Ramita Mehta
Nani Dadi Ki Kahaniyan
I'm here to share some of the best stories I heard and loved growing up in India.
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Episodes
दिनकरजी की रश्मि रथी सर्ग 6 अंतिम भाग 15.07.2021 14:11
आज सुने कि कैसे कर्ण अर्जुन को चुनौती देयत है दवंद युद्ध के लिए और कैसे मधुसूदन अर्जुन के रथ को कर्ण से बहुत दूर रखते हैं क्योंकि कर्ण इन्द्र के दिए हुए एकघनी अस्त्र को अर्जुन पर प्रयोग करने को उत्सुक है। अब केशव भीम के बेटे घटोत्कच को बोलते हैं कि शत्रु पक्ष को संभालो और घटोत्कच दानव पुत्र होने के कारण बहुत मायावी कार्य कर सकते थे। उन्होंने कौरव सेना मे हाहाकार मचा दिया। दुर्योधन को कर्ण से कहना...
दिनकरजी की रश्मि रथी सर्ग 6 भाग 3 11.07.2021 12:25
आज की कथा मे सुने कर्ण की वीरता का प्रदर्शन और फिर अभिमन्यु का वध, जयद्रथ का वध और भूरिश्रवा का वध। इनमे से कोई भी धर्म के अनुकूल न था। किन्तु अभी सब मे दानवता हवी था मानवता बहुत नीचे छूप गया था। जरूर सुने दिनकरजी के सशक्त लेखनी का प्रवाह।
दिनकरजी की रश्मि रथी सर्ग 6 भाग 2 08.07.2021 9:55
कुरुक्षेत्र का युद्ध शुरू हो चुका है। आज भीष्म पितामह घायल हो कर गिर चुके हैं। सभी बहुत दुखी हैं। तब कर्ण उनसे मिलने आटे हैं और उनसे युद्ध शुरू करने की अनुमति मांगते हैं। भीष्म पितामह उन्हे समझाते हैं कि युद्ध रोक लो। उनके और कर्ण के संवाद का आनंद लें। जरूर सुने।
रश्मि रथी सर्ग 6 भाग 1 05.07.2021 12:11
सर्ग 6 मे दिनकरजी बहुत सारे प्रश्न रखते हैं। पौरुष सिर्फ मरने और मरने में है या युद्ध से सब बर्बाद न हो, लाखों जानें न जाएं इसीलिए अपनी बलिदान देने में है? क्या मन इस अन्याय स्वीकार कर पाएगा कि कौरव सुई की नोक जितनी जममें भी न देंगे बिना युद्ध किए, फिर भी पांडव उसे बर्दाश्त करले और फिर एक बार वन चले जाएं - सिर्फ युद्ध के विनाश को रोकने के लिए? मनुष्य के अंदर मानवता की सुद्धा है पर फिर भी दानवता ज्...
दिनकर जी की रश्मि रथी सर्ग 5 अंतिम भाग 02.07.2021 8:13
कुंती चाहती हैं कि कर्ण उनके साथ चले और अपने भाइयों के वाढ का पाप न लें पर कर्ण दुर्योधन को नहीं छोड़ सकते हैं। तो वे कुंती को वचन देते हैं कि कुंती हमेशा पाँच पूतों की माता रहेंगी। कर्ण सिवा अर्जुन के किसी और भाई को नहीं मारेंगे और अर्जुन अगर मार गए तो कर्ण कुंती के पास आ जाएंगे। सुने दिनकरजी की सुंदर अभिव्यक्ति ।
दिनकरजी की रश्मि रथी सर्ग 5 भाग 5 26.06.2021 9:58
आपने सुना कि कुंती को सामने देखकर कर्ण के अंदर का आक्रोश बाहर आ जाता है। कुंती उन सब बातों को सुनकर क्या जवाब देती हैं दिनकरजी की सुन्दर अभिव्यक्ति मे सुने। कुंती कहती हैं कि मैं पूजा मे चढ़े फूल को उठाने नहीं आई हूँ। मैं तो अपने पुत्र को ढूढने आई हूँ। आगे सुने।
दिनकरजी की रश्मि रथी - सर्ग 5 भाग 4 23.06.2021 12:04
