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Padhaku Nitin

Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein. कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी क...

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Odcinki

राष्ट्र-देश में अंतर क्या है और राष्ट्रवाद कितने काम की चीज़?: पढ़ाकू नितिन, Ep 19 25.11.2021

राष्ट्रवाद यानि नेशनलिज़्म पर दशकों से बहस चल रही है. सबके लिए इसके मायने अलग हैं. दौर के हिसाब से भी और देश के हिसाब से भी. पढ़ाकू नितिन की बैठकी में इस बार नितिन ठाकुर के साथ प्रियदर्शन शामिल हैं. कई किताबों के लेखक और पॉलिटिकल-सोशल- कल्चरल मसलों पर लिखनेवाले प्रियदर्शन ने जवाब दिया कि राष्ट्रवाद क्या है, कितनी तरह का है, भारत का राष्ट्रवाद पश्चिम से अलग कैसे, इसका फायदा-नुकसान क्या और इसकी नियत...

जवाहर लाल नेहरू से जुड़ी हर अफ़वाह की चीर फाड़ : पढ़ाकू नितिन, Ep 18 18.11.2021

जितने लोग नेहरू के फैन हैं उतने ही उनसे नफरत करनेवाले भी हैं. आज़ादी के तुरंत बाद देश की बागडोर संभालनेवाले इस नेता पर आज भी बहस जारी है. ये बहस राजनीतिक मंचों से लेकर चौक-चौराहों और सोशल मीडिया के ठीयों तक पर गरम रहती है. जाने कितने ऐसे सवाल हैं जिनमें आधा सच आधा झूठ छिपा है. पढ़ाकू नितिन की इस बैठकी में नितिन ठाकुर ने न्यौता है पीयूष बबेले को जिन्होंने ‘नेहरू - मिथक और सत्य’ नाम की किताब लिखी है...

संस्कृत सबसे प्राचीन होकर भी कभी प्रचलित क्यों नहीं हो सकी?: पढ़ाकू नितिन, Ep 17 11.11.2021

अक्सर ये बहस गर्म रहती है कि दुनिया की पहली भाषा कौन सी है? इसका कोई एक जवाब नहीं मगर हम भारतीयों ने माना कि इसका जवाब संस्कृत है. संस्कृत को बाकी भाषाओं की जननी भी कहा गया. पढ़ाकू नितिन में इस बार की बैठकी में नितिन ठाकुर के साथ हैं हेमंत राजोपाध्ये जो जर्मनी से संस्कृत में पीएचडी कर चुके हैं, साथ ही देशी विदेशी यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाते हैं. उनसे जानेंगे कि संस्कृत का इतिहास क्या है, कौन इस भाषा...

लंदन की भव्य इमारतों के पीछे दहेज में मिले मुंबई का हाथ था? : पढ़ाकू नितिन, Ep 16 04.11.2021

लंदन हमेशा भारतीयों के लिए अहम रहा. कोई इससे प्यार करता रहा तो कोई नफरत. वजह ऐतिहासिक है. वहां रहनेवालों ने हम पर सदियों तक शासन किया था. इसी बीच भारतीयों ने भी उनके शहर में जड़ें जमाईं. बहुत कुछ उसे दिया, काफी कुछ लिया. इस बार पढ़ाकू नितिन की बैठकी में नितिन ठाकुर के साथ ‘Indians in London’ के लेखक अरूप के चटर्जी हैं. वो बता रहे हैं कि क्यों लंदन को लेकर भारतीयों के दिल में खास जगह है, इस शहर में...

गांधी और गोडसे में कौन बड़ा हिंदू था?: पढ़ाकू नितिन, Ep 15 28.10.2021

कहा जाता है कि बाइबिल के बाद सबसे ज़्यादा प्रकाशित होनेवाली किताबें गांधी के बारे में हैं. 73 साल बाद उनके जीवन और मौत दोनों की परतें बार-बार उघाड़ी जाती हैं. खासकर 30 जनवरी 1948 को की गई उनकी हत्या के कारणों और तरीकों पर लगातार किताबें आई हैं. पढ़ाकू नितिन की इस बैठकी में नितिन ठाकुर ने इतिहास पर किताबें लिखनेवाले अशोक कुमार पांडेय से बात की है. उनसे कई बातें जानने की कोशिश की. जैसे गांधी की हत्य...

