Stream Panther Network

Shiv Puran Katha in Hindi

शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,

Não deixe de visitar o site do podcast e apoiar quem o produz: podcasters.spotify.com

Autor

Stream Panther Network

Categoria

Religion

Site do podcast

podcasters.spotify.com

Último episódio

5 de jul de 2026

Onde ouvir?

Podcasts no app Replaio Radio Em breve

Os podcasts estão chegando ao app. Instale agora e seja o primeiro a descobrir um jeito totalmente novo de curtir podcasts

Baixe no Google Play Instale grátis Android 5 mi+ downloads · nota 4,8 iOS em breve

Episódios

शिव पुराण - आकाशवाणी | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 31 21.07.2025

अध्याय नाम: एकतीसवां अध्याय – आकाशवाणी इस अध्याय में शिव पुराण के अनुसार उस महान यज्ञ में उत्पन्न हुए संकट के समय हुई दिव्य आकाशवाणी का वर्णन किया गया है। यह आकाशवाणी दक्ष के अहंकार, भगवान शिव और माता सती के अपमान, और धर्म विरोधी कृत्यों की कड़ी निंदा करती है। इसमें बताया गया है कि शिव एवं सती के अपमान से समस्त ब्रह्मांड के लिए विनाशकारी परिणाम उत्पन्न हो सकते हैं। यह अध्याय सती की महानता, शिव की...

शिव पुराण - सती द्वारा योगाग्नि से शरीर को भस्म करना | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 30 14.07.2025

सती का योगाग्नि में देह त्याग | दक्ष यज्ञ का विध्वंस और शिवगणों का क्रोध | शिव पुराण कथा इस भावुक और अत्यंत मार्मिक अध्याय में जानिए कैसे माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान देखकर योगाग्नि में अपनी देह का त्याग किया। शिवगणों का भीषण आक्रमण, यज्ञ स्थल पर युद्ध, और सृष्टि में मचे हाहाकार ने पूरे ब्रह्मांड को हिला दिया। यह कथा हमें भक्ति, सम्मान और अहंकार के विनाश का गहन संदेश द...

शिव पुराण - यज्ञशाला में सती का अपमान |अध्याय 29 | श्रीरुद्र संहिता 07.07.2025

"सती का आत्मदाह | दक्ष यज्ञ में शिव का अपमान और सती का त्याग | शिव पुराण कथा" इस भावुक और अत्यंत मार्मिक अध्याय में जानिए कैसे माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का घोर अपमान देखा और आहत होकर अपने प्राण त्यागने का कठोर निर्णय लिया। शिव निंदा का परिणाम, सती का क्रोध और आत्मदाह, और आगे आने वाली महाविनाश की शुरुआत — इस अध्याय में छिपा है भक्ति, सम्मान और धर्म की सच्ची गहराई का संदेश। दे...

शिव पुराण - सती का दक्ष के यज्ञ में आना | अध्याय 28 | श्रीरुद्र संहिता 30.06.2025

"सती का यज्ञ में जाना | शिवजी का मना करना और सती का हठ | शिव पुराण कथा" इस अध्याय में जानिए कैसे माता सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में जाने का निर्णय लेती हैं, जबकि शिवजी उन्हें रोकते हैं। अपनी जिद पर अड़ी सती, शिवजी का आशीर्वाद लेकर, भव्य श्रृंगार और शिवगणों के साथ यज्ञ स्थल की ओर प्रस्थान करती हैं। मार्ग में गूंजते शिव के जयकार, और सती की महान भक्ति का यह अध्याय हमें अहंकार, प्रेम और धर्...

शिव पुराण - दक्ष द्वारा महान यज्ञ का आयोजन | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 27 23.06.2025

"दक्ष प्रजापति का यज्ञ | भगवान शिव का अपमान और दधीचि का शाप | शिव पुराण की दिव्य कथा" इस भावुक और धर्ममयी कथा में जानिए कैसे प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव को अपने महायज्ञ से निमंत्रण नहीं दिया, जिससे शिव का अपमान हुआ। महर्षि दधीचि का क्रोध, ऋषियों का त्याग, और अंततः ब्रह्मा और विष्णु द्वारा यज्ञ को पूरा करने का प्रयास—यह अध्याय धर्म, अहंकार और सच्चे श्रद्धा की गहराइयों को छूता है। देखिए शिव...

