Ramita Mehta

Nani Dadi Ki Kahaniyan

Kids HI ↓ 407 episodes

I'm here to share some of the best stories I heard and loved growing up in India.

Author

Ramita Mehta

Category

Kids

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Jul 10, 2026

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Episodes

दिनकरजी की रश्मि रथी सर्ग 6 अंतिम भाग 15.07.2021

आज सुने कि कैसे कर्ण अर्जुन को चुनौती देयत है दवंद युद्ध के लिए और कैसे मधुसूदन अर्जुन के रथ को कर्ण से बहुत दूर रखते हैं क्योंकि कर्ण इन्द्र के दिए हुए एकघनी अस्त्र को अर्जुन पर प्रयोग करने को उत्सुक है। अब केशव भीम के बेटे घटोत्कच को बोलते हैं कि शत्रु पक्ष को संभालो और घटोत्कच दानव पुत्र होने के कारण बहुत मायावी कार्य कर सकते थे। उन्होंने कौरव सेना मे हाहाकार मचा दिया। दुर्योधन को कर्ण से कहना...

दिनकरजी की रश्मि रथी सर्ग 6 भाग 3 11.07.2021

आज की कथा मे सुने कर्ण की वीरता का प्रदर्शन और फिर अभिमन्यु का वध, जयद्रथ का वध और भूरिश्रवा का वध। इनमे से कोई भी धर्म के अनुकूल न था। किन्तु अभी सब मे दानवता हवी था मानवता बहुत नीचे छूप गया था। जरूर सुने दिनकरजी के सशक्त लेखनी का प्रवाह।

दिनकरजी की रश्मि रथी सर्ग 6 भाग 2 08.07.2021

कुरुक्षेत्र का युद्ध शुरू हो चुका है। आज भीष्म पितामह घायल हो कर गिर चुके हैं। सभी बहुत दुखी हैं। तब कर्ण उनसे मिलने आटे हैं और उनसे युद्ध शुरू करने की अनुमति मांगते हैं। भीष्म पितामह उन्हे समझाते हैं कि युद्ध रोक लो। उनके और कर्ण के संवाद का आनंद लें। जरूर सुने।

रश्मि रथी सर्ग 6 भाग 1 05.07.2021

सर्ग 6 मे दिनकरजी बहुत सारे प्रश्न रखते हैं। पौरुष सिर्फ मरने और मरने में है या युद्ध से सब बर्बाद न हो, लाखों जानें न जाएं इसीलिए अपनी बलिदान देने में है? क्या मन इस अन्याय स्वीकार कर पाएगा कि कौरव सुई की नोक जितनी जममें भी न देंगे बिना युद्ध किए, फिर भी पांडव उसे बर्दाश्त करले और फिर एक बार वन चले जाएं - सिर्फ युद्ध के विनाश को रोकने के लिए? मनुष्य के अंदर मानवता की सुद्धा है पर फिर भी दानवता ज्...

दिनकर जी की रश्मि रथी सर्ग 5 अंतिम भाग 02.07.2021

कुंती चाहती हैं कि कर्ण उनके साथ चले और अपने भाइयों के वाढ का पाप न लें पर कर्ण दुर्योधन को नहीं छोड़ सकते हैं। तो वे कुंती को वचन देते हैं कि कुंती हमेशा पाँच पूतों की माता रहेंगी। कर्ण सिवा अर्जुन के किसी और भाई को नहीं मारेंगे और अर्जुन अगर मार गए तो कर्ण कुंती के पास आ जाएंगे। सुने दिनकरजी की सुंदर अभिव्यक्ति ।

दिनकरजी की रश्मि रथी सर्ग 5 भाग 5 26.06.2021

आपने सुना कि कुंती को सामने देखकर कर्ण के अंदर का आक्रोश बाहर आ जाता है। कुंती उन सब बातों को सुनकर क्या जवाब देती हैं दिनकरजी की सुन्दर अभिव्यक्ति मे सुने। कुंती कहती हैं कि मैं पूजा मे चढ़े फूल को उठाने नहीं आई हूँ। मैं तो अपने पुत्र को ढूढने आई हूँ। आगे सुने।

