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Shiv Puran Katha in Hindi

Religion HI ↓ 81 episodes

शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,

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Jul 5, 2026

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Episodes

पार्वती-शिव का दार्शनिक संवाद | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 13 04.01.2026

यह अध्याय शिव पुराण के उस अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग का वर्णन करता है जहाँ देवी पार्वती भगवान शिव की कठोर तपस्या, सेवा और भक्ति द्वारा उनके हृदय को जीत लेती हैं। देवताओं के कल्याण हेतु पार्वती-शिव का दिव्य संयोग आवश्यक था, क्योंकि तारकासुर के वध के लिए शिव के तेजस्वी पुत्र का जन्म होना था। इस अध्याय में पार्वती की निष्ठा, कामदेव का भस्म होना, शिव की समाधि, और अंततः देवी पार्वती की तपस्या की सिद्धि का...

शिव पुराण - पार्वती को सेवा में रखने के लिए हिमालय का शिव को मनाना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 12 28.12.2025

बारहवें अध्याय में हिमालय द्वारा भगवान शिव को पार्वती की सेवा के लिए मनाने की पवित्र कथा सुनाई गई है। इस प्रसंग में हिमालय का भक्तिभाव, शिवजी की तपस्या, और पार्वती की महाशक्ति का गूढ़ स्वरूप उजागर होता है। कथा बताती है कि क्यों शिवजी तपस्वियों के लिए स्त्री–संग को बाधक मानते हैं, और कैसे हिमालय अपने दलित हृदय से शिवजी से विनती करते हैं। यह अध्याय भक्ति, तप, विरक्ति, शिव–पार्वती संबंधों और हिमालय क...

शिव पुराण - भगवान शिव की गंगावतरण तीर्थ में तपस्या | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 11 22.12.2025

भगवान शिव की गंगावतरण तीर्थ में तपस्या से जुड़ी इस पवित्र कथा में हिमालय पुत्री पार्वती, गिरिराज हिमालय और देवाधिदेव महादेव के दिव्य मिलन का अद्भुत वर्णन मिलता है। जब महादेव ने पार्वती के जन्म का समाचार सुना, तब उन्होंने गंगोत्री के पावन स्थल पर एकांत में कठोर तप करने का निश्चय किया। इस अध्याय में शिवजी की एकाग्रचित्त साधना, हिमालय द्वारा की गई भक्ति-पूजा, देवताओं की उपस्थितियाँ और गंगा के उद्गम स...

शिव पुराण - भौम जन्म | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 10 14.12.2025

“शिव पुराण के दसवें अध्याय ‘भोम्-जन्म’ में वर्णित कथा भगवान शिव के तप, समाधि, सती-वियोग, दिव्य शिशु ‘भोम्’ के जन्म और पृथ्वी माता द्वारा उसके पालन-पोषण की अद्भुत लीला को प्रकट करती है। इस अध्याय में शिव के अत्यंत पावन यश, उनके ध्यान, असंख्य वर्षों की समाधि, उनके मस्तक से गिरे पसीने से बालक भोम् का प्रकट होना और फिर उस दिव्य बालक का काशी जाकर कठोर तपस्या से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का वर्णन ह...

शिव पुराण – पार्वती का स्वप्न | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 9 07.12.2025

“नवां अध्याय — पार्वती का स्वप्न” शिव पुराण का अत्यंत पवित्र अध्याय है, जिसमें देवी पार्वती के दिव्य जन्म, उनके भविष्य के संकेत, भगवान शिव से विवाह के पूर्व के शुभ स्वप्न और माता मैना-हिमालय की भावनाओं का दिव्य वर्णन मिलता है। इस अध्याय में बताया गया है कि देवी पार्वती को ब्रह्ममुहूर्त में एक अद्भुत स्वप्न प्राप्त होता है जिसमें एक तपस्वी ब्राह्मण (भगवान शिव का ही स्वरूप) उन्हें उनके भविष्य—‘शिवप्...

शिव पुराण - मैना–हिमालय संवाद | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 8 01.12.2025

“ शिव पुराण ” के आठवें अध्याय में माता मैना और हिमालय के बीच हुआ दिव्य संवाद दर्शाया गया है, जिसमें माता मैना अपनी पुत्री पार्वती के भविष्य और विवाह को लेकर चिंतित होती हैं। देवर्षि नारद की बातों को याद करते हुए वे हिमालय से पार्वती के लिए एक सुयोग्य, शुभ लक्षणों वाले वर की खोज करने का आग्रह करती हैं। हिमालय उन्हें सांत्वना देते हुए बताते हैं कि यदि पार्वती को सच्चा सुख पाना है, तो उन्हें भगवान शि...

