Arjun Bharti Mina
मलिका-ए-गर्दिश by Arjun Bharti Mina
Podcast Description — " Malika-e-Gardish " " जब तख्त गिरते हैं — कुछ औरतें उठती हैं। " यह कहानी सिर्फ़ एक औरत की नहीं है। यह कहानी है एक शहर की, एक दौर की, एक टूटती हुई तहज़ीब की — और उस आग की, जो राख से उठती है। “ Malika-e-Gardish ” एक ऐतिहासिक, भावनात्मक और राजनीतिक यात्रा है, जो हमें ले जाती है 1847 से 1858 के बीच के लखनऊ में — जहाँ इत्र की खुशबू के पीछे साज़िशें हैं, महफ़िलों की रौनक के पीछे सन्नाटा है, और शायरी के पीछे छुपा है एक खामोश युद्ध। इस कहानी के केंद्र में है नूर (रोशन आरा) — एक तवायफ़, जिसे दुनिया ने कमज़ोर समझा, लेकिन जिसने अपनी खामोशी को हथियार बना लिया। नौ साल की उम्र में बेच...
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गर्दिश की रात – पहली महफ़िल और पहला इंकार | By Arjun Bharti Mina 24.03.2026 20:05
लखनऊ, सन् 1847। एक ऐसा शहर जहाँ तहज़ीब अपनी आख़िरी साँस ले रही है… और साज़िशें जन्म ले रही हैं। Arjun Bharti Mina की लिखी इस कहानी “मलिका-ए-गर्दिश” के पहले एपिसोड में, हम कदम रखते हैं कोठा-ए-नूर की उस शाही महफ़िल में जहाँ हर चेहरा एक मुखौटा है, और हर लफ़्ज़ के पीछे एक मक़सद। यहाँ पहली बार सामने आती है नूर — एक तवायफ़, लेकिन असल में एक ऐसी औरत जो लोगों को नहीं, उनकी नीयत को पढ़ती है। महफ़िल में मौज...
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