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Jansatta संपादकीय Podcast - Editorial
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Episodes
आपातकाल के सहारे- Emergency The Only Solution For Srilanka Crisis (14 July 2022) 14.07.2022 3:44
चारों तरफ पसरी अराजकता से निपटने का रास्ता फिलहाल आपातकाल की घोषणा को माना गया है। हालांकि यह एक नाजुक दौर था जब जनता को यह विश्वास दिलाया जाता कि देश के सामने जो समस्या खड़ी हो गई है, वहां का सत्ता-तंत्र उससे निकलने का रास्ता निकालेगा। मगर देश के पश्चिमी प्रांत में कर्फ्यू लगा दिया गया है और इसके साथ ही प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने उपद्रव कर रहे लोगों को गिरफ्तार करने और उनके वाहन जब्त करने क...
टोपी पहनने के झमेले – The Trend of Caps (Duniya Mere Aage, 13 July 2022) 13.07.2022 4:44
जैसी आदमी की क्षमता वैसी टोपी। बस समय और परिस्थिति के अनुसार टोपी पहनाने की कला और तकनीक आनी चाहिए। टोपी पहनाते समय न तो इंसानियत देखी जाती है और न मानव धर्म, न राष्ट्र धर्म केवल स्व-लाभ ही अपना लक्ष्य होता है। टोपी पहनाना एक कला है, तो टोपी पहनना एक असावधानी।
जुर्म और सजा- Crime Punishment and Intervention of Supreme Court (13 July 2022) 13.07.2022 3:29
हमारे देश में बहुत सारे ऐसे लोग जेलों में बंद हैं, जिन पर जमानती जुर्म की धाराएं लगी हैं, पर मुकदमा दायर करने वाली इकाइयों के एतराज की वजह से उन्हें जमानत नहीं मिल पाती। बहुत सारे विधि विशेषज्ञ और मानवाधिकार कार्यकर्ता लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि ऐसे लोगों को तुरंत जमानत दे दी जानी चाहिए, जिनसे न तो समाज को कोई खतरा