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Ek Geet Sau Afsane

Music HI ↓ 159 episódios

Every song has its own journey once it is released for the audiences but there are many back stories behind every song about which we generally remained unaware, so this series is for bringing to you all such back stories related to many favorite songs of our times, that are very much part of our life, stay tuned with Sujoy Chatterjee and Sangya Tandon for a weekly dose of Ek Geet Sau Afsane

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Episódios

“बाबुल मोरा नैहर छूट ही जाये..." 16.11.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  राजीव पटेरिया प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रेडियो,...

“अंगना आयेंगे सांवरिया..." 09.11.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  राजीव पटेरिया  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रे...

“तुझे देखा तो ये जाना सनम..." 02.11.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  सुजाता शुक्ला  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रे...

“गोरा रंग चुनरिया काली..." 26.10.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर :  राधा पाठक  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रेडियो...

“आप जैसा कोई मेरी ज़िन्दगी में आए..." 19.10.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : डॉ. शबनम खानम  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रेडियो,...

“मन क्यों बहका रे बहका आधी रात को..." 12.10.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : अंजू तिवारी  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रेडियो, टे...

“जाओ रे जोगी तुम जाओ रे..." 05.10.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : ऋतु कौशिक  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों!। ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के इस कार्यक्रम की ख़ास बात यह है कि इसमें दी गई जानकारियाँ और तमाम तथ्य ऐसे साक्षात्कारों से लिए गए होते हैं जो कलाकारों या उनके परिवार जनों द्वारा ही कहे गए होते हैं। स्थापित प...

“गाता रहे मेरा दिल..." 28.09.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : मीनू सिंह  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। आज की कड़ी में हम लेकर आए हैं 1965 की फ़िल्म ’गाइड’ के एकमात्र युगल गीत "गाता रहे मेरा दिल" के बनने की रोचक कहानी। फ़िल्म ’गाइड’ में शुरू-शुरू में कोई भी युगल गीत क्यों नहीं रखा गया था? लता मंगेशकर और किशोर कुमारा का गाया य...

“अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम..." 21.09.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : राजीव पटेरिया  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रेडियो,...

“ना किसी की आंख का नूर हूँ..." 14.09.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : शिवेन्द्र शुक्ला  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’  के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है द...

“कहीं दूर जब दिन ढल जाये..." 07.09.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : शुभ्रा ठाकुर  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रेडियो, ट...

"तुम तो ठहरे परदेसी..." 31.08.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : डॉ. शबनम खानम  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रेडियो,...

"बता दो मुझे कौन गली मोरे श्याम..." 24.08.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : ऋतु कौशिक  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक कार्यक्रम ’एक गीत सौ अफ़साने’ में आप सभी श्रोताओं का फिर एक बार स्वागत है। नमस्कार दोस्तों! यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम बातें करते हैं किसी एक गीत की, उससे जुड़े तमाम पहलुओं की, गीतों की रचना प्रक्रिया से सम्बन्धित रोचक जानकारियों की, और ज़िक्र होता है दिलचस्प घटनाओं का। जहाँ आज रेडियो, टेली...

" फ़िल्मी गीत जिनसे जगा आज़ादी का अलख..." भाग-1 10.08.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : संज्ञा, सुनील  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन सम्पादन : सुनील चिपड़े  भारत के स्वाधीनता संग्राम में केवल क्रान्तिकारियों और नेताओं का ही योगदान नहीं था, बल्कि समाज के हर वर्ग के लोगों और संस्थाओं ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस देश को आज़ादी दिलाने में अपना अपना बहुमूल्य योगदान दिया। इस दृष्टि से फ़िल्म, संगीत और फ़िल्म-संगीत का योगदान भी कम उल्लेखनीय नहीं था। आइए आ...

एक तू ना मिला, सारी दुनिया मिले भी तो क्या है...गीत के बहाने इन्दीवर साहब की ज़िन्दगी के एक अजीब-ओ-ग़रीब और अफ़सोसजनक पहलू की ओर इशारा... क्या है वह पहलू? 03.08.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : राजीव पटेरिया  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन आज की कड़ी में ज़िक्र करें 1965 की फ़िल्म ’हिमालय की गोद में’ के गीत "एक तू ना मिला" के बहाने इसके गीतकार इन्दीवर के जीवन के एक अजीब-ओ-ग़रीब पहलू का। "एक तू ना मिला, सारी दुनिया मिले भी तो क्या है"। "छोड़ दें सारी दुनिया किसी के लिए, ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए"। "हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे, डूबी जब दिल की नैया, सामने थे कि...

