Rahul Gaur

Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherished

Society HI ↓ 71 episodes

Here at Majhdhaar, you get to listen to some exquisite pieces of writings - stories, poems, articles, reminiscences, satires, essays, what have you. If you like what you hear, rate the podcast, follow it on your platform and spread the word around :) Connect atEmail - rahuljigaur@gmail.com. Instagram - @majhdhaar Facebook - https://www.facebook.com/rahul.gaur.332#hindistories #books #poems #literature #podcast #hindi #rajasthani #punjabi #languages #Indian

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Rahul Gaur

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Jul 9, 2026

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Episodes

Ep 45 आ चल के तुझे मैं ले के चलूँ : किशोर कुमार - सुशोभित/ Aa chal ke tujhe main: Kishore Kumar - Sushobhit 03.08.2023

किशोर कुमार हिंदी फ़िल्मों की एक नायाब आवाज़ हैं जो विविध रूपों में अपने चाहने वालों के दिलों में समाये हैं। हिंदी फ़िल्मों के सन् ५०-६० के स्वर्णिम युग से आज तक शायद सिर्फ़ किशोर कुमार ऐसे गायक हुए हैं जिनके अलग-अलग “मूड्स” के संकलन निकले, जैसे “रोमांस विद् किशोर”, “फनी किशोर”, “किशोर के दर्द भरे गीत”, “क्रेज़ी विद् किशोर”, “एनेर्जेटिक किशोर” आदि। (याद रहे, ये स्पॉटिफ़ाई से पहले का ज़माना था) उनक...

Ep 44 आवारा भीड़ के ख़तरे (निबंध) - हरिशंकर परसाई / Awaara Bheed Ke Khatre (Essay) - Harishankar Parsai 24.07.2023

हिंदी के अनन्य व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का दशकों पुराना ये निबंध आज भी प्रासंगिक है। क्यूँकि जब तक हम आवारा भीड़ के बनने की स्थितियाँ पैदा करते रहेंगे, आवारा भीड़ के ख़तरे यूँही बने रहेंगे। फ़ीडबैक के लिये लिेखें rahuljigaur@gmail.com

Ep 43 सिग्नल (कहानी) - व्सेवोलोद गार्शिन/ Signal - Vsevolod Garshin 16.06.2023

रूसी लेखक व्सेवोलोद गार्शिन द्वारा लिखित कहानी “सिग्नल” बहुत सरलता और प्रभावी ढंग से इस बात को रेखांकित करती है कि संसार में तमाम मुश्किलों के बावजूद आम व्यक्ति में एक भला मानस रहता है। The story "Signal" written by the Russian writer Vsevolod Garshin very simply and effectively underlines that despite all the difficulties in the world, there is a good soul in the common man.

Ep 42 आज़ादी मेरा ब्रांड- अनुराधा बेनीवाल / Azadi Mera Brand - Anuradha Beniwal 12.05.2023

“आज़ादी मेरा ब्रांड” अनुराधा बेनीवाल की यूरोप के शहरों की घुमक्कड़ी का दस्तावेज है। अनुराधा ने इस बैकपैकिंग भ्रमण के ज़रिये अपने यायावरी के शौक़ को पूरा किया और स्वयं और अपने परिवेश को भी नये सिरे से पहचाना। छोटी सी किताब और सरल भाषा में अनुराधा ने बहुत कुछ कह दिया है। इस एपिसोड में इस यात्रा वृतांत के कुछ टुकड़े मैं पढ़ कर सुना रहा हूँ। आपके बहुमूल्य फ़ीडबैक मुझे rahuljigaur@gmail.com पर भेजें। आ...

