Ramita Mehta

Nani Dadi Ki Kahaniyan

Kids HI ↓ 407 episodes

I'm here to share some of the best stories I heard and loved growing up in India.

Author

Ramita Mehta

Category

Kids

Podcast website

soundcloud.com

Latest episode

Jul 10, 2026

Where to listen?

Podcasts in the app Replaio Radio Coming soon

Podcasts are coming to the app soon. Install now and be the first to see a whole new take on podcasts

Get it on Google Play Install for free Android 5M+ downloads · 4.8 rating iOS soon

Episodes

रामायण भाग 9 20.09.2021

जब राम और लक्ष्मण सीताजी को ढूंढ रहे थे, उन्हे जटायु ने दक्षिण पश्चिम की ओर आगे जाने कहा व शबरी से मतंग ऋषि के आश्रम मे मिलने को कहा और मूक पर्वत पर सुग्रीव वानर से मिलने को कहा। राम और लक्ष्मण जटायु का दाह संस्कार कर आगे बढ़े तो उन्हे कबंधन राक्षस मिला जिसका बहुत बड़ा पेट था और सिर था ही नहीं! आगे सुने राम और सुग्रीव की मित्रता के बारे मे और बाली के वध के बारे मे।

रामायण भाग 8 18.09.2021

रामायण की यह कहानी तुलसीदासजी की रामायण से थोड़ी भिन्न है। शूर्पनखा राम को पंचवटी मे देखकर उनपर रीझ जाती है और उनसे शादी करने कहती है। किन्तु जब राम या लक्ष्मण उससे शादी करने को तैयार न हुए तो वह क्रोधित होकर सीता पर झपटी। तब लक्ष्मण ने उसका नाक व कान काट लिया। वह अपमानित होकर अपने चचेरे भाई कहर व दूषण के पास पहुंची। आगे सुने।

रामायण भाग 7 15.09.2021

भरत जब वापस अयोध्या लौट गए, तब रामचन्द्रजी, लक्ष्मण व सीता मंदाकिनी नदी के किनारे किनारे दक्षिण की ओर बढ़ने लगे। आगे उन्हे अत्री ऋषि का आश्रम मिला। उन्होंने रात वहीं बितायी और सुबह दंडक वन के लिए रवाना हो गए। ऋषि पत्नी भगवती अनुसूया ने सीता को दिव्य वस्त्र, दिव्य अलंकार और दिव्य आभूषण का उपहार दिया जो कि कभी मैले नहीं होते और न ही टूटते हैं। आगे सुने।

रामायण भाग 6 13.09.2021

भरत को इतनी बड़ी सेना के साथ आते देखकर निषादों के राजा गुह पेशोपेश मे पड़ गए कि भरत रामचन्द्रजी से मिलने जा रहा है या युद्ध करने! उन्होंने निश्चय किया कि यदि भरत उनसे युद्ध करने जा रहे हैं तो पहले उन्हे राजा गुह की सेना से लड़ना होगा। फिर उन्होंने सोचा कि वहाँ जाकर पता करते हैं और वे बहुत सारे उपहार लेकर भरत से मिलने गए। भरत से मिलते ही उनकी शंका दूर हो गई। वे समझ गए कि भारत अपने भाई से मिलने और उन्ह...

रामायण भाग 5 12.09.2021

रामचन्द्रजी, सीता व लक्ष्मण सुमंत्र के साथ रथ मे शाम होने तक गंगा नदी के किनारे शृंगवेरपुर पहुचे । वहाँ निषादों के राजा गुह रहते थे । वे तुरंत उनसे मिलने आए और शृंगवेरपुर को अपना घर समझ कर रहने की अनुग्रह करने लगे किन्तु रामचन्द्रजी ने उन्हे वनवास की बात बताई और वहीं पेड़ के नीचे घास की शैय्या पर सो गए। अगले दिन रामचन्द्रजी ने सुमंत्र को वापस जाने कहा और उनका प्रणाम मत पिता तक पहुचाने कहा। आगे सुने...

रामायण भाग 4 09.09.2021

कल राम का राज्याभिषेक होना है। राज्य सभा मे राजा दशरथ ने यह घोषणा की। आस पास के राज्यों के सभी राजाओं को आमंत्रित किया गया किन्तु मिथिला के राजा जनक व भरत के नाना को नहीं बुलाया गया। सभी को राजा दशरथ का सुझाव पसंद आया कि राम राजा बने। रानी कौसल्या बहुत खुश थी पर काल होने के पहले ही सबकुछ बदल गया। आगे सुने..

