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Shiv Puran Katha in Hindi
शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,
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Jul 5, 2026
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Episodes
शिव पुराण - विश्वकर्मा द्वारा दिव्य मंडप की रचना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 38 05.07.2026 7:09
शिव पुराण के अध्याय 38 में विश्वकर्मा द्वारा भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के लिए बनाए गए अद्भुत मंडप का विस्तृत वर्णन मिलता है। शैलराज हिमालय के आदेश पर देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा ने ऐसा अलौकिक मंडप तैयार किया जिसे देखकर देवता, ऋषि और स्वयं भगवान शिव भी आश्चर्यचकित हो गए। इस अध्याय में दिव्य मंडप, देवताओं के लोकों, सुंदर मूर्तियों, स्वर्गीय सजावट और शिव विवाह की भव्य तैयारियों का अत्...
हिमालय का लग्न पत्रिका भेजना | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 37 28.06.2026 5:02
शिव पुराण के अध्याय 37 में वर्णन मिलता है कि कैसे शैलराज हिमालय ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह हेतु लग्न पत्रिका तैयार करवाई और उसे कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के पास भेजा। इस अध्याय में विवाह की तैयारियों, शुभ मुहूर्त, देवताओं के आमंत्रण और शिव-पार्वती विवाह के पवित्र प्रसंग का सुंदर वर्णन किया गया है। यदि आप शिव पुराण की सम्पूर्ण कथा सुनना चाहते हैं, तो इस अध्याय को अंत तक अवश्य सुनें।...
सप्तऋषियों का शिव के पास आगमन | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 36 21.06.2026 2:42
शिव पुराण के अध्याय 36 में सप्तऋषि कैलाश पर्वत पहुँचकर भगवान शिव को हिमालय और मैना की स्वीकृति का समाचार देते हैं। वे भगवान शिव से वैदिक रीति से देवी पार्वती का पाणिग्रहण संस्कार करने का अनुरोध करते हैं। इस अध्याय में शिव-पार्वती विवाह की तैयारियों का शुभारंभ होता है और सभी देवताओं, ऋषियों तथा दिव्य शक्तियों को विवाह में आमंत्रित करने की चर्चा होती है। ✔ सप्तऋषियों का कैलाश आगमन ✔ भगवान शिव को विव...
हिमालय का शिवजी के साथ पार्वती के विवाह का निश्चय करना | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 35 14.06.2026 4:44
शिव पुराण के अध्याय 35 में सप्तऋषियों और देवी अरुंधती द्वारा हिमालय और मैना को समझाने के बाद शिव-पार्वती विवाह का निर्णय लिया जाता है। हिमालय भगवान शिव की महिमा को स्वीकार करते हुए अपनी पुत्री पार्वती को शिवजी की अमानत घोषित करते हैं। सप्तऋषि पार्वती को आशीर्वाद देते हैं और विवाह के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित करते हैं। इस अध्याय में जानिए: ✔ भगवान शिव की सर्वोच्च महिमा ✔ हिमालय द्वारा विवाह की स्वी...
पद्मा–पिप्पलाद की कथा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 34 07.06.2026 7:16
शिव पुराण के चौंतीसवें अध्याय में देवी पद्मा और ऋषि पिप्पलाद की प्रेरणादायक कथा मिलती है। इस अध्याय में देवी पद्मा के पतिव्रत धर्म, धर्मराज द्वारा ली गई परीक्षा, शाप और वरदान का वर्णन है। इस कथा में बताया गया है कि कैसे देवी पद्मा ने अपने वृद्ध पति पिप्पलाद के प्रति अटूट निष्ठा दिखाई और धर्मराज से वरदान प्राप्त किया।
राजा अनरण्य और पद्मा विवाह की कथा - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 33 01.06.2026 6:15
शिव पुराण के तैंतीसवें अध्याय में जानिए राजा अनरण्य, उनकी पुत्री पद्मा और ऋषि पिप्पलाद की अद्भुत कथा। इस अध्याय में धर्म, त्याग, कुल रक्षा और भाग्य की गहरी शिक्षा मिलती है। सुनिए शिव पुराण अध्याय 33 हिंदी में और जानिए कैसे राजा अनरण्य ने अपने कुल की रक्षा के लिए कठिन निर्णय लिया। ✨ इस वीडियो में: राजा अनरण्य की कथा देवी पद्मा का विवाह ऋषि पिप्पलाद की कहानी धर्म और त्याग का महत्व शिव पुराण हिंदी क...
