Umesh Pratap Singh
Main Aur Tum
कुछ अनकहे से ख्याल
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Autor
Umesh Pratap Singh
Categoria
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Último episódio
22 de nov de 2023
Onde ouvir?
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Episódios
रुको, तुम्हें एक बार गले लगा लूं क्या? 25.02.2022 2:20
रुको, तुम्हें एक बार गले लगा लूं क्या?
कितने घाव हैं दिल पे मेरे तुम्हे मालूम है जाना 04.02.2022 2:31
कितने घाव हैं दिल पे मेरे तुम्हे मालूम है जाना
रात दिन खुद को उसकी कहानियां सुनाता हूं। 02.02.2022 2:52
रात दिन खुद को उसकी कहानियां सुनाता हूं।
एक खत जो कभी डाक घर को सौंपा ही नहीं 31.01.2022 3:02
एक खत जो कभी डाक घर को सौंपा ही नहीं
एक दफा तुम छत पर क्यों नहीं आते 27.01.2022 2:45
एक दफा तुम छत पर क्यों नहीं आते
लिख करके आखिरी खत कलम तोड़ डाली 23.01.2022 3:01
लिख करके आखिरी खत कलम तोड़ डाली
वो जो अजीज था, बेवफा हो रहा है 19.01.2022 2:52
वो जो अजीज था, बेवफा हो रहा है
माटी का ये बदन उसका,संगमरमर हो गया है 18.01.2022 2:37
माटी का ये बदन उसका,संगमरमर हो गया है
रातों में जगना अब मैं सीख गया हूं 15.01.2022 2:32
रातों में जगना अब मैं सीख गया हूं
सोच लेता हूं तुम्हें, तो बदन महकता है 09.01.2022 2:27
सोच लेता हूं तुम्हें, तो बदन महकता है
कुछ पल में हमने सदियां बिता दीं 02.01.2022 2:42
कुछ पल में हमने सदियां बिता दीं
अपने होठों को तेरे माथे पे रख आया। 29.12.2021 2:31
अपने होठों को तेरे माथे पे रख आया।
बस मेरे सांसों को रुकने कि कोई वजह ना दो 27.12.2021 2:10
बस मेरे सांसों को रुकने कि कोई वजह ना दो
हम भी अब हवाओं का पीछा कर रहे हैं 23.12.2021 2:53
हम भी अब हवाओं का पीछा कर रहे हैं
देखा किए तुझे, कभी मिल ना पाए 19.12.2021 1:48
देखा किए तुझे, कभी मिल ना पाए
उफनते समुंदर को मैं रोक लेता हूं 12.12.2021 2:35
उफनते समुंदर को मैं रोक लेता हूं
तुमसे बिछड़े तो नई ख्वाहिशें जन्म ले रही थी 11.12.2021 2:38
तुमसे बिछड़े तो नई ख्वाहिशें जन्म ले रही थी
अमावस्या में पूर्णिमा का चांद खिला दूं 05.12.2021 2:16
अमावस्या में पूर्णिमा का चांद खिला दूं
कभी जिस तरह तुझे याद किया करता था. 29.11.2021 2:35
कभी जिस तरह तुझे याद किया करता था.
मेरे पास बैठो 28.11.2021 2:28
मेरे पास बैठो
मेरा सब कुछ बन जाना तुम. 22.11.2021 2:45
मेरा सब कुछ बन जाना तुम.
कौन हो तुम? 13.11.2021 1:55
कौन हो तुम?
किताब में एक पुराना गुलाब का फूल मिला 06.11.2021 2:34
किताब में एक पुराना गुलाब का फूल मिला
मैंने समुंदर को रुलाया है 05.11.2021 2:50
मैंने समुंदर को रुलाया है
खिड़की से चांद को घर ले आता हूं मैं 03.11.2021 2:31
खिड़की से चांद को घर ले आता हूं मैं
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