रामायण भाग 3 06.09.2021

बड़ी रोचक कथा है। मुनि विश्वमित्र जी रामचन्द्र जी को राजा दशरथ से मांग कर ले जाते हैं ताकि वे राक्षसों का वध कर दें। ये राक्षस यज्ञ मे बहुत बाधा पहुचते हैं। लक्ष्मण भी साथ हो लेते हैं। रंचन्द्रजी बड़ी आसानी से ताड़का व अन्य राक्षसों का वध करते हैं। विश्व मित्रजी राम व लक्ष्मण को मिथिला ले जाते हैं। आगे सुने।

सुभद्रा कुमारी चौहान की ठुकरा दो या प्यार करो कविता 06.09.2021

सुभद्रा कुमारी चौहान की खूबसूरत कविता प्रस्तुत है। इसमे कवियत्री भगवान को संबोधित करते हुए कहती हैं कि आप के पूजन के लिए ढेरों चढावा लेकर धनवान व्यक्ति आते हैं किन्तु मैं बहुत गरीब हूँ इसीलिए कुछ भी नहीं ला पाई। आपके प्रति हृदय मे जो अथाह प्रेम व श्रद्धा है उसे अभिव्यक्त करने का भी मुझमे चातुर्य और स्वर मे मधुरता नहीं है। फिर भी मैं साहस कर आई हूँ। यह प्राण आप ही की दी हुई है। मैं इसे आपके चरणों म...

रामायण भाग 2 03.09.2021

जब रामचन्द्र जी थोड़े बड़े हुए उन्हे और उनके भाइयों को वशिष्ठ मुनि के आश्रम मे सभी विद्याओं को सीखने के लिए भेज गया। बहुत शीघ्र ही रामचन्द्रजी व उनके भाई सभी विद्याओं मे कुशल हो गए। आगे सुने।

रामायण - 1 भाग 02.09.2021

राजा दशरथ कोसल नगरी के राजा थे। बहुत योग्य राजा थे। प्रजा हर तरह से सुखी थी। किन्तु राजा के कोई संतान न थी।

रामायण - वाल्मिकीजी द्वारा रचित 01.09.2021

इस रामायण की रचना आज से 2500 वर्ष पूर्व हुआ था। तब रामचन्द्रजी जीवित थे। इस रामायण के रचना की पृष्टभूमि भी अति रोचक है। जरूर सुने।

जयशंकर प्रसाद की कविता - प्रयाण गीत 29.08.2021

जय शंकर प्रसादजी की बेहद खूबसूरत व देशप्रेम से ओत प्रोत रचना प्रस्तुत है। जय शंकरजी हिन्दी के प्रसिद्ध कवियों मे से एक हैं। उनकी भाषा थोड़ी क्लिष्ट है। देश के सेनिकों को प्रोत्साहित करने वाली है यह कविता, कि कर्तव्य के पथ पर बढ़ो। देश त्याग और बलिदान माँगता है। तुम्हारा जय तो निश्चित है तुम वीर पूर्वजों के संतान हो। कविता का आनंद लें।

माखन लाल चतुर्वेदीजी की कविता पुष्प की अभिलाषा 29.08.2021

माखन लाल चतुर्वेदी जी की एक पुष्प के देश भक्ति की कल्पना बहुत ही मोहक है। बहुत चोटी सी कविता है पर मन को छू लेने वाली कविता है।

दिनकरजी का महाकाव्य कुरुक्षेत्र - अंतिम भाग 26.08.2021

बार बार यही सवाल उठता है कि क्या युद्ध अनिवार्य है? क्या भटके हुए को रास्ते मे लाने का और कोई विकल्प नहीं? क्या वीर पुरुष का अन्याय सहन उचित है और कबतक उचित है? सुने दिनकरजी की समीक्षा ।

दिनकरजी की कुरुक्षेत्र सर्ग 3 17.08.2021

युद्ध मे हुए विध्वंस से युधिष्ठिर क्षुबध हैं। किन्तु पितामह कहते हैं कि युद्ध कुरुक्षेत्र के पहले भी हुआ है और बाद मे भी होता रहेगा क्योंकि ईर्ष्या युद्ध का सृजन करता है। सुनते है दिनकरजी का महाकाव्य कुरुक्षेत्र।

कुरुक्षेत्र महाकाव्य सर्ग 2 भाग 2 13.08.2021

दिनकरजी ने कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद, युधिष्ठिर के हृदय मे उठ रहे संताप का वर्णन किया है और उसे सुनने के बाद पीतामह के माध्यम से युद्ध की विवेचना की है। बहुत कशमकश की स्तिथि है। जरूर सुने।

दिनकरजी का महाकाव्य कुरुक्षेत्र - सर्ग 2 10.08.2021

कुरुक्षेत्र का युद्ध खतम हो चुका और युधिष्ठिर बहुत व्याकुल हैं इस नर संहार से। वे पितामह के पास जाते हैं जो शर के शैय्या मे लेटे हुए हैं। युधिष्ठिर अपने मन का दुख पितामह को सुनाते हैं और पितामह उसका क्या उत्तर देते है, सुने।

कविताओं का गुलदस्ता 10.08.2021

आज 5 छोटी छोटी कविताएं प्रस्तुत हैं। कविताओं मे बड़ी खासियत होती है कि वे हमारे सोच को नई दिशा दे पाते हैं। हमारी उलझनों को सुलझा देते हैं। बहुत सुकून मिलता है कविता पढ़ने या सुनने मे। आप इन कविताओं का आनंद उठायें। धन्यवाद।

दिनकरजी की महाकाव्य कुरुक्षेत्र सर्ग 1 08.08.2021

कुरुक्षेत्र महाकाव्य कुरुक्षेत्र के युद्ध की समाप्ति के बाद के प्रसंग पर लिखी गई है। पांडव जीत का जशन मन रहे हैं पर यह जीत युधिष्ठिर के हृदय को कचोटता है। इतने शूरवीरों की बिछी लाशे, अगणित गज व अश्वों का मृत शरीर उन्हे ग्लानि से भर रहा है। क्या सचमुच यह विजय है? जरूर सुने। आपके मन मे यह सवाल उठेगा कि क्या युद्ध सही विकल्प है?