वशिष्ठ मुनि का उपदेश - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 32 24.05.2026 6:25
शिव पुराण के बत्तीसवें अध्याय में महर्षि वशिष्ठ हिमालय को भगवान शिव के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराते हैं। इस अध्याय में शिव-पार्वती विवाह का महत्व, भगवान शिव की महिमा और देवी पार्वती के दिव्य स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है। महर्षि वशिष्ठ बताते हैं कि भगवान शिव स्वयं सृष्टि के पालनकर्ता और परमेश्वर हैं तथा देवी पार्वती आदिशक्ति हैं। यह अध्याय शिवभक्तों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक है।
सप्तऋषियों ने हिमालय और मैना को समझाया | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 31 17.05.2026 9:33
शिव पुराण के इकतीसवें अध्याय में सप्तऋषियों का हिमालय के घर आगमन और देवी मैना को समझाने की कथा वर्णित है। इस अध्याय में सप्तऋषि हिमालय और मैना को भगवान शिव की महिमा बताते हैं और समझाते हैं कि पार्वती का विवाह शिवजी से ही होना चाहिए। इस कथा में तारकासुर के अत्याचार, शिव-पुत्र की आवश्यकता, पार्वती की तपस्या और शिव-पार्वती विवाह के दिव्य कारण का वर्णन मिलता है। shiv puran adhyay 31, shiv puran chapte...
ब्राह्मण वेष में पार्वती के घर गए शिव | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 30 11.05.2026 5:07
शिव पुराण के तीसवें अध्याय में भगवान शिव ब्राह्मण वेष धारण करके शैलराज हिमालय के घर जाते हैं। वहाँ वे हिमालय को पार्वती और शिव विवाह के विषय में परखते हैं और शिवजी के गुण-दोषों की चर्चा करते हुए हिमालय की परीक्षा लेते हैं। इस अध्याय में भगवान शिव की लीला, हिमालय की भक्ति, पार्वती की पहचान और शिव-पार्वती विवाह से पहले की दिव्य परीक्षा का वर्णन मिलता है।
शिवजी द्वारा हिमालय से पार्वती को मांगना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 29 26.04.2026 7:27
शिव पुराण के उनतीसवें अध्याय में भगवान शिव द्वारा हिमालय से माता पार्वती का हाथ मांगने की अद्भुत कथा वर्णित है। इस अध्याय में शिवजी की लीला, उनकी माया और पार्वती जी के प्रति उनके दिव्य प्रेम का सुंदर वर्णन मिलता है। इस कथा में बताया गया है कि कैसे भगवान शिव नट रूप धारण करके हिमालय और मैना की परीक्षा लेते हैं, और अंत में उनके मन में पश्चाताप उत्पन्न होता है। यह अध्याय भक्ति, श्रद्धा और भगवान की लील...
शिव-पार्वती संवाद और विवाह का निर्णय | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 28 19.04.2026 5:32
शिव पुराण के अट्ठाईसवें अध्याय में भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण संवाद का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में पार्वती जी अपने पूर्व जन्म, तपस्या और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की इच्छा को स्पष्ट करती हैं। भगवान शिव इस संवाद में सृष्टि के गहरे रहस्य, प्रकृति और पुरुष के संबंध, तथा माया और ब्रह्म के तत्व को समझाते हैं। अंततः वे पार्वती जी की इच्छा स्वीकार करते हैं और विवाह क...
पार्वती जी का क्रोध और शिव का प्रकट होना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 27 12.04.2026 8:45
शिव पुराण के सत्ताईसवें अध्याय में देवी पार्वती के अद्भुत धैर्य, भक्ति और भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में पार्वती जी एक ब्राह्मण के रूप में आए भगवान शिव की परीक्षा के दौरान उनके अपमान को सहन नहीं करतीं और क्रोध में उन्हें फटकारती हैं। इसी क्षण भगवान शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट होते हैं और पार्वती जी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी स्वीकार करने का व...