शिव पुराण - पार्वती का नामकरण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 7 23.11.2025

शिव पुराण का यह अध्याय देवी पार्वती के जन्म, नामकरण और भगवान शिव से उनके दिव्य संबंध की कथा को विस्तारपूर्वक वर्णित करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे देवी जगदंबिका ने हिमालय और मैना के घर जन्म लेकर पार्वती के रूप में अवतार लिया। बाल्यकाल में पार्वती अत्यंत सुंदर, तेजस्वी और गुणों से युक्त थीं, जिससे हिमालय और मैना अत्यंत प्रसन्न थे। नारद मुनि ने हिमालय को भविष्यवाणी दी कि पार्वती का विवाह स्वयं...

शिव पुराण – पार्वती जन्म | श्रीरुद्र संहिता - तृतीय खंड | अध्याय 6 16.11.2025

“शिव पुराण – छठा अध्याय: पार्वती जन्म” में वर्णन है कि किस प्रकार देवी जगदंबा ने हिमालय और मैना के घर जन्म लेकर माता पार्वती का दिव्य अवतार धारण किया। भगवती ने पहले हिमालय के हृदय में प्रवेश किया और फिर मैना के गर्भ से जन्म लिया। उनके जन्म के समय पूरा ब्रह्मांड प्रकाशमय हो गया — मंद-मंद हवा चलने लगी, पुष्पवृष्टि होने लगी और सभी देवता हिमालय के घर दर्शन हेतु आए। देवी ने अपने दिव्य स्वरूप में माता म...

शिव पुराण कथा – मैना और हिमालय की तपस्या से देवी जगदंबा का वरदान | 10.11.2025

शिव पुराण के श्रीरुद्र संहिता के पाँचवें अध्याय में हिमालय और उनकी पत्नी मैना की अद्भुत तपस्या का वर्णन मिलता है। जब देवी सती ने अपने शरीर का त्याग किया और जगदंबा अंतर्धान हुईं, तब श्रीहरि विष्णु ने हिमालय और मैना को देवी जगदंबा की आराधना करने का उपदेश दिया। दोनों ने सताईस वर्षों तक कठोर तप किया — चैत्रमास से प्रारंभ होकर नवमी और अमावस्या को व्रत, पूजा, दान और ब्राह्मण सेवा के माध्यम से उन्होंने द...

शिव पुराण – देवी जगदंबा का दिव्य स्वरूप और देवताओं की प्रार्थना | श्रीरुद्र संहिता - तृतीय खंड - अध्याय 4 03.11.2025

शिव पुराण के श्रीरुद्र संहिता के इस अध्याय में बताया गया है कि जब सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर योगाग्नि द्वारा अपना शरीर त्याग दिया, तब समस्त देवता विष्णु जी के साथ हिमालय के पास पहुँचे। उन्होंने हिमालय से प्रार्थना की कि देवी सती पुनः उनके घर जन्म लें और भगवान शिव की अर्धांगिनी बनें। श्रीविष्णु के वचनों से हिमालय अत्यंत प्रसन्न हुए और देवी जगदंबा की आराधना की। इस...

शिव पुराण – देवताओं का हिमालय के पास जाना | श्रीरुद्र संहिता - तृतीय खंड | अध्याय 3 26.10.2025

शिव पुराण के श्रीरुद्र संहिता के इस अध्याय में बताया गया है कि जब सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर योगाग्नि द्वारा अपना शरीर त्याग दिया, तब समस्त देवता विष्णु जी के साथ हिमालय के पास पहुँचे। उन्होंने हिमालय से प्रार्थना की कि देवी सती पुनः उनके घर जन्म लें और भगवान शिव की अर्धांगिनी बनें। श्रीविष्णु के वचनों से हिमालय अत्यंत प्रसन्न हुए और देवी जगदंबा की आराधना की। इस...

शिव पुराण – पार्वती, सीता और राधा का दिव्य जन्म | श्रीरुद्र संहिता (तृतीय खंड) 20.10.2025

शिव पुराण के श्रीरुद्र संहिता तृतीय खंड के इस अध्याय में बताया गया है कि पितरों की तीन कन्याएँ — मैना, धन्या और कालावती — शाप से मुक्त होकर पुनः अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त करती हैं। मैना की पुत्री पार्वती कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव की प्राणवल्लभा बनती हैं, धन्या की पुत्री सीता श्रीरामचंद्र की पत्नी बनती हैं, और कालावती की पुत्री राधा श्रीकृष्ण के स्नेह में बंधकर उनकी प्रिया बनती हैं। यह कथा शि...

