कीर्ति बल्लभ जोशी

DEVINE VERSES (दिव्य श्लोक)

"दिव्य श्लोक" एक आध्यात्मिक पॉडकास्ट है जो वाल्मीकि रामायण और अन्य पवित्र हिंदू ग्रंथों की कालातीत कहानियों और शिक्षाओं को साझा करने के लिए समर्पित है। इस श्रृंखला में, हम प्राचीन ग्रंथों की गहरी और अद्भुत कथाओं को प्रस्तुत करेंगे, उनकी ज्ञानवर्धक शिक्षाओं को समझेंगे और आज के जीवन में उनकी प्रासंगिकता को खोजेंगे।हर एपिसोड में श्रोताओं को भगवान राम, सीता, और अन्य प्रमुख पात्रों की अद्भुत कहानियों की यात्रा पर ले जाया जाएगा, जैसा कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित है। साथ ही, पॉडकास्ट में अन्य पवित्र ग्रंथों से प्रेरक चर्चाएँ और कथाएँ भी प्रस्तुत की जाएंगी, जो आध्यात्मिक ज्ञान और प्रेरणा का खजाना है

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Autor

कीर्ति बल्लभ जोशी

Categoria

Religion

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Último episódio

8 de nov de 2025

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Episódios

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड ऐकोनचत्वारिंश: सर्ग 15.02.2025

वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – 39वाँ सर्ग इस सर्ग में महर्षि विश्वामित्र राजा सगर के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े की चोरी, सगर के पुत्रों द्वारा पूरी पृथ्वी को खोदने तथा देवताओं के ब्रह्मा जी के पास जाने का वर्णन करते हैं। 1. इंद्र द्वारा सगर के यज्ञीय अश्व की चोरी: राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ का घोड़ा पूरे राज्य में निर्बाध रूप से घूमता है, और जो भी इसे रोकता है, उसे युद्ध करना पड़ता है।...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड अष्टा त्रिंश:सर्ग 15.02.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के 38वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र श्रीराम को राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति और उनके इतिहास के बारे में विस्तार से बताते हैं। सारांश: राजा सगर अयोध्या के प्रतापी राजा थे, जो इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए थे। वे बहुत ही पराक्रमी और धर्मपरायण थे। उनकी दो पत्नियाँ थीं—केशिनी और सुमति। राजा सगर को संतान प्राप्ति की इच्छा थी, इसलिए उन्होंने वंश वृद्धि के लिए कठोर तपस्या क...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सप्तत्रिंश:सर्ग 14.02.2025

वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – सर्ग 37 बालकाण्ड के 37वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र राजा रघु कुल भूषण श्रीराम को गंगा द्वारा भगवान शिव के तेज को धारण करने तथा कार्तिकेय के जन्म की कथा सुनाते हैं। गंगा द्वारा शिव के तेज को धारण करना भगवान शिव के तेज से जब अग्नि देव अत्यधिक संतप्त हो गए, तब उन्होंने इस तेज को गंगा में प्रवाहित कर दिया। गंगा ने भगवान शिव के इस दिव्य तेज को धारण किया, जिससे वह और भी अध...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड षट्त्रिंश: सर्ग 13.02.2025

हाँ, वाल्मीकि रामायण के बालकांड के 36वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र भगवान श्रीराम को भगवान शिव और माता पार्वती (उमा) की रतक्रीड़ा (दांपत्य प्रेमलीला) का प्रसंग सुनाते हैं। संक्षिप्त विवरण (बालकांड - सर्ग 36) जब श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ मिथिला की ओर जा रहे होते हैं, तो मार्ग में ऋषि उन्हें एक पवित्र स्थल के बारे में बताते हैं। • इस स्थान पर पहले भगवान शिव और माता पार्वती (उमा)...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड पंचत्रिंश:सर्ग 12.02.2025

