Ankit Pandey

Yatra

Arts HI ↓ 55 episodes

This podcast has some good content, some well written poetry and stories. Here I'm reciting some old stuf I've written so far.

Author

Ankit Pandey

Category

Arts

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Latest episode

Apr 9, 2024

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Episodes

घर (Ghar) 09.04.2024

सवाल तो कई हैं पर अब घर तो घर है, जरूरतों को पूरा करने का घर, तन का घर-मन का घर, मेरा घर, उसका घर, छत वाला घर, खपरैलों में छुपा घर या फिर एक अपना घर यानि इश्क़। पर इस घर में हम जी तो सकते हैं, मर नहीं सकते। हमें मरने के लिए भी तो घर चाहिए...

विंटेज (Vintage) 20.01.2024

________________________ पुराने वृक्षों की खाल की रन्ध्रों में उग आते हैं छोटे-बड़े छातेनुमा पीले, मटमैले मशरूम मेरी पुरानी स्मृतियों में जिस तरह तुम्हारा उग आना होता है मटमैली, पीली, धुँधली सी हो कर किसी विंटेज खिड़की से थोड़ी सुन्दर  लेकिन छू लेने महसूसने पकड़ने से बहुत दूर क्षणिकाओं की तरह।। ________________________ तारीख- २०-०१-२०२४ दो० १२:३६ बजे ________________________

Haan Tum Bilkul Waisi ho- Intezaarnama 06.01.2024

Khayal hi nahi, ishq bhi hai intezaarnama.

बढ़ई और चिड़िया (Badhai aur chidiya) 21.10.2023

केदारनाथ सिंह शायद हिन्दी के समकालीन काव्य परिदृश्य में अकेले ऐसे कवि हैं, जो एक ही साथ गाँव के भी कवि हैं और शहर के भी। उनकी यह कविता शायद ऊँघते काटे जा रहे जंगलों की कराह होगी जो मुझे पढ़ने मिली।

माँ और परछाई (Maa aur Parchhayi) 28.02.2023

एक अहसास कि माँ अभी मेरी हथेली पर अपना हाथ मल कर गईं और छोड़ गईं खुद को शीशे में, मुझ में...

जाना- इन्तज़ारनामा 2 (Jaana- Intzarnama 2) 26.02.2023

इतिहास में इंतजार की कोई जगह नहीं होती। इन्तज़ारनामा 2, ऑडियो- Santoor Flute Raag Jhinihoti by Pt. Shri Shiv kumar sharma, Pt. Shri Hariprasad chaurasiya.

अव्यवस्थित ढंग (Avyavasthit Dhang) 24.02.2023

मेरा तुम्हारे लिए अव्यवस्थित ढंग से किया गया प्रेम हमेशा सबसे सुंदर रहा।। Poem by - Ankit

फूल सी कविता (Phool si Kavita) 22.02.2023

बहुत दिनों से फूल धरे हैं घर में टेबल की छत्ती पर मुरझाए से सिकुड़े सारे जैसे मेरा मन मुरझाया, मेरे मन के मुरझाने पर तुम तो पानी दे आँखों का कर देती हो ताजा सब कुछ, फूलों को बोलो क्या दूँ मैं ? कैसे ताजा करूँ कहो अब कैसे उनको यह बतलाऊँ, मेरी आँखों के देखे से नज़र लगी तो मुरझाता सब,

इन्तज़ारनामा - चिट्ठी (Chitthi) 11.02.2023

चिट्ठी खतम हो गयी थी। प्रेमनुराग आँखों से जलप्रपात की तरह तरल हो निकला था। तभी विविध भारती में घर के बाहर से जाती कार में सुनाई दिया। बाबूजी धीरे चलना, प्यार में ज़रा सम्भलना, बड़े धोखे हैं इस राह में...!! Music by @Anupamroy Piku movie.

