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Pravachans / Moral-Stories / Chantings / Bhajans - by Mahatmas of Vedanta Ashram, Indore
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मुण्डकोपनिषद प्रवचन (२९ अप्रैल २०२१) का सार 29.04.2021 4:03
वेदांत आश्रम, इंदौर में आजकल मुण्डकोपनिषद की तीसरी वल्ली पर प्रवचन चल रहे हैं। प्रसंग यह चल रहा है की अपने छोटेपन की धारणा ही हमारी समस्त शोक और पीड़ाओं का कारण होती है। इस छोटेपने से मुक्त होना ही आत्मा-ज्ञान का प्रयोजन होता है। जब ' मैं ' छोटा होता है तभी ' मेरा ' भी छोटा होता है। सीधे मैं का ज्ञान नहीं होता है, पहले हमें मेरे को व्यापक, उदात्त एवं बड़ा बनाना चाहिए। इसी को समष्टि दृष्टी से युक्त ह...
मुण्डकोपनिषद प्रवचन (२८ अप्रैल २०२१) का सार 29.04.2021 3:01
पू स्वामिनी समतानन्दजी २७/४ के पू गुरूजी स्वामी आत्मानन्द जी द्वारा दिए गए प्रवचन का सार बता रही हैं।
होलिका दहन की कथा और रहस्य 26.03.2021 19:46
होलिका दहन की क्या वास्तविक कथा है। अनेको लोग जो होलिका को अपने सगे भाई हिरण्यकश्यपु के षड्यंत्र का हिस्सा समझते हैं - वे सत्य जानते नहीं हैं। होलिका को तो वस्तुतः डरा-धमका कर अग्नि में प्रह्लाद को लेकर बैठने के लिए के मजबूर किया गया था। होलिका अग्नि देवता की बहुत महान उपासक थी तथा उसको अग्नि देवता ने प्रसन्न होकर एक विशिष्ट चद्दर का उपहार दिया, जिसको ओढ़ कर वो बगैर अग्नि से जले देर तक अपनी उपासना...
गीता महायज्ञ - अध्याय-18 (भाग-२) 20.03.2021 1:58:14
गीता महायज्ञ में श्रीमद्भगवद गीता के अंतिम अर्थात समापन प्रवचन में वेदांत आश्रम, इंदौर के आचार्य परं पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने मोक्ष-सन्यास योग नामक १८वें अध्याय के दूसरे भाग में आगे बताते हुए कहा की गीता में भगवान् श्री कृष्ण अर्जुन को न केवल जीवन का परम लक्ष्य बताते हैं लेकिन उसके लिए साधन भी स्पष्टता से बताते हैं। लक्ष्य अपनी वास्तविकता को जानना और उसमे जगना होता है, और इसके लिए मन को...
गीता महायज्ञ - अध्याय-18 (भाग-१) 20.03.2021 1:38:48
गीता महायज्ञ में श्रीमद्भगवद गीता के अंतिम अध्याय (१८वें) जिसका नाम मोक्ष-सन्यास योग है, उसके पहले भाग में अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय का भी प्रारम्भ अर्जुन के एक प्रश्न से होता है। वो पूछता है की हे महाबाहो, हमने आपके उद्बोधन को ध्यान से सुना, इसमें आपने अनेको जगह सन्यास एवं अनेको जगह त्याग शब्दों का कई बार प्रयोग किया, क्या ये दोनों एक ही भाव से प...
गीता महायज्ञ - अध्याय-17 20.03.2021 1:34:57
गीता महायज्ञ में श्रीमद्भगवद गीता के १७वें अध्याय (श्रद्धात्रयविभाग योग) का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय का प्रारम्भ अर्जुन के एक प्रश्न से होता है। वो पूछता है की हे कृष्ण, हमें शास्त्र के द्वारा प्रतिपादित ज्ञान से चलना चाहिए ये बात हमको समझ में आती है, लेकिन भगवन शास्त्र का ज्ञान तो धीमे-धीमे ही प्राप्त होता है, प्रारम्भ में तो हमें पता ही नहीं होता है की श...