शिव पुराण - हिमालय विवाह | श्रीरुद्र संहिता | (तृतीय खंड) 12.10.2025

“शिव पुराण – श्रीरुद्र संहिता” के इस प्रथम अध्याय हिमालय विवाह में बताया गया है कि देवी सती, जिन्होंने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में शरीर त्याग किया था, पुनर्जन्म लेकर हिमवान पर्वत की पुत्री ‘मैना’ के रूप में जन्मीं। यह अध्याय इस दिव्य कथा का आरंभ है, जिसमें ब्रह्माजी नारद मुनि के प्रश्नों का उत्तर देते हुए हिमालय पर्वत की महिमा, उसकी पवित्रता, और देवताओं के आगमन का सुंदर वर्णन करते हैं। देवताओं और प...

शिव पुराण - दक्ष का यज्ञ को पूर्ण करना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 42 06.10.2025

शिव पुराण के सती खंड में देवी सती और भगवान शिव की दिव्य कथा का वर्णन है। इसमें दक्ष यज्ञ, देवी सती का आत्मत्याग, भगवान शिव का क्रोध, वीरभद्र का प्रकट होना और अंततः दक्ष का पुनर्जीवन शामिल है। यह कथा भक्तों को भक्ति, धैर्य और शिव कृपा की अद्भुत महिमा का अनुभव कराती है। इस अध्याय का पाठ करने से पापों से मुक्ति, यश, स्वर्ग और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।" TAGS - शिव पुराण, सती खंड, दक्ष यज्ञ, द...

शिव पुराण - शिव द्वारा दक्ष को जीवित करना - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 41 29.09.2025

शिव द्वारा दक्ष को पुनर्जीवित करने का अध्याय - इस अध्याय में भगवान शिव की करुणा और क्षमा की लीला का अद्भुत वर्णन है। दक्ष के यज्ञ-विध्वंस और उसके परिणामस्वरूप हुए विनाश के बाद सभी देवता, ऋषि-मुनि और विष्णु भगवान शिव से क्षमा और कृपा की याचना करते हैं। भगवान शिव प्रसन्न होकर यज्ञ को पूर्ण करते हैं, देवताओं के घावों को भरते हैं और दक्ष को जीवनदान देते हैं। यह कथा क्षमा, करुणा और पुनरुत्थान का गहरा स...

शिव पुराण - ब्रह्माजी का कैलाश पर शिवजी से मिलना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 40 21.09.2025

शिव पुराण के इस अध्याय में देवता और ऋषि-मुनि भगवान शिव के क्रोध को शांत करने के लिए विनम्रता से क्षमा याचना करते हैं। यह कथा दिखाती है कि केवल भगवान शिव की कृपा से ही विनाश से रक्षा संभव है। TAGS - शिव पुराण, भगवान शिव, शिव कथा, शिव पुराण अध्याय, शिव की कृपा, शिव की शरण, देवताओं की प्रार्थना, शिवजी की महिमा, शिव उपासना, क्षमा याचना . शिव पुराण, भगवान शिव की कथा, शिवजी का क्रोध, शिव की कृपा, देवताओ...

शिव पुराण - दधीचि का शाप और क्षुव पर अनुग्रह | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 39 14.09.2025

शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता के उनचालीसवें अध्याय में दधीचि ऋषि और क्षुव के विवाद, भगवान विष्णु की लीला तथा महर्षि दधीचि के शाप का अद्भुत प्रसंग मिलता है। इस कथा के श्रवण से अपमृत्यु का भय मिटता है, युद्ध में विजयश्री की प्राप्ति होती है और अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती है। TAGS शिव पुराण कथा, दधीचि का शाप, क्षुव पर अनुग्रह, भगवान शिव की कथा, श्रीरुद्र संहिता, पुराण कथा हिंदी में, अमृत कथा, मृत्यु...

शिव पुराण - दधीचि क्षुव विवाद | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 38 07.09.2025

शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता द्वितीय खंड के अड़तीसवें अध्याय में दधीचि और क्षुव के बीच विवाद का वर्णन है। इस कथा में अहंकार, श्राप, भगवान शिव की महिमा और महामृत्युंजय मंत्र की दिव्य शक्ति का गहन वर्णन मिलता है। यह अध्याय हमें सिखाता है कि शिव की भक्ति और तपस्या से ही मोक्ष और कल्याण संभव है। शिव पुराण कथा, दधीचि क्षुव विवाद, शिव पुराण अड़तीसवां अध्याय, महामृत्युंजय मंत्र की महिमा, शिव भक्ति, शिव पुर...

शिव पुराण - दक्ष का सिर काटकर यज्ञ कुंड में डालना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 37 01.09.2025

शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता – द्वितीय खंड का सैंतीसवां अध्याय दक्ष प्रजापति के अंत का वर्णन करता है। वीरभद्र ने यज्ञशाला में घुसकर सभी देवताओं को परास्त किया और अंत में दक्ष का सिर काटकर यज्ञ कुंड में डाल दिया। यह प्रसंग शिवजी के अपमान और सती माता के त्याग के परिणामस्वरूप दक्ष के विनाश की कथा है। #ShivPuran #ShivKatha #Veerbhadra #DakshaYagya #SatiMata #Mahadev #ShivParvati #HinduGranth #SanatanDha...

