Mohit Mishra

Aah se Upja Gaan

Arts HI ↓ 21 episodes

Your weekly dose of Hindi-Hindwi poetry... The goal is to read a poem the way poem should be read. :)

Author

Mohit Mishra

Category

Arts

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redcircle.com

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Jan 26, 2025

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Episodes

संस्कृति के चार अध्याय-Sanskriti ke Chaar Adhyay - episode 2- Adhyay 1 Prakaran 1 अध्याय 1 प्रकरण 1 - रामधारी सिंह दिनकर -Ramdhari Singh Dinkar 26.01.2025

संस्कृति के चार अध्याय-Sanskriti ke Chaar Adhyay - episode 2- Adhyay 1 Prakaran 1 अध्याय 1 प्रकरण 1 - रामधारी सिंह दिनकर -Ramdhari Singh Dinkar  आप सभी से अनुरोध है कि कृपया आप इस पुस्तक को खरीदे व अपने पास रखें। यह पुस्तक सर्वथा संग्रहणीय है |

संस्कृति के चार अध्याय-Episode 1-लेखक का निवेदन-Sanskriti ke chaar Adhyay- रामधारी सिंह दिनकर -Ramdhari Singh Dinkar 26.01.2025

संस्कृति के चार अध्याय-1-लेखक का निवेदन-Sanskriti ke chaar Adhyay- रामधारी सिंह दिनकर -Ramdhari Singh Dinkar  आप सबसे अनुरोध है कृपया इस किताब को जरूर खरीदिए | यह पुस्तक भारत देश के हर हिंदी प्रेमी को पढ़नी चाहिए

किसको नमन करूँ मैं - रामधारी सिंह दिनकर Kisko Naman Karun Main-Ramdhari Singh Dinkar 30.03.2024

तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ, मैं ? मेरे प्यारे देश ! देह या मन को नमन करूँ मैं ? किसको नमन करूँ मैं भारत ? किसको नमन करूँ मैं ? भू के मानचित्र पर अंकित त्रिभुज, यही क्या तू है ? नर के नभश्चरण की दृढ़ कल्पना नहीं क्या तू है ? भेदों का ज्ञाता, निगूढ़ताओं का चिर ज्ञानी है मेरे प्यारे देश ! नहीं तू पत्थर है, पानी है जड़ताओं में छिपे किसी चेतन को नमन करूँ मैं ? भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण...

Saaye Mein Dhoop-Dushyant kumar साये में धूप - दुष्यंत कुमार 29.03.2024

साये में धूप की कुछ चुनिंदा ग़ज़लें आपकी ख़िदमत में

परशुराम की प्रतीक्षा खण्ड 1,2,3 Parshuram ki Pratiksha Khand 1,2,3 18.07.2023

गरदन पर किसका पाप वीर ! ढोते हो ? शोणित से तुम किसका कलंक धोते हो ? उनका, जिनमें कारुण्य असीम तरल था, तारुण्य-ताप था नहीं, न रंच गरल था; सस्ती सुकीर्ति पा कर जो फूल गये थे, निर्वीर्य कल्पनाओं में भूल गये थे; गीता में जो त्रिपिटक-निकाय पढ़ते हैं, तलवार गला कर जो तकली गढ़ते हैं; शीतल करते हैं अनल प्रबुद्ध प्रजा का, शेरों को सिखलाते हैं धर्म अजा का; सारी वसुन्धरा में गुरु-पद पाने को, प्यासी धरती के ल...

प्रणति राम धारी सिंह दिनकर pranati by Ramdhari Sinh Dinkar 15.01.2023

प्रणति-1 कलम, आज उनकी जय बोल जला अस्थियाँ बारी-बारी छिटकाई जिनने चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल । कलम, आज उनकी जय बोल । जो अगणित लघु दीप हमारे तूफानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए, किसी दिन माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल । कलम, आज उनकी जय बोल । पीकर जिनकी लाल शिखाएँ उगल रहीं लू लपट दिशाएं, जिनके सिंहनाद से सहमी धरती रही अभी तक डोल । कलम, आज उनकी जय बोल । अंधा चकाचौंध का मारा क...