दिनकरजी की रश्मि रथी - सर्ग 5 भाग 4 23.06.2021

आज कर्ण के दुख की सीमाएं टूट गई हैं। कुंती की बात सुनकर जिंदगी भर ढोते हुए दुखों का गुब्बार फूट पड़ता है। कर्ण के भावों का दिनकरजी ने बहुत सुंदर वर्णन किया है। जरूर सुने।

दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग 5 भाग 3 19.06.2021

कुंती व कर्ण का वार्तालाप - दिनकर जी कल्पना से। जरूर सुने।

दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग 5 भाग 2 19.06.2021

आज कुंती बहुत व्याकुल है। कल से कुरुक्षेत्र का युद्ध शुरू होने वाला है। उसका ज्येष्ट पुत्र कर्ण शत्रु की ओर से अपने ही अनुजों से लड़ेगा। यह बात कुंती बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। फिर बहुत सोच समझ कर कर्ण से मिलने नदी तट पर पहुचती है और कर्ण से अपनी व्यथा कहती है। दिनकरजी की इतना सुंदर चित्र खीचा है कि आप के आखों के सामने महाभारत की कहानी जीवित हो जाती है। जरूर सुने।

दिनकर जी की रश्मि रथी - पंचम सर्ग 16.06.2021

अब तक आपने सुना कि इन्द्र देवता विप्र का वेश धारण कर कर्ण से कवच और कुंडल मांग कर ले जाते हैं। कल से महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला है। कुंती बहुत व्याकुल है कि उसी के पुत्र आपस में एक दूसरे को मारेंगे । क्योंकि कर्ण उसका ज्येषठ पुत्र है जो कौरवों की ओर से युद्ध करेगा। कुछ सोचकर वह नदी तट पर कर्ण से मिलने जाती हैं। आगे का वर्णन दिनकरजी के शब्दों मे सुने।

दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग 4 अंतिम भाग 14.06.2021

कर्ण अपने भाग्य दोष से दुखी हैं। समझ नहीं पाते हैं कि कवच और कुंडल देकर भी प्रकृति ने उनके भाग्य में हमेशा बाधा ही क्यों लिखा है। कर्ण कहते हैं कि शायद उनका जनम इसी उद्देशय से हुआ है कि आदर्श पुरुष कैसे होते हैं इसका जीवित उदाहरण वे दुनिया को दे सकें। कितना भी दुख आए वे डरेंगे नहीं न ही सत्य के पथ से कभी डिगेंगे। जब वे कृपाण से छीलकर अपने कवच और कुंडल को अपने शरीर से अलग कर इन्द्र के हाथ मे धर देत...

दिनकर जी की रश्मि रथी - 11.06.2021

रश्मि रथी मे आज सुने दिनकर जी के लेखनी की भाव भरे मर्म स्पर्शी उन वर्णन को जिसमे इन्द्र ब्राह्मण बनकर कर्ण से कवच और कुंडल माँग लेते हैं और कर्ण के व्यथा भरे उदगार। जरूर सुने।

रश्मि रथी सर्ग 3 का अंतिम भाग व सर्ग 4 का पहला भाग 10.06.2021

रश्मि रथी महाकाव्य मे आज उस अंश को सुनते हैं जिसमे कर्ण कृष्ण को बात रहे हैं कि क्यों वे दुर्योधन को न छोड़ पाएंगे। और कृष्ण उनकी बंधुता का साधुवाद करते हैं। चौथे सर्ग मे कर्ण की दान वीरता का वर्णन हैं। दिनकर जी ने दान की बहुत सुंदर व्याख्या की है। जो समझने और सीखने योग्य है। अर्जुन इन्द्र के पुत्र थे। कहीं वे कुरुक्षेत्र के युद्ध मे कर्ण द्वारा मारे न जाएं इसीलिए इन्द्र ब्राह्मण का वेश धारण कर कर्...

दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग 3 भाग 3 08.06.2021

आपने पिछली बार सुना कि जब दुर्योधन कृष्ण भगवान को बांधने का दुःसाहस करता है तो भगवान अपना विराट रूप दिखाते हैं। इस बार सुने आगे का महाकाव्य। कृष्ण जब सभा से बाहर निकाल रहे थे उन्हे वहाँ कर्ण मिला। उन्होंने उसे अपने रथ मे बिठा लिया और उसे समझाने लगे कि युद्ध बहुत भयानक होगा। दुर्योधन कर्ण के दम पर ही युद्ध लड़ने को तैयार है। किन्तु कर्ण तो पांडवों का ज्येषठ भ्राता है उसे उनके साथ होना चाहिए। उसका रा...

दिनकर जी की रश्मि रथी महाकाव्य - सर्ग ३ भाग २ 06.06.2021

रश्मि रथी महाकाव्य को आगे सुनते हैं। कर्ण और ऋषि परशुराम दोनों बहुत दुखी हैं। ऋषिवर को कर्ण की जाति का पता चल गया है। उन्होंने उससे ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया है। इस बात से कर्ण जितना दुखी है उतना ही दुखी ऋषिवर भी हैं। पर अभिशप्त व्यक्ति गुरुकुल मे नहीं रह सकता इसीलिए उसे आश्रम से जाना पड़ता है. कहानी नई मोड़ लेती है। पांडव १३ वर्ष का वनवास पूरा करके आए हैं। कृष्ण उनके दूत बनकर हस्तिनापुर जाते हैं और...

दिनकर जी की रश्मि रथी - सर्ग २ भाग 3 04.06.2021

आज के संवाद बहुत ही भावुक हैं। परशुरामजी की रक्त के स्पर्श से नींद खुलती है वे दुखी होते हैं कि कर्ण ने इतनी पीड़ा सही। फिर वे बहुत क्रोधित हो जाते हैं कि एक ब्राह्मण इतना सहनशील नहीं हो सकता। तुम सच बताओ तुम कौन हो वरना मेरे श्राप से अभी भसम हो जाओगे। कर्ण ग्लानि और दुख से कहते हैं कि मैं सूत पुत्र हूँ। मुझे आपसे धनुर विद्या सीखने की बड़ी लालसा थी इसीलिए झूठ का सहारा लेना पड़ा। गुरु बहुत दुखी होते ह...

कबीरजी की शिक्षा 31.05.2021

कबीर जी के दोहे बहुत अच्छी शिक्षा देते हैं। जीने की राह बताते हैं। जीवन में गुरु के महत्व को बताते हैं जो हमारी अज्ञानता को दूर करेन, वे गुरु।

रश्मि रथी सर्ग २ भाग २ 31.05.2021

ऋषि परशुराम कर्ण के गोद मे सिर रखकर सो रहे हैं। दोपहर का वक्त है। कर्ण गुरु की बातों को मन मे दोहरा रहे हैं कि जबतक समाज, देश व विश्व मे ज्ञानी की पूजा नहीं होगी और राजा पूजे जाएंगे तबतक इस पृथ्वी से दुखों का अंत नहीं होगा। रिशिवर कहते हैं कि तलवार उसी के हाथ मे दिया जा सकता है जो वीर और कोमल दोनों हो। कर्ण सोचते हैं कि ऋषि उनके तीर के करतब देखकर कितने खुश होते है और कितना आशीर्वाद देते हैं कि तुम...

दिनकरजी की रश्मि रथी - द्वितीय सर्ग - १ ला भाग 26.05.2021

द्वितीय भाग के प्रारंभ मे ऋषि परशुरामजी के आश्रम का वर्णन है। जहाँ एक तरफ आश्रम मे रहने वाली सभी वस्तुएं हैं, पशु हैं और दूसरी तरफ सभी औज़ार हैं जैसे यहाँ शस्त्रों की शिक्षा डी जा रही हो। कर्ण एक अच्छे गुरु से तीर धनुष चलाना सीखना चाहते हैं। उस समय जाति-पांति का भेदभाव समाज मे बहुत था। कर्ण को सूत पुत्र होने के कारण द्रोणाचार्यजी ने शिष्य बनाने से मना कर दिया था। परशुरामजी सिर्फ ब्राह्मण को अस्त्र...

