Umesh Pratap Singh

Main Aur Tum

कुछ अनकहे से ख्याल

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Autor

Umesh Pratap Singh

Categoria

Society

Site do podcast

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Último episódio

22 de nov de 2023

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Episódios

इस दुनिया से परे एक और दुनिया बसती है 22.11.2023

इस दुनिया से परे एक और दुनिया बसती है

आयने में नजर आता वो शख्स भी अब मेरा नहीं। 25.10.2023

आयने में नजर आता वो शख्स भी अब मेरा नहीं।

ये भी एक दौर- ए-ज़िन्दगी थी मेरी 24.09.2023

ये भी एक दौर- ए-ज़िन्दगी थी मेरी

तु मेरी मोहबब्त है मेरी जरूरत हो नहीं सकता. 26.08.2023

तु मेरी मोहबब्त है मेरी जरूरत हो नहीं सकता.

तुमसे दूर होऊंगा और फिर सितारा हो जाऊंगा 01.07.2023

तुमसे दूर होऊंगा और फिर सितारा हो जाऊंगा

तुम वहां पहुंच गए मेरी जान 29.06.2023

तुम वहां पहुंच गए मेरी जान

बहुत कुछ अपने में बिखर रहा है 24.06.2023

बहुत कुछ अपने में बिखर रहा है

आखें बंद होते ही वो दौड़ी चली आती है। 15.05.2023

आखें बंद होते ही वो दौड़ी चली आती है।

मैं उसकी तस्वीर बनाता हूं और वो मेरे सामने आ जाती है। 29.04.2023

मैं उसकी तस्वीर बनाता हूं और वो मेरे सामने आ जाती है।

हमने जब भी लिखा फकत तुझे ही लिखा. 24.04.2023

हमने जब भी लिखा फकत तुझे ही लिखा.

इस कदर हमें वो प्यारा था 23.02.2023

इस कदर हमें वो प्यारा था

ना जाने क्यों फिर ये तन्हाई कैसी है 18.02.2023

ना जाने क्यों फिर ये तन्हाई कैसी है

उसके छत पे पतंग उतारा करते थे हम। 30.12.2022

उसके छत पे पतंग उतारा करते थे हम।

सफ़र खतम हुआ है, ज़िन्दगी नहीं। 28.12.2022

सफ़र खतम हुआ है, ज़िन्दगी नहीं।

जरुरत में तो मुसाफिर भी दरख़्त तले रुकते हैं। 24.12.2022

जरुरत में तो मुसाफिर भी दरख़्त तले रुकते हैं।

इस कदर मुझमें पागल है वो लड़की 22.12.2022

इस कदर मुझमें पागल है वो लड़की

उसके गालों को कोई अब हाथों से छूता होगा। 16.12.2022

उसके गालों को कोई अब हाथों से छूता होगा।

ये मेरे बिस्तर की जो चादर है, ये चादर हटा दो. 09.12.2022

ये मेरे बिस्तर की जो चादर है, ये चादर हटा दो.

इसके अलावा, मेरा कोई ठिकाना नहीं. 06.12.2022

इसके अलावा, मेरा कोई ठिकाना नहीं.

तुम तो हम जैसे नजर आ रहे हो 02.12.2022

तुम तो हम जैसे नजर आ रहे हो

मैं तो उससे मोहब्बत करता था 28.11.2022

मैं तो उससे मोहब्बत करता था

वो जहां भी रहे खुश रहे. 24.11.2022

वो जहां भी रहे खुश रहे.

ये मेरी मोहब्बत है जिसे तुम पागलपन समझते हो 20.11.2022

ये मेरी मोहब्बत है जिसे तुम पागलपन समझते हो

सुना है कुछ लोग थोड़ी देर बाद मिलते हैं. 16.11.2022

सुना है कुछ लोग थोड़ी देर बाद मिलते हैं.

मुझे नींद से जगा कर चला गया वो 31.10.2022

मुझे नींद से जगा कर चला गया वो

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