Some Couplets of Munnavvar Rana. मुन्नव्वर राना की चुनिंदा शायरियाँ 07.06.2022

Enjoy

गीत कैसे लिखें? How to write songs in HINDI / URDU/ HINDWI ? 22.11.2021

Dr. Jyotsana Sharma is an avid scholar and a well published poet. She had agreed to tell us fundamentals of Geet writing and this is the audio of the same video recording.

Kavya-Goshthi, Participants Mohit, Manish, Nilesh, Sumit on 17-10-21 17.10.2021

Original Poems, Ghazals by four poetry lovers. We sat and got it recorded.

Rashmirathi Saptam Sarg part -2 रश्मीरथी सप्तम सर्ग-भाग २ by Pandit Shri Ramdhari Singh Dinkar Voice Mohit Mishra Karn ka Mahaprayan 08.10.2021

रथ सजा, भेरियां घमक उठीं, गहगहा उठा अम्बर विशाल, कूदा स्यन्दन पर गरज कर्ण ज्यों उठे गरज क्रोधान्ध काल । बज उठे रोर कर पटह-कम्बु, उल्लसित वीर कर उठे हूह, उच्छल सागर-सा चला कर्ण को लिये क्षुब्ध सैनिक-समूह । हेषा रथाश्व की, चक्र-रोर, दन्तावल का वृहित अपार, टंकार धुनुर्गुण की भीम, दुर्मद रणशूरों की पुकार । खलमला उठा ऊपर खगोल, कलमला उठा पृथ्वी का तन, सन-सन कर उड़ने लगे विशिख, झनझना उठी असियाँ झनझन । ता...

Rashmirathi Saptam Sarg part -1 रश्मीरथी सप्तम सर्ग-भाग १ कर्ण की हुंकार Karna Ki Hunkar by Pandit Shri Ramdhari Singh Dinkar Voice Mohit Mishra 06.10.2021

1 निशा बीती, गगन का रूप दमका, किनारे पर किसी का चीर चमका। क्षितिज के पास लाली छा रही है, अतल से कौन ऊपर आ रही है ? संभाले शीश पर आलोक-मंडल दिशाओं में उड़ाती ज्योतिरंचल, किरण में स्निग्ध आतप फेंकती-सी, शिशिर कम्पित द्रुमों को सेंकती-सी, खगों का स्पर्श से कर पंख-मोचन कुसुम के पोंछती हिम-सिक्त लोचन, दिवस की स्वामिनी आई गगन में, उडा कुंकुम, जगा जीवन भुवन में । मगर, नर बुद्धि-मद से चूर होकर, अलग बैठा ह...

Rashmirathi Shast Sarg part -2 रश्मीरथी षष्ठ सर्ग-भाग २ By Pandit Ramdhari Singh Dinkar Mohit Mishra 03.10.2021

भीष्म का चरण-वन्दन करके, ऊपर सूर्य को नमन करके, देवता वज्र-धनुधारी सा, केसरी अभय मगचारी-सा, राधेय समर की ओर चला, करता गर्जन घनघोर चला। पाकर प्रसन्न आलोक नया, कौरव-सेना का शोक गया, आशा की नवल तरंग उठी,  जन-जन में नयी उमंग उठी, मानों, बाणों का छोड़ शयन, आ गये स्वयं गंगानन्दन। सेना समग्र हुकांर उठी, ‘जय-जय राधेय !’ पुकार उठी, उल्लास मुक्त हो छहर उठा, रण-जलधि घोष में घहर उठा, बज उठी समर-भेरी भीषण, हो...

