Surbhi Kansal

Premchand Ki Lokpriy Kahaaniyaan

Arts HI ↓ 46 episódios

अमर कथाकार मुन्शी प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य जगत के ऐसे जगमगाते नक्षत्र हैं जिनकी रोशनी में साहित्य प्रेमियों को आम भारतीय जीवन का सच्चा दर्शन प्राप्त होता है।

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Autor

Surbhi Kansal

Categoria

Arts

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Último episódio

26 de mai de 2025

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Episódios

निर्मला (पार्ट ६) (by Surbhi Kansal) 24.02.2023

यहां बुड्ढा आदमी तुम्हारे रग-रूप हाव-भाव पर क्या लट्टू होगा? इसने इन्ही बालकों की सेवा करने के लिए तुमसे विवाह किया है, भोग-विलास के लिए नही । वह बड़ी देर तक घाव पर नमक छिड़कती रही, पर निर्मला ने चूं तक न की।

निर्मला (पार्ट ५) (by Surbhi Kansal) 07.02.2023

मातृ प्रेम में कठोरता होती थी, लेकिन मृदुलता से मिली हुई। इस प्रेम में करुणा थी, पर वह कठोरता न थी, जो आत्मतियता का गुप्त संदेश है।

निर्मला (पार्ट ४) ( by Surbhi Kansal) 17.01.2023

अभािगनी को अच्छा घर वर कहां मिलता! अब तो किसी भाती सिर का बोझा उतरना था, किसी भाती लडकी को पार लगाना था, उसे कुएं मे झोकना था। वह रूपवती है, गुणशील है, चतुर है, कुलीन है, तो हुआ करे, दहेज नही तो उसके सारे गुण दोष हैं, दहेज हो तो सारे दोष गुण हैं।

निर्मला ( पार्ट ३) ( by Surbhi Kansal) 25.12.2022

बनावट की बात तो ऐसी चुभती है कि सच्ची बात उसके सामने बिलकुल फीकी मालूम होती ह। यह किस्से-कहानियां लिखने वाले जिनकी किताबे पढ़-पढ़कर तुम घंटो रोती हो, क्या सच्ची बाते लिखते हैं? सरासर झूठ का तुमार बांधते हैं। यह भी एक कला है।

निर्मला ( पार्ट २) (by Surbhi Kansal) 17.12.2022

संध्या का समय था। बाबू भालचन्द्र दीवानखाने के सामने आरामकुसी पर नंग-धड़ंग लेटे हुए हुक्का पी रहे हे थे। बहुत ही स्थूल, ऊंचे कद के आदमी थे। ऐसा मालूम होता था कि काला देव है या कोई हब्शी अफ्रीका से पकड़कर लाया गया है। सिर से पैर तक एक ही रंग था-काला। चेहरा इतना स्याह था कि मालूम न होता था कि माथे का अंत कहां है सिर का आरंभ कहां। बस, कोयले की एक सजीव मूर्ति थी।

निर्मला (पार्ट १) ( by Surbhi Kansal) 10.12.2022

कृष्णा कुछ-कुछ जानती है। कुछ-कुछ नही जानती। जानती है बहन को अच्छे-अच्छे गहने मिलेंगे, द्वार पर बाजे बजेंगे, मेहमान आयेंगे, नाच होगा-यह जानकर प्रसन्न है और यह भी जानती है कि बहन सबके गले मिलकर रोएगी, यहां से रो धोकर विदा हो जाएगी, मैं अकेली रह जाऊंगी- यह जानकर दुखी भी है।

हिंसा परमो धर्म: ( by Surbhi Kansal) 17.11.2022

उसकी जात से दूसरों को चाहे कितना ही फ़ायदा पहुँचे, अपना कोई उपकार न होता था, यहाँ तक कि वह रोटियों तक के लिए भी दूसरों का मुहताज था। दीवाना तो वह था और उसका गम दूसरे खाते थे। आख़िर जब लोगों ने बहुत धिक्कारा-- 'क्यों अपना जीवन नष्ट कर रहे हो, तुम दूसरों के लिए मरते हो, कोई तुम्हारा भी पूछने वाला है?

खुदाई फौजदार ( by Surbhi Kansal) 19.10.2021

 एक सेठ के घर में कहकर डाका डालने की कहानी.