हरिवंश राई बच्चन जी की कविता "जो बीत गई सो बात गई" 07.08.2021

इस कविता मे प्रकृति का उदाहरण देकर बच्चनजी ने अपने मन को समझाने की कोशिश की है कि जो बहुत प्रिय हो और अपने जीवन से चला जाए तो उसे लेकर गम न मनाओ। इस लघु जीवन मे सभी को जाना है।

दिनकरजी की रश्मि रथी का अंतिम भाग 27.07.2021

दिनकरजी की रश्मि रथी का अंतिम भाग। कर्ण धनुष बाण रहित अपने रथ के पहिये को निकालने का प्रयास कर रहे हैं और उस निहत्थे कर्ण को मरने का कृष्ण भगवान अर्जुन को आदेश देते हैं। सारी सेना मौन देख रही है। कृष्ण भगवान कहते हैं कि धर्म पर चलने का क्या सिफर पांडुवों की जिम्मेवारी है? तो कर्ण बताते हैं कि पांडव भी अधर्म मे काफी आगे बढ़ गए हैं। किन्तु कर्ण खुश हैं कि उन्होंने इस जीवन मे कभी धर्म का साथ नहीं छोडा...

दिनकरजी की रश्मि रथी सर्ग 7 भाग 4 26.07.2021

आज कर्ण बहुत आतुर हैं भीषण युद्ध मचाने के लिए। वे शल्य से कहते हैं कि मुझे ऐसे जगह ले चलो जहाँ प्रचंड युद्ध छिड़ा हो। शल्य घोड़ों को तेज दौड़ते हैं और अर्जुन की रथ जो बहगवां कृष्ण चले रहे हैं, वहाँ रुक जाते हैं। रथ का पहिया रक्त के कीच मे फंस जाता है और शल्य उसे निकाल नहीं पते हैं तो कर्ण से अखते हैं कि बड़े आश्चर्य की बात है कि इतने थोड़े से कीचड़ मे रथ का पहिया इस कदर फंस गया है। आप इसे निकाले । कर्ण...

दिनकरजी की रश्मि रथी 7 सर्ग भाग 3 23.07.2021

कर्ण और अर्जुन दोनों एक दूसरे को परास्त कर अपने को महावीर घोषित करना चाहते हैं। जब उन दोनों मे आपस मे दवंद युद्ध शुरू होता है तो सारी सेना युद्ध करना भूल जाती है। यहाँ तक कि स्वर्ग के देवता भी अपना कार्य छोड़ उस युद्ध को देखने आ जाते हैं। तब कवि सोचते हैं कि अगर युद्ध के जगह इन वीरों ने मानवता के उत्थान हेतु कुछ किया होता तो धरा जल नहीं रही होती। मनुष्य मे युद्ध की जगह शांति खोजने की इच्छा कब होगी?...

दिनकर्जी की रश्मि रथी 7 सर्ग 2 भाग 21.07.2021

महाभारत के युद्ध मे आज कर्ण कौरवों के सेना नायक हैं। वह युधिष्ठिर, नकुल, सहदेव व भीम को पकड़ कर छोड़ देते हैं। उनके सारथी शल्य हैरान हैं कि मारना ही नहीं है तो तुम शाम तक युही जीत जाओगे क्या? पर कर्ण तो अपने वचन को निभा रहे हैं। उन्हे तो सिर्फ अर्जुन का सिर काटना है। और आखिर उन्हे अर्जुन दिख ही जाते हैं। सुने दिनकरजी की सुंदर रचना रश्मि रथी 7 सर्ग, भाग 2.

दिनकरजी की रश्मि रथी सप्तम सर्ग प्रथम भाग 20.07.2021

दिनकरजी ने सर्ग की शुरुआत उषा काल के वर्णन से किया है कि कैसे उषा पशु पक्षी व पुष्प को उत्साह से भर देती है पर मनुष्य को छू नहीं पट्टी क्योंकि मनुष्य बहुत ज्ञानी हो गया है और वह सरल कौतकता के खुशी से वंचित हो गया है। वह तो विजय की लालसा मे धर्म को भूल चुका है और पाताल तक भी जीत के पीछे जाने को तैयार है। फिर दिनकरजी कर्ण के मन मे चल रही विचारों को दर्शाते हैं कि कर्ण बहुत खुश है। उसकी तीव्र इच्छा क...

Listen to the Nani Dadi Ki Kahaniyan podcast in Replaio

Radio and podcasts in one app - free, with no sign-up. Install today and do not miss the launch

Get it on Google Play

Replaio is not a podcast publisher; show names, artwork and audio belong to their authors and are distributed through public RSS feeds.