Rashmirathi Shasht Sarg part -1 रश्मीरथी षष्ठ सर्ग-भाग १ by Pandit Shri Ramdhari Singh Dinkar Voice Mohit Mishra 30.09.2021

नरता कहते हैं जिसे, सत्तव क्या वह केवल लड़ने में है ? पौरूष क्या केवल उठा खड्ग मारने और मरने में है ? तब उस गुण को क्या कहें मनुज जिससे न मृत्यु से डरता है ? लेकिन, तक भी मारता नहीं, वह स्वंय विश्व-हित मरता है। है वन्दनीय नर कौन ? विजय-हित जो करता है प्राण हरण ? या सबकी जान बचाने को देता है जो अपना जीवन ? चुनता आया जय-कमल आज तक विजयी सदा कृपाणों से, पर, आह निकलती ही आयी हर बार मनुज के प्राणों से।...

Rashmirathi Pancham Sarg part -2 रश्मीरथी पंचम सर्ग-भाग २ Voice Mohit Mishra 28.09.2021

you can also find me on my youtube channel https://www.youtube.com/channel/UCOmnt0xo6H3nt3ZXOloTCPQ पहली वर्षा में मही भींगती जैसे, भींगता रहा कुछ काल कर्ण भी वैसे। फिर कण्ठ छोड़ बोला चरणों पर आकर, "मैं धन्य हुआ बिछुड़ी गोदी को पाकर। पर, हाय, स्वत्व मेरा न समय पर लायीं, माता, सचमुच, तुम बड़ी देर कर आयीं। अतएव, न्यास अंचल का ले ने सकूँगा, पर, तुम्हें रिक्त जाने भी दे न सकूँगा। "की पूर्ण सभी...

Rashmirathi Pancham Sarg part -1 रश्मीरथी पंचम सर्ग-भाग १ Voice Mohit Mishra 24.09.2021

Kunti Meets Karna आ गया काल विकराल शान्ति के क्षय का, निर्दिष्ट लग्न धरती पर खंड-प्रलय का । हो चुकी पूर्ण योजना नियती की सारी, कल ही होगा आरम्भ समर अति भारी । कल जैसे ही पहली मरीचि फूटेगी, रण में शर पर चढ़ महामृत्यु छूटेगी । संहार मचेगा, तिमिर घोर छायेगा, सारा समाज दृगवंचित हो जायेगा । जन-जन स्वजनों के लिए कुटिल यम होगा, परिजन, परिजन के हित कृतान्त-सम होगा । कल से भाई, भाई के प्राण हरेंगे, नर ही न...

Rashmirathi Chaturtha Sarg Full रश्मीरथी चतुर्थ सर्ग सम्पूर्ण Ram Dhari Singh 'Dinkar' रामधारी सिंह 'दिनकर' 21.09.2021

Karna pays a heavy price for being true to his principles... 4. चतुर्थ सर्ग प्रेमयज्ञ अति कठिन कुण्ड में कौन वीर बलि देगा ? तन, मन, धन, सर्वस्व होम कर अतुलनीय यश लेगा ? हरि के सन्मुख भी न हार जिसकी निष्ठा ने मानी, धन्य-धन्य राधेय ! बन्धुता के अद्भुत अभिमानी । पर जाने क्यों नियम एक अद्भुत जग में चलता है, भोगी सुख भोगता, तपस्वी और अधिक जलता है । हरिआली है जहाँ, जलद भी उसी खण्ड के वासी, मरु की भूमि म...

