ल की आयरन मैन से ठनी थी।...

दीपदान (DeepDaan) 24.11.2022

देवालय में बैठा बैठा मैं मन में करता ध्यान। शुभ दिन आया मैं करूँ दीप कौन सा दान। मिटटी के दीपक क्षणभंगुर और छोटी सी ज्योति। बड़ी क्षीण सी रौशनी बस पल दो पल की होती। मन में इच्छा बड़ी प्रबल दुर्लभ हो मेरा दान। सारे व्यक्ति देख करें बस मेरा ही गुण गान। इस नगर में हर व्यक्ति के मुख पर हो मेरा नाम। इसी सोच में डूबा बैठा आखिर क्या करूँ मैं काम। सोचा चाँदी की चौकी पर सोने का एक दीप सजाऊँ। साथ में माणिक मो...

ग़ज़ल - नियामतें जो मिली (Ghazal - Niyamaten Jo Mili) 17.11.2022

नियामतें जो मिली शुक्र सुब्ह शाम करें। कि ख़्वाहिशों को कभी भी न बे-लगाम करें। वो मुस्कुरा के हैं पूछे कि हाल कैसा है, सजा के झूठ लबों पर दुआ सलाम करें। सजा रखे थे जो अरमां लुटा दिए तुम पर, बचे हुए हैं ये सपने कहो तमाम करें। ख़ता नहीं थी हमारी पता नहीं तुझको, तुझे यकीं जो दिलाये वो कैसा काम करें। बिकी हुई है अदालत जो ठीक दो कीमत, चलो कहीं से गवाहों का इंतिज़ाम करें। ---- सुर और संगीत - साधना रस्तो...

अपना भारत - एक बाल गीत (Apna Bharat - A Children Song) 11.11.2022

भारत माता के हम बच्चे, सबसे प्यारा अपना भारत। दूर दूर तक देखा जग में, सबसे न्यारा अपना भारत॥ भिन्न भिन्न भोजन हैं अपने, भिन्न भिन्न है अपनी बोली। भिन्न भिन्न उत्सव हैं अपने, ओणम बीहू पोंगल होली॥ भिन्न भिन्न इन त्योहारों ने, खूब सँवारा अपना भारत। दूर दूर तक देखा जग में, सबसे न्यारा अपना भारत॥ भारत माता के हम बच्चे, सबसे प्यारा अपना भारत। दूर दूर तक देखा जग में, सबसे न्यारा अपना भारत॥ भिन्न भिन्न पो...

रास लीला - रूपमाला छंद 28.10.2022

प्रथम सर्ग रास लीला की कथा को, मैं सुनाता आज। ध्यान से सुन लो मनोहर, गूढ़ है ये राज॥ पुण्य वृन्दावन हमारा, प्रेम पावन धाम। रात को निधि-वन पधारें, रोज श्यामा श्याम॥ दिव्य दर्शन दें प्रभु हर, पूर्णिमा की रात। मान लो मेरा कहा ये, सत्य है यह बात॥ पेड़-पौधे पुष्प-पत्ते, झूमते मनमीत। मोर कोयल मिल सुनाते, प्रेम रस के गीत॥ जीव-जंतु भी करे हैँ, हर्ष से गुण-गान। तितलियाँ मदहोश होतीं, प्रेम रस कर पान॥ मुस्कुरा...

ग़ज़ल – घरों के साथ जीवन भी सजाते हैं दिवाली पर 21.10.2022

घरों के साथ जीवन भी सजाते हैं दिवाली पर। नयी उम्मीद के दीपक जलाते हैं दिवाली पर। चमकते हैं ये घर आँगन ज़रा झाड़ू लगा अंदर, ये जाले बदगुमानी के हटाते हैं दिवाली पर। जुबां मीठी बने सबकी न कड़वे बोल हम बोलें, बना ऐसी मिठाई इक खिलाते हैं दिवाली पर। प्रकाशित मन करे ऐसा जलाओ दीप हर घर में, दिलों से आज अँधियारा मिटाते हैं दिवाली पर। लबों पर मुस्कुराहट ला भुला दे सब ग़मों को जो, चलो सब फुलझड़ी ऐसी चलाते हैं दि...

ग़ज़ल - इश्क़ भी तुम ने किया (Ghazal - Ishq Bhi Tumne Kiya) 13.10.2022

ग़ज़ल - इश्क़ भी तुम ने किया बस यूँ ही आते जाते   इश्क़ भी तुम ने किया बस यूँ ही आते जाते।  दर्द कितना है दिया हम को यूँ जाते जाते।  दोस्ती ख़ूब निभाई थी बड़े दिन हमसे, फ़र्ज़ दुश्मन का भी बनता है निभाते जाते।  मेरे बस में तो नहीं है कि जला दूँ इनको, ख़त जो तुमने थे लिखे उन को जलाते जाते। मुस्कुराहट है लबों पर जो सजाई झूठी, रोक कर हैं जो रखे अश्क़ बहाते जाते। कैसे काटेंगे सफ़र ज़िंदगी...