सनौली की खुदाई में मिली औरतों की लाशों के पांव कटे हुए क्यों थे?: पढ़ाकू नितिन, Ep 14 21.10.2021

बागपत के सनौली में चार हज़ार साल पुराना एक कब्रिस्तान मिला. खुदाई हुई तो तलवारों, ढालों, भालों, गहनों का अंबार लग गया. फिर मिले तीन रथ. पुरुषों के साथ महिलाओं की पांव कटे कंकाल. 2005 और 2018 की खुदाई में पुरातत्व विभाग ने यहां से जो कुछ हासिल किया उसने दुनिया में बहस छेड़ दी. इतिहास के जानकार टकराने लगे. नए जवाबों और नए सवालों ने संभावना पैदा कर दी है कि शायद तारीख फिर से लिखी जाएगी. ढेर सारी जिज्...

वोटर को कनविंस करने में अपनी विरोधी पार्टियों से बेहतर क्यों है बीजेपी?: पढ़ाकू नितिन, Ep 13 14.10.2021

मोदी सरकार की दूसरी ईनिंग के ढाई साल पूरे हो चुके हैं. अभी ढाई बाकी हैं. हर विधानसभा चुनाव को लोकसभा चुनाव के लिटमस टेस्ट की तरह देखा जाता है. किसे ही मालूम है कि ढाई सालों में क्या क्या होगा और फाइनली इलेक्शन किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा. पढ़ाकू नितिन की बैठकी में नितिन ठाकुर के साथ इस बार हैं गौतम चिंतामणि. कई किताबों के लेखक गौतम ने The Midway Battle नाम की किताब लिखी है जिसमें सरकार की उन चुनौतिय...

जिसने जलियांवाला बाग के कसाई को अपनी आंखों से देखा : पढ़ाकू नितिन, Ep 12 07.10.2021

आज से 102 साल पहले जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थे लोगों का बेरहमी से खून बहाया था, जिसके बाद उन्हें अमृतसर का कसाई कहा जाने लगा. वो दर्दनाक मंज़र अपनी आँखों से एक लड़के ने देखा था. बाद में उसने आपबीती लिखी भी जिसे अंग्रेज़ों ने बैन कर दिया. उसके वंशजों ने सौ साल बाद वो आपबीती खोज निकाली. पढ़ाकू नितिन की इस बैठकी में जलियांवाला बाग के उसी खूनी दिन की बात हुई है. वो दिन अहम है क्योंकि उसने...

क्या भगत सिंह सावरकर को अपना आदर्श मानते थे?: पढ़ाकू नितिन, Ep 11 30.09.2021

शहीदे आज़म भगत सिंह का नाम सब जानते हैं, काम भी सबको पता है लेकिन ख्यालों के समंदर में डुबकी मारने से बचते हैं. वो उन चुनिंदा विचारक क्रांतिकारियों में हैं जिनकी पूजा सहजता से हो जाएगी लेकिन उतना ही मुश्किल उनके विचारों को लागू करना है. करीब सौ साल बीत गए हैं पर उनका लिखा और बोला हुआ अब भी धुंधलके में है. आज उससे काफी हद तक परत हटाने की कोशिश पढ़ाकू नितिन में हुई है. बैठकी में नितिन ठाकुर के साथ श...

भारत के शानदार Indie Pop Music की हत्या किसने की: पढ़ाकू नितिन Feat. पलाश सेन, Ep 10 23.09.2021

नब्बे के दशक में बहुत कुछ बदला. हिंदुस्तान में म्यूज़िक की तस्वीर भी बदली. टीवी स्क्रीन्स पर एक से एक म्यूज़िक बैंड और सोलो आर्टिस्ट दिखे. उस दौर को इंडी पॉप का गोल्डन पीरियड कहा गया. आज भी नब्बे का दौर लोगों के दिल से गुज़रा नहीं लेकिन सवाल ये है कि बीस साल पहले म्यूज़िक इंडस्ट्री पर राज करनेवाले तमाम चेहरे अब कहां गए? उस इंडी पॉप म्यूज़िक को किसने गायब कर दिया? क्या दुनिया भर में सोलो ऑर्टिस्ट्स...

