Finney Samuel

दैनिक मन्ना | Bible Devotions in Hindi

Religion HI ↓ 668 episodes

"दैनिक मन्ना" प्रतिदिन के लिए संक्षिप्त बाइबल अध्ययन है। इन अध्ययन के माध्यम से रोज़ आप आत्मिक उन्नति कर सकते है! WhatsApp पर सूचित होने के लिए आप हमारे वेबसाइट द्वारा जुड़ सकते है: www.finneysamuel.com

Author

Finney Samuel

Category

Religion

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Aug 31, 2024

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Episodes

जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है | नीतिवचन 10:18-20 17.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:18-20 18 जो बैर को छिपा रखता है, वह झूठ बोलता है, और जो अपवाद फैलाता है, वह मूर्ख है। 19 जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है। 20 धर्मी के वचन तो उत्तम चान्दी हैं; परन्तु दुष्टों का मन बहुत हलका होता है।

जो डांट से मुंह मोड़ता, वह भटकता है | नीतिवचन 10:17 16.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:17 17 जो शिक्षा पर चलता वह जीवन के मार्ग पर है, परन्तु जो डांट से मुंह मोड़ता, वह भटकता है।

धर्मी का परिश्रम जीवन के लिये होता है | नीतिवचन 10:16 15.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:16 16 धर्मी का परिश्रम जीवन के लिये होता है, परन्तु दुष्ट के लाभ से पाप होता है।

कंगाल लोग निर्धन होने के कारण विनाश होते हैं | नीतिवचन 10:14-15 14.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:14-15 14 बुद्धिमान लोग ज्ञान को रख छोड़ते हैं, परन्तु मूढ़ के बोलने से विनाश निकट आता है। 15 धनी का धन उसका दृढ़ नगर है, परन्तु कंगाल लोग निर्धन होने के कारण विनाश होते हैं।

निर्बुद्धि की पीठ के लिये कोड़ा है | नीतिवचन 10:13 12.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:13 13 समझ वालों के वचनों में बुद्धि पाई जाती है, परन्तु निर्बुद्धि की पीठ के लिये कोड़ा है।

प्रेम से सब अपराध ढंप जाते हैं! | नीतिवचन 10:12 11.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:12 12 बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढंप जाते हैं।

धर्मी का मुंह तो जीवन का सोता है | नीतिवचन 10:11 10.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:11 11 धर्मी का मुंह तो जीवन का सोता है, परन्तु उपद्रव दुष्टों का मुंह छा लेता है।

जो आँख मारता है, उस से औरों को दुख मिलता है | नीतिवचन 10:10 09.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:10 10 जो नैन से सैन करता है उस से औरों को दुख मिलता है, और जो बकवादी और मूढ़ है, वह पछाड़ खाता है।

जो टेढ़ी चाल चलता है उसकी चाल प्रगट हो जाती है | नीतिवचन 10:9 08.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:9 9 जो खराई से चलता है वह निडर चलता है, परन्तु जो टेढ़ी चाल चलता है उसकी चाल प्रगट हो जाती है।

जो बुद्धिमान है, वह आज्ञाओं को स्वीकार करता है | नीतिवचन 10:8 07.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:8 8 जो बुद्धिमान है, वह आज्ञाओं को स्वीकार करता है, परन्तु जो बकवादी और मूढ़ है, वह पछाड़ खाता है।

धर्मी को लोग आशीर्वाद देते हैं, परन्तु दुष्टों का नाम मिट जाता है | नीतिवचन 10:7 05.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:7 7 धर्मी को स्मरण करके लोग आशीर्वाद देते हैं, परन्तु दुष्टों का नाम मिट जाता है।

धर्मी पर बहुत से आर्शीवाद होते हैं | नीतिवचन 10:6 04.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:6 6 धर्मी पर बहुत से आर्शीवाद होते हैं, परन्तु उपद्रव दुष्टों का मुंह छा लेता है।

जो बेटा कटनी के समय भारी नींद में रहता है, वह लज्जा का कारण होता है | नीतिवचन 10:5 03.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:5 5 जो बेटा धूपकाल में बटोरता है वह बुद्धि से काम करनेवाला है, परन्तु जो बेटा कटनी के समय भारी नींद में पड़ा रहता है, वह लज्जा का कारण होता है।

जो काम में ढिलाई करता है, वह निर्धन हो जाता है | नीतिवचन 10:4 02.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:4 4 जो काम में ढिलाई करता है, वह निर्धन हो जाता है, परन्तु कामकाजी लोग अपने हाथों के द्वारा धनी होते हैं।

धर्मी को यहोवा भूखा मरने नहीं देता | नीतिवचन 10:3 01.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:3 3 धर्मी को यहोवा भूखों मरने नहीं देता, परन्तु दुष्टों की अभिलाषा वह पूरी होने नहीं देता।

दुष्टों के धन से लाभ नही होता! | नीतिवचन 10:2 01.11.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:2 2 दुष्टों के रखे हुए धन से लाभ नही होता, परन्तु धर्म के कारण मृत्यु से बचाव होता है।

मूर्ख पुत्र के कारण माता उदास रहती है! | नीतिवचन 10:1 29.10.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 10:1 1 सुलैमान के नीतिवचन॥ बुद्धिमान पुत्र से पिता आनन्दित होता है, परन्तु मूर्ख पुत्र के कारण माता उदास रहती है।

चोरी का पानी मीठा होता है! | नीतिवचन 9:13-18 28.10.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 9:13-18 13 मूर्खता रूपी स्त्री हौरा मचाने वाली है; वह तो भोली है, और कुछ नहीं जानती। 14 वह अपने घर के द्वार में, और नगर के ऊंचे स्थानों में मचिया पर बैठी हुई 15 जो बटोही अपना अपना मार्ग पकड़े हुए सीधे चले जाते हैं, उन को यह कह कह कर पुकारती है, 16 जो कोई भोला है, वह मुड़ कर यहीं आए; जो निर्बुद्धि है, उस से वह कहती है, 17 चोरी का पानी मीठा होता है, और लुके छिपे की रोटी अच्छी लगत...

यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है? | नीतिवचन 9:10-12 28.10.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 9:10-12 10 यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है, और परमपवित्र ईश्वर को जानना ही समझ है। 11 मेरे द्वारा तो तेरी आयु बढ़ेगी, और तेरे जीवन के वर्ष अधिक होंगे। 12 यदि तू बुद्धिमान हो, ते बुद्धि का फल तू ही भोगेगा; और यदि तू ठट्ठा करे, तो दण्ड केवल तू ही भोगेगा॥

ठट्ठा करने वाले को न डांट ऐसा न हो कि वह तुझ से बैर रखे! | नीतिवचन 9:7-9 26.10.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 9:7-9 7 जो ठट्ठा करने वाले को शिक्षा देता है, सो अपमानित होता है, और जो दुष्ट जन को डांटता है वह कलंकित होता है॥ 8 ठट्ठा करने वाले को न डांट ऐसा न हो कि वह तुझ से बैर रखे, बुद्धिमान को डांट, वह तो तुझ से प्रेम रखेगा। 9 बुद्धिमान को शिक्षा दे, वह अधिक बुद्धिमान होगा; धर्मी को चिता दे, वह अपनी विद्या बढ़ाएगा।

बुद्धि ने अपना घर बनाया और उसके सातों खंभे गढ़े हुए हैं | नीतिवचन 9:1-6 25.10.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 9:1-6 1 बुद्धि ने अपना घर बनाया और उसके सातों खंभे गढ़े हुए हैं। 2 उस ने अपने पशु वध कर के, अपने दाखमधु में मसाला मिलाया है, और अपनी मेज़ लगाई है। 3 उस ने अपनी सहेलियां, सब को बुलाने के लिये भेजी है; वह नगर के ऊंचे स्थानों की चोटी पर पुकारती है, 4 जो कोई भोला हे वह मुड़ कर यहीं आए! और जो निर्बुद्धि है, उस से वह कहती है, 5 आओ, मेरी रोटी खाओ, और मेरे मसाला मिलाए हुए दाखमधु को पीओ...

"जो मुझे पाता है, वह जीवन को पाता है..." | नीतिवचन 8:32-36 25.10.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 8:32-36 32 इसलिये अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो; क्या ही धन्य हैं वे जो मेरे मार्ग को पकड़े रहते हैं। 33 शिक्षा को सुनो, और बुद्धिमान हो जाओ, उसके विषय में अनसुनी न करो। 34 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो मेरी सुनता, वरन मेरी डेवढ़ी पर प्रति दिन खड़ा रहता, और मेरे द्वारों के खंभों के पास दृष्टि लगाए रहता है। 35 क्योंकि जो मुझे पाता है, वह जीवन को पाता है, और यहोवा उस से प्रसन्न हो...

"यहोवा ने मुझे प्राचीनकाल के कामों से भी पहिले उत्पन्न किया..." | नीतिवचन 8:22-31 22.10.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 8:22-31 22 यहोवा ने मुझे काम करने के आरम्भ में, वरन अपने प्राचीनकाल के कामों से भी पहिले उत्पन्न किया। 23 मैं सदा से वरन आदि ही से पृथ्वी की सृष्टि के पहिले ही से ठहराई गई हूं। 24 जब न तो गहिरा सागर था, और न जल के सोते थे तब ही से मैं उत्पन्न हुई। 25 जब पहाड़ वा पहाड़ियां स्थिर न की गई थीं, 26 जब यहोवा ने न तो पृथ्वी और न मैदान, न जगत की धूलि के परमाणु बनाए थे, इन से पहिले मैं...

"मेरा फल चोखे सोने वरन कुन्दन से भी उत्तम है..." | नीतिवचन 8:18-21 21.10.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 8:18-21 18 धन और प्रतिष्ठा मेरे पास है, वरन ठहरने वाला धन और धर्म भी हैं। 19 मेरा फल चोखे सोने से, वरन कुन्दन से भी उत्तम है, और मेरी उपज उत्तम चान्दी से अच्छी है। 20 मैं धर्म की बाट में, और न्याय की डगरों के बीच में चलती हूं, 21 जिस से मैं अपने प्रेमियों को परमार्थ के भागी करूं, और उनके भण्डारों को भर दूं।

"मेरे ही द्वारा राजा राज्य करते हैं..." | नीतिवचन 8:14-17 20.10.2021

आज का वचन ➤ नीतिवचन 8:14-17 14 उत्तम युक्ति, और खरी बुद्धि मेरी ही है, मैं तो समझ हूं, और पराक्रम भी मेरा है। 15 मेरे ही द्वारा राजा राज्य करते हैं, और अधिकारी धर्म से विचार करते हैं; 16 मेरे ही द्वारा राजा हाकिम और रईस, और पृथ्वी के सब न्यायी शासन करते हैं। 17 जो मुझ से प्रेम रखते हैं, उन से मैं भी प्रेम रखती हूं, और जो मुझ को यत्न से तड़के उठ कर खोजते हैं, वे मुझे पाते हैं।

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