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Episodes
Chupke Se Idhar Aa Jao | Shahryar 16.06.2026 1:27
चुपके से इधर आ जाओ । शहरयारदरवाज़ा-ए-जाँ से हो करचुपके से इधर आ जाओइस बर्फ़ भरी बोरी कोपीछे की तरफ़ सरकाओहर घाव पे बोसे छिड़कोहर ज़ख़्म को तुम सहलाओमैं तारों की इस शब कोतक़्सीम करूँ यूँ सब कोजागीर हो जैसे मेरीये अर्ज़ न तुम ठुकराओचुपके से इधर आ जाओ
Ibn-e-Insha | Swanand Kirkire 15.06.2026 2:24
इब्ने इंशा । स्वानंद किरकिरेहम इंशा जी के चेले हैंहम जोगी हैं बैरागी हैंहम प्रीत प्रेम के प्यासे हैंहम फ़ितरत से अनुरागी हैंइंशा की लय पर लिखते हैंकुछ उनकी तरह ही दिखते हैंइंशा की तरह हम प्रेमी हैंइंशा की तरह हम बाग़ी हैंहै चाँद से अपना यारानाहै मन उसका आना-जानाजिस शै से हमारा दिल है लगावो चाँद-चाँद कहलाती हैहज़ारों रातें चाँद हज़ारहर शब है मोहब्बत का बाज़ारहम जीते हैं अजी ऐसे हीहमें चाँद लगन जो...
Shareef Log | Abdul Bismillah 14.06.2026 1:53
शरीफ़ लोग । अब्दुल बिस्मिल्लाहपत्थर के कोयले सेजो धुआँ उठता हैउसमें एक शहर महकता हैसुना है उस शहर मेंशरीफ़ लोग रहते हैंलेकिनशराफ़त काधुएँ से क्या नाता हैयह समझ में नहीं आताजैसे यहकि हर बार जंगल का राजाशेर ही क्यों हो जाता हैया यहकि बच्चों की फ़सलमुरझाने क्यों लगी हैकि बिना किसी बीमारी केमेरा जिस्मतलवार क्यों हो रहा हैक्या यह बातशरीफ़ों के कर्त्तव्य से बाहर हैकि वे धुएँ को ख़त्म करेंअथवापत्थर को जलन...
Hatheli Ki Lakeerein | Madhav Kaushik 13.06.2026 2:01
हथेली की लकीरें । माधव कौशिकचले तो साथ थे लेकिन न जाने कैसे हुआतुम्हारा हाथ किसी पिछले जन्म में शायद हमारे हाथ से छूटा तो छूटता ही गया हज़ारों साल से बिछड़ी हुई हैं दो आँखेंहज़ारों साल में जाकर कभी मिलें तो मिलेंकोई सुराग़ नहीं है इसीलिए शायदहथेलियों की लकीरों में ढूंँढता हूँ तुझे
Usne Kaha | Shiv Kumar Gandhi 12.06.2026 2:34
उसने कहा । शिव कुमार गांधीउसने कहा मुझसे ले चलो अपने शहरजो कहोगे वही करूँगाफिर पकड़ाई चाय जो गैस केचूल्हे पर बनी थीमैंने कहा मज़ाक़ में -जगह बदल लेते हैं हमऔर फिर वैसे भी शहर ख़ुद ही तो आ रहा हैतुम तकउसने कहा वहाँ छत पर बैठना शाम मेंअच्छा लगता है रोशनियों बीच और फिर हवा तो आती ही हैएक कारख़ाने में काम करता था उसका भतीजाजिसके साथ किसी छत पर बैठा था वह एक दिनइस शहर में रोशनियों बीचऔर उस दिन भी हवा तो...
Is Ghat-Antar Baag-Bageeche | Kabir 11.06.2026 1:51
इस घट-अंतर बाग़-बगीचे । कबीरइस घट-अंतर बाग़-बगीचे इसी में सिरजनहाराइस घट-अंतर सात समुंदर इसी में नौ लख ताराइस घट-अंतर पारस मोती इसी में परखनहाराइस घट-अंतर अनहद गरजै इसी में उठत फुहाराकहत 'कबीर' सुनो भाई साधो इसी में साईं हमारा
Kya Kiya | Sushma Kumari 10.06.2026 2:04
क्या किया। सुषमा कुमारीघोर अँधेरे मेंजब 'मुक्तिबोध' के शब्दगूंजते हैं कानों में- 'कहो इस जीवन में क्या किया?किसी मेमने की तरहघबराई,मैं भागने लगती हूँउल्टी दिशा में!बहुत-बहुत भाग करफिर पहुँचती हूँ वहीं!न बचने की हालत मेंबहुत-बहुत सोचती हूँ,और पाती हूँ।अँधेरी खदानों मेंखोदती रही जीवन।उम्मीदों की अनाज से,भरती रही बच्चों का पेट!मजदूरी कीझुकी हुई पीठ पर बोझा उठाया।कतरनों को चुन करगढ़े बहुत-बहत सपनें।ब...