ग़ज़ल - मेरी मुहब्बत नयी नहीं है (Ghazal - Meri Muhabbat Nayi Nahin Hai) 08.10.2022

ग़ज़ल - मेरी मुहब्बत नयी नहीं है बड़ी पुरानी है ये कहानी, मेरी मुहब्बत नयी नहीं है। जो फाँस बन के गड़ी हुयी है, जिगर में हसरत नयी नहीं है। कभी लिखे थे दिलों पे अपने, जो नाम इक दूसरे के हमने, नहीं धुलेंगे वो आंसुओं से, छपी इबारत नयी नहीं है। न तू ये जाने जगह जो मैंने, तेरे लिये थी कभी बनायी, सजा के दिल में तुझे है पूजा, मेरी इबादत नयी नहीं है। दवा नहीं मिल रही है इसकी, बुख़ार हमको जो हो गया है, है आग...

ग़ज़ल - सुनो तुम आत्महत्या से कभी हित हो नहीं सकता 01.10.2022

कभी कभी जीवन से निराश हो चुके व्यक्ति आत्महत्या तक के बारे में सोचने लगते हैं जबकि यह किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। अभी कुछ दिनों पहले विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर मैंने एक ग़ज़ल के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों को नकारात्मक सोच से निकल सकारात्मकता की ओर जाने का सन्देश देने का प्रयास किया गया है।  साथ ही यह भी चेष्टा रही है कि शुद्ध हिंदी के शब्दों का प्रयोग कर एक सम्पूर्ण ग़ज़ल लिखी ज...

प्रयाण गीत (पञ्चचामर छंद) 10.09.2022

अजेय सैनिकों चलो, लिये तिरंग हाथ में। समक्ष शत्रु क्या टिके, समस्त हिन्द साथ में॥ ललाट गर्व से उठा, स्वदेश भक्ति साथ है। अशीष मात का मिला, असीम शक्ति हाथ है॥ चले चलो बढ़े चलो, कि देश है पुकारता। सवाल आज आन का, कि आस से निहारता॥ सदैव शौर्य जीतता, कि शक्ति ही महान है। कि वीर की वसुंधरा, यही सदा विधान है॥ चढ़ा लहू कटार से, यहाँ उतार आरती। भले तू खंड-खंड हो, रहे अखंड भारती॥ महान मातृभूमि का, चुका सकें न...

श्रीकृष्ण बाल कथा (Shri Krishna Baal Katha) 19.08.2022

श्रीकृष्ण माहात्म्य हरिगीतिका छंद (२८ मात्रिक १६,१२ पर यति) प्रथम सर्ग - श्रीकृष्ण बाल कथा श्रीकृष्ण की सुन लो कथा तुम, आज पूरे ध्यान से। भवसागरों से मुक्ति देती, यह कथा सम्मान से॥ झंझावतों की रात थी जब, आगमन जग में हुआ। प्रारब्ध में जो था लिखा तय, कंस का जाना हुआ॥ गोकुल मुझे तुम ले चलो अब, हो प्रकट बोले हरी। माया वहाँ मेरी है जन्मी, तेज से है वो भरी॥ ज्यूँ कृष्ण का आना हुआ त्यूँ, बेड़ियाँ सब खुल ग...

ग़ज़ल - नहीं फ़ख़्र-ए-वतन उसका ये हिंदुस्तान थोड़े है (Ghazal) 13.08.2022

ग़ज़ल - नहीं फ़ख़्र-ए-वतन उसका ये हिंदुस्तान थोड़े है लुटाते जान सैनिक ही हमारी जान थोड़े है। बचाते अजनबी को भी कोई पहचान थोड़े है। नहीं अहसान मानो तो समझ इक बार हम जायें, मगर मारो जो तुम पत्थर वहाँ ईमान थोड़े है। ख़िलाफ-ए-'मुल्क साजिश कर जो दुश्मन की ज़बाँ बोले, नहीं फ़ख़्र-ए-वतन उसका ये हिंदुस्तान थोड़े है। कहे भारत के टुकड़े जो वो अपना हो नहीं सकता, पढ़ा है तीस सालों तक अभी नादान थोड़े है। चलो मिल कर बना...

ज़रा याद करो कुर्बानी (Zara Yaad Karo Kurbani) 04.08.2022

बचपन से खूब सुनी हैं, दादी नानी से कहानी। जादुई परियों के किस्से, और सुन्दर राजा रानी। कथा मैं उनकी सुनाता, जो देश के हैं बलिदानी। ना उनको आज भुलाओ, ज़रा याद करो कुर्बानी। आज़ाद हवा में साँसे, खुल कर हम सब ले पाये। क्यूँकि कुछ लोग थे ऐसे, जो अपनी जान लुटाये। उन सब की बात करूँ मैं, नहीं जिनका बना है सानी। ना उनको आज भुलाओ, ज़रा याद करो कुर्बानी। सन सत्तावन में देखी, आज़ादी की पहली लड़ाई। सबसे आगे जो न...

