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Naami Giraami

Naami Giraami is a Hindi podcast by Aaj Tak Radio on biographies of influential and powerful people. Audio packages on Stories and life journeys of famous personalities of India and around the world. Catch up with a new episode every Monday. नायक और खलनायक. विद्वान और महारथी. कला के ऐसे सितारे जो अब भी आसमान में चमकते हैं. और ऐसी हस्तियां जो इतिहास में अमर हैं. उजले व्यक्तित्व के धनी भी. और स्याह पहलुओं वाले लोग भी. ये वो लोग हैं जो मशहूर हैं. ये हैं, नामी गिरामी. सुनिए, हर सोमवार आज तक रेडियो पर.

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Categoria

Society

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5 de mai de 2025

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Episódios

फ़ोन की वह घंटी जो बन गई डॉ. कलाम के जीवन का टर्निंग पॉइंट 27.07.2020

भारत के 11वें राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन किसी के लिए भी प्रेरणा हो सकता है. रामेश्वरम के मछुवारे परिवार में पैदा हुआ एक बच्चा मदरसे में पढ़ाई करता है, अख़बार बेचता है, धीरे-धीरे अपनी मेहनत के दम पर ग्रेजुएट होता है, इसरो और डीआरडीओ को नई ऊंचाईयां देता है, भारत के वैज्ञानिक आकाश को समृद्ध करता है और एक दिन देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की शोभा बढ़ाता है. यह सबकुछ इतना आसान नहीं था, यह सपन...

कम्प्यूटर को मात देने वाली शकुंतला देवी बिना कलम-काग़ज़ छुए कैसे देती थीं जवाब 20.07.2020

शकुंतला देवी जब 3 साल की थीं तब से गणित के सवाल हल करने लगीं थीं. धीरे-धीरे उनके पड़ोसी अपने बच्चों का होमवर्क करवाने, ट्यूशन के लिए उनके पास आते गए. अंकों के प्रति उनके भीतर प्रेम और लगाव जागने लगा और वह धीरे-धीरे गुणा, भाग, क्यूब रूट्स और बाकी सवाल हल करने में एक्सपर्ट होती गईं. वे मात्र 15 से 30 सेकंड में बड़े से बड़ा अंक देखते ही उसे गुणा कर देतीं और उसका स्क्वायर रूट, क्यूब रूट निकाल देतीं. वो...

अरुणा आसफ़ अली: आवारागर्दी के आरोप में जिन्हें अंग्रेज़ों ने भेजा था जेल 16.07.2020

दिल्ली में पत्रकारिता का जाना माना संस्थान है, IIMC. वो जिस मार्ग पर है उसका नाम है अरुण आसफ़ अली मार्ग. किसी के नाम पर देश की राजधानी की एक सड़क का नाम रखा जाना यह छोटी बात नहीं है. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को जब अंग्रेजी हुकूमत ने जेल में डाल दिया था. तब अरुणा आसफ़ अली अदम्य साहस का परिचय देते हुए आगे आती हैं. आंदोलन में जोश भरने के लिए ग्वालिया टैंक के मैदान तक पहुंचत...

विलियम हैना ने कैसे बनाए थे टॉम एंड जैरी जैसे कार्टून 13.07.2020

विलियम हैना ने पिछली सदी के बच्चों से लेकर बड़ों तक के भीतर बचपन को ज़िंदा रखने का काम किया है. उनकी वजह से एनिमेशन इंडस्ट्री को नई पहचान मिली और ऐसे-ऐसे कैरेक्टर उन्होंने हमें दिए कि आज तक वो न केवल टीवी पर दिखाए जाते हैं बल्कि लोगों की पहली पसंद भी बने हुए हैं. 1940 में हैना और बारबरा की जोड़ी ने पुस गेट्स द बूट्स नाम का कार्टून बनाया. कार्टून को ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया लेकिन हैना और बारबरा क...

अंधेरे और उजाले का अनूठा शोमैन थे गुरुदत्त 09.07.2020

जब पूरी दुनिया 50 mm का लेंस शूट के लिए काम में लेती थी. गुरुदत्त ने वी. के. मूर्ति के साथ मिलकर 75 mm का लेंस से शूट किया. कभी-कभी तो पूरे फ्रेम में चेहरा ही नज़र आता कलाकार का. उनके कैमरे की एप्रोच हमेशा ह्युमनिस्टिक ही रही, कहानियां भी इंसानी संवेदनाओं के इर्द-गिर्द मंडराती हुई. गुरुदत्त के इस पहलू से रूबरू करवा रही हैं माधुरी.