नेहरू की पॉलिसी की वजह से चीन हम पर हावी हुआ?: पढ़ाकू नितिन, Ep 09 16.09.2021

तिब्बत हमेशा ही भारत और चीन के बीच टकराव की बड़ी वजह रहा लेकिन ये बीज अंग्रेज़ बो कर गए थे. ऐसा ही एक और लड़ाई का बीज उन्होंने अक्साई चिन में बोया जिसके चक्कर में 1962 की जंग हो गई, लेकिन बात इतनी सीधी नहीं है और ना इतने सीधे हैं भारत-चीन के रिलेशन. कम्युनिस्ट चीन की आक्रामकता, नेहरू की चीन-तिब्बत पॉलिसी, तिब्बत के कर्ता-धर्ताओं की लापरवाही बहुत कुछ है भारत-चीन के टकरावों में. आज इन्हीं की परतें ख...

सड़क पर किसी की जान न जाए, चाहते हैं तो ये सुनें: पढ़ाकू नितिन, Ep 08 09.09.2021

आप रोज़ाना घर से निकलते हैं और लौटते हैं लेकिन रोज़ करीब 400 लोग सुरक्षित घर नहीं लौट पाते. ये सड़क हादसों में मारे जाते हैं. आंकड़े कहते हैं कि इनमें से 30 तो बच्चे होते हैं. सालाना पांच लाख रोड एक्सीडेंट्स देखनेवाला हमारा देश इस मामले में दुनिया का टॉपर है. यकीनन कोई नहीं चाहेगा कि इस लिस्ट में हम नंबर वन पर बने रहें. आज पढ़ाकू नितिन में समझेंगे कि सड़कों पर एक्सीडेंट के सबसे बड़े कारण क्या हैं...

दुनिया में हर जगह सड़क और पुल बनाकर चीन को क्या मिलता है?: पढ़ाकू नितिन, Ep 07 02.09.2021

चीन आज वहाँ से बहुत आगे निकल आया है जहां कभी भारत के पीछे खड़ा था. इकोनॉमी की रेस में वो दुनिया का दूसरा बड़ा देश बन गया है लेकिन हमारी रफ़्तार पहले से धीमी है. आज के पढ़ाकू नितिन में जानेंगे कि उसने ये रास्ता कैसे तय किया, किसने उसका आर्थिक रूप इतना बदला कि वो वामपंथी नाम का रह गया और क्यों चीन घूम-घूमकर दुनिया भर में सड़कें और पुल बना रहा है. भारत के सामने सवाल भी है कि चीन के बढ़ते ख़तरे के साम...

100 साल तक भारतीय सैनिकों का आदेश मानने को मजबूर क्यों थे चीनी?: पढ़ाकू नितिन, Ep 06 26.08.2021

कुछ लोगों को चीन की तेज़ तरक़्क़ी हैरान करती है और कुछ देशों को डराती है. वर्ल्ड ऑर्डर में टॉप पर होने की चीनी चाहत ने दुनिया के थिंक टैक्स को मजबूर कर दिया है कि वो चीन का विज़न और उसका इतिहास दोनों समझें. चीन कभी आज की तरह बहुत विशाल और समृद्ध था लेकिन बीच में एक लंबा दौर आया जब उसने दुनिया से अपमान सहा. कुछ सयाने कहते हैं कि आज के चीन की गुंडई के पीछे उसी बेइज़्ज़ती का असर है. यहाँ तक कि एक सदी...