Be-Awaaz | Veeru Sonkar 09.06.2026 1:19
बे-आवाज़ । वीरू सोनकरजहाँ भाषा चूकती हैऔर अर्थ बे-आवाज़ ही रह जाते हैंजहाँ शब्दों को कोई ईश्वर नहीं मानताहम वहाँ मिलेंगेऔर अपनी चुप्पियों में कहेंगेकि आवाज़ एक ख़लल हैइस दुनिया को बिना किसी शर्त अब चुप हो जाना चाहिए!
Meri Ma Ek Patang Hai | Kumar Divyanshu Shekhar 08.06.2026 1:45
मेरी माँ एक पतंग है । कुमार दिव्यांशगु शेखर पतंग बने।नियत हुआ आकाश; पर किसी तौरउन्हें भाते रहेतार,पटरियों के ऊपर बिछे समानांतर।ओ मेरी मातः!तुम एक पतंग हो,तुमने नहीं चुना आकाश।कितना त्रासद है यहतार से चिपका-उलझा-फड़फड़ातानिरंतर सुलगताएक दिन गल जाएगातुम्हारा अस्तित्व।
Harmony | Hemant Deolekar 07.06.2026 1:32
हार्मनी। हेमंत देवलेकरसफ़ेद ओर काला अलग रहेंगेतो नस्ल कहायेंगेमिलकर रहेंगे तो संगीतहारमोनियमसाहचर्य की एक मिसाल है।उंगलियों के बीच की खली जगहउंगलियों से भर देने के लिए है
Ummeed | Shailay 06.06.2026 1:41
उम्मीद । शैलेयअँजुरी भर जलतलुवे भर ओसआँख भर सपनानींद भर लोरीहौसले कोजुगनू भर हिक़मतजुटा ही लेनी चाहिएनामुराद अंधड़ मेंकुछ तो मिट्टी टूटने से बचेगीकुछ तो उगी रह सकेगीदूबकि कभी न कभी तोफूट ही लेंगे कल्ले नए-नए।
Ek Abhineta Ki Thakaan | Agney 05.06.2026 1:36
एक अभिनेता की थकान। आग्नेयवह रंगमंच पर जा चुका हैवह अपनी भूमिका पूरी कर चुका हैउतार दी है पोशाकउस चरित्र की जिसका अभिनय किया उसनेवह नहीं जानताजब वह रंगमंच पर थाकरतल-ध्वनियाँ हुईं या नहींअथवा सन्नाटा पसरा रहादर्शकों के बीच रंगशाला मेंप्रत्येक वर्ष यह भूमिका करतेवह थक चुका हैकहाँ जाए रंगमंच छोड़करहो चुका है वह जो कुछ अभिनय करतेउसको छोड़कर जानाक्या उस पर निर्भर करता है
Yah Number Maujood Nahi Hai | Manglesh Dabral 04.06.2026 2:56
यह नंबर मौजूद नहीं । मंगलेश डबरालदिस नंबर डज़ नॉट एग्ज़िस्टजहाँ भी जाता हूँ जो भी फ़ोन मिलाता हूँअक्सर एक बेगानी-सी आवाज़ सुनाई देती हैदिस नंबर डज़ नॉट एग्ज़िस्ट यह नंबर मौजूद नहीं हैकुछ समय पहले इस पर मिला करते थे बहुत-से लोगकहते आ जाओ हम तुम्हें पहचानते हैंइस अंतरिक्ष में तुम्हारे लिए भी बना दी गई है एक जगहलेकिन अब वह नंबर मौजूद नहीं है वह कोई पहले का नंबर थाउन पुराने पतों पर बहुत कम लोग बचे हु...