श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के 35वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र भगवान श्रीराम को गंगा की उत्पत्ति की कथा सुनाते हुए बताते हैं कि गंगा और उमा (पार्वती) हिमवान और मैना (मैना या मेनका) की दो पुत्रियाँ थीं। गंगा और उमा की उत्पत्ति महर्षि विश्वामित्र कहते हैं कि हिमालय पर्वत के राजा हिमवान और उनकी पत्नी मैना के दो दिव्य पुत्रियाँ हुईं—गंगा और उमा। • गंगा अत्यंत पवित्र और तेजस्विनी थीं, इसलिए द...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड चतुस् त्रिंश: सर्ग 11.02.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के चौंतीसवें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र अपने वंश (कौशिक वंश) का वर्णन करते हैं। जब राजा दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ वन में जाते हैं, तब मार्ग में कई घटनाएँ घटती हैं। एक प्रसंग में, जब वे सिद्धाश्रम पहुँचते हैं, तब महर्षि विश्वामित्र अपने वंश का विस्तार से वर्णन करते हैं। विश्वामित्र का वंशवृत्तांत (कौशिक वंश) महर्षि विश्वामित्र बताते हैं कि उ...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड त्रयस त्रिंश:सर्ग 10.02.2025

राजा कुशनाभ का धैर्य: जब राजा कुशनाभ ने यह सुना, तो वे दुखी तो हुए, लेकिन उन्होंने अपने धर्म और धैर्य को नहीं छोड़ा। उन्होंने अपनी पुत्रियों का विवाह महर्षि चुलि के पुत्र ब्रह्मदत्त से किया। विवाह के बाद ब्रह्मदत्त के आशीर्वाद से वे कन्याएँ पुनः अपने पूर्व रूप में लौट आईं। राजा कुशनाभ के बाद उनके वंश में राजा गाधि हुए, जो महर्षि विश्वामित्र के पिता थे। इस प्रकार, महर्षि विश्वामित्र स्वयं इस वंश के...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड द्वात्रिंश:सर्ग 09.02.2025

वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – सर्ग 32 इस सर्ग में महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को सोनभद्र नदी के तट पर राजा कुश और उनके वंश की कथा सुनाते हैं। सोनभद्र नदी और राजा कुश का वर्णन जब श्रीराम, लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र मिथिला की यात्रा पर आगे बढ़ते हैं, तो वे सोनभद्र नदी के तट पर पहुंचते हैं। वहां विश्राम करते समय रामचंद्र जी महर्षि विश्वामित्र से इस पवित्र नदी के इतिहास के बारे में पूछते ह...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड एकत्रिंश:सर्ग 09.02.2025

इस सर्ग में अयोध्या के राजकुमार श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ मिथिला की यात्रा प्रारंभ करते हैं। जब श्रीराम और लक्ष्मण ने ताड़का और मारीच जैसे राक्षसों का वध कर धर्म की रक्षा की, तब महर्षि विश्वामित्र उन्हें मिथिला ले जाने का निश्चय करते हैं। मिथिला के राजा जनक ने एक विशाल धनुष-यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें शिवजी के महान धनुष को उठाने की शर्त रखी गई थी। विश्वामित्र इस यज्ञ में श्रीर...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड त्रिंश: सर्ग 08.02.2025

महर्षि विश्वामित्र द्वारा यज्ञ प्रारंभ करने के बाद, राक्षस मारीच, सुबाहु और उनके साथी यज्ञ को विध्वंस करने के लिए सिद्धाश्रम पर आक्रमण करते हैं। श्रीराम और लक्ष्मण अपने धनुष-बाण के साथ उनकी प्रतीक्षा कर रहे होते हैं। मारीच पर राम का प्रहार • जैसे ही मारीच सामने आता है, श्रीराम उसे अपनी मंत्रबद्ध बाण शक्ति से निशाना बनाते हैं। • यह बाण इतनी शक्ति से चलता है कि मारीच को सैकड़ों योजन दूर समुद्र के पा...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड एकोनत्रिंश: सर्ग 08.02.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के 29वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को अपने सिद्धाश्रम के बारे में बताते जब महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर अपने आश्रम (सिद्धाश्रम) में प्रवेश करते हैं, तो वे श्रीराम को इस आश्रम का महत्त्व समझाते हैं। वे कहते हैं कि यह वही स्थान है जहाँ कभी स्वयं भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था। इसी स्थान पर उन्होंने बलि राजा से तीन पग भूमि का दान मा...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड अष्टविंश:सर्ग 07.02.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के 28वें सर्ग में भगवान श्रीराम महर्षि विश्वामित्र से उन दिव्य अस्त्रों के संहार के बारे में ज्ञान प्राप्त करते हैं, जिन्हें उन्होंने पहले प्राप्त किया था। सारांश: • इस सर्ग में श्रीराम महर्षि विश्वामित्र से अस्त्रों की शांति (संहार) के उपाय पूछते हैं। • वे कहते हैं कि जैसे आपने मुझे इन दिव्य अस्त्रों का ज्ञान दिया है, वैसे ही अब उनके संहार का भी ज्ञान दें, जिससे मैं उन्...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सप्तविंश:सर्ग 06.02.2025

बाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के सत्ताईसवें (27वें) सर्ग में महर्षि विश्वामित्र श्रीराम को अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान प्रदान करते हैं। सर्ग का विवरण: 1. ताड़का वध के बाद – जब श्रीराम ने ताड़का का वध कर दिया, तब ऋषि-मुनि अत्यंत प्रसन्न हुए। महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम की वीरता की सराहना की और उनके शौर्य को देखते हुए उन्हें दिव्यास्त्र प्रदान करने का निश्चय किया। 2. अस्त्रों की शिक्षा – महर...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड षडविंश: सर्ग 06.02.2025

बालकाण्ड के छब्बीसवें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र के साथ अयोध्या के राजकुमार श्रीराम और लक्ष्मण ताड़का वन में प्रवेश करते हैं। यह वन ताड़का राक्षसी के अत्याचारों से दूषित और भयावह हो चुका था। महर्षि विश्वामित्र श्रीराम को ताड़का के भयंकर रूप और उसकी दुष्टताओं के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि यह राक्षसी अत्यंत बलशाली है और ऋषियों की तपस्या में विघ्न डालती है। इस कारण वे श्रीराम से उसका वध करने...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड पंचविंश:सर्ग 04.02.2025

श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के पच्चीसवें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र भगवान राम को ताड़का राक्षसी के विषय में बताते हैं। जब राजा दशरथ के आदेश से राम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ वन की ओर जाते हैं, तब वे मार्ग में एक भयंकर वन क्षेत्र से गुजरते हैं। इस वन को ताड़का वन कहा जाता था, जो अत्यंत भयानक और निर्जन था। वहाँ कोई भी जीव-जन्तु, पक्षी या ऋषि-मुनि सुरक्षित नहीं थे, क्योंकि वहाँ एक...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड चतुर्विंश: सर्ग 03.02.2025

जब राम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ यात्रा कर रहे थे, तब वे एक अत्यंत भयानक और निर्जन वन के पास पहुँचे। वह वन बहुत ही डरावना था, जहाँ असुरों का अत्याचार फैला हुआ था। उस स्थान की दुर्दशा देखकर राम ने महर्षि विश्वामित्र से पूछा— राम का प्रश्न: "हे महर्षि! यह स्थान अत्यंत भयानक है। यहाँ कोई भी जीव-जन्तु या पक्षी प्रसन्नचित्त नहीं दिख रहे। यह वन इस दशा में कैसे पड़ा? क्या यह कोई प्राचीन न...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड त्रयोविंश:सर्ग 02.02.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के 23वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर आगे बढ़ते हैं और उन्हें महत्वपूर्ण ज्ञान प्रदान करते हैं। इस सर्ग में विशेष रूप से “बाला” और “अतिबाला” विद्याओं का उपदेश दिया गया है। सारांश (बालकांड – सर्ग 23) 1. रात्रि विश्राम और सुबह की यात्रा • विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर गंगा के किनारे पहुँचते हैं। • वे वहाँ रात्रि विश्राम करते हैं। इस दौरान ऋषि संध...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड द्वाविंश:सर्ग 02.02.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के 22वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र अयोध्या से राम और लक्ष्मण को साथ लेकर वन की ओर प्रस्थान करते हैं। इस सर्ग का मुख्य वर्णन इस प्रकार है: सारांश: महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की अनुमति प्राप्त कर चुके थे। इसके बाद वे दोनों राजकुमारों को लेकर अयोध्या से निकलते हैं। 1. अयोध्या से प्रस्थान – राम और लक्ष्मण गुरु के पीछे-पीछे चल पड़ते ह...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड एकविंश:सर्ग 01.02.2025

वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – इक्कीसवाँ सर्ग इस सर्ग में महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ की वचनभंग की प्रवृत्ति देखकर अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं। जब दशरथ बार-बार यही कहते हैं कि वे राम को नहीं भेज सकते, क्योंकि वह अभी बालक है और राक्षसों का सामना करने में सक्षम नहीं है, तब विश्वामित्र कठोर शब्दों में कहते हैं— “हे रघुकुलनंदन! आप इक्ष्वाकु वंश के राजा होकर भी अपने वचन से पीछे हट रहे हैं? यह धर्म के विर...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड विंश: सर्ग 01.02.2025

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, बीसवाँ सर्ग में महर्षि विश्वामित्र अयोध्या आकर राजा दशरथ से अपने यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम को देने की याचना करते हैं। इस पर राजा दशरथ अत्यंत व्याकुल हो जाते हैं और अपने पुत्र राम को देने में असमर्थता प्रकट करते हैं। राजा दशरथ महर्षि विश्वामित्र से विनम्रतापूर्वक कहते हैं कि राम अभी केवल बालक हैं, वे न तो युद्ध में निपुण हैं और न ही राक्षसों का सामना करने योग्य हैं। वे...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड एकोनविंश: सर्ग 31.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के 19वें सर्ग में महर्षि विश्वामित्र का प्रसंग आता है, जिसमें वे अयोध्या नरेश राजा दशरथ से अपने यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम को माँगने आते हैं। संक्षिप्त कथा: महर्षि विश्वामित्र घोर तपस्या और यज्ञ कर रहे थे, लेकिन राक्षस (विशेष रूप से मारीच और सुबाहु) उनके यज्ञ में बाधा डालते थे। तब वे राजा दशरथ के दरबार में गए और उनसे अपने यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम को कुछ समय के लिए...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड अष्टादश:सर्ग 30.01.2025

ऋष्यशृंग के यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद, राजा दशरथ अपनी पत्नियों और अनुचरों के साथ अयोध्या लौटते हैं। कुछ समय पश्चात, उनके घर में चार पुत्रों का जन्म होता है। 1. यज्ञ की समाप्ति और अयोध्या वापसी: • जब महाराज दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ संपन्न कर लिया, तब ऋष्यशृंग ने उन्हें आशीर्वाद दिया। • देवताओं और ऋषियों ने भी संतोष व्यक्त किया। • इसके पश्चात दशरथ अपने परिवार सहित अयोध्या लौट आए। 2. चारों पुत्रों का...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सप्तदश: सर्ग 29.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सप्तदश सर्ग में वर्णन है कि जब रावण और उसके अनुयायियों के अत्याचारों से पृथ्वी त्रस्त हो गई, तब देवता, ऋषि, और अन्य लोकपाल ब्रह्माजी के पास गए। उन्होंने रावण के आतंक की शिकायत की और उससे मुक्ति का उपाय पूछा। इस पर ब्रह्माजी ने उन्हें भगवान विष्णु के पास जाने की सलाह दी। भगवान विष्णु ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे पृथ्वी पर राम के रूप में अवतार लेंगे और रावण का अंत करेंग...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड षोडशः सर्ग 28.01.2025

बाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के षोडश सर्ग (16वां सर्ग) में दो प्रमुख घटनाएँ वर्णित हैं: 1. देवताओं द्वारा श्री हरि से रावण वध का निवेदन देवताओं और ऋषि-मुनियों ने रावण के अत्याचारों से पीड़ित होकर ब्रह्मा जी की शरण ली। ब्रह्मा जी उन्हें लेकर भगवान विष्णु के पास गए। उन्होंने भगवान से निवेदन किया कि रावण ने वरदान के कारण देवताओं, दैत्यों, गंधर्वों, यक्षों आदि को जीत लिया है, और केवल मनुष्य के हाथों उस...

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड पंचदश:सर्ग 26.01.2025

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के पंचदश सर्ग में पुत्रेष्टि यज्ञ का आयोजन और साथ ही ब्रह्माजी द्वारा रावण के वध का उपाय बताने का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह सर्ग राजा दशरथ की संतान प्राप्ति और रावण के वध के लिए आवश्यक घटनाओं को स्थापित करता है। 1. पुत्रेष्टि यज्ञ का आयोजन राजा दशरथ को संतान प्राप्ति की इच्छा थी। उन्होंने अपने गुरु वसिष्ठ के सुझाव पर यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ के लिए ऋष्यश्रंग को ब...

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