गीता महायज्ञ - अध्याय-16 20.03.2021 1:34:43
गीता महायज्ञ में श्रीमद्भगवद गीता के १६वें अध्याय (दैवासुरविभाग योग) का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय में व्यक्ति को अपनी प्रेरणाओं के अवलोकन की प्रेरणा दी जा रही है। हम सब अध्ययन या श्रवण आदि कुछ भी करें लेकिन अंततः यह देखा जाना चाहिए की हमारे मन में अब प्रेरणा किस चीज़ की हो रही है। हमें अब क्या अच्छा लगाने लगा है। भले वो गुण आज हमारे अंदर नहीं हों लेकिन चाह अ...
गीता महायज्ञ - अध्याय-15 20.03.2021 1:32:30
गीता महायज्ञ में श्रीमद्भगवद गीता के पुरुषोत्तम योग नामक १५वें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि यह अध्याय हमारे लिए शीशे की तरह से है - जो की हमारी पारमार्थिक वास्तिविकता बताता है। जिस पुरुष तत्त्व को पिछले अध्याय में बताया था, उसकी गहराई में इस अध्याय में भगवान हमें ले जा रहे हैं। किसको वेदों का जानकार कहते हैं? उसके कैसे मूल्य होते हैं? वो कैसे संसार के अंतहीन झ...
गीता महायज्ञ - अध्याय-14 20.03.2021 1:33:39
गीता महायज्ञ के १६वें दिन गीता के गुणत्रयविभाग योग नामक १४वें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय में भगवान् आत्म-अनात्म विवेक को एक दूसरी तरह से प्रस्तुत करते हैं - वह है प्रकृति एवं पुरुष विवेक। वे इस विवेक की स्तुति पूर्वक कहते हैं सृष्टि को प्रारम्भ से देखना चाहिए। प्रारम्भ में परमात्मा खुद प्रकृति में गर्भादान करते हैं जिससे वो सृष्टि की प्रक्रिया प्रा...
गीता महायज्ञ - अध्याय-13 20.03.2021 1:31:26
गीता महायज्ञ के १५वें दिन गीता के क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग नामक १३वें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय में भगवान् हमें आत्म-अनात्म विवेक के बारे में बताते हैं। परमत्मा को इसी विवेक से अपरोक्षतः जाना जाता है। इसका प्रारम्भ करते हुए प्रभु कहते हैं की अपने शरीर को क्षेत्र कहा जाता है और जो इसको जनता है उसे क्षेत्रज्ञ जानो, और वह खुद परमात्मा ही होते हैं। क...
गीता महायज्ञ - अध्याय-12 20.03.2021 1:34:01
गीता महायज्ञ के १४वें दिन गीता के भक्ति योग नामक १२वें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि पिछले अध्याय के अंत में भगवान् ने कहा था की कण-कण में ईश्वर ही परम सत्य है यह स्पष्टता से जानने के बाद अब तुमको हमें ही अपने जीवन का केंद्र बिंदु बनाना चाहिए। अपने समस्त कर्म, भावनाएं और लक्ष्य हमें ही बनाकर जीना चाहिए। अर्जुन ने भी भक्ति की प्राप्ति को अपना लक्ष्य बना लिया। सा...
गीता महायज्ञ - अध्याय-11 20.03.2021 1:31:30
गीता महायज्ञ के १३वें दिन गीता के विस्वरूपदर्शन योग नामक ११वें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि पिछले अध्याय के अंत में भगवान् ने कहा था की अर्जुन यद्यपि हमारी विविध विभूतियाँ हमारी स्मरण और भजन का अन्यन्त सुन्दर और सरल निमित्त होती हैं लेकिन ये अनंत होती हैं, और सभी को देखा भी नहीं जा सकता है। हम वस्तुतः अपने एक छोटे से अंश से पूरी दुनिया को धारण करते हैं। इस वाक...
गीता महायज्ञ - अध्याय-10 20.03.2021 1:24:41
श्रीमद भगवद गीता के १०वें अध्याय के ऊपर आज प्रकाश डालते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी ने गीता महायज्ञ के १२वें दिन बताया की अध्याय का नाम विभूति योग है और इसका विषय भगवान् अपनी ऐसी समस्त विभूतियों की गणना से करते है जिससे ईश्वर का सतत भजन करा जा सके। इसमें जाने से पूर्व व्यक्ति का अत्यंत विनम्रता से ये जानना चाहिए की वो ईश्वर के बारे में नहीं जनता है। हमें दुनिया के विविध कार्य देखकर उनके कारण की...