एक राष्ट्रपति को ज़हर देने की कोशिश ने कैसे फोड़ी अफ़ग़ानिस्तान की क़िस्मत?: पढ़ाकू नितिन, Ep 05 19.08.2021

19 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है लेकिन आज उसके हालात अजीब हैं. कोई नहीं जानता कि वो अमेरिका से आज़ाद हुआ है या तालिबान का गुलाम. कुछ लोगों का मानना है कि तालिबान अब मैच्योर हो गया है तो किसी ने कहा कि सौ चूहे खानेवाली बिल्ली हज पर जाए तो भी भरोसा नहीं करना चाहिए. आज पढ़ाकू नितिन में हम तालिबान की पैदाइश के हालात, पतन, रिवाइवल की कहानी जानेंगे. साथ ही समझेंगे कि अफ़ग़ानिस्तान...

भारतीय रेल की ग़ज़ब कहानी, ट्रेन में भूत पहले आया या टॉयलेट?: पढ़ाकू नितिन, Ep 04 12.08.2021

हम भारतीयों का रेल से नाता थोड़ा जुदा है. ज़रा गहरा है. बचपन के तमाम किस्सों में कोई वाकया रेल से जुड़ा ज़रूर होगा. आज पढ़ाकू नितिन के चौथे एपिसोड में हम चलेंगे रेल के ही सफ़र पर. इस यात्रा में कई स्टेशन आएँगे. कौन कौन से हैं वो नीचे लिखे हैं, तो क़िस्से कहानियों के ज़रिए रेल की दिलचस्प कहानी को समझाने वाले हैं डॉ अरूप के चटर्जी जो रेल की संस्कृति और इतिहास पर तीन शानदार किताबों के लेखक हैं. इस बा...

क्यों अफ़ग़ानिस्तान में घुसना आसान है मगर निकलना कठिन: पढ़ाकू नितिन, Ep 03 05.08.2021

जब पड़ोस में शोर हो तो चर्चा लाज़िमी है. पढ़ाकू नितिन का तीसरा एपीसोड ऐसे ही पड़ोसी पर है जिसके घर में हंगामा मचा है. इसका नाम अफ़ग़ानिस्तान है. इस मुल्क के बारे में कहा जाता है कि यहाँ घुसना आसान है लेकिन निकलना मुश्किल. इस कहावत को ब्रिटेन और सोवियत यूनियन के बाद अमेरिका ने पुष्ट किया है. बात हो रही है मोहम्मद ज़ीशान से जिन्होंने अमेरिका में इंटरनेशनल अफ़ेयर्स की पढ़ाई की, मध्य एशिया के कई देशों...

एलियंस होते हैं या नहीं होते? दो मशहूर वैज्ञानिकों की बतरस: पढ़ाकू नितिन, Ep 02 29.07.2021

पढ़ाकू नितिन के दूसरे ऐपीसोड में बैठकी जमी है UFOs पर. कोई इन्हें उड़नतश्तरी कहता है तो कोई एलियंस. एक संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को बहुत सालों तक हम मज़ाक़ में उड़ाते रहे लेकिन अब दुनिया के विकसित देश कमर कस के रिसर्च करने में जुट गए हैं. बात होगी इसरो के पूर्व वैज्ञानिक अनिल कुलकर्णी से जिनका दावा है कि उन्होंने UFO देखा है और साइंटिस्ट अमिताभ पांडे से जो बरसों से एलियंस थ्योरी ध्वस्त करते रहे है...

बाबर को 'मुग़ल' शब्द से नफ़रत क्यों थी?: पढ़ाकू नितिन, Ep 01 22.07.2021

ये ऐपीसोड है बाबर पर. क्यों वो हिंदुस्तान आया? क्यों वापस नहीं लौटा? बाबरनामा के कुछ पन्ने ग़ायब होकर कहां पहुँचे? बाबर को भारत में क्या पसंद था और क्या नापसंद? ऐसे तमाम सवालों के जवाब तलाशते हुए उसके दिमाग़ की सैर पर निकलेंगे अमेरिका की डेलावेयर यूनिवर्सिटी में पढ़ानेवाले प्रोफेसर मुक्तदर खान के साथ पढ़ाकू नितिन में. More in this episode: - बाबर ख़ुद मुग़ल था लेकिन क्यों उसे इस शब्द से सख़्त नफ़र...

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