दिनकर जी की रश्मि रथी - प्रथम सर्ग अंतिम भाग 22.05.2021

आपने अभी तक सुना था कि कर्ण किस प्रकार सामने आकर अर्जुन तो द्वनद युद्ध के लिया ललकार तो कृपाचार्य जी ने कहा कि अगर अर्जुन से लड़ना हो तो पहले कहीं के राजा बनो। आज की कविता यहाँ से शुरू होती है। कर्ण यह सुनकर हैरान रह गए और क्या जवाब दे समझ न पाए। तब दुर्योधन ने आगे बढ़कर कहा कि ऐसे वीर पुरुष का अपमान उचित नहीं है। मैं कर्ण को अंग देश का राजा बनाता हूँ। कर्ण दुर्योधन की इस बड़प्पन से चकित व ऋणी हो गए।...

दिनकर जी के महाकाव्य रश्मि रथी का प्रथम सर्ग - भाग ३ और ४ 21.05.2021

रश्मि रथी के प्रथम सर्ग के ३ रे व ४ थे भाग मे कवि ने कर्ण के दुख व आक्रोश का वर्णन किया है। सारी सभा कर्ण के करतबों को देखकर अचंभित रह गई किन्तु द्रोणा ने कहा कि अपना परिचय दो। अर्जुन बहुत बड़े खानदान से ताल्लुक रखते हैं और हर किसी से युद्ध नहीं कर सकते। कर्ण तो सुतपुत्र थे, उन्होंने कहा कि मेरी भुजाओ से मेरा परिचय पूछो पर द्रोणा ने कहा कि अगर आपको अर्जुन से लड़ना ही है तो कहीं के राजा बन जाओ फिर यु...

दिनकर जी की महाकाव्य रश्मि रथी - प्रथम सर्ग - भाग १ और २ 21.05.2021

अगर आप को दिनकरजी के महाकाव्य रश्मि रथी को पढ़ने का मौका न लगा हो तो जरूर सुने। रश्मि रथी कर्ण के शूर वीरता व दान वीरता का वर्णन है, उसके जीवन मे आने वाले हर उतार चढ़ाव का वर्णन है। अगर आप हिन्दी भाषा के प्रेमी है तो आपको बहुत अच्छा लगेगा। दिनकर जी बहुत ही सधे हुए लेखक व कवि थे। प्रथम भाग मे दिनकरजी ने इस बात पर जोर दिया है कि पुष्प वन मे खिले या राजमहल के उद्यान मे, दोनों फूलों का महत्व समान होता ह...

महाभारत की अंतिम कहानी ४० प्रकरण 20.05.2021

आज महाभारत की कहानी खतम होती है। जीवन विचित्र है। पांचों भाई दुर्योधन से पंच गाँव भी नहीं ले पाए और युद्ध मे सब कुछ जीतकर भी जीत मे मज़ा न था बल्कि सभी के मन के किसी कोने मे अथाह पीड़ा थी।

महाभारत ३९ प्रकरण - नेवले की कहानी 09.05.2021

युधिष्ठिर अश्वमेध यज्ञ कर रहे हैं। सभी देशों के राजकुमार वहाँ उपस्थित हैं। सभी को बहुत सारे भेंट दिए गए हैं। गरीबों को यथोचित दान दिया गया है। ऐसे मे अंहकार मन मे आना स्वाभाविक है कि यज्ञ बहुत अच्छे से हो गया। इतने में वहाँ एक नेवला आता है जिसका एक तरफ का शरीर स्वर्णिम है और दूसरे तरफ का सामान्य। नेवला वहाँ उपस्थित लोगों के बीच मे आकर लोटने लगता है और हसने लगता है। आगे सुने

कबीर के खजाने 08.05.2021

कबीर के दोहों मे बहुत गहरा अर्थ छिपा रहता है। उनके दोहे जीवन जीने की राह दिखते हैं। समाज की कुरीतियों को हटाने का संदेश देते हैं। गलत राह मे जाने से रोकते हैं। जरूर सुने।

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