गीता महायज्ञ - अध्याय-9 20.03.2021 1:39:01
श्रीमद भगवद गीता के नवें अध्याय के ऊपर आज प्रकाश डालते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी ने गीता महायज्ञ के ग्यारवें दिन बताया की यह राजविद्या राजगुह्य योग नमक अध्याय में भगवान् सद्यो मुक्ति के बारे में बताते हैं। पिछले अध्याय में क्रम मुक्ति की चर्चा हुई थी। वे यहीं पर मुक्त हो जाने की विद्या बताते हुई कहते हैं की हमें कण-कण में व्याप्त जानो। हमारे अंदर जगत विराजमान है और हम सबकी आत्मा हैं। वस्तुतः ह...
गीता महायज्ञ - अध्याय-8 20.03.2021 1:33:09
गीता महायज्ञ के १०वें दिन गीता के अक्षरब्रह्म योग नामक ८वें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय का प्रारम्भ अर्जुन के कुछ प्रश्नो से होता है - की ब्रह्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव, अधियज्ञ, अध्यात्म क्या होते हैं? उसका अंतिम प्रश्न है की अंतिम समय में व्यक्ति आपका समरण कैसे कर सकता है? भगवान् ने इन सभी प्रश्नों के उत्तर प्रदान करे। अंतिम प्रश्न का उत्तर ज्यादा व...
गीता महायज्ञ - अध्याय-7 20.03.2021 1:30:26
गीता महायज्ञ के ९वें दिन गीता के ज्ञान-विज्ञान योग नामक ७वें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय में भगवान् अपने वास्तविक तत्व का परिचय देते हैं। वे कहते हैं की वे अपने परिचय के अलावा अपने साक्षात्कार का तरीका भी बताएँगे जिस ज्ञान से मनुष्य सभी चीज़ों का मूल राशि जान जायेगा। इसके लिए वे अपनी दो प्रकार की प्रकृति के ज्ञान से प्रारम्भ करते हुए बताते हैं की एक...
गीता महायज्ञ - अध्याय-6 20.03.2021 1:28:23
गीता महायज्ञ के आठवें दिन गीता के ध्यान-योग नामक छठे अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय में भगवान योग की अंतरंग साधना अर्थात ध्यान के समस्त पहलु बताते हैं। पिछले अध्यायों में उन्होंने कर्म-योग रुपी बहिरंग साधना बताई और अब हमें और अंदर की गहराईयों में ले चल रहे हैं। इस अध्याय में भी पहले वे कर्मफल के ऊपर आश्रित हुए बगैर कर्म करने का पुनः महत्त्व बताते हैं।...
गीता महायज्ञ - अध्याय-5 20.03.2021 1:19:12
गीता महायज्ञ के सातवें दिन गीता के कर्मसन्यास योग नामक पांचवें अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय का प्रारम्भ अर्जुन के एक प्रश्न से होता है। वो पूँछता है की हे कृष्ण, हमने देखा की आप कभी कर्म से सन्यास की स्तुति करते हैं और कभी कर्मा योग की - कृपया हमें इन दोनों में से जो भी श्रेयस्कर है उसका निश्चय करके बताएं। भगवाब ने कहा की अर्जुन ये दोनों - कर्म-सन्या...
गीता महायज्ञ - अध्याय-4 20.03.2021 1:26:46
गीता महायज्ञ के छठे दिन गीता के ज्ञानकर्मसन्यास योग नामक चौथे अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय का प्रारम्भ भगवान् के वचनो से होता है। वे स्वतः कर्म योग की स्तुति करते हैं। वे कहते हैं की हमने ये योग सबसे पहले सूर्य देवता को दिया था - इसी के कारन वे इतने अध्भुत प्रकार से कभी न थकते हुए सबके ऊपर कृपा की वृष्टि करते हुए कार्य करते रहते हैं। सूर्य देवता ने य...