शिव पुराण - दक्ष का भगवान शिव को शाप देना | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 26 16.06.2025

दक्ष का यज्ञ, भगवान शिव का अपमान और श्रापों का महा संग्राम | शिव पुराण कथा" इस रोमांचक कड़ी में जानिए प्राचीन शिव पुराण की वह कथा जब प्रजापति दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया गया। शिव का अपमान, सती का विरोध, और नंदी व दक्ष के बीच श्रापों का आदान-प्रदान – यह सब बनता है इस अध्याय का मुख्य आकर्षण। श्रद्धा, अहंकार, और धर्म के टकराव को दर्शाने वाली यह कथा...

शिव पुराण - श्रीराम का सती के संदेह को दूर करना | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 25 09.06.2025

“पच्चीरावाँ अध्याय: ‘श्रीराम का सती के संदेह को दूर करना’—इस अध्याय में श्रीरामचन्द्र जी द्वारा माता सती को यह कथा सुनाकर उनके हृदय से संदेह और मोह दूर किए जाते हैं। शंकर–सती के पारस्परिक प्रेम एवं उनकी परिक्षा का भावपूर्ण विवरण, स्तुति–लीला के स्वरूपों को उजागर करता है।” टैग्स (Tags): शिव सती कथा, श्रीराम की परीक्षा, सती का भ्रम, शिव पुराण, हिन्दू ग्रंथ, आध्यात्मिक कथा, पौराणिक प्रसंग, सीता रूप ध...

शिव पुराण - शिव की आज्ञा से सती द्वारा श्रीराम की परीक्षा | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 24 02.06.2025

इस अध्याय में सती द्वारा श्रीराम की परीक्षा लेने की कथा वर्णित है। जब सती को भगवान शिव की बातों पर संदेह हुआ, तब उन्होंने स्वयं सीता का रूप धारण कर श्रीराम की परीक्षा ली। इस परीक्षा के बाद श्रीराम ने सती को पहचान लिया, जिससे सती का भ्रम दूर हुआ। उन्होंने श्रीराम की महिमा को स्वीकार किया और उनके चरणों में प्रणाम किया। यह प्रसंग भक्तिरस, विनम्रता और आत्म-ज्ञान का बोध कराता है। टैग्स (Tags): शिव सती...

शिव पुराण - शिव द्वारा ज्ञान और मोक्ष का वर्णन | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 23 26.05.2025

इस अध्याय में देवी सती भगवान शिव से ज्ञान और मोक्ष की महिमा के बारे में जानने की इच्छा प्रकट करती हैं। भगवान शिव, भक्तिपूर्वक उनकी जिज्ञासा शांत करते हुए भक्ति, ज्ञान, मोक्ष और उनके आपसी संबंधों का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं। वे श्रद्धा, प्रेम, सेवा, आत्मसमर्पण जैसे नौ अंगों की भक्ति को श्रेष्ठ बताते हैं और यह स्पष्ट करते हैं कि बिना भक्ति के ज्ञान अधूरा है और बिना ज्ञान के भक्ति भी फलदायक नहीं...

शिव पुराण - शिव–सती का हिमालय गमन | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 22 19.05.2025

इस अध्याय में देवी सती की इच्छा पर भगवान शिव उन्हें हिमालय पर्वत पर विहार के लिए ले जाते हैं। वर्षा ऋतु का सुहावना वातावरण देखकर देवी सती का मन प्रकृति में रमण करने को होता है। भगवान शिव उनकी भावना को समझते हुए उन्हें हिमालय लेकर जाते हैं। वहां दोनों कुछ समय प्रसन्नतापूर्वक विहार करते हैं और फिर अपने निवास स्थल कैलाश लौट आते हैं। यह अध्याय शिव-सती के प्रेम, सौंदर्य, अनुराग और दांपत्य जीवन के सौम्य...

