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कविताएं (Poetry Hindi -Urdu)
I like poetry. I have made this podcast to recite some of my favourite poets poem and some of my own.
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Episodes
चांदनी कुछ चित्र कुछ प्रश्न 25.05.2026 3:03
गिरिजा कुमार माथुर की कविता चांदनी कुछ चित्र कुछ प्रश्न
प्रार्थना और चीख़ों के बीच 25.05.2026 1:22
अशोक वाजपेयी
चुपचाप 25.05.2026 1:58
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
यूं मुझसे रुठकर जाने का शुक्रिया 25.05.2026 0:59
कुंअर बेचैन की ग़ज़ल यूं मुझसे रुठकर जाने का शुक्रिया
किसी हिचकी से आती है 25.05.2026 1:12
कुंअर बेचैन की ग़ज़ल
कितनी लघु अंजली हमारी 25.05.2026 1:50
अज्ञेय की कविता कितनी लघु अंजली हमारी
आवारा 2 21.05.2026 1:54
असरारुल हक़ मजाज़ की प्रसिद्ध नज़्म आवारा का दूसरा हिस्सा
आवारा 1 20.05.2026 3:17
असरारुल हक़ मजाज़ की प्रसिद्ध नज़्म आवारा का पहला हिस्सा
तूं मुझे इतने प्यार से मत देख 20.05.2026 0:33
अली सरदार जाफ़री की नज़्म तूं मुझे इतने प्यार से मत देख
मैं मोम की बती हूं 20.05.2026 1:11
लुत्फ़ी की एक ग़ज़ल
अलविदा 20.05.2026 7:54
विजयदेव नारायण साही की कविता अलविदा का पाठ
कबीर (४) 05.08.2025 1:30
ठाकुर प्रसाद सिंह जी के खण्ड काव्य कबीर का चौथा भाग
कबीर (३) 05.08.2025 2:01
ठाकुर प्रसाद सिंह जी के खण्ड काव्य कबीर का तीसरा भाग
कबीर ( २) 01.08.2025 1:27
ठाकुर प्रसाद सिंह के खण्ड काव्य कबीर का दूसरा भाग
कबीर (१) 01.08.2025 0:22
ठाकुर प्रसाद सिंह के खण्ड काव्य कबीर का पहला भाग
पर्वत की घाटी का जल चंचल (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:28
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
मेरे घर के पीछे चन्दन है (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:24
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
चिड़ियों ने पर्वत पर घोंसला बनाया (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:44
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
आछी के बन (वंशी और मांदल ) 27.07.2025 0:27
वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
नदिया का घना घना कूल है (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:44
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
पात झरे फिर फिर होंगे हरे (वंशी और मांदल) 27.07.2025 0:49
वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
चलो चलें चम्पागढ़ सपनों के देश(वंशी और मांदल) 27.07.2025 0:37
वंशी और मांदल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
कबसे तुम गा रहे, कबसे तुम गा रहे (वंशी और मादल) 27.07.2025 1:00
वंशी और मादल ठाकुर प्रसाद सिंह के संथाली ताप में ताए छोटे छोटे गीतों का अमूल्य संग्रह है
अब मत सोचो (वंशी और मादल) 27.07.2025 0:39
वंशी और मादल, ठाकुर प्रसाद सिंह की संथाली गीतों के ताप में ताए छोटे छोटे अमूल्य गीतों का संग्रह है
खुली हथेली और तुलसी गंध 25.07.2025 5:43
ठाकुर प्रसाद सिंह की कविता जो काशी के प्रति उनके गहने अनुराग का प्रतीक होते के साथ-साथ पढ़ने वाले को काशी का भ्रमण करा देती है
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