संजीव कुमार ने क्यों किया था शादी न करने का फ़ैसला? 09.07.2020

संजीव कुमार हिंदी सिनेमा के अभिनेता नहीं थे बल्कि अभिनय का संस्थान थे. अपने किरदार को घुट्टी की तरह घोल कर पी जाना यह प्रतिभा बहुत कम लोगों के पास होती है. फ़िल्म 'नया दिन नई रात' में संजीव कुमार ने 9 किरदार निभाये, यह ऑफ़र तो हुई थी दिलीप कुमार को लेकिन संजीव की झोली में कैसे चली गयी? संजीव कुमार की ज़िदगी से जुड़े ऐसे ही तमाम क़िस्से आज तक रेडियो के इस पॉडकास्ट में लेकर आए हैं अंजुम शर्मा.

स्वामी विवेकानंद के संघर्ष के दिनों में किसने दिया था उनका साथ? 06.07.2020

रामकृष्ण परमहंस ने प्रशिक्षित किया और नरेंद्रनाथ से वो बन गए, विवेकानंद. परमहंस ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और भगवा वस्त्र पहनने के लिए दिए थे. लेकिन उनके सिर पर जो पगड़ी बंधी है उसके पीछे की कहानी क्या है, सुनिए आजतक रेडियो के इस पॉडकास्ट में अंजुम शर्मा के साथ.

नागार्जुन: कवि जिसने इंदिरा-नेहरू की तारीफ़ भी की, और बख़्शा भी नहीं 02.07.2020

नागार्जुन हिंदी के प्रख्यात प्रगतिशील कवि और कथाकार हैं. हिंदी, मैथिली, संस्कृत और बांग्ला भाषा में उन्होंने कविताएं लिखीं. अपनी मातृभाषा मैथिली में उन्होंने 'यात्री' उपनाम से लेखन किया. वो हिंदी के बड़े यायावर कवियों में एक थे. नागार्जुन ने राजनीति और जनता के संघर्षों में सक्रिय भागीदारी की और रचनात्मक तरीके से जनता की आवाज़ बने. 5 नवंबर को उनकी पुण्यतिथि होती है. आज तक रेडियो के इस पॉडकास्ट में अं...

कौन हैं पी.सी.महालनोबिस जिनका जन्मदिन होता है राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस? 29.06.2020

आज 29 जून है और भारत में आज का दिन राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रुप में मनाया जाता है. कारण है कि आज ही के दिन भारत में सांख्यिकी के पिता प्रशांत चंद्र महालनोबिस का जन्मदिवस होता है. भारत में आर्थिक नियोजन से लेकर सैंपल सर्वे के विकास तक में महालनोबिस का अभूतपूर्व योगदान है. आज तक रेडियो के ख़ास पॉडकास्ट में उन्हें याद कर रहे हैं अंजुम शर्मा

कैसे एक गाने से मदन मोहन और लता मंगेशकर हो गए भाई-बहन 25.06.2020

हिंदी सिनेमा में चोटी के संगीतकारों में एक नाम मदन मोहन का भी है. मदन मोहन, हिंदी फिल्मों में ग़ज़ल और गीतों को बराबर ख़ूबसूरती से साधने के लिए जाने जाते थे. ग़ज़लों को जिस तरह उन्होंने कंपोज़ किया, वैसा उदाहरण पूरे हिंदी फ़िल्म संगीत में बेहद कम देखने को मिलता है. हिंदी फ़िल्म संगीत में वो एक विलक्षण संगीतकार थे. आज तक रेडियो की इस प्रस्तुति में सुनिए मदन मोहन से जुड़े बेहद दिलचस्प क़िस्से, अंजुम शर्मा के...

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत पर क्यों होती है सियासत? 23.06.2020

आज भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि है। भारतीय जनता पार्टी इस दिन को बलिदान दिवस के रूप में मनाती है। डॉ मुखर्जी राष्ट्रवाद के प्रखर अगुआ रहे, मात्र 33 बरस की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और अनुच्छेद 370 के मुखर विरोधी थे। 1953 में श्रीनगर जाते समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था, नज़रबंद रखा गया और 23 जून 1953 को उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई...

अमरीश पुरी: खलनायक को नायक से बड़ा बनाने वाले अभिनेता 22.06.2020

हिंदी सिनेमा के सबसे चहेते खलनायक अमरीश पुरी का आज जन्मदिन है. फिल्मों में आने से पहले वो रंगमंच के प्रख्यात कलाकार रहे. दमदार आवाज़ के मालिक अमरीश पुरी जब सिल्वर स्क्रीन पर डायलॉग्स बोलते थे तो पूरी फिल्म पर उनके डायलॉग्स भारी पड़ जाते थे. दूसरों के निभाए जो रोल उन्हें पसंद आते थे, उनका फ़ोटो निकलवाकर देर तक वो उन्हें ऑब्ज़र्व करते थे. आज तक रेडियो की ख़ास पेशकश में अंजुम शर्मा से सुनिए अमरीश पुरी क...