शिव पुराण - शिव–सती विहार | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 21 12.05.2025

इस अध्याय में भगवान शिव और देवी सती के विवाह के पश्चात उनके कैलाश पर्वत पर आगमन, विदाई के प्रसंग, और उनके एकांत विहार का सुंदर चित्रण किया गया है। सती की तपस्या और शिवजी के प्रति उनका प्रेम, साथ ही शिवजी की प्रसन्नता व सती के सौंदर्य पर मोहित होना, दोनों के मिलन का एक भावुक और पूजनीय चित्र प्रस्तुत करता है। - शिव सती विवाह कैलाश पर्वत शिव सती प्रेम शिवजी का सान्निध्य शिव सती कथा शिव पुराण हिंदी हि...

शिव पुराण - शिव-सती का विदा होकर कैलाश जाना | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 20 05.05.2025

इस अध्याय में भगवान शिव और देवी सती के विवाह के पश्चात उनके कैलाश लौटने की कथा वर्णित है। विदाई के समय दक्ष द्वारा सम्मानपूर्वक आशीर्वाद, देवताओं द्वारा स्तुति, शिव-सती की शोभायात्रा और विवाह के महात्म्य का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह अध्याय विवाह के धार्मिक महत्व और शिवभक्तों के लिए इस कथा के पुण्यफल की व्याख्या करता है। (Tags/Keywords): शिव सती विवाह, शिव पुराण कथा, सती का विदा, कैलाश गमन,...

शिव पुराण - ब्रह्मा और विष्णु द्वारा शिव की स्तुति करना | | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 18 28.04.2025

"इस अध्याय में ब्रह्मा जी नारद जी को बताते हैं कि दक्ष द्वारा भगवान शिव को अनेक उपहार प्रदान किए गए। विष्णु भगवान भी लक्ष्मी जी के साथ भगवान शिव की भक्ति भाव से आराधना करते हैं। वे शिवजी को संपूर्ण सृष्टि का रचयिता, पालनकर्ता और रक्षक बताते हैं। सभी देवता और ऋषि मुनि भगवान शिव के गुणगान में स्तुति करते हैं और संसार के कल्याण की कामना करते हैं।" Tags शिव पुराण, ब्रह्मा विष्णु शिव स्तुति, दक्ष का कन...

शिव पुराण -शिव और सती का विवाह | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 18 21.04.2025

इस अध्याय में ब्रह्माजी कैलाश पर्वत जाकर भगवान शिव को प्रजापति दक्ष की स्वीकृति का समाचार देते हैं। शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और विवाह हेतु तत्पर हो जाते हैं। नारद और ब्रह्मा जी विवाह का संदेश लेकर दक्ष के पास जाते हैं। शुभ मुहूर्त तय होते ही चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव देवी सती की बारात लेकर कैलाश पर्वत से निकलते हैं। इस भव्य विवाह यात्रा में भगवान विष्णु, देवी लक्ष्...

शिव पुराण - सती को शिव से व्रत की प्राप्ति | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 17 12.04.2025

इस अध्याय में देवी सती की कठोर तपस्या का फल मिलता है। भगवान शिव स्वयं प्रकट होकर उन्हें दर्शन देते हैं और उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। सती भगवान शिव से वर मांगने में संकोच करती हैं, किंतु शिवजी स्वयं उन्हें अर्धांगिनी बनाकर स्वीकार करते हैं। इसके पश्चात सती अपने पिता दक्ष के पास लौटती हैं और शिव से प्राप्त वर की बात बताती हैं। प्रजापति दक्ष हर्षित होकर विवाह के लिए सहमत हो जाते हैं। अंत में ब्रह्...