शिव पुराण - श्रीहरि और वीरभद्र का युद्ध | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 36 25.08.2025

शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता – द्वितीय खंड, छत्तीसवाँ अध्याय इस अध्याय में श्रीहरि विष्णु और वीरभद्र के बीच हुए भयानक युद्ध का वर्णन है। शिवजी के अपमान और देवी सती के अन्याय के कारण उत्पन्न यह संग्राम देवताओं और ऋषियों के लिए भयावह सिद्ध हुआ। वीरभद्र और महाकाली ने अनेक देवताओं और मुनियों को दंडित किया तथा उनकी करनी के अनुसार उन्हें परिणाम भोगना पड़ा। यह अध्याय हमें सिखाता है कि शिव और सती का अपमान क...

शिव पुराण - वीरभद्र का आगमन | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 35 18.08.2025

शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता के पैंतीसवें अध्याय में वीरभद्र के प्रकट होने और यज्ञ मण्डप में उनके आगमन का दिव्य वर्णन है। दक्ष के अहंकार और शिव का अपमान करने के दुष्परिणामस्वरूप जब यज्ञ विनाश के कगार पर पहुँचता है, तब वीरभद्र और महाकाली अपनी विशाल सेना के साथ प्रकट होकर यज्ञशाला की ओर बढ़ते हैं। भयभीत दक्ष और देवता श्रीहरि विष्णु की शरण में जाकर रक्षा की प्रार्थना करते हैं। यह अध्याय दर्शाता है कि श...

शिव पुराण - यज्ञ-मण्डप में भय और विष्णु से जीवन रक्षा की प्रार्थना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 34 11.08.2025

शिव पुराण श्रीरुद्र संहिता – द्वितीय खंड के इस चौंतीसवें अध्याय में, वीरभद्र और महाकाली की सेनाओं के दक्ष यज्ञ की ओर बढ़ने पर यज्ञमण्डप में फैले भय और अपशकुनों का वर्णन है। आकाशवाणी के माध्यम से दक्ष के पापों का उद्घाटन होता है और भगवान विष्णु से जीवन रक्षा की प्रार्थना की जाती है। यह कथा शिवभक्ति, धर्म और कर्मफल के गूढ़ संदेश को उजागर करती है। Join Email https://forms.gle/Pzk6o9Fts87jgth16 TAGS -...

शिव पुराण - वीरभद्र और महाकाली का यज्ञशाला की ओर प्रस्थान | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 33 03.08.2025

"तेँतीसवाँ अध्याय – वीरभद्र और महाकाली का यज्ञशाला की ओर प्रस्थान" इस अध्याय में भगवान शिव के आदेश पर वीरभद्र और महाकाली की विशाल सेना के साथ यज्ञ विनाश के लिए प्रस्थान का वर्णन है। शिवगणों, भूत-पिशाचों और नव दुर्गाओं सहित असंख्य शक्तियाँ भगवान शिव के अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए यज्ञशाला की ओर बढ़ती हैं। यह दृश्य शक्ति, भक्ति और न्याय का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। शिव पुराण कथा – Em...

शिव पुराण - शिवजी का क्रोध | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 32 28.07.2025

इस अध्याय में शिवजी के प्रचंड क्रोध का वर्णन है। जब सती माता ने यज्ञ में अपने अपमान से दुखी होकर देह त्याग दी, तब शिवगणों ने यह समाचार शिवजी को सुनाया। शिवजी अत्यंत क्रोधित हुए, उनकी जटा से वीरभद्र और महाकाली की उत्पत्ति हुई। वीरभद्र को आदेश दिया गया कि वह दक्ष यज्ञ को विध्वंस कर दे। इस अध्याय में क्रोध, न्याय और शिव की रौद्र लीला का वर्णन है। #शिवपुराण #बत्तीसवाअध्याय #शिवजीकाक्रोध #वीरभद्र #दक्ष...

शिव पुराण - 'श्रीरुद्राष्टकम' हिंदी अर्थ | स्तुति | श्रावण मास 25.07.2025

रुद्राष्टकम् भगवान शिव की स्तुति में रचित एक अद्भुत स्तोत्र है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। यह स्तुति शिव जी के निर्गुण, निर्विकल्प और परमेश्वर स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करती है। जो भी भक्त सच्चे मन से इसका पाठ करता है, उस पर भगवान शंकर की कृपा अवश्य होती है। 'श्री शिव रुद्राष्टकम' स्तुति का पाठ, जानिए इसका हिंदी अर्थ और महत्व भावपूर्ण उच्चारण के साथ रुद्राष्टकम् का पाठ प्रस्त...

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