AKTANU899

कविताएं (Poetry Hindi -Urdu)

Arts HI ↓ Odcinki: 529

I like poetry. I have made this podcast to recite some of my favourite poets poem and some of my own.

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Autor

AKTANU899

Kategoria

Arts

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7 paź 2026

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Odcinki

बनारस 16.07.2026

रियाज़ लतीफ़

ख़्वाब का दर बंद है 16.07.2026

शहरयार

एक ख़्वाहिश 16.07.2026

बशर नवाज़

टुकड़ों में बंटी हुई ज़िन्दगी 16.07.2026

अज़रा अब्बास

मैं तुम्हें याद कर रहा था 16.07.2026

सरवत हुसैन

आदमी की तलाश 16.07.2026

निदा फ़ाज़ली

बंजारा-नामा 16.07.2026

नज़ीर अकबराबादी

Only for thee that I hope (Gitanjali) 14.07.2026

Rabindra Nath Tagore

दोनों इक सड़क के आर- पार चल रहे हैं हम 14.07.2026

गुलज़ार

ख़्याल को वजूद देके, उसको ढूंढ़ते रहे 14.07.2026

गुलज़ार

ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर 2 14.07.2026

अख़्तर शीरानी

ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर 1 14.07.2026

अख़्तर शीरानी

मोहब्बत अब नहीं होगी 14.07.2026

मुनीर नियाज़ी

पहुंच 12.07.2026

तुम्हारे साथ देखते-देखते समुद्र पर पुल बन गया है, ऊंचे गिरि शिखरों तक सड़क जन संकुल नगरों से दूर निकल आया हूं - हाथों में थामे तुम्हारा हाथ! दुष्यंत कुमार

सारे रिश्ते भुलाए जाएंगे अब तो ग़म भी गंवाए जाएंगे जौन एलिया 12.07.2026

सारे रिश्ते भुलाए जाएंगे अब तो ग़म भी गंवाए जाएंगे जानिए किस क़दर बचेगा वो उससे जब हम घटाए जाएंगे उसको होगी बड़ी पशेमानी अब जो हम आज़माए जाएंगे क्या गरज़ दौर-ए- जाम से हमको हम तो शीशे चबाए जाएंगे मेरी उम्मीद को बजा कहकर सब मेरा दुख बढ़ाए जाएंगे कम से कम कुछ गली में जानानां धूम तो हम मचाए जाएंगे जख्म पहले के अब मुफ़ीद नहीं अब नये ज़ख़्म खाए जाएंगे हो ख़ुदा कि आदम-ओ-इब्लीस सब के सब आज़माए जाएंगे शाख...

वर्षा 11.07.2026

दुष्यंत कल दिन भर वर्षा हुई कल न उजाला दिखा अकेला रहा तुम्हे ताकता अपलक। आती रही याद: इंद्रधनुषों कि वे सतरंगी छवियां खिंची रहीं जो मानस पट पर भरसक। कलम हाथ में लेकर बूंदों से बचने की चेष्टा की इधर-उधर को भागा भींग गया पर मस्तक: हाय! भाग्य की रेखा, मुझ पर ही आकाश अकारण बरसा पर तुम ... बूंदें गई न शायद तुम तक। दुष्यंत कुमार

एक शाम की मनःस्थिति 11.07.2026

दुष्यंत कुमार

वर्षों बाद 11.07.2026

दुष्यंत कुमार

सितारों के पयाम आये 30.06.2026

अली सरदार जाफ़री

वही फ़ासला लगे है मुझे 30.06.2026

जां निसार अख़्तर

दर्द वही जो मीठे-मीठे गीतों में ढल जाता है 30.06.2026

ताबां गुलाम रब्बानी

कवि मुक्तिबोध के निधन पर 26.06.2026

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

सुरों के सहारे -2 26.06.2026

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

सुरों के सहारे -1 26.06.2026

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

शमशेर का काव्य संग्रह पढ़ने के बाद 26.06.2026

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

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