पार्वती को शिवजी से दूर रहने का आदेश | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 26 05.04.2026 7:13
शिव पुराण के छब्बीसवें अध्याय में भगवान शिव, ब्राह्मण के वेश में माता पार्वती की परीक्षा लेते हैं। वे पार्वती को समझाने का प्रयास करते हैं कि शिवजी उनके योग्य पति नहीं हैं और उन्हें शिव से दूर रहना चाहिए। इस अध्याय में शिवजी अपने ही स्वरूप की निंदा करते हुए पार्वती की भक्ति और दृढ़ता को परखते हैं। पार्वती देवी इन सब बातों को सुनकर भी अपने संकल्प से विचलित नहीं होतीं।
शिवजी ने ली पार्वती की तपस्या की परीक्षा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 25 30.03.2026 5:48
शिव पुराण के पच्चीसवें अध्याय में भगवान शिव स्वयं ब्राह्मण रूप धारण कर देवी पार्वती की कठोर तपस्या की परीक्षा लेने आते हैं। पार्वती जी अपने पूर्व जन्म (सती) का स्मरण करती हैं और बताती हैं कि वे केवल भगवान शिव को ही पति रूप में प्राप्त करना चाहती हैं। तीन हजार वर्षों की कठोर तपस्या के बाद भी जब शिवजी प्रकट नहीं होते, तो पार्वती अग्नि में प्रवेश करने का निश्चय करती हैं। किंतु उनकी तपस्या की शक्ति से...
सप्तऋषियों ने ली पार्वती की परीक्षा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 24 22.03.2026 9:34
शिव पुराण के चौबीसवें अध्याय में सप्तऋषि देवी पार्वती की तपस्या की परीक्षा लेते हैं। वे नारद मुनि की निंदा करते हुए पार्वती को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं। लेकिन देवी पार्वती अटल विश्वास के साथ कहती हैं कि वे केवल भगवान शिव को ही पति रूप में स्वीकार करेंगी। यह अध्याय गुरु भक्ति, दृढ़ निश्चय और अटूट श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण है। 📌 इस वीडियो में जानिए: सप्तऋषि क्यों आए? नारद की निंदा क्यों की गई?...
देवताओं ने शिव से किया विवाह का अनुरोध | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 23 16.03.2026 9:30
शिव पुराण के तेईसवें अध्याय में देवता भगवान शिव से पार्वती जी से विवाह करने का निवेदन करते हैं। भगवान शिव विवाह को एक बंधन बताते हैं और समझाते हैं कि कैसे काम, क्रोध और मोह तपस्या में बाधा डालते हैं। फिर भी भक्तों की रक्षा के लिए वे पार्वती से विवाह करने का निर्णय लेते हैं। 📌 इस वीडियो में जानिए: शिव विवाह को बंधन क्यों कहते हैं? शिव का वैराग्य भाव क्या है? भक्तों के लिए शिव क्या त्याग करते हैं?
देवताओं का शिवजी के पास जाना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 22 09.03.2026 6:10
शिव पुराण के बाईसवें अध्याय में देवताओं पर आए संकट का वर्णन मिलता है। तारकासुर के अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में जाते हैं। भगवान विष्णु, ब्रह्मा और अन्य देवताओं के साथ मिलकर शिवजी से प्रार्थना की जाती है कि वे पार्वती जी से विवाह करें ताकि उनके पुत्र द्वारा तारकासुर का वध हो सके। यह अध्याय भक्ति, श्रद्धा और ईश्वर की शरणागति का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। 📌 इस वीडियो में...
पार्वती की तपस्या - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 21 01.03.2026 5:55
शिव पुराण का इक्कीसवां अध्याय देवी पार्वती की अद्भुत, कठोर और अलौकिक तपस्या का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के संकल्प के साथ पार्वती सांसारिक सुखों का त्याग कर गंगोत्री तीर्थ में घोर तपस्या आरंभ करती हैं। वे पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जप करती हैं। फलाहार से प्रारंभ होकर पत्तों के त्याग और अंततः निराहार साधना तक उनकी तपस्या बढ़ती जाती है। भोजन त्...
शिवजी के वियोग में पार्वती का शोक और तपस्या का आरंभ - शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 20 22.02.2026 6:52
शिव पुराण का बीसवां अध्याय देवी पार्वती के गहन शोक, विरह और आत्मचिंतन का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन प्रस्तुत करता है। कामदेव के भस्म होने के बाद पार्वती का हृदय शिव-वियोग से व्याकुल हो उठता है। यह अध्याय बताता है कि किस प्रकार देवी पार्वती सांसारिक सुखों से विरक्त होकर भगवान शिव को पुनः प्राप्त करने हेतु कठोर तपस्या का संकल्प लेती हैं। इस अध्याय में भक्ति, वैराग्य, आत्मसंयम और तप की महिमा का विस्तार से...
