Dhiraj
Modern Masters
A contemplative take on stalwarts of modern cultural landscape. It will cover Modern Art, Music, Movies, Television. Abstract paintings to modern art; rock n roll to classical music . So onto Picasso, Matisse, Warhol, Jimi Hendrix, Jim Morrison, Janis Joplin, Yes Minister, BBC mysteries, Modernartists etc
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Episodes
एक कविता लिखनी है 17.04.2024 1:22
एक कविता लिखनी है। सफ़ेद ख़ामोशी सी पागल गुम अपनेपन सी मुलायम खाली सन्नाटे के दोनो से ढकी एक कविता लिखनी है। बारिश को भिगोते शहर सी खनकती पिघलती बातों सी शर्माए हुए नशे सी एक कविता लिखनी है। करते ही भूले से वादे सी किसी सिसकते पाप सी किसी नापाक हसरत सी एक कविता लिखनी है। तेरी हिकारत के डंक सी मेरी समझ के तंग मकबरे सी इस मरीज दौर के वहशीपन सी एक कविता लिखनी है। कुछ दिल में कुछ दिल के बाहर बिखरे उस आम...
खेद सहित 17.04.2024 0:54
तक़ादा सा करते सड़क पर पड़े पथ्थर अंधेरे में साये सा खड़ा पेड़ घूरता हवा की गुत्थी भी एक शिकायत सी लिए मुड़ा तो धड़कन खड़ी थी तिरस्कार के शैवाल जीवन से बनी साँस भी कुछ घिसी कुछ छिली एक पिघली सी हँसी गुज़री पूछती कब लिखोगे हमें सफ़ेद काग़ज़ का डाँटता सा सूनापन रोने की कसक भी दूर समर्पण भी टुकड़ों में दर्द भी उधार सा एक भूले से सपने में कल मिला था शायरी के झिझकते उलाहने से कब लिखोगे? सो आज ये खेद सह...
क्यों न कर जायें चुपके से कोई गुनाह हम 20.11.2023 1:41
हो बेज़ार राख़ पसरी सन्नाटे के आसमानों में कुरेदें क्यों न उसमें झीनी हँसीं के पठारों को हम बन रहा है थकान विरक्ति और शायद आदतों से एक मक़बरा इसे सजायें क्यों न कुछ पैबंद मुस्कुराहटों से हम बुझती आत्मा में रोज़ उगते हैं नए मरुस्थल बसाएँ क्यों न उन में कुछ बिसरे से गाँव हम किवाड़ें दरक रही हैं जा चुकों के न होने से जलाएँ क्यों न उन पर कुछ नए सूने दीये हम ग़ज़ल की लज़्ज़त सूखने सी लगी है रोज़मर्रा क...
इतने भी बेख़्याल नहीं हम 24.10.2023 0:56
कुछ हम नज़रंदाज़ कर देते हैं कुछ तुम रहने देते हो गफलत का शक वरना इतने भी बेख्याल नहीं हम अपनी मौत के बहानो से। लोग कहते है बड़ा ढीठ है जिए जा रहा है। हम बेक़रार हैं कि जिला जाये कोई। अब बातें नहीं होती अपने भीतर के झोलों से नाराज़ सी जिंदगी जो घूमती है बाहर डूबती इन उम्मीदों में कुछ समझा लेते हैं खुद को कुछ तुम्हारी चुप्पी बुन जाती है कुछ भरम दिल सम्हल जाता है सांस चल जाती है।
प्यास की आबरू 21.10.2023 1:06
हारी बाज़ी सी फैली रात का भूला हुआ कतरा सहम कर कुछ आरजुए बुनता झगड़ते हुए ये जज़्बात मन बनाते मुक्कम्मल हो जाने का सोचा था क़ि आज तुमको सोचेंगे अब आरजुओं का क्या है बेख़ौफ़ चली आती हैं मैं रह जाता हूँ तुम्हारी बेरुखी की काली चादर को समेटने के लिए ये अकेलेपन के बियाबान के कटीले पेड़ तमगे हैं मेरी प्यास के कम रह जाने के कभी रखो आबरू इन डरे हुए ख्वाबों की अपने अजनबीपन को नफरत का नाम देकर। कुछ मिटें कुछ लुटे...