आज कर्ण के दुख की सीमाएं टूट गई हैं। कुंती की बात सुनकर जिंदगी भर ढोते हुए दुखों का गुब्बार फूट पड़ता है। कर्ण के भावों का दिनकरजी ने बहुत सुंदर वर्णन किया है। जरूर सुने।
दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग 5 भाग 3 19.06.2021 8:40
कुंती व कर्ण का वार्तालाप - दिनकर जी कल्पना से। जरूर सुने।
दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग 5 भाग 2 19.06.2021 12:09
आज कुंती बहुत व्याकुल है। कल से कुरुक्षेत्र का युद्ध शुरू होने वाला है। उसका ज्येष्ट पुत्र कर्ण शत्रु की ओर से अपने ही अनुजों से लड़ेगा। यह बात कुंती बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। फिर बहुत सोच समझ कर कर्ण से मिलने नदी तट पर पहुचती है और कर्ण से अपनी व्यथा कहती है। दिनकरजी की इतना सुंदर चित्र खीचा है कि आप के आखों के सामने महाभारत की कहानी जीवित हो जाती है। जरूर सुने।
दिनकर जी की रश्मि रथी - पंचम सर्ग 16.06.2021 12:09
अब तक आपने सुना कि इन्द्र देवता विप्र का वेश धारण कर कर्ण से कवच और कुंडल मांग कर ले जाते हैं। कल से महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला है। कुंती बहुत व्याकुल है कि उसी के पुत्र आपस में एक दूसरे को मारेंगे । क्योंकि कर्ण उसका ज्येषठ पुत्र है जो कौरवों की ओर से युद्ध करेगा। कुछ सोचकर वह नदी तट पर कर्ण से मिलने जाती हैं। आगे का वर्णन दिनकरजी के शब्दों मे सुने।
दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग 4 अंतिम भाग 14.06.2021 13:45
कर्ण अपने भाग्य दोष से दुखी हैं। समझ नहीं पाते हैं कि कवच और कुंडल देकर भी प्रकृति ने उनके भाग्य में हमेशा बाधा ही क्यों लिखा है। कर्ण कहते हैं कि शायद उनका जनम इसी उद्देशय से हुआ है कि आदर्श पुरुष कैसे होते हैं इसका जीवित उदाहरण वे दुनिया को दे सकें। कितना भी दुख आए वे डरेंगे नहीं न ही सत्य के पथ से कभी डिगेंगे। जब वे कृपाण से छीलकर अपने कवच और कुंडल को अपने शरीर से अलग कर इन्द्र के हाथ मे धर देत...
दिनकर जी की रश्मि रथी - 11.06.2021 12:01
रश्मि रथी मे आज सुने दिनकर जी के लेखनी की भाव भरे मर्म स्पर्शी उन वर्णन को जिसमे इन्द्र ब्राह्मण बनकर कर्ण से कवच और कुंडल माँग लेते हैं और कर्ण के व्यथा भरे उदगार। जरूर सुने।
रश्मि रथी सर्ग 3 का अंतिम भाग व सर्ग 4 का पहला भाग 10.06.2021 17:33
रश्मि रथी महाकाव्य मे आज उस अंश को सुनते हैं जिसमे कर्ण कृष्ण को बात रहे हैं कि क्यों वे दुर्योधन को न छोड़ पाएंगे। और कृष्ण उनकी बंधुता का साधुवाद करते हैं। चौथे सर्ग मे कर्ण की दान वीरता का वर्णन हैं। दिनकर जी ने दान की बहुत सुंदर व्याख्या की है। जो समझने और सीखने योग्य है। अर्जुन इन्द्र के पुत्र थे। कहीं वे कुरुक्षेत्र के युद्ध मे कर्ण द्वारा मारे न जाएं इसीलिए इन्द्र ब्राह्मण का वेश धारण कर कर्...
दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग 3 भाग 3 08.06.2021 10:17
आपने पिछली बार सुना कि जब दुर्योधन कृष्ण भगवान को बांधने का दुःसाहस करता है तो भगवान अपना विराट रूप दिखाते हैं। इस बार सुने आगे का महाकाव्य। कृष्ण जब सभा से बाहर निकाल रहे थे उन्हे वहाँ कर्ण मिला। उन्होंने उसे अपने रथ मे बिठा लिया और उसे समझाने लगे कि युद्ध बहुत भयानक होगा। दुर्योधन कर्ण के दम पर ही युद्ध लड़ने को तैयार है। किन्तु कर्ण तो पांडवों का ज्येषठ भ्राता है उसे उनके साथ होना चाहिए। उसका रा...
दिनकर जी की रश्मि रथी महाकाव्य - सर्ग ३ भाग २ 06.06.2021 9:13
रश्मि रथी महाकाव्य को आगे सुनते हैं। कर्ण और ऋषि परशुराम दोनों बहुत दुखी हैं। ऋषिवर को कर्ण की जाति का पता चल गया है। उन्होंने उससे ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया है। इस बात से कर्ण जितना दुखी है उतना ही दुखी ऋषिवर भी हैं। पर अभिशप्त व्यक्ति गुरुकुल मे नहीं रह सकता इसीलिए उसे आश्रम से जाना पड़ता है. कहानी नई मोड़ लेती है। पांडव १३ वर्ष का वनवास पूरा करके आए हैं। कृष्ण उनके दूत बनकर हस्तिनापुर जाते हैं और...
दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग २ भाग 3 04.06.2021 13:00
आज के संवाद बहुत ही भावुक हैं। परशुरामजी की रक्त के स्पर्श से नींद खुलती है वे दुखी होते हैं कि कर्ण ने इतनी पीड़ा सही। फिर वे बहुत क्रोधित हो जाते हैं कि एक ब्राह्मण इतना सहनशील नहीं हो सकता। तुम सच बताओ तुम कौन हो वरना मेरे श्राप से अभी भसम हो जाओगे। कर्ण ग्लानि और दुख से कहते हैं कि मैं सूत पुत्र हूँ। मुझे आपसे धनुर विद्या सीखने की बड़ी लालसा थी इसीलिए झूठ का सहारा लेना पड़ा। गुरु बहुत दुखी होते ह...
कबीरजी की शिक्षा 31.05.2021 10:55
कबीर जी के दोहे बहुत अच्छी शिक्षा देते हैं। जीने की राह बताते हैं। जीवन में गुरु के महत्व को बताते हैं जो हमारी अज्ञानता को दूर करेन, वे गुरु।
रश्मि रथी सर्ग २ भाग २ 31.05.2021 8:41
ऋषि परशुराम कर्ण के गोद मे सिर रखकर सो रहे हैं। दोपहर का वक्त है। कर्ण गुरु की बातों को मन मे दोहरा रहे हैं कि जबतक समाज, देश व विश्व मे ज्ञानी की पूजा नहीं होगी और राजा पूजे जाएंगे तबतक इस पृथ्वी से दुखों का अंत नहीं होगा। रिशिवर कहते हैं कि तलवार उसी के हाथ मे दिया जा सकता है जो वीर और कोमल दोनों हो। कर्ण सोचते हैं कि ऋषि उनके तीर के करतब देखकर कितने खुश होते है और कितना आशीर्वाद देते हैं कि तुम...
दिनकरजी की रश्मि रथी - द्वितीय सर्ग - १ ला भाग 26.05.2021 11:10
द्वितीय भाग के प्रारंभ मे ऋषि परशुरामजी के आश्रम का वर्णन है। जहाँ एक तरफ आश्रम मे रहने वाली सभी वस्तुएं हैं, पशु हैं और दूसरी तरफ सभी औज़ार हैं जैसे यहाँ शस्त्रों की शिक्षा डी जा रही हो। कर्ण एक अच्छे गुरु से तीर धनुष चलाना सीखना चाहते हैं। उस समय जाति-पांति का भेदभाव समाज मे बहुत था। कर्ण को सूत पुत्र होने के कारण द्रोणाचार्यजी ने शिष्य बनाने से मना कर दिया था। परशुरामजी सिर्फ ब्राह्मण को अस्त्र...