शिव क्रोधाग्नि की शांति- शिव पुराण - कामदेव भस्म कथा | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 19 15.02.2026 2:53
शिव पुराण का उन्नीसवाँ अध्याय बताता है कि कैसे भगवान शिव के तीसरे नेत्र से उत्पन्न क्रोधाग्नि से कामदेव भस्म हो गए और ब्रह्मा जी ने उस अग्नि को समुद्र में सुरक्षित रखकर सृष्टि की रक्षा की। यह अध्याय शिव के रौद्र और करुणामय स्वरूप का अद्भुत वर्णन करता है। शिव पुराण अध्याय 19 शिव क्रोधाग्नि की शांति कामदेव भस्म कथा भगवान शिव तीसरा नेत्र शिव पुराण हिंदी शिव क्रोध कथा समुद्र में क्रोधाग्नि ब्रह्मा और...
कामदेव का भस्म होना - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 18 08.02.2026 7:11
शिव पुराण का अठारहवाँ अध्याय एक अत्यंत मार्मिक और दिव्य प्रसंग प्रस्तुत करता है, जिसमें कामदेव भगवान शिव को मोहित करने के प्रयास में उनके तीसरे नेत्र की अग्नि से भस्म हो जाते हैं। इस अध्याय में भगवान शिव की कठोर तपस्या, कामदेव द्वारा चलाए गए बाणों का निष्फल होना, रति का विलाप तथा देवताओं की करुण प्रार्थना का विस्तार से वर्णन मिलता है। यह कथा वैराग्य, संयम, तपस्या और अहंकार के नाश का गहरा आध्यात्मि...
कामदेव का शिव को मोहित करने के लिए प्रयाण | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 17 02.02.2026 4:37
शिव पुराण का सत्रहवाँ अध्याय कामदेव के उस महत्वपूर्ण प्रयाण का वर्णन करता है, जिसमें देवताओं के कष्ट निवारण हेतु वे भगवान शिव को मोहित करने का प्रयास करते हैं। इस अध्याय में तारकासुर के अत्याचार, देवी पार्वती की तपस्या, इंद्रदेव की चिंता तथा शिव-पार्वती विवाह की पृष्ठभूमि का गूढ़ आध्यात्मिक विवरण मिलता है। -- Shiv Puran Adhyay 17 में कामदेव को देवताओं द्वारा शिव को मोहित करने का कार्य सौंपा जाता ह...
तारक का स्वर्ग त्याग शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 16 25.01.2026 5:37
शिव पुराण का षोडशवाँ अध्याय तारकासुर के पतन की दिशा में एक निर्णायक मोड़ प्रस्तुत करता है। भगवान शिव के आदेश से तारकासुर स्वर्ग का त्याग करता है और पृथ्वी पर शोनित नगर में शासन प्रारंभ करता है। देवता पुनः स्वर्गलोक लौटते हैं और इंद्र के नेतृत्व में स्वर्ग का संतुलन स्थापित होता है। यह अध्याय अहंकार, वरदान के दुरुपयोग और धर्म के मार्ग से विचलन के परिणामों को स्पष्ट करता है। शिव पुराण की यह कथा दर्श...
तारकासुर का जन्म व उसका तप - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 15 18.01.2026 5:51
शिव पुराण का पंद्रहवाँ अध्याय तारकासुर के जन्म, उसके भयानक तप और देवताओं पर उसके बढ़ते अत्याचार का विस्तृत वर्णन करता है। इस अध्याय में बताया गया है कि कैसे कठोर तपस्या से तारकासुर ने अपार शक्तियाँ प्राप्त कीं, देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और सम्पूर्ण त्रिलोक भयभीत हो उठा। यह अध्याय अहंकार, शक्ति और तप के दुरुपयोग के गहरे आध्यात्मिक संदेश को उजागर करता है तथा यह दर्शाता है कि अधर्...
तारकासुर का जन्म व उसका तप - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 14 11.01.2026 5:59
शिव पुराण का पंद्रहवाँ अध्याय तारकासुर के जन्म, उसके भयानक तप और देवताओं पर उसके बढ़ते अत्याचार का विस्तृत वर्णन करता है। इस अध्याय में बताया गया है कि कैसे कठोर तपस्या से तारकासुर ने अपार शक्तियाँ प्राप्त कीं, देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और सम्पूर्ण त्रिलोक भयभीत हो उठा। यह अध्याय अहंकार, शक्ति और तप के दुरुपयोग के गहरे आध्यात्मिक संदेश को उजागर करता है तथा यह दर्शाता है कि अधर्...
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