ग़ज़ल - दिन रात मुझे याद (Ghazal - Din Raat Mujhe Yaad) 26.07.2022

दिन रात मुझे याद यूँ आया न करो तुम। हर वक़्त यूँ तड़पा के सताया न करो तुम। दिन भर तो मुझे नींद नहीं होती मयस्सर, आ ख्वाब में हर रात जगाया न करो तुम। इक वक़्त था मुस्कान हमेशा थी लबों पर, वो वक़्त मुझे याद दिलाया न करो तुम। लगता है तेरे दिल में कहीं कुछ तो बचा है, जो भी है दिल में वो छुपाया न करो तुम। इस वक़्त से बढ़कर है नहीं कुछ भी यहाँ पर, बेकार की बातों में गँवाया न करो तुम। माना कि तेरे दिल में नहीं...

शारदा स्तुति (Sharda Stuti) 17.06.2022

शारदा स्तुति हरिगीतिका छंद (२८ मात्रिक १६,१२ पर यति) है हंस पर आरूढ़ माता, श्वेत वस्त्रों में सजी। वीणा रखी है कर तिहारे, दिव्य सी सरगम बजी॥ मस्तक मुकुट चमके सुशोभित, हार पुष्पों से बना। फल फ़ूल अर्पण है चरण में, हम करें आराधना॥ संगीत का आधार हो माँ, हर कला का श्रोत हो। जग में प्रकाशित हो रही जो, वेद की वह ज्योत हो॥ वरदायिनी पद्मासिनि माँ, अब यही अभियान हो। हम सब चलें सत्मार्ग पर अब, ना हमें अभिमान...

आओ पर्यावरण बचायें (Let us save environment) 12.06.2022

आओ पर्यावरण बचायें यह प्रकृति हम से नहीं, इस प्रकृति से हम हैं। प्रकृति सरंक्षण हेतु हम जितना भी करे कम है। पंच तत्व बन प्रकृति ही इस तन को निर्मित करती है। सौंदर्य सुधा की सुरभि से सबको आकर्षित करती है। जीवनदायी प्रकृति करती है सब का पालन पोषण। निज स्वार्थ में हम कर बैठे इस देवी का शोषण। भूमि हमको भोजन देती पर हम इसको विष देते। दूषित करते उन नदियों को जिनसे हम जल लेते। प्राणदायिनी वायु तक को भी ह...

Shiv Vandana - मैं बस शिवा हूँ (Mein Bas Shiva Hoon) 06.05.2022

न हूँ मैं मेधा, न बुद्धि ही मैं हूँ। अहंकार न हूँ न चित्त ही मैं हूँ। न नासिका में न नेत्रों में ही समाया। न जिव्हा में स्थित न कर्ण में सुनाया। न मैं गगन हूँ न ही धरा हूँ। न ही हूँ अग्नि न ही हवा हूँ। जो सर्वत्र सर्वस्व आनंद व्यापक। मैं बस शिवा हूँ उसी का संस्थापक। नहीं प्राण मैं हूँ न ही पंचवायु। नहीं पंचकोश और न ही सप्तधातु। वाणी कहाँ बांच मुझको सकी है। मेरी चाल कहाँ कभी भी रुकी है। किसी के हाथ...

श्रीकृष्ण स्तुति (Sri Krishna Stuti) 28.04.2022

श्रीकृष्ण मेरे इष्ट भगवन, नित्य करता ध्यान मैं। मुरली मनोहर श्याम सुन्दर, भक्तिरस का गान मैं॥ कोमल बदन चन्दन सजा है, भव्य यह श्रृंगार है। कर में सजी वंशी सुनहरी, देखता संसार है॥ सम्पूर्ण जग में आप ही हो, आप से ही सब बना। है आप पर सर्वस्व अर्पण, आप की आराधना॥ मम मात तुम तुम तात हो तुम, बन्धु तुम ही हो सखा।  प्रियतम तुझे ही मानता मैं, तुम बिना क्या है रखा॥ मनमोहना है छवि तिहारी, श्वास का आधार ह...

मैंने राम को देखा है 10.04.2022

कौन हैं राम कैसे थे राम, कब थे राम कहाँ है राम? अक्सर ऐसे प्रश्न उठाते, लोगों को मैंने देखा है। श्रद्धा-सूर्य पर संशय-बादल, मंडराते मैंने देखा है। है उनको बस इतना बतलाना, मैंने राम को देखा है । पितृ वचन कहीं टूट ना जाये सौतेली माँ भी रूठ ना जाये राजसिंहासन को ठुकराकर परिजनों को भी बहलाकर एक क्षण में वैभव सारा छोड़ रिश्ते नातों के बंधन तोड़ कुल-देश-धर्म की मर्यादा पर सर्वस्व लुटाते देखा है हाँ मैंने...

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