शिव पुराण - रूद्रदेव का सती से विवाह | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 16 07.04.2025

इस अध्याय में ब्रह्मा, विष्णु और अन्य देवताओं द्वारा भगवान शिव की स्तुति की जाती है और उनसे अनुरोध किया जाता है कि वे लोकहित के लिए विवाह करें। भगवान शिव पहले अपने तप, वैराग्य और योगमयी जीवन का वर्णन करते हुए विवाह को अस्वीकार करते हैं, लेकिन फिर देवताओं के आग्रह और लोककल्याण हेतु विवाह स्वीकार करते हैं। विष्णु भगवान उन्हें बताते हैं कि देवी उमा ही लक्ष्मी और सरस्वती के समान उनकी अर्धांगिनी बनने क...

शिव पुराण - सती की तपस्या | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 15 06.04.2025

पंद्रहवां अध्याय – सती की तपस्या इस अध्याय में ब्रह्माजी नारद को बताते हैं कि वे एक दिन नारद के साथ प्रजापति दक्ष के घर गए। वहाँ उन्होंने देवी सती को देखा और आशीर्वाद दिया कि वे भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करेंगी, क्योंकि वे दोनों एक-दूसरे के योग्य हैं। इसके बाद सती ने अपनी माता से भगवान शिव को प्राप्त करने की इच्छा बताई और माता की अनुमति से घर पर ही भगवान शिव की तपस्या आरंभ कर दी। वे आश्विन...

शिव पुराण - दक्ष की साठ कन्याओं का विवाह | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 14 05.04.2025

स अध्याय में ब्रह्माजी नारद को बताते हैं कि दक्ष को शांत करने के लिए वे स्वयं उसके पास गए और उसे सांत्वना दी। दक्ष ने ब्रह्माजी की बात मानते हुए अपनी पत्नी से सात सुंदर कन्याएं प्राप्त कीं और उनका विवाह धर्म के अनुसार योग्य वरों से किया। दक्ष ने: 10 कन्याओं का विवाह धर्म से, 13 कन्याओं का विवाह कश्यप मुनि से, 27 कन्याओं का विवाह चंद्रमा से किया, अन्य कन्याओं का विवाह भूतनिग्रह, कुशाश्व और तार्क्ष्...

शिव पुराण: दक्ष द्वारा मैथुनी सृष्टि का आरंभ | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 13 27.03.2025

इस अध्याय में ब्रह्माजी नारद को बताते हैं कि देवी का वरदान प्राप्त कर प्रजापति दक्ष अपने आश्रम लौटे और मानसिक सृष्टि करने लगे। लेकिन उसमें वृद्धि न होते देख वे चिंतित हो उठे और ब्रह्माजी से उपाय पूछते हैं। ब्रह्माजी उन्हें शिव भक्ति करने और वीरण की पुत्री असिक्नी से विवाह कर मैथुनी सृष्टि का आरंभ करने की सलाह देते हैं। दक्ष असिक्नी से विवाह करते हैं और उनके दस हज़ार पुत्र हर्यश्व जन्म लेते हैं। वे...

शिव पुराण: दक्ष की तपस्या | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 12 26.03.2025

इस अध्याय में नारद जी, ब्रह्माजी से प्रश्न करते हैं कि प्रजापति दक्ष ने देवी की किस प्रकार तपस्या की और उन्हें क्या वरदान प्राप्त हुआ? ब्रह्मा जी बताते हैं कि उनकी आज्ञा से प्रजापति दक्ष क्षीरसागर के तट पर तपस्या के लिए गए और वहां बैठकर देवी उमा को पुत्री रूप में प्राप्त करने की प्रार्थना करते हुए कठोर व्रत का पालन किया। तीन हजार दिव्य वर्षों तक केवल वायु और जल पर निर्वाह करते हुए उन्होंने घोर तप...