Ep 41 शिव कुमार बटालवी की कविताएँ / Poems by Shiv Kumar Batalvi 29.03.2023

शिव कुमार बटालवी पंजाबी भाषा के सबसे चर्चित और मशहूर कवियों में से हैं। इनके प्रेम और विछोह के दर्द से भरी कविताओं और गीतों के लिये इनके प्रशंसकों ने इन्हें “बिरहा दा सुल्तान” नाम से नवाज़ा और आज पचास साल बाद भी इनके गहन भावों से भरे गीतों के चाहने वाले कम नहीं हैं। आज के एपिसोड में मैं शिव कुमार बटालवी की दो पंजाबी कविताएँ अर्थ सहित पढ़ रहा हूँ। फ़ीडबैक के लिये लिखें - rahuljigaur@gmail.com

Ep 40 मेरे मुँह में ख़ाक - मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी / Mere Munh Mein Khaak - Mushtaq Ahmed Yusufi 04.03.2023

ये एपिसोड उर्दू के बेहतरीन व्यंग्यकार मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी के उपन्यास “मेरे मुँह में ख़ाक” के एक अंश का पाठन है। इस अंश में वे अपने प्यारे कुत्ते सीज़र का क़िस्सा, या कहें कि जीवनी, बयान कर रहे हैं। यूसुफ़ी साहब पाकिस्तान के चोटी के साहित्यकारों में से है पर उनके क़द्रदान सरहद के दोनों ओर हैं। एपिसोड सुनिये। फ़ीडबैक - rahuljigaur@gmail.com

Ep 39 राग दरबारी- श्रीलाल शुक्ल / Raag Darbari - Shrilal Shukl 07.01.2023

“राग-दरबारी" न केवल भारत की गाय-पट्टी में बिखरे असंख्य कस्बों और गावों का एक अनिवार्य प्राईमर है बल्कि व्यंग्य की शक्ल में हमारे तंत्र की विफलताओं का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है| शिवपाल-गंज नामक एक काल्पनिक क़स्बे में स्थित यह गाथा छोटे कस्बों और गावों की सामाजिक और राजनैतिक हालत पर तीखा किन्तु सोद्देश्य व्यंगय करती है, और सत्तर के दशक में लिखी जाने के बावजूद यह कमोबेश आज भी प्रासंगिक है |स्वयं लेखक...

Ep 38 तीन राजस्थानी कविताएँ / Three Rajasthani Poems 04.12.2022

मेरे पॉडकास्ट के आज के एपिसोड में राजस्थानी (मायड़) भाषा के विपुल साहित्य से तीन तीखे तेवर की कविताएँ सुनिये। ये कविताएँ हैं “रोटी नाम सत है” (कवि - हरीश भादानी); “कोड़ा जमाल साई” (कवि - शिवराम); और “थै मजा करो महाराज” (कवि - मोहम्मद सद्दीक)

Ep 37 अवसर - नरेंद्र कोहली/ Awsar - Narendra Kohli 07.10.2022

अयोध्या के राजकुमार राम के, जननायक - मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम में बदलने की कीमिया कहाँ से शुरू होती है? मेरे देखे यह प्रस्थान बिंदु तब है जब रानी कैकेयी अपने वचनों से बंधे सम्राट दशरथ से दो वर माँगती हैं और राम को वनवास का आदेश होता है। साथ ही, पारंपरिक रूप से खलनायिका समझी गयी कैकेयी में मुझे एक स्वाभिमानी नारी दिखाई देती है। मेरे पॉडकास्ट के आज के एपिसोड में नरेंद्र कोहली जी के रामकथा पर आधार...

