AKTANU899
कविताएं (Poetry Hindi -Urdu)
I like poetry. I have made this podcast to recite some of my favourite poets poem and some of my own.
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Autor
AKTANU899
Categoria
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Último episódio
12 de jul de 2026
Onde ouvir?
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Episódios
चिड़ियों ने पर्वत पर घोंसला बनाया (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:44
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
आछी के बन (वंशी और मांदल ) 27.07.2025 0:27
वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
नदिया का घना घना कूल है (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:44
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
पात झरे फिर फिर होंगे हरे (वंशी और मांदल) 27.07.2025 0:49
वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
चलो चलें चम्पागढ़ सपनों के देश(वंशी और मांदल) 27.07.2025 0:37
वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
कबसे तुम गा रहे, कबसे तुम गा रहे (वंशी और मादल) 27.07.2025 1:00
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
अब मत सोचो (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:39
वंशी और मादल, ठाकुर प्रसाद सिंह की संथाली गीतों के ताप में ताए छोटे छोटे अमूल्य गीतों का संग्रह है
खुली हथेली और तुलसी गंध 25.07.2025 5:43
ठाकुर प्रसाद सिंह की कविता जो काशी के प्रति उनके गहने अनुराग का प्रतीक होते के साथ-साथ पढ़ने वाले को काशी का भ्रमण करा देती है
मधुशाला ७० 05.07.2025 0:36
मधुशाला ७०
मधुशाला ८८ 05.07.2025 0:35
मधुशाला ८९
मधुशाला ८८ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ८८
मधुशाला ८७ 05.07.2025 0:35
मधुशाला ८७
मधुशाला ८५ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ८५
मधुशाला ८४ 05.07.2025 0:35
मधुशाला ८४
मधुशाला ८३ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ८३
मधुशाला ८२ 05.07.2025 0:39
मधुशाला ८२
मधुशाला ८१ 05.07.2025 0:37
मधुशाला ८१
मधुशाला ८० 05.07.2025 0:37
मधुशाला ८०
मधुशाला ७९ 05.07.2025 0:38
मधुशाला ७९
मधुशाला ७८ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ७८
मधुशाला ७७ 05.07.2025 0:36
मधुशाला ७७
मधुशाला ७५ 05.07.2025 0:34
मधुशाला ७५
मधुशाला ७४ 05.07.2025 0:34
मधुशाला ७४
मधुशाला ७३ 05.07.2025 0:35
मधुशाला ७३
पछाड़ते -पछाड़ते 04.07.2025 0:31
केदारनाथ अग्रवाल की एक छोटी सी कविता पकी उम्र में प्रेम मृत्यु के द्वार पर खड़े जीवन में भी,जीने की उत्कट आकांक्षा पैदा कर देता है
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