शिव पुराण: ब्रह्माजी की काली देवी से प्रार्थना | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 11 24.03.2025

स अध्याय में नारद जी के प्रश्न पर ब्रह्मा जी बताते हैं कि भगवान विष्णु के जाने के बाद उन्होंने देवी दुर्गा (योगनिद्रा, चामुंडा) का स्मरण किया और उनसे प्रार्थना की कि वे धरती पर अवतरित होकर भगवान शिव से विवाह करें। ब्रह्मा जी को यह चिंता थी कि शिवजी गृहस्थ जीवन में प्रवेश नहीं करना चाहते। देवी चामुंडा प्रकट होकर कहती हैं कि भगवान शिव को मोह में डालना असंभव है, क्योंकि वे परम योगी और ब्रह्मचारी हैं,...

शिव पुराण: ब्रह्मा-विष्णु संवाद | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 10 17.03.2025

यह अध्याय शिव पुराण से लिया गया है और इसमें ब्रह्मा-विष्णु संवाद का वर्णन किया गया है। इसमें भगवान शिव के रुद्र अवतार और देवी सती के जन्म एवं विवाह की चर्चा की गई है। ब्रह्मा की चिंता: ब्रह्माजी यह चाहते हैं कि भगवान शिव विवाह करें, इसलिए वे विष्णुजी से इस विषय में मार्गदर्शन मांगते हैं। विष्णुजी का उत्तर: विष्णुजी समझाते हैं कि भगवान शिव निर्गुण और परब्रह्म हैं, लेकिन वे रुद्र रूप में अवतरित होंग...

शिव पुराण: ब्रह्मा का शिव विवाह हेतु प्रयत्न | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 9 10.03.2025

शिव पुराण - ब्रह्मा का शिव विवाह हेतु प्रयत्न क्या कामदेव भगवान शिव को मोहित कर पाए? शिव पुराण के नवें अध्याय में जानिए कामदेव, रति, वसंत और ब्रह्मा के प्रयासों की अद्भुत कथा! इस वीडियो में विस्तार से बताया गया है कि कैसे ब्रह्माजी ने शिव विवाह के लिए यत्न किए और शिवजी की तपस्या अडिग रही। 🔹 आप जानेंगे: ✅ कामदेव के प्रयास और उनकी असफलता ✅ भगवान शिव के प्रति ब्रह्मा का प्रयत्न ✅ शिव विवाह का रहस...

शिव पुराण: काम की हार | श्रीरुद्र संहिता | द्वितीय खंड - अध्याय 8 25.02.2025

आठवाँ अध्याय – काम की हारइस अध्याय में ब्रह्माजी और नारद जी के संवाद द्वारा बताया गया है कि कैसे कामदेव ने भगवान शिव को मोहित करने का प्रयास किया और असफल रहा।नारद जी ने ब्रह्माजी से संध्या के विवाह के बाद की घटनाओं के बारे में पूछा। ब्रह्माजी ने बताया कि जब वे मोह में पड़ गए थे, तब भगवान शिव ने उनका उपहास किया। इस अपमान से क्रोधित होकर ब्रह्माजी ने शिवजी को मोहित करने के लिए कामदेव और उनकी पत्नी र...

शिव पुराण: संध्या की आत्माहुति | श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 7 24.02.2025

सातवाँ अध्याय – संध्या की आत्माहुति इस अध्याय में ब्रह्माजी नारद को संध्या देवी की कथा सुनाते हैं। भगवान शिव से वरदान प्राप्त करने के बाद संध्या मुनि मेधातिथि के यज्ञ स्थल पर पहुँचीं। उन्होंने आत्मशुद्धि के लिए यज्ञ की प्रज्वलित अग्नि में कूदकर आत्माहुति दी। उनके शरीर का ऊपरी भाग प्रातः संध्या और शेष भाग सायं संध्या में परिवर्तित हो गया। भगवान शिव ने संध्या को दिव्य शरीर प्रदान किया। यज्ञ की समाप्...

Ouça o podcast Shiv Puran Katha in Hindi no Replaio

Rádio e podcasts em um só app - grátis e sem cadastro. Instale hoje e não perca o lançamento

Baixe no Google Play

O Replaio não é o publicador dos podcasts; os nomes dos programas, as capas e o áudio pertencem aos seus autores e são distribuídos por feeds RSS públicos