Tum Ho | Nazim Hikmat 03.06.2026 1:45
तुम हो । नाज़िम हिकमतअनुवाद : सुरेश सलिलतुम्हीं मेरी ग़ुलामी हो, तुम्हीं मेरी आज़ादीगर्मियों की किसी बेलिबास रात की तरह मेरा जिस्ममेरा वतन हो तुमपन्ने जैसी हल्की हरी आँखें,हैरतअंगेज़ हो तुम, ख़ूबसूरत और ज़िंदादिलमेरी हस्रत हो तुम, मेरी पहुँच से परे हरदम।
Sankatgrasth | Vivek Nirala 02.06.2026 1:51
संकटग्रस्त। विवेक निराला भूमंडलीकरण के इस युग में संकट ही संकट थे स्थानीय लोग कुछ वैश्विक संकटों से जूझ रहे थे और वैश्विक लोग स्थानीय संकटों से।मेरा संकट मेरी टूटी खाट थी जब कि मैं स्वप्न में था। किसानों के पास कर्ज था और उद्योगपतियों के पास मर्ज सरकार को किसी से हर्ज न था।खुदगर्ज सिर्फ़ हिन्दी का कवि था लेकिन वह भी संकट से दुबराया था।न उसकी किताब बिकती थी और न उसकी आत्मा। उसके शरीर में जन्म से ए...
Ped | Omprakash Valmiki 01.06.2026 1:29
पेड़ । ओमप्रकाश वाल्मीकिपेड़तुम पेड़ उसी वक़्त तकपेड़ हो,जब तक ये हरे पत्तेहिल रहे हैंतुम्हारी टहनियों पर।पेड़,तुम्हारा हरापन उसी वक़्त तक हैजब तक ये पत्ते सही सलामत हैंतुम्हारी टहनियों पर।पेड़,तुम उसी वक़्त तक पेड़ हो,जब तक ये पत्तेतुम्हारे साथ हैं।पत्ते झरते हीपेड़ नहीं ठूँठ कहलाओगेजीते जी मर जाओगे!
Tum Muskurana | Anurag Tiwari 31.05.2026 2:43
तुम मुस्कुराना । अनुराग तिवारीचाहे जैसी स्थितियां होहालात चाहे कैसे होदुख हो, निराशा होया फिर झूठी आशा होविफलता या असफलता होया फिर घोर विकलता होसंताप, वेदना, दर्द होया थक कर हारा मर्द होजब अपनी शक्ति क्षीण लगेहम-तुम सा वीर अधीर लगेजब निश्छल प्रेम अधूरा होअपना सोचा ना पूरा होतब मानों इक बात मेरी, ना घबरानातुम मुस्कुराना मुस्कुराना मुस्कुराना।।सपने अगर अधूरे होकोशिश हो ना पूरे होंराहों में कठिनाई हो...
Mohabbat Mein Der Ho Sakti Hai | Zeeshan Sahil 30.05.2026 1:59
मोहब्बत में देर हो सकती है। ज़ीशान साहिलजब तुम मुझे सुनोये कहते हुएएक ख़ूब-सूरत लड़की पे मरनाकितना आसान हैऔर उसी के लिए मर जानामैं पसंद करता हूँऔर इस के बादतुम मुझे देखोकई बरस तकअपने टूटे हुए दिल को जोड़तेगिरे हुए सितारों कोदोबारा आसमान में टाँकतेमिट्टी में मिले हुए फूलों कोफिर से खिलाने की कोशिश करतेएक ख़ूब-सूरत लड़की के लिएमोहब्बत में देर हो सकती है
Shabd | Kamala Das | Translation - Ranjana Mishra 29.05.2026 2:20
शब्द / कमला दास अनुवाद. - रंजना मिश्रामेरे चारों और शब्द, शब्द, शब्द हैंवे मुझपर पत्तों की तरह उगते हैंऐसा लगता है वे कभी मेरे भीतरधीमे धीमे उगना बन्द नहीं करतेपर मैं खुद से कहती हूँ — शब्दवे एक मुसीबत हैं, उनसे सावधान रहो,वे कई चीज़ें हो सकते हैं, जैसेकि खाईजहाँ तेज़ी से चलते क़दमों को ठहरना चाहिएदेखो, वे समुद्र की पंगु बनाने वाली लहरें हो सकते हैंगर्म हवाओं का भूचाल या तुम्हारे सबसे अच्छे मित्र...