क्यों चौंकता है मन 18.10.2023 0:49
क्यों चौंकता है मन पता तो है ये अहसास धुंध से तराशी एक आयत ही तो है कुछ सुर इस साज पर नहीं लगते गुनगुनाने की हिमाकत कुछ और नहीं एक छोटा मोटा कुफ्र ही तो है अब कोई शुबह नहीं तुम्हारी हिक़ारत कोई नाज़ ओ अदा का खेल नहीं हमारी अर्ज़ी इक सिरफिरे का भरम ही तो है आज फिर सोचा कि दिल की किसी परत में उकेरेंगे बारिशों की खुसफुसाहट कुछ और नहीं राख़ के ढेर से इक गुज़ारिश ही तो है क्यों चौंकता है मन पता तो है.....
कुछ गहरा जियें 30.09.2023 0:56
जीवन का कुछ कारोबार चले इक सड़क से लम्बे लम्हे मे इक डूबते से वैराग्य में सिर्फ होठों पर ठिठकती इक झीनी हंसी में कुछ वेदना ढूंढे अजीब असमंजस सस्ती ख़ुशी समझ नहीं आती दर्द का शूल विस्मृत इक उदास सांस में एक छिछली सन्तुष्टि के घूँट में इक इठलाते अल्प विराम में कुछ वेदना ढूंढे। कुछ गहरा जियें गंगा के ठंडे विस्तार सी कोई गहरी ख़ुशी खालिस चमकते नीले अंधरे सा कोई गहरा दर्द ऊपर ऊपर बहुत जिये अब डूब कर भी जि...
सामान्य का सम्मोहन 26.09.2023 1:11
कभी रुक कर देखो तिलस्मी रोमानियत की ख़ुमारी के झुरमुटे को थोड़ा हटा कर , दिखेगा... छोटे सच सा सलोना सामान्य का सम्मोहन शायर का काम है उड़ना कहीं लुट जाना किसी गुनाह को जी कर अमीर कर देना मगर एक कुफ़्र ये भी करके देखो .... एक उम्र से तराशी घुले मौन सी शक्ति नदी सी उदार भीतर तक तृप्त शाम के सूरज सी थकी मुस्कुराहट को पढ़ के देखो उसमें बैठा सामान्य का सम्मोहन उन रोज़मर्रा समझौतों से पुख़्ता ख़ुद के दर...
होने चाहिए कुछ अड्डे 26.09.2023 0:46
लम्हों के पतझड़ से
खनकती चुभन तुम्हारे न होने की 25.09.2023 0:40
जैसे बरसती हो बेनाम बे आवाज़ बारिश किसी भूले सागर के धुँधले कोने में जैसे फैलती हो अनमनी सी कस्तूरी किसी अनछुए जंगल के कँवारे सन्नाटे में जैसे सुलगती हो पराई सी चाँदनी किसी अनजान आकाशगंगा के मौन झूलते अकेलेपन में वैसे ही तुम्हारा न होना भर देता है मुझे उस बिना जिए ख़ालीपन की खनकती चुभन से
अलगाव सी उदासी 16.09.2023 1:20
झुलसती विरक्ति से पोसी थकी सी रात का सूना एक पल रोशनियाँ बांधती भूखे अंधेरों से बने चाँद इक चुप्पी की रजाई और वो टीसों का तांडव अलगाव सी उदासी एक उबा सा वैराग्य शापित सृष्टियों से सजा वो सूना एक पल कब खटखटाता है ये पल भूले दोस्त सा अनमना सा आ खड़ा होता है जैसे पुरानी चोट का दर्द संवेदन के पटल पर शरमाया सा एक दावा एक झीनी सी प्यास जो जिद तो नहीं करती पर घेर पूरा लेती है उस पल के उलझे से सुख उम्र की...