परीक्षा ( by Surbhi Kansal) 21.08.2021

सरदार सुजान सिंह ने देश के प्रसिद्ध समाचारपत्रों में यह विज्ञापन दिया कि रियासत देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है | दीवान पद के उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना जरूरी नहीं पर हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है | मंदाग्नि के मरीज को उम्मीदवार बनने से मना कर दिया गया था | उम्मीदवार की विद्या को कम परन्तु कर्तव्य को अधिक महत्व दिया जानेवाला था | जो सरदार सुजान सिंह की परीक्षा में खरा उतरेगा, वही दीवान का प...

चोरी (by Surbhi Kansal) 25.10.2020

कहानी सुन कर कोई भी ऐसा नही होगा जिसे अपना बचपन याद न आ जाये। प्रेमचंद जी ने बड़े ही सुन्दर तरीके से बचपन की यादों को कहानी में पिरोया है।

पंच परमेश्वर ( by Surbhi Kansal) 09.10.2020

पंच परमेश्वर' शीर्षक कहानी प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ट कहानियों में से एक है | इस कहानी में प्रेमचंद्र जी ने यह दिखलाया है की उत्तरदायित्त्व आ जाने से मनुष्य अपनी व्यक्तिगत परिधियों से ऊपर उठ जाता है |

बूढ़ी काकी ( by Surbhi Kansal) 16.09.2020

वृद्धा अवस्था में मन किसी बच्चे की भांति चंचल हो जाता है। स्वादिष्ट भोजन खाने के लिए जी तरसता है और उसे पाने के बाद अपने साथ हुए सारे तिरस्कार भाव को भूल जाता है। ऐसे ही भावपूर्ण दृश्यों के साथ बुजुर्गो के प्रति संवेदना जाहिर करती कथाकार मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी 'बूढ़ी काकी'।

नमक का दारोगा ( by Surbhi Kansal) 02.09.2020

इसमें एक ईमानदार नमक निरीक्षक की कहानी को बताया गया है जिसने कालाबाजारी के विरुद्ध आवाज उठाई। ... कहानी में मानव मूल्यों का आदर्श रूप दिखाया गया है और उसे सम्मानित भी किया गया है। सत्यनिष्ठा, धर्मनिष्ठा और कर्मपरायणता को विश्व के दुर्लभ गुणों में बताया गया है।

पूस की रात ( by Surbhi Kansal) 27.08.2020

पूस की रात' गरीब भारतीय किसान की दयनीय दशा को लेकर लिखी गयी कहानी है। इस कहानी में प्रेमचंदजी ने समाज की आर्थिक विषमता पर प्रकाश डाला है। 

कायर ( by Surbhi Kansal) 24.08.2020

इस कहानी में प्रेमचंद जी ने बड़े ही मार्मिक रूप् से दो प्रेम करने वालों की मनोस्थिती का वर्णन किया है।

दारोगा जी ( by Surbhi Kansal) 19.08.2020

इस कहानी में प्रेमचंद जी ने दारोगा जी की आपबीती का वर्णन बहुत ही मजेदार ढंग से किया है।

कफन ( by Surbhi Kansal) 15.08.2020

कफन' प्रथमदृष्ट्या घीसू-माधव - पिता-पुत्र - की संवेदनहीनता और भावनात्मक क्रूरता की कहानी  है।

ऐक्ट्रेस (पार्ट 2) ( by Surbhi Kansal) 14.08.2020

इस पार्ट में मूलचंद जी ने तारा की दुविधा को बड़े ही मार्मिक रूप से लिखा है।

ऐक्ट्रेस (पार्ट 1) ( by Surbhi Kansal) 13.08.2020

प्रेमचंद जी ने बहुत ही खुबसूरती से एक ऐक्ट्रेस के मन के विचारो तथा उसके हृदय में चल रहे द्वंद को अपनी कलम से प्रस्तुत किया है।

रामलीला (by Surbhi Kansal) 10.08.2020

प्रेमचंद ने बड़े ही सरल और प्रभावित शब्दो में लेखक के बचपन की रामलीला की यादों का सजीव वर्णन किया है।

Trailer 09.08.2020

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