Ek Aur Dhang | Shrikant Verma 28.05.2026 2:07
एक और ढंग। श्रीकांत वर्माभागकर अकेलेपन से अपनेतुममें मैं गया।सुविधा के कई वर्षतुममें व्यतीत किए।कैसे?कुछ स्मरण नहीं।मैं और तुम! अपनी दिनचर्या केपृष्ठ परअंकित थेएक संयुक्ताक्षर!क्या कहूँ! लिपि की नियतिकेवल लिपि की नियतिथी—तुममें से होकर भी,बसकर भी,संग-संग रहकर भीबिल्कुल असंग हूँ।सच है तुम्हारे बिना जीवन अपंग है।- लेकिन! क्यों लगता है मुझेप्रेमअकेले होने का हीएक और ढंग है।
Ma | Amitabh 27.05.2026 1:14
माँ । अमिताभहालाँकि मैं सबसे छोटा थाग़रीब दुर्बलपर माँ सर्वाधिक मेरे हिस्से में आईमैं ही था उसका अशिष्ट सेवकलापरवाह प्रेमीमैं ही अकेला चूम सकता था उसके गालवही जानती थी बस कि मैं कवि हूँ
Buddh Chahiye Yuddh Nahi | Rajni Tilak 26.05.2026 2:43
बुद्ध चाहिए युद्ध नहीं । रजनी तिलकक्यों खड़ी की तुमनेबारूद के ढेर पर हमारी दुनियामुझे जीवन की आस है।मैं सावन को आँखों में भरकरबहारों में झूलना चाहती हूँशाँति, ज्ञान, करुणा मेरा गहनायुद्ध, क्रूरता, तृष्णा तुम्हारा हथियारहिरोशिमा की तड़प मैं भूलना चाहती हूँ।तुमने जो मृत्यु बीजपरमाणु युद्ध क्यों बोया?यह घृणा-मृत्यु का वटवृक्षपल में लाखों को भी लेगा,बुद्ध के देश मेंपंचशील, संकल्प टूट जाएगा।मैं जीवन क...
Mohabbat Mein Karein Kya Kuch | Daag Dehlvi 25.05.2026 1:44
मुहब्बत में करे क्या कुछ किसी से हो नहीं सकता । दाग़ देहलवीमुहब्बत में करे क्या कुछ किसी से हो नहीं सकतामेरा मरना भी तो मेरी ख़ुशी से हो नही सकतान रोना है तरीक़े का न हंसना है सलीके़ कापरेशानी में कोई काम जी से हो नहीं सकताख़ुदा जब दोस्त है ऐ 'दाग़' क्या दुश्मन से अन्देशाहमारा कुछ किसी की दुश्मनी से हो नहीं सकता
Bhejna | Tribhuvan 24.05.2026 2:08
भेजना | त्रिभुवनलौटते पत्र के साथकुछ बादल भेजनासमुद्र के कुछ पेड़पत्तियों के बीच चहचहाते कुछ पक्षीऔर पानी की कुछ लहरें भेजनाअपनी सुंदर आँखों के अक्स भेजनाभेजना चेहरे की लालिमा के कुछ लैंडस्केपऔर रात भर नशा करके बैठी सुबह की कुछ छवियाँ भेजनाहाँ, एक खुली खिड़की भेजनाएक मदमाती पतली अकेली गली का वह कोना भेजनाजहाँ मैं तुमसे मिल सकूँऔर अपनी उँगलियों की छुअन भेजनाजिसे अपनी चाहत की दीवारों में गाड़करअपने भरो...
Na Hoga Kuch Tab | Ritu Kumar Ritu 23.05.2026 1:37
न होगा कुछ तब। ऋतु कुमार ऋतुहमें मालूम हैएक न एक दिन हम सब मिल जाएँगेइसी मिट्टी मेंएक न एक दिनहमें मालूम हैहोगी निष्प्राण यह सृष्टिहमें मालूम हैएक न एक दिनअपने यक़ीन पर आ जाएँगेहम सबऔर किसी सबूत की ज़रूरत नहीं होगी!
About the podcast
कवितायेँ जहाँ जी चाहे वहाँ रहती हैं- कभी नीले आसमान में, कभी बंद खिड़कियों वाली संकरी गली में, कभी पंछियों के रंगीन परों पर उड़ती हैं कविताएँ, तो कभी सड़क के पत्थरों के बीच यूँ ही उग आती हैं। कविता के अलग अलग रूपों को समर्पित है, हमारी पॉडकास्ट शृंखला - प्रतिदिन एक कविता। कीजिये एक नई कविता के साथ अपने हर दिन की शुरुआत।
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Nayi Dhara Radio
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