गीता महायज्ञ - अध्याय-3 20.03.2021 1:16:25
गीता महायज्ञ के पांचवें दिन गीता के कर्म योग नामक तीसरे अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि इस अध्याय का प्रारम्भ अर्जुन के एक प्रश्न से होता है। वो पूँछता है की हे जनार्दन, अगर ज्ञान, कर्म से श्रेष्ठ होता है तो आप हमें इस कर्म में क्यों प्रेरित कर रहे हैं। हे केशव ! अभी हम इन सभी बातों का समझ नहीं पा रहे हैं, कृपया हमें एक निश्चित बात बताने की कृपा करें। इसके बाद भग...
गीता महायज्ञ - अध्याय-2 20.03.2021 1:05:56
गीता महायज्ञ के चौथे दिन गीता के दूसरे अध्याय का सार बताते हुए पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने कहा कि यह सांख्य योग नामक अध्याय पूरी गीता का सार है। इनके ७२ श्लोकों में गीताचार्य हमें बताते हैं एक जीव की पूरी आध्यात्मिक यात्रा भले अल्पता जनित शोक से प्रारम्भ हो, लेकिन यह स्थित-प्रज्ञ की मुक्ति में समाप्त होनी चाहिए। यह ही इस अध्याय का खाका है। इस अध्याय को हम चार भागों में विभाजित कर सकते हैं।...
गीता महायज्ञ - अध्याय-1 20.03.2021 1:12:51
गीता महायज्ञ के तीसरे दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द जी ने बताया की गीता के प्रथम अध्याय में ४७ श्लोक हैं - जिनमे १ धृतराष्ट्र, २५ संजय, एवं २१ अर्जुन के द्वारा कहे गएँ हैं। भगवन श्री कृष्ण के द्वारा एक भी श्लोक नहीं है। मात्र दो शब्द हैं। इसका नाम अर्जुन विषाद योग रखा गया है, क्यूंकि इसमें अर्जुन के विषाद जनित जिज्ञासा का उदय है। सबका विषाद योग नहीं बन पता है। इसलिए अनेकानेक लोगों में शोक के बावजूद ज...
गीता महायज्ञ - भूमिका-2 19.03.2021 1:01:29
सम्पूर्ण भगवद-गीता के महायज्ञ की प्रवचन श्रंखला के दूसरे दिन वेदान्त आश्रम, इंदौर के पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने अपनी भूमिका के दूसरे प्रवचन में बताया कि भगवद गीता धर्म के निर्णय में असमर्थ अर्जुन के लिए उपदेश था। उसके साथ-साथ जो भी अर्जुन स्थानीय जीव हैं उन सबको अपने अनिर्णय के संकट से उभरने हेतु उपदेश है। इस लिए यह समस्त मानव मात्र के लिए उपयोगी और प्रासंगिक है। महाभारत की भू...
गीता महायज्ञ - भूमिका-1 19.03.2021 1:08:34
सम्पूर्ण भगवद-गीता के महायज्ञ की प्रवचन श्रंखला का प्रारम्भ करते हुए वेदान्त आश्रम, इंदौर के पूज्य गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने अपनी भूमिका में बताया कि महाभारत युद्ध एक धर्म युद्ध था। इसमें पांडव लोग धर्म के पक्ष वाले थे और कौरव अधर्म के। धर्म, पूरी दुनियाँ को सर्वज्ञ, सर्व-शक्ति के धाम, करुणानिधान ईश्वर को मध्य में रखकर जीवन जीने की कला है, एवं अधर्म एक छोटे, असुरक्षित, अपूर्ण व्यक्...
एकश्लोकि श्रवण माला - 6 18.03.2021 1:07:43
वेदान्त श्रवण माला के अंतर्गत एकश्लोकी ज्ञान यज्ञ के छठे और अंतिम प्रवचन में पूज्य गुरूजी स्वामी आत्मानन्द जी महाराज ने बताया की परम ज्योति की खोज की यात्रा के अंतिम पड़ाव में हम लोग मन रुपी ज्योति से परम ज्योति तक कैसे पहुंचते हैं उसके लिए हम मन रुपी ज्योति पर पहले चिंतन करना चाहिए। मन रुपी ज्योति अत्यंत समर्थ होती है - वो केवल प्रकाशक ही नहीं बल्कि सृष्टा भी होती है। मन की संकल्प शक्ति दुनिया की...
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