Ep 36 उसने कहा था - कहानी - चंद्रधर शर्मा गुलेरी / Us Ne Kaha Thha - Story by Chandradhar Sharma Guleri 28.08.2022

यह मार्मिक प्रेम कथा हिंदी साहित्य की श्रेष्ठतम कहानियों में से एक है। क़रीब सौ साल पहले रची गई ये कहानी अपनी संरचना और सोच के कारण कहानी की विधा में उस समय तो एक बड़ी छलांग थी ही, बल्कि आज भी ताज़ा रची लगती है।

Ep 35 बूढ़ी काकी - प्रेमचंद / BooDhi Kaki - Premchand 30.07.2022

कथा सम्राट प्रेमचंद की भाव विभोर कर देने वाली प्रसिद्ध कहानी - बूढ़ी काकी

Ep 34 ठगों की हुश्यारियां - भाग २ / (उपन्यास अंश - कई चांद थे सरे-आसमां : शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी) / Kai Chaand Thhe Sare Aasmaan - 2 15.07.2022

पाँच छह सौ साल पहले के हिंदुस्तान के क़िस्से जब सुने सुनाये जाते हैं तो कहीं ना कहीं ठगों का ज़िक्र ज़रूर आता है। “ठग” यानि सुनसान रास्तों पर समूह बना कर यात्रियों को लूटने वाले गिरोह, जिनसे यात्री ख़ौफ़ खाते थे। इनसे माल असबाब लुटने का ख़तरा तो था ही, जान जाना भी क़रीब क़रीब तय ही था। सुप्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार और आलोचक शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी के उपन्यास “कई चांद थे सरे-आसमां” के इस अंश में कहानी...

Ep 33 ठगों की हुश्यारियां- भाग १ / (उपन्यास अंश- कई चांद थे सरे-आसमां : शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी) / Excerpts from The Mirror of Beauty Part 1 04.07.2022

पाँच छह सौ साल पहले के हिंदुस्तान के क़िस्से जब सुने सुनाये जाते हैं तो कहीं ना कहीं ठगों का ज़िक्र ज़रूर आता है। “ठग” यानि सुनसान रास्तों पर समूह बना कर यात्रियों को लूटने वाले गिरोह, जिनसे यात्री ख़ौफ़ खाते थे। इनसे माल असबाब लुटने का ख़तरा तो था ही, जान जाना भी क़रीब क़रीब तय ही था। सुप्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार और आलोचक शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी के उपन्यास “कई चांद थे सरे-आसमां” के इस अंश में कहानी...

Ep 32 मोहता पैलेस, कराचीः रिश्ता बीकानेर से - ओम थानवी / Mohata Palace, Karachi: Om Thanvi 20.05.2022

सरहद पार, अरब सागर के किनारे बसा है पाकिस्तान का महानगर - कराची। और कराची के सबसे रईस इलाक़े में है एक बेहतरीन, शानदार इमारत - मोहता पैलेस, जो कि आज एक प्रसिद्ध अजायबघर और पर्यटन आकर्षण है और माज़ी में कभी राजनैतिक हलचल का भी बड़ा केंद्र रहा। कम लोग जानते हैं कि इस इमारत के इतिहास का राजस्थान के बीकानेर शहर से गहरा संबंध रहा है। कैसे? यह रोचक जानकारी सुनिये मेरे पॉडकास्ट के आज के एपिसोड में जिसमें...

Ep 31 सरदार जी - कहानी - ख़्वाजा अहमद अब्बास / Sardar Ji - Story by Khwaja Ahmed Abbas 14.04.2022

धार्मिक और नस्ली पूर्वाग्रहों को आईना दिखाती और उन्हें ध्वस्त करती ये कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय में स्थित है पर देश की सीमाओं के भीतर भी आज यह उतनी ही प्रासंगिक है।

Ep 30 वर्जीनिया वुल्फ़ से सब डरते हैं: शरद जोशी / Virgnia Woolf Se Sab Darte Hain, Satire by Sharad Joshi 16.03.2022

पुराने सरकारी ऑफिसों में चापलूसी, दिखावे और छोटी मोटी राजनीति का मज़ेदार चित्रण करती, मशहूर व्यंग्यकार शरद जोशी की ये रचना “वर्जीनिया वुल्फ़ से सब डरते हैं”। आज चाहे समय बदल गये हैं पर इंसानी फ़ितरतें कहाँ बदलती हैं। सुनिये और आनन्द लीजिये।

