Surbhi Kansal
Premchand Ki Lokpriy Kahaaniyaan
अमर कथाकार मुन्शी प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य जगत के ऐसे जगमगाते नक्षत्र हैं जिनकी रोशनी में साहित्य प्रेमियों को आम भारतीय जीवन का सच्चा दर्शन प्राप्त होता है।
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Autor
Surbhi Kansal
Categoria
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Último episódio
26 de mai de 2025
Onde ouvir?
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Episódios
निर्मला (पार्ट ६) (by Surbhi Kansal) 24.02.2023 44:55
यहां बुड्ढा आदमी तुम्हारे रग-रूप हाव-भाव पर क्या लट्टू होगा? इसने इन्ही बालकों की सेवा करने के लिए तुमसे विवाह किया है, भोग-विलास के लिए नही । वह बड़ी देर तक घाव पर नमक छिड़कती रही, पर निर्मला ने चूं तक न की।
निर्मला (पार्ट ५) (by Surbhi Kansal) 07.02.2023 49:11
मातृ प्रेम में कठोरता होती थी, लेकिन मृदुलता से मिली हुई। इस प्रेम में करुणा थी, पर वह कठोरता न थी, जो आत्मतियता का गुप्त संदेश है।
निर्मला (पार्ट ४) ( by Surbhi Kansal) 17.01.2023 12:19
अभािगनी को अच्छा घर वर कहां मिलता! अब तो किसी भाती सिर का बोझा उतरना था, किसी भाती लडकी को पार लगाना था, उसे कुएं मे झोकना था। वह रूपवती है, गुणशील है, चतुर है, कुलीन है, तो हुआ करे, दहेज नही तो उसके सारे गुण दोष हैं, दहेज हो तो सारे दोष गुण हैं।
निर्मला ( पार्ट ३) ( by Surbhi Kansal) 25.12.2022 22:29
बनावट की बात तो ऐसी चुभती है कि सच्ची बात उसके सामने बिलकुल फीकी मालूम होती ह। यह किस्से-कहानियां लिखने वाले जिनकी किताबे पढ़-पढ़कर तुम घंटो रोती हो, क्या सच्ची बाते लिखते हैं? सरासर झूठ का तुमार बांधते हैं। यह भी एक कला है।
निर्मला ( पार्ट २) (by Surbhi Kansal) 17.12.2022 19:43
संध्या का समय था। बाबू भालचन्द्र दीवानखाने के सामने आरामकुसी पर नंग-धड़ंग लेटे हुए हुक्का पी रहे हे थे। बहुत ही स्थूल, ऊंचे कद के आदमी थे। ऐसा मालूम होता था कि काला देव है या कोई हब्शी अफ्रीका से पकड़कर लाया गया है। सिर से पैर तक एक ही रंग था-काला। चेहरा इतना स्याह था कि मालूम न होता था कि माथे का अंत कहां है सिर का आरंभ कहां। बस, कोयले की एक सजीव मूर्ति थी।
निर्मला (पार्ट १) ( by Surbhi Kansal) 10.12.2022 32:00
कृष्णा कुछ-कुछ जानती है। कुछ-कुछ नही जानती। जानती है बहन को अच्छे-अच्छे गहने मिलेंगे, द्वार पर बाजे बजेंगे, मेहमान आयेंगे, नाच होगा-यह जानकर प्रसन्न है और यह भी जानती है कि बहन सबके गले मिलकर रोएगी, यहां से रो धोकर विदा हो जाएगी, मैं अकेली रह जाऊंगी- यह जानकर दुखी भी है।
हिंसा परमो धर्म: ( by Surbhi Kansal) 17.11.2022 23:50
उसकी जात से दूसरों को चाहे कितना ही फ़ायदा पहुँचे, अपना कोई उपकार न होता था, यहाँ तक कि वह रोटियों तक के लिए भी दूसरों का मुहताज था। दीवाना तो वह था और उसका गम दूसरे खाते थे। आख़िर जब लोगों ने बहुत धिक्कारा-- 'क्यों अपना जीवन नष्ट कर रहे हो, तुम दूसरों के लिए मरते हो, कोई तुम्हारा भी पूछने वाला है?
खुदाई फौजदार ( by Surbhi Kansal) 19.10.2021 26:15
एक सेठ के घर में कहकर डाका डालने की कहानी.