बुरा तो ये कि बुरा भी नहीं लगता… 25.01.2023 1:45
गुम सी हो गयी ग़ज़ल बुरा तो ये कि बुरा भी नहीं लगता दिल तो आज भी छिलता होगा खनकती बारिशें आज भी भिगोती होंगी रागों का सन्नाटा आज भी भरता होगा चाँद पर कई सागर ये दर्द ये उन्माद ये आह्लाद थकाता तो है छलक कर बहता नहीं है कविता उफनते देखी थी कुंठा, अपमान, प्रेम और भूखी मुलायमियत के बाज़ार में कविता मरते भी देखी थी संतुष्टि, व्यस्तता और पठार होते चेतन पर जो नहीं देखा था वो था रंगों का रंगत खो देना सपनो...
नहीं जवाबदेह हूँ तुम्हारे नफ़रतों के मक़बरे में- A reposte to whataboutery syndrome कविता 16.01.2023 1:27
सच सच क्यों है इसलिए क्योंकि मैं एक हद के बाद नापना बंद कर देता हूँ डर भी डर इसलिए है क्योंकि मैं एक हद के बाद बहादुर बनने को नहीं तैयार हूँ दुख दुःख इसलिए है क्योंकि एक हद के बाद मेरे दिल ने वो किवाड़ खोल दी है ख़ुशी ख़ुशी क्यों है क्योंकि वो आ खड़ी हुई है बस मेरे सच , मेरे डर, मेरे दुःख और मेरी ख़ुशियाँ सही है कि नापी जा सकती हैं , नकारी जा सकती हैं आज तुम्हारे पास मेरा सारा इतिहास हैं पर मेरा व...
मन नहीं है तुम्हारे न होने की आदत डालें 12.01.2023 1:21
जब कोई गया कम याद आए
रजनीकांत - एक आदमकद उन्माद 08.11.2022 1:46
A tribute to Mega star Rajinikanth
अमिताभ - कौतूहल सा एक राग 05.11.2022 2:23
अमिताभ बच्चन को एक नज़र । A tribute to Amitabh Bachchan
ऑगस्ट रोडाँ के साँस लेते पत्थर | Warm Flesh of Rodin's Sculpture| Hindi | 22.10.2022 2:23
रोडाँ को दिखावटी और भड़कीला कहा गया है। उनकी शोहरत 1917 में उनकी मृत्यु के बाद तेज़ी से नीचे गयी जब नयी पीढ़ी के शिल्पकारों (उनमें से कई उनके शिष्य भी थे जैसे Maillol, Brancusi, Bourdelle, Pompon आदि) रोडाँ के उमड़ते इमोशन और हाइपर डिटेलिंग की जगह आकार और अर्थ के दूसरे अप्रोच के साथ अपनी खुद की शैली ढूँढने लग गए। यद्यपि ये सब रोडाँ के क्लासिसिज़म के पहाड़ को पार करने से लाभान्वित हुए थे पर वो सब इस...
रोवन एटकिंसन: हाइपर कॉमेडी की सादगी| Hindi | Rowen Atkinson- Understated Hyper Comedy 14.10.2022 8:11
रोवन एटकिंसन एक दुर्लभ प्रजाति हैं - a natural born actor, एक नैसर्गिक अभिनय प्रतिभा। वो इतने सहज और गहरे कॉमेडियन हैं की वो चरित्र को अभिनीत करने के बजाय उसे जीते हैं। उन्होंने कॉमेडी की विधा उठाई और उस पर अपने दबे मुलायम चुम्बकीय व्यक्तित्व की मुहर लगा दी। । सहजता और अंडरस्टेटमेंट उनकी प्रतिभा के प्रमुख तत्व हैं। अंडरस्टेटमेंट और मिस्टर बीन- सुनने में अजीब लगता है लेकिन मिस्टर बीन या एटकिंसन द्व...