Rashmirathi Tritiya Sarg Part 2 रश्मीरथी तृतीय सर्ग भाग २ - Ram Dhari Singh 'Dinkar' रामधारी सिंह 'दिनकर 18.09.2021

भगवान सभा को छोड़ चले,  करके रण गर्जन घोर चले  सामने कर्ण सकुचाया सा,  आ मिला चकित भरमाया सा  हरि बड़े प्रेम से कर धर कर,  ले चढ़े उसे अपने रथ पर।  रथ चला परस्पर बात चली,  शम-दम की टेढी घात चली,  शीतल हो हरि ने कहा, "हाय,  अब शेष नही कोई उपाय  हो विवश हमें धनु धरना है,  क्षत्रिय समूह को मरना है।  "मैंने कितना कुछ कहा नहीं?  विष-व्यंग कहाँ तक सहा नहीं?  पर, दुर्योधन मतवाला है,  कुछ नहीं समझ...

Rashmirathi Tritiya Sarg Part 1 रश्मीरथी तृतीय सर्ग भाग १ Ram Dhari Singh 'Dinkar' रामधारी सिंह 'दिनकर' कृष्ण की चेतावनी, Krishna ki Chetavani 15.09.2021

1 हो गया पूर्ण अज्ञात वास,  पाडंव लौटे वन से सहास,  पावक में कनक-सदृश तप कर,  वीरत्व लिए कुछ और प्रखर,  नस-नस में तेज-प्रवाह लिये,  कुछ और नया उत्साह लिये।  सच है, विपत्ति जब आती है,  कायर को ही दहलाती है,  शूरमा नहीं विचलित होते,  क्षण एक नहीं धीरज खोते,  विघ्नों को गले लगाते हैं,  काँटों में राह बनाते हैं।  मुख से न कभी उफ कहते हैं,  संकट का चरण न गहते हैं,  जो आ पड़ता सब सहते हैं,  उद्योग-निरत...

Rashmirathi Dwitiya Sarg Part 2 रश्मीरथी द्वितीय सर्ग भाग 2 - Ram Dhari Singh 'Dinkar' रामधारी सिंह 'दिनकर' 14.09.2021

A very emotional episode between Karna and Parshuram... Please use headphones. Reach me at AahSeUpjaGaan@gmail.com गुरु को लिए कर्ण चिन्तन में था जब मग्न, अचल बैठा,  तभी एक विषकीट कहीं से आसन के नीचे पैठा।  वज्रदंष्ट्र वह लगा कर्ण के उरु को कुतर-कुतर खाने,  और बनाकर छिद्र मांस में मन्द-मन्द भीतर जाने।  कर्ण विकल हो उठा, दुष्ट भौरे पर हाथ धरे कैसे,  बिना हिलाये अंग कीट को किसी तरह पकड़े कैसे?  पर भ...

Rashmirathi Dwitiya Sarg Part 1 रश्मीरथी द्वितीय सर्ग भाग १ - Ram Dhari Singh 'Dinkar' रामधारी सिंह 'दिनकर' 13.09.2021

This part describes Aashram of Parshuram and his philosophy. A must-listen episode. Have worked hard for it. Have tried to use some new techniques. I hope you all like it. 2. द्वितीय सर्ग शीतल, विरल एक कानन शोभित अधित्यका के ऊपर,  कहीं उत्स-प्रस्त्रवण चमकते, झरते कहीं शुभ निर्झर।  जहाँ भूमि समतल, सुन्दर है, नहीं दीखते है पाहन,  हरियाली के बीच खड़ा है, विस्तृत एक उटज पावन।  आस-पास कुछ कटे हुए पीले...

Rashmirathi Pratham Sarg रश्मीरथी प्रथम सर्ग - Ram Dhari Singh 'Dinkar' रामधारी सिंह 'दिनकर' 12.09.2021

Recitation and Mixing by me. Here are the lyrics. 'जय हो' जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,  जिस नर में भी बसे, हमारा नमन तेज को, बल को।  किसी वृन्त पर खिले विपिन में, पर, नमस्य है फूल,  सुधी खोजते नहीं, गुणों का आदि, शक्ति का मूल।  ऊँच-नीच का भेद न माने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है,  दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है।  क्षत्रिय वही, भरी हो जिसमें निर्भयता की आग,  सबसे श्रेष्ठ वही...

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