Ep 29 “पटकथा” - धूमिल की लम्बी कविता के अंश / Excerpts from Dhoomil's long poem "Patkatha" 10.02.2022

…“जनता क्या है? एक शब्द… सिर्फ़ एक शब्द है : कुहरा, कीचड़ और काँच से बना हुआ… एक भेड़ है जो दूसरों की ठंड के लिए अपनी पीठ पर ऊन की फ़सल ढो रही है।”… धूमिल की पुण्यतिथि पर उनकी कविता का अंश सुनिये…

Ep 28 कौन हो तुम, मेरे भारत? - एक कविता 25.01.2022

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ! भारत की विविधता को समेटे एकता, भारत की एक अतुलनीय विशेषता है। इसी को कहने का प्रयास है ये मेरी कविता; आशा है पसंद आयेगी

Ep 27 हिरनौटाः दमीत्री मामिन-सिबिर्याक (श्रेष्ठ रूसी बाल कथाएँ) / Hirnauta: Dmitri Mamin-Sibiriyak (Best Russian Children’s Tales) 07.01.2022

श्रेष्ठ रूसी बाल-कथाएँ” रूस के महान लेखकों की प्रसिद्ध कहानियों का संकलन है, जिसमें से एक प्यारी कहानी है हिरनौटा। इस संकलन की अन्य कहानियों की तरह इस कहानी में भी प्रेम, करूणा, दुख और ख़ुशी का मिश्रण है, बालकों की सरलता है और बड़ों की नैतिकता। कहानी सुनें और पसंद आये तो शेयर करें। आपके विचार आप rahuljigaur@gmail.com पर भेज सकते हैं।

Ep 26 हरिवंश राय बच्चन - आत्मकथा अंश / Excerpts from the autobiography of Harivansh Rai Bachchan 30.11.2021

हरिवंश राय बच्चन जी की बेहद पठनीय आत्मकथा, जो कि चार खंडों में फैली है, में से दो रोचक क़िस्से सुनिये 😊 अभी २७ नवंबर को उनकी जयंती थी - उन्हें सादर नमन

Ep 25 दीपावली- दो कविताएँ / Diwali - Two poems 05.11.2021

दीपावली की शुभकामनाएँ दो कविताओं के साथ - हरिवंश राय बच्चन जी की “है अँधेरी रात, पर दीवा जलाना कब मना है” और गोपाल दास नीरज जी की “धरा को उठाओ, गगन को झुकाओ”

Ep 24 ब्रेस ब्रेस ब्रेसूटी याने जो दल गया वो मल गया: लपूझन्ना- भाग ८ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 8 (Ashok Pandey) 22.10.2021

ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो ल...

Ep 23 कविता “मोचीराम” - सुदामा पाण्डेय धूमिल / Poem “Mochiram” - Sudama Pandey Dhoomil 03.10.2021

धूमिल विद्रोह के कवि हैं जिन्होंने सत्ता के शोषण और समाज की विसंगतियों को अपनी कविताओं में ढाला। “मोचीराम” जूते बनाने वाले एक कारीगर से वार्तालाप के ज़रिये यही कुछ कहती एक कविता है।

Ep 22 सर्वेश्वरदयाल सक्सेना: “प्रार्थना” एवं अन्य कविताएँ / "Prarthana" and other poems of Sarvershwar Dayal Saxena 15.09.2021

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की जयंती के अवसर पर उनको याद करते हुए उनकी कुछ कविताओं का पाठ आप के लिये। (इस पॉडकास्ट में तीन अलग अलग खंड हैं जो कि अलग अलग समय पर रिकॉर्ड हुए हैं)

Ep 21 बच्चों की चड्डी और होशियार सुतरा: लपूझन्ना- भाग ७ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 7 (Ashok Pandey) 10.09.2021

ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो ल...

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