क्लिंट ईस्टवुड: न्यूनता में भव्यता | Hindi | Minimally Grand: Eastwood Enigma 12.10.2022 22:34
ईस्टवुड गाथा में भी बिना भटके केंद्रीय तत्व की परतें उतारने की शिक्षा साफ़ दीखती है। जब सबको सीमित अभिनय क्षमता का एक सुन्दर नौजवान दिखता था तब इटालियन सेकंड यूनिट डायरेक्टर सर्जिओ लिओनी ने उनको लेकर जापानी समुराई फिल्मों और अमरीकी वेस्टर्न्स के मिश्रण से Man With No Name को पैदा किया। उन्होंने वेस्टर्न्स और समुराई फिल्मों के अंतर्निहित संरचना के मुख्य तत्व जैसे लड़ाकू लोग, धमकी भरे तर...
Milan Kundera: A Playful Dialogue with Soul 02.10.2022 13:58
Milan Kundera is a great novelist and a pioneer for his style which he himself confesses is in the tradition of great European novelists. His key works stand the test of time and resonate with brilliance that appeals to human concerns beyond a certain epochs. His best works contain the intellectual and emotional pleasure of an examined life. His capabilities of “forging connections between the ind...
मिलान कुंदेरा- आत्मा का उशृंखल संवाद I Milan Kundera I Hindi 01.10.2022 13:04
कुंदेरा की ख्याति 80 के दशक में अपने चरम पर थी जब हर कोई The Book of Laughter and Forgetting और The Unbearable Lightness of Being के साथ ही दिखाई पड़ता था। तब चेक कम्युनिज्म ज़्यादा पुराना नहीं था और कुंदेरा की खिलन्दड़ी उश्रृंखलता को एक 'ग्रिम बैकड्रॉप' मुहैया कराता था। अब ये देखने वाली बात है कि बिना इस पृष्ठ भूमि के कुंदेरा के डार्क मजाकिया और कई बार उश्रृंखल...
एरिक क्लैप्टन: एक उन्मादित सौम्यता 29.09.2022 20:32
आज के एरिक क्लैप्टन संगीत के प्रकाश स्तम्भ और उसके सेवक के रूप में पूरी तरह से सक्रिय हैं। बेहद बुद्धिमत्तापूर्ण तारीकी से उन्होंने स्वयं को ‘एल्डर स्टेट्समैन ऑफ़ म्यूजिक ‘ जैसी उपाधियों से दूर रखा है जिनके वैसे तो वो पूरे हक़दार हैं. उन्होंने संगीत के स्मारक बनने की जगह संगीत का विद्यार्थी बने रह कर अपनी उपयोगिता और उपादेयता बनाये रखी है। आज वो जीवन की जिस गहराई के साथ संगीत पैदा कर र...
मार्टिन स्कॉरसीसी - एक दिग्गज किस्सागो का सम्मोहक फिल्म संसार/ Martin Scorsese: 'Headlong Momentum of a Consummate Story-teller' -Hindi 26.09.2022 19:40
स्कॉरसीसी शैली और स्टाइल के बहुत बेबाक़ जादूगर हैं। अच्छी बात यह है कि उनकी शो मैनशिप, सिनेमा की भाषा पर उनकी उत्कृष्ट पकड़ और वास्तव में एक महान फ़िल्मकार की अपनी विधा पर व्यापक महारत से आती है। उनकी शो मैन शिप कभी भी उनकी दृष्टि और कहानी के संदेश पर हावी नहीं होती वरन उनको निखारने के एक प्रभावी टूल के रूप में काम करती है। उनमें हम को एक बेमिसाल किस्सागो और मंजे हुए विज़ूअल स्टाइलिस्ट का सुखद संग...
Eric Clapton: Dazzling with Depth 24.09.2022 19:42
This second episode of Modern Masters is about Eric Clapton. It deals with his character and musical traits of dispassionate acceptance and a sagacious survival instinct. This traits enabled his illustrious and long innings as a top performer on the global music stage. For the blog copy, visit http://modernartists.blogspot.com/2019/05/eric-clapton-dazzling-with-depth.html
Martin Scorsese: 'Headlong Momentum of a Consummate Story-teller' 19.09.2022 12:36
Martin Scorsese has complete tonal control over what is appearing on screen. He maintains that control with a surefootedness which is an innate quality with Scorsese. He has honed his technological virtuosity to amazing sophistication. However, this sophistication has always been subservient to his greatest gift- the gift of storytelling.
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