दिनकर जी की रश्मि रथी - प्रथम सर्ग अंतिम भाग 22.05.2021 8:46
आपने अभी तक सुना था कि कर्ण किस प्रकार सामने आकर अर्जुन तो द्वनद युद्ध के लिया ललकार तो कृपाचार्य जी ने कहा कि अगर अर्जुन से लड़ना हो तो पहले कहीं के राजा बनो। आज की कविता यहाँ से शुरू होती है। कर्ण यह सुनकर हैरान रह गए और क्या जवाब दे समझ न पाए। तब दुर्योधन ने आगे बढ़कर कहा कि ऐसे वीर पुरुष का अपमान उचित नहीं है। मैं कर्ण को अंग देश का राजा बनाता हूँ। कर्ण दुर्योधन की इस बड़प्पन से चकित व ऋणी हो गए।...
दिनकर जी के महाकाव्य रश्मि रथी का प्रथम सर्ग - भाग ३ और ४ 21.05.2021 4:54
रश्मि रथी के प्रथम सर्ग के ३ रे व ४ थे भाग मे कवि ने कर्ण के दुख व आक्रोश का वर्णन किया है। सारी सभा कर्ण के करतबों को देखकर अचंभित रह गई किन्तु द्रोणा ने कहा कि अपना परिचय दो। अर्जुन बहुत बड़े खानदान से ताल्लुक रखते हैं और हर किसी से युद्ध नहीं कर सकते। कर्ण तो सुतपुत्र थे, उन्होंने कहा कि मेरी भुजाओ से मेरा परिचय पूछो पर द्रोणा ने कहा कि अगर आपको अर्जुन से लड़ना ही है तो कहीं के राजा बन जाओ फिर यु...
दिनकर जी की महाकाव्य रश्मि रथी - प्रथम सर्ग - भाग १ और २ 21.05.2021 6:16
अगर आप को दिनकरजी के महाकाव्य रश्मि रथी को पढ़ने का मौका न लगा हो तो जरूर सुने। रश्मि रथी कर्ण के शूर वीरता व दान वीरता का वर्णन है, उसके जीवन मे आने वाले हर उतार चढ़ाव का वर्णन है। अगर आप हिन्दी भाषा के प्रेमी है तो आपको बहुत अच्छा लगेगा। दिनकर जी बहुत ही सधे हुए लेखक व कवि थे। प्रथम भाग मे दिनकरजी ने इस बात पर जोर दिया है कि पुष्प वन मे खिले या राजमहल के उद्यान मे, दोनों फूलों का महत्व समान होता ह...
महाभारत की अंतिम कहानी ४० प्रकरण 20.05.2021 7:44
आज महाभारत की कहानी खतम होती है। जीवन विचित्र है। पांचों भाई दुर्योधन से पंच गाँव भी नहीं ले पाए और युद्ध मे सब कुछ जीतकर भी जीत मे मज़ा न था बल्कि सभी के मन के किसी कोने मे अथाह पीड़ा थी।
महाभारत ३९ प्रकरण - नेवले की कहानी 09.05.2021 11:18
युधिष्ठिर अश्वमेध यज्ञ कर रहे हैं। सभी देशों के राजकुमार वहाँ उपस्थित हैं। सभी को बहुत सारे भेंट दिए गए हैं। गरीबों को यथोचित दान दिया गया है। ऐसे मे अंहकार मन मे आना स्वाभाविक है कि यज्ञ बहुत अच्छे से हो गया। इतने में वहाँ एक नेवला आता है जिसका एक तरफ का शरीर स्वर्णिम है और दूसरे तरफ का सामान्य। नेवला वहाँ उपस्थित लोगों के बीच मे आकर लोटने लगता है और हसने लगता है। आगे सुने
कबीर के खजाने 08.05.2021 8:42
कबीर के दोहों मे बहुत गहरा अर्थ छिपा रहता है। उनके दोहे जीवन जीने की राह दिखते हैं। समाज की कुरीतियों को हटाने का संदेश देते हैं। गलत राह मे जाने से रोकते हैं। जरूर सुने।
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