परीक्षा ( by Surbhi Kansal) 21.08.2021 10:47
सरदार सुजान सिंह ने देश के प्रसिद्ध समाचारपत्रों में यह विज्ञापन दिया कि रियासत देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है | दीवान पद के उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना जरूरी नहीं पर हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है | मंदाग्नि के मरीज को उम्मीदवार बनने से मना कर दिया गया था | उम्मीदवार की विद्या को कम परन्तु कर्तव्य को अधिक महत्व दिया जानेवाला था | जो सरदार सुजान सिंह की परीक्षा में खरा उतरेगा, वही दीवान का प...
चोरी (by Surbhi Kansal) 25.10.2020 22:08
कहानी सुन कर कोई भी ऐसा नही होगा जिसे अपना बचपन याद न आ जाये। प्रेमचंद जी ने बड़े ही सुन्दर तरीके से बचपन की यादों को कहानी में पिरोया है।
पंच परमेश्वर ( by Surbhi Kansal) 09.10.2020 32:13
पंच परमेश्वर' शीर्षक कहानी प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ट कहानियों में से एक है | इस कहानी में प्रेमचंद्र जी ने यह दिखलाया है की उत्तरदायित्त्व आ जाने से मनुष्य अपनी व्यक्तिगत परिधियों से ऊपर उठ जाता है |
बूढ़ी काकी ( by Surbhi Kansal) 16.09.2020 25:36
वृद्धा अवस्था में मन किसी बच्चे की भांति चंचल हो जाता है। स्वादिष्ट भोजन खाने के लिए जी तरसता है और उसे पाने के बाद अपने साथ हुए सारे तिरस्कार भाव को भूल जाता है। ऐसे ही भावपूर्ण दृश्यों के साथ बुजुर्गो के प्रति संवेदना जाहिर करती कथाकार मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी 'बूढ़ी काकी'।
नमक का दारोगा ( by Surbhi Kansal) 02.09.2020 24:00
इसमें एक ईमानदार नमक निरीक्षक की कहानी को बताया गया है जिसने कालाबाजारी के विरुद्ध आवाज उठाई। ... कहानी में मानव मूल्यों का आदर्श रूप दिखाया गया है और उसे सम्मानित भी किया गया है। सत्यनिष्ठा, धर्मनिष्ठा और कर्मपरायणता को विश्व के दुर्लभ गुणों में बताया गया है।
पूस की रात ( by Surbhi Kansal) 27.08.2020 18:01
पूस की रात' गरीब भारतीय किसान की दयनीय दशा को लेकर लिखी गयी कहानी है। इस कहानी में प्रेमचंदजी ने समाज की आर्थिक विषमता पर प्रकाश डाला है।
कायर ( by Surbhi Kansal) 24.08.2020 30:10
इस कहानी में प्रेमचंद जी ने बड़े ही मार्मिक रूप् से दो प्रेम करने वालों की मनोस्थिती का वर्णन किया है।
दारोगा जी ( by Surbhi Kansal) 19.08.2020 20:43
इस कहानी में प्रेमचंद जी ने दारोगा जी की आपबीती का वर्णन बहुत ही मजेदार ढंग से किया है।
कफन ( by Surbhi Kansal) 15.08.2020 22:27
कफन' प्रथमदृष्ट्या घीसू-माधव - पिता-पुत्र - की संवेदनहीनता और भावनात्मक क्रूरता की कहानी है।
ऐक्ट्रेस (पार्ट 2) ( by Surbhi Kansal) 14.08.2020 16:59
इस पार्ट में मूलचंद जी ने तारा की दुविधा को बड़े ही मार्मिक रूप से लिखा है।
ऐक्ट्रेस (पार्ट 1) ( by Surbhi Kansal) 13.08.2020 14:23
प्रेमचंद जी ने बहुत ही खुबसूरती से एक ऐक्ट्रेस के मन के विचारो तथा उसके हृदय में चल रहे द्वंद को अपनी कलम से प्रस्तुत किया है।
रामलीला (by Surbhi Kansal) 10.08.2020 18:09
प्रेमचंद ने बड़े ही सरल और प्रभावित शब्दो में लेखक के बचपन की रामलीला की यादों का सजीव वर्णन किया है।
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