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कविताएं (Poetry Hindi -Urdu)
I like poetry. I have made this podcast to recite some of my favourite poets poem and some of my own.
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Episodes
वो जा रहा है कोई शबे गम गुजार के 06.09.2021 0:57
फै़ज़ की नज़्म का हिस्सा।परिचय की कोई जरुरत नहीं।
कनुप्रिया (पहला गीत) 04.09.2021 2:13
राधा कृष्ण के संबंधों के अर्थ ढूंढ़ती हुयी धर्मवीर भारती की कालजयी रचना।क्या है कनुप्रिया होना ।
तुम मेरे पास होते हो गोया। जब कोई दूसरा नहीं होता।। 04.09.2021 1:09
"मोमिन" उर्दू के मशहूर शायर जिनके इस शे'र पर गा़लिब ने कहा कि मेरा सारा दीवान ले लो और मुझे यह शे'र दे दो। राहत-फ़जा़ - राहत देने वाला , जि़क्रे -अग़्यार - प्रतिद्वन्दी की चर्चा (talk of competitor) ,हर्फ़ -शब्द , नासेह -उपदेशक( preacher), अर्ज़ -प्रार्थना (request) मुज़तरिब - व्याकुल
कोई गीत गाता हूं मैं (नीरव) 03.09.2021 2:39
कुछ प्रश्न एक दूसरे से याद करने और याद आने के बारे में।
हयात मौत से टकरा गई तो क्या होगा 01.09.2021 1:34
एहसान दानिश की गज़ल़ । न रहनुमाओं की मजलिस में ले के चलो मुझको।मैं बेअदब हूं, हंसी आ गई तो क्या होगा। मुन्तिज़र हैं -प्रतीक्षारत हैं (waiting),शबाबे-लाला-ओ-गुल-फूलों का यौवन यहां तात्पर्य बसंत ऋतु से है। खि़जां-सिरिश्त -पतझड़ सरीखी (like autumn)
यहां सांस ले संभल के 31.08.2021 1:43
एहसान दानिश की खूबसूरत गज़ल़ ।इसकी एक पंक्ति काबिले गौर है "तेरी बेझिझक हंसी से न हो किसी का दिल मैला"
गा़लिब श्रृंखला 2 (तुमने क्या मजा पाया ) 29.08.2021 1:32
गा़लिब का ग़ज़लों और शेरों को कहने का अपना अंदाज़ है।गा़लिब को पढ़ना जीवन को पढ़ने जैसा है। आसानी के लिए कुछ शब्दों के अर्थ दिए गएं हैं। जी़स्त-जिंदगी ,जीवन (life),दर्दे-लादवा -लाइलाज मर्ज़ (incurable disease)
1.क्या क्या समझ बैठे थे हम। 2. रात भी नींद भी कहानी भी 28.08.2021 2:17
फि़राक़ गोरखपुरी के जन्म दिवस पर उनकी गज़लों के हिस्से।
द्रौपदी के भीष्म से प्रश्न भाग1( नीरव) 28.08.2021 5:08
द्रौपदी के भीष्म से प्रश्न एक प्रयास उस सभा में जहां द्रौपदी के स्त्रीत्व, अस्मिता को अपमानित किया गया उसी सभा में धर्म की रक्षा करने का दंभ भरने वाले भीष्म के मौन से है।क्यों भीष्म का मौन इतना महत्वपूर्ण और इतना क्रोध करने योग्य है।
उस पागल के बारे में 26.08.2021 2:20
प्रेम वार "बटनी"
दर्द ने बढ़कर थाम लिया 25.08.2021 1:57
प्रगतिशील शायर गुलाम रब्बानी ताबां की एक गज़ल़।
मैं अपनी पीर सुनाता 25.08.2021 0:32
ये ईट्स की कविता की चार लाईनें हरिवंशराय बच्चन जी द्वारा अनुवादित उनकी पुस्तक बसेरे से दूर से।बस चार पंक्ति यां परंतु प्रभावशाली।
गा़लिब श्रृंखला 1 24.08.2021 1:25
गा़लिब के बारे में कोई क्या कहे। गा़लिब के बाद उर्दू शायरी की दिशा ही बदल गई।गा़लिब विद्रोही शायर थे जब उर्दू शायरी हुस्न -इश्क़ ,जाम -मीना ऐसे ही विषयों में भटक रही थी गा़लिब ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों से जो लिखा वो बेमिसाल है।गा़लिब को मोहमल (अर्थहीन)कहने वाला शायर कहा गया।
सितारों तुम तो सो जाओं 22.08.2021 1:48
क़तील शिफा़ई उर्दू के मशहूर शायर ।उनकी एक ग़ज़ल।
इन कदमों की आहट जान लेते हैं। 22.08.2021 1:47
फि़राक़ गोरखपुरी उर्दू के मशहूर शायर जिनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। उनकी बहुत प्रसिद्ध नज्म का एक छोटा सा हिस्सा।
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