" तू ही सागर है तू ही किनारा..."वह कौन सा गीत था जिसे सुन कर निर्देशक रमेश सहगल ने सुलक्षणा पंडित को अपनी फ़िल्म ’संकल्प’ में ना केवल गायिका बल्कि एक अभिनेत्री के रूप में जगह दे दी? 27.07.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : अंजू तिवारी  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन ’एक गीत सौ अफ़साने’... यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें हम हर सप्ताह किसी एक गीत से जुड़ी रोचक बातें आपको बताते हैं। गीत की रचना प्रक्रिया, उससे जुड़े यादगार क़िस्से, मज़ेदार पहलुएँ, और कभी-कभी आश्चर्य में डाल देने वाले कुछ तथ्य। आजकल जहाँ बहुत से ऐसे स्तम्भ इन्टरनेट पर चल रहे हैं, वहाँ किसी गीत या फ़िल्म से सम्बन्धित दी जा रही जानकारियो...

तुम जो आओ तो प्यार आ जाए...गीतकार योगेश का अपने पहले पहले संगीतकार के साथ को किस तरह का communication gap हुआ? 20.07.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : सुजाता शुक्ला  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन आज की कड़ी में हम जिस गीत के संदर्भ में अपनी बात रखने जा रहे हैं, वह है 1962 की फ़िल्म ’सखी रॉबिन’ का गीत "तुम जो आओ तो प्यार आ जाए, ज़िन्दगी में बहार आ जाए" जिसे गाया मन्ना डे और सुमन कल्याणपुर ने। गीतकार योगेश के लिखे गीतों की संख्या कम ज़रूर है, पर उनका लिखा एक एक गीत किसी स्तरीय कविता से कम नहीं। कैसे मिला उन्हें मौका अपना पहल...

उलझ गए नयनवा..30 के दशक में फ़िल्मों से सन्यास लेने के बावजूद बेगम अख़्तर 1942 में ’रोटी’ में गाने का फ़ैसला क्यों? 13.07.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : अनुज श्रीवास्तव  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन आज की कड़ी में हम जिस गीत के बनने की कहानी सुनाने जा रहे हैं, वह है 1942 की फ़िल्म ’रोटी’ का गीत "उलझ गए नयनवा" जिसे गाया अख़्तरीबाई फ़ैज़बादी यानी बेगम अख़्तर ने। 30 के दशक में फ़िल्मों में आने और कुछ ही समय में वहाँ से सन्यास लेने के बावजूद अख़्तरीबाई फ़ैज़ाबादी उर्फ़ बेगम अख़्तर ने फिर एक बार 1942 में महबूब ख़ान की फ़िल्म ’रोटी’ में गा...

" मैं कहीं कवि ना बन जाऊँ..."इस गीत का मुखड़ा हसरत जयपुरी के बजाय जयकिशन ने क्यों लिखा? 06.07.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : शिवेन्द्र शुक्ला  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन आज की कड़ी में हम जिस गीत के बनने की कहानी सुनाने जा रहे हैं, वह है फ़िल्म ’प्यार ही प्यार’ का गीत "मैं कहीं कवि ना बन जाऊँ तेरे प्यार में ऐ कविता"। हसरत जयपुरी, शंकर-जयकिशन और मोहम्मद रफ़ी साहब के टीम की यादगार रचना।"मैं कहीं कवि ना बन जाऊँ", इस गीत का मुखड़ा हसरत जयपुरी के बजाय जयकिशन ने क्यों लिखा? इस गीत के मुखड़े में बस एक...

" इक कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत" फ़िल्म ’उड़ता पंजाब’ में शिव कुमार बटालवी की इस कविता को क्यों गीत के रूप में शामिल किया गया? 29.06.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : डॉ. शबनम खानम  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन आज की कड़ी के लिए हम लेकर आए हैं एक कविता। अरे अरे, घबराइए नहीं। कविता ज़रूर है पर इसे एक फ़िल्मी गीत के रूप में पेश किया गया है। जी हाँ, फ़िल्म ’उड़ता पंजाब’ के गीत "इक कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत" है आज की इस कड़ी का विषय। पंजाब के मशहूर कवि शिव कुमार बटालवी की प्रसिद्ध कविता है "इक कुड़ी जिहदा नाम मोहब्बत, वो गुम है, गुम है, गुम है"। सम...

वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी...क्या आपको पता है कि इस नज़्म के पीछे सुदर्शन फ़ाक़िर का कैसा दर्द छुपा हुआ है? 22.06.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : ऋतु कौशिक  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन आज की कड़ी के लिए हम जो गीत लेकर आये हैं, वह कोई फ़िल्मी गीत नहीं, बल्कि एक मशहूर ग़ैर-फ़िल्मी नज़्म है जिसे आप सभी ने ज़रूर सुना होगा - "ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो..."। सुदर्शन फ़ाक़िर का कलाम, आवाज़ जगजीत सिंह की। वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी"... दोस्तों, आपने यह नज़्म तो बहुत बार सुनी होगी पर क्या आपको पता है कि इस नज़्म के...

जब से पी संग नैना लागे : वो गीत जिसके कारण ओ पी नैय्यर और लता मंगेशकर ने ज़िंदगी भर साथ काम नहीं किया 15.06.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : राजीव पटेरिया  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तंभ 'एक गीत सौ अफ़साने'। आज की कड़ी में प्रस्तुत है 1952 की फ़िल्म ’आसमान’ के गीत "जब से पी संग नैना लागे" के बहाने संगीतकार ओ. पी. नय्य...

"सरकती जाये है रुख से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता..." कुछ तो होगी बात अमीर मीनाई की इस एक ग़ज़ल में जो बार-बार फ़िल्मी गीत के रूप में सामने आती रही 08.06.2021

आलेख : सुजॉय चटर्जी स्वर : डॉ. शबनम खानम  प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन आज की कड़ी में प्रस्तुत है एक ग़ज़ल की बातें। 1982 की फ़िल्म ’दीदार-ए-यार’ में शामिल हुई थी अमीर मीनाई की मशहूर ग़ज़ल "सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता"। आज इसी ग़ज़ल की चर्चा। 19-वीं सदी में लिखी गई एक ग़ज़ल। फ़िल्म संगीत की शुरुआत होने पर इस ग़ज़ल को इसके मूल रूप में, या फिर फेर बदल के साथ बार-बार फ़िल्मों में शामिल किया गया। 30...

हिन्दी फ़िल्मी गीतों में बाइसाइकिल : विशेष एपिसोड 03.06.2021

(SPECIAL EPISODE OF ‘EK GEET SAU KAHAANIYAN’ ON WORLD BICYCLE DAY, 3-JUNE) 3 जून को समूचे विश्व में विश्व बाइसाइकिल दिवस मनाया जाता है। साइकिल की उपयोगिता और इसके स्वास्थ्य सम्बन्धित गुणों की वजह से इसे और अधिक जनसाधारण में लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से यह दिन मनाया जाता है। भले ही बाइसाइकिल या साइकिल का आविष्कार 1817 में जर्मनी में हुआ हो, अपनी उपयोगिता और कम कीमत की वजह से यह आग की तरह पूरी दुनि...

"ससुराल गेंदा फूल..."फ़िल्म ’Delhi-6' के लिए छत्तीसगढ़ी लोक गीत को ही क्यों चुना गया? 25.05.2021

आलेख _ सुजॉय चटर्जी स्वर - अनुज श्रीवास्तव  प्रस्तुति - संज्ञा टण्डन साप्ताहिक स्तंभ 'एक गीत सौ अफ़साने' की  आज की कड़ी में प्रस्तुत है चर्चित फ़िल्म ’Delhi-6’ के प्रसिद्ध गीत "ससुराल गेन्दाफूल" के बनने की कहानी। कैसे योजना बनी फ़िल्म ’Delhi-6' में एक लोक-संगीत आधारित गीत रखने की? और इसके लिए छत्तीसगढ़ी लोक गीत को ही क्यों चुना गया? कैसी समस्या खड़ी हुई रघुवीर यादव और ए. आर. रहमान की सोच में म...

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