अब और नहीं होता (Ab aur nahi hota) 08.02.2023

हम कई बार जी लेना चाहते हैं, कविताओं में, वक़्तों के हिस्सों में, उसी जगह से एक कविता.-- मेरी सारी कविताओं में सिमट जाते हैं हम दोनों- खिलखिलाकर गले लगते हैं कहते हैं दो-चार बातें और हो जाते हैं अपने आप में मशरूफ़- किसी दिन ऐसा असल में हो तो मैं छोड़ दूँ कविताएं लिखना और मशरूफ़ हो जाऊँ तुममें- यूँ कविताओं में सिमटे रहना अब और नहीं होता।। Audio in background taken from Piku movue, Music created by @Anu...

इन्तज़ारनामा (intezarnama) 05.02.2023

इमैजिनेशन की वो दुनिया जिसमें सब खूबसूरत है, बेहद खूबसूरत, आपके लिये।।

प्रेम की जगह अनिश्चित है (Prem ki jagah anishchit hai) - Vinod kumar shukl 04.12.2022

हमेशा की तरह हतप्रभ कर देने वाले विनोद कुमार शुक्ल जी की यह कविता...

मेरा तुम्हारा रिश्ता (Mera Tumhara Rishta- Faiz) 30.11.2022

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब की ये नज़्म जो रिश्ते बयां करती है।।

रश्मियाँ (Rashmiyan) 27.07.2022

Let's define the beauty...

ऊमर के फूल (oomar ke phool) 17.06.2022

जीवन की अनियमितताएं, सच, मृत्यु, सब कुछ एक मात्र फूल में निहित...!!

चिट्ठी (Chitthi) 07.04.2022

चिट्ठियां कैप्शन नहीं ले कर चलतीं।

उंगलियों का विज्ञान (Ungaliyon Ka Vigyaan) 08.03.2022

Science is fiction, Spirituality is real or Science is real and Spirituality is function ? Choose wisely, until then, listen this poem.

मैं तुम्हारी देह पर (Mai Tumhari Deh Par) 07.01.2022

प्रेमानुभूति प्रक्रिया से क्रिया का सफलतम रूप होती है।

दिसम्बर के दिन (Days of December) 06.01.2022

दिसम्बर के दिन सालों से पुछल्ले माने जाते रहे हैं पर असल में नीव की तरह काम में लगे होते हैं वो भी आगे आने वाले साल के लिए। इसी कोशिश में ये कुछ अलग और बड़े वक़्त बाद नई कविता। आपके और दिसम्बर के नाम।

Tonight i can write by Neruda 15.10.2021

Translation by Ankit, Written by Pablo Neruda.. It's just a try...

Meri Mrityu ke baad (मेरी मृत्यु के बाद) 23.06.2021

एक सच जो हर लिखने वाले की अन्तरात्मा झकझोर देता है वो है, उसे उस समय तवज्जो ना देना जब आवश्यक हो, बजाय जब वो रह ही न जाए तब के। "कविता को आवाज़ दी है थिएटर आर्टिस्ट और बहुत अच्छी आवाज़ की धनी, दोस्त पुष्पा ने।"

SlowMotion 26.05.2021

Slow motion detected in past

समर शेष है (Samar Shesh Hai) 30.04.2021

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की इस कविता को हम जितनी बार पढ़ते हैं, उतनी बार नया राष्ट्र, नया कलाप सामने होता दीख पड़ता है। समय की व्यथा, राष्ट्र का दुःख, जनता का अपनत्व साफ समझ आता है। हर ओर से ऐसा लगता है जैसे बस यही कविता है जिसने जियाले अपने भीतर सहेजे हुए हैं।

खिड़कियाँ (Khidkiyaan) 05.04.2021

भविष्य भला खिड़की से सुंदर कौन जान पाया है बाबू।

प्रेम कविता (Prem Kavita) 05.04.2021

किसी कविता में आवाज़ उन कलाकारों की मिल जाए जो चहेते हों तो कुछ ही क्षणों में सुकून हरी दूब की तरह बिछा बिछौना हो जाता है।

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