सालिम अली: ऐसा शख्स जिसने पूरी ज़िंदगी कर दी पंछियों के नाम 20.06.2020

सालिम अली को भारत में ऑर्निथोलॉजी यानी पक्षी विज्ञान का पितामह कहा जाता है. कहते हैं अगर वो नहीं होते तो भारत में पक्षियों का सर्वे उतना सुनियोजित नहीं हो पाता जितना उनके कारण हुआ. भारत में पक्षी विज्ञान को वो नई ऊंचाईयों पर ले गए और इसे बाक़ायदा एक व्यवस्थित वैज्ञानिक कार्य के तौर पर पहचान दिलाई. उनकी जयंती पर सुनिए आज तक रेडियो का यह ख़ास पॉडकास्ट अंजुम शर्मा के साथ.

बेटे को पीठ पर बांधा, तलवार उठाई और हुंकारती हुई निकलीं रानी लक्ष्मीबाई 18.06.2020

रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी का एक इंच भी अंग्रेज़ों को देने से इंकार कर दिया था. मातृभाषा से लेकर मातृभूमि तक वो स्वराज का विस्तार देखती थीं. उन्होंने अंग्रेज़ों के साथ इस तरह युद्ध किया कि कई अंग्रेज़ी अफसरों ने उन्हें 'मर्दानी योद्धा' से लेकर 'विद्वान और नेतृत्व कुशल रानी' कहकर पुकारा. 18 जून को उन्हें अंग्रेज़ों से युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त हुई. सुनिए रानी झांसी की ज़िंदगी पर आधारित आज तक रेडियो...

वेलेंटीना तेरेश्कोवा: एकल अंतरिक्ष मिशन को अंजाम देने वाली पहली महिला 15.06.2020

16 जून का दिन इतिहास में दर्ज है महिलाओं की उड़ान के नाम. हम सब पहले अंतरिक्ष यात्री का नाम याद रखते हैं, यूरी गागरिन. लेकिन पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कौन थी? शायद सोचना पड़े. वो थीं रूस की वेलेंटीना तेरेश्कोवा! 16 जून 1963 को रूस की वेलेंटीना तेरेशकोवा ने दुनिया की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बनने का गौरव हासिल किया था. कैसी थी उनकी उड़ान, कितना मुश्किल था उनका सफ़र, आज तक रेडियो की ख़ास पेशकश में बत...

जब राजस्थान की मिट्टी से लिपट कर रोये गायक मेहदी हसन 13.06.2020

ग़ज़ल गायिकी के उस्ताद मेहदी हसन ख़ाँ, राजस्थान राज्य के झुंझुनू जिले में पैदा हुए थे। शुरुआती तालीम घर पर ही हुई, खूब वर्जिश की ताकि साँस लंबी खींचकर देर तक सुर साधे जा सकें। देश का बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान जाना पड़ा और ताउम्र वहीं रहे। लेकिन राजस्थान से लगाव नहीं छूटा। वह जितने पाकिस्तान के रहे, उतने ही हिंदुस्तान के भी। उन्होंने ग़ज़ल गायकी को शास्त्रीय संगीत की रवायत में ढाला। उनकी पुण्यतिथि पर सु...

जब रामप्रसाद बिस्मिल ने साथियों संग लूटा सरकारी ख़ज़ाना 11.06.2020

आज़ादी के संघर्ष में क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम देने वाले पंडित रामप्रसाद बिस्मिल एक लेखक भी थे. उन्होंने राम, अज्ञात, और बिस्मिल उपनाम से कविताएं और किताबें लिखी. उनकी लिखी शायरी और गीत आगे चलकर क्रांति के गीत बन गए. बिस्मिल मैनपुरी और काकोरी कांड में अपनी भूमिका के लिए जाने जाते हैं. कैसा था उनका क्रांतिकारी जीवन, सुनिए आज तक रेडियो की ख़ास पेशकश में अंजुम शर्मा के साथ.

25 बरस जीने वाले बिरसा मुंडा के भगवान बनने की कहानी 09.06.2020

बिरसा मुंडा ने 19वीं सदी के अंत में आदिवासी हक़ों के लिए दिकूओं के ख़िलाफ़ विद्रोह का नेतृत्व किया था. जंगल से बेदखल किये जा रहे जंगल के लोगों की दशा देखकर बिरसा ने उलगुलान का आह्वान किया और परंपरागत हथियारों से लड़ाई लड़ी. बिरसा केवल 25 बरस जिए लेकिन ऐसे जिए कि आदिवासियों के भगवान कहलाए. उनकी जयंती पर सुनिए आज तक रेडियो की ख़ास पेशकश अंजुम शर्मा के साथ.

जसदेव सिंह वो एक स्वर जिसने कभी लाल किले तो कभी इंडिया गेट के नज़ारे दिखाए. 08.06.2020
हबीब तनवीर: भारतीय रंगमंच को लोक परंपरा से जोड़ने वाले दिग्गज नाटककार 08.06.2020

हबीब तनवीर भारतीय रंगमंच की प्रयोगशील आवाज़ थे. उन्होंने लोक परंपराओं को आधुनिक नाटकों से जोड़ा और आदिवासी, गांव-देहात के लोगों के मुद्दों को रंगमंच से उठाया. एक रंगकर्मी होने के साथ वे एक पटकथा लेखक और गीतकार भी थे. इसके अलावा उन्होंने कई बॉलीवुड फिल्मों में अभिनय भी किया. उनकी पुण्यतिथि पर सुनिए आज तक रेडियो की यह ख़ास प्रस्तुति अंजुम शर्मा के साथ

बाज़ार नहीं अपनी शर्तों पर फ़िल्म बनाते थे बासु चटर्जी 04.06.2020

बासु चटर्जी ने 40 से ज़्यादा हिंदी फ़िल्मे बनाईं, कुछ फिल्में बांग्ला में भी बनाईं। छोटे पर्दे पर उन्होंने रजनी, व्योमकेश बख्शी और कक्काजी कहिन जैसे सफल टीवी धारावाहिक बनाए। हिंदी साहित्य में जब मध्यवर्गीय परिवार की कहानियाँ लिखी जा रही थी, उसी समय बासु दा उसे पर्दे उतार रहे थे। आज उनका निधन हो गया। कैसा था उनका सिनेमाई सफ़र, सुनिये आज तक रेडियो की ख़ास पेशकश में अंजुम शर्मा के साथ।

लियोनार्दो दा विंची की कला में था विज्ञान और चिंतन का संगम 03.06.2020

लियोनार्दो दा विंची एक पेंटर, होने के साथ-साथ इंजीनियर, वैज्ञानिक, गणितज्ञ, मूर्तिकार, डॉक्टर, आविष्कारक, भूगोल शास्त्री, संगीतकार, लेखक और वनस्पति विज्ञानी भी थे. 2 मई 1519 में इस महान शख्सियत ने दुनिया को अलविदा कहा था. आज तक रेडियो के इस पॉडकास्ट में सुनिए दुनिया के सबसे महान कलाकार लियोनार्दो दा विंची की कहानी.

चीन और रूस के नेता भी राज कपूर के फ़ैन थे 02.06.2020

राज कपूर एक कंप्लीट आर्टिस्ट थे. वो जानते थे कि पर्दा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बदलाव का भी माध्यम है. उनकी फ़िल्मों के चाहने वाले दुनिया भर में मौजूद थे. इसका कारण था कि उनकी फ़िल्में अपने दौर की सभी विशेषताओं से लैस थीं. क्या वजह थी कि वो सिनेमा के सबसे बड़े शोमैन कहलाते थे, सुनिए आज तक रेडियो की इस प्रस्तुति में अंजुम शर्मा के साथ.

वाजिद नए ज़माने के संगीत में लगाते थे लोकगीत का छौंका 01.06.2020

फ़िल्म संगीतकार साजिद-वाजिद एक जोड़ी की तौर पर ख्यात थे लेकिन इस जोड़ी का एक सुर अब खामोश हो गया है. किडनी की समस्या से जूझ रहे वाजिद ख़ान का मुम्बई में निधन हो गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वे कोरोना से भी संक्रमित थे. उन्होंने बॉलीवुड में अपने भाई के साथ मिलकर कई हिट गाने कम्पोज़ किए. अंजुम शर्मा के साथ साथ सुनिए, आज तक रेडियो की ओर से यह ख़ास पेशकश: वाजिद को श्रद्धांजलि

गांधी बनाम गोडसे: कहानी एक महात्मा और एक हत्यारे की 01.06.2020

नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या के बाद जो बयान दिया, वो किताब की शक्ल में छपा. मशहूर लेखक अशोक कुमार पांडेय से ये बातचीत सुनिए, जिसमें वह गोडसे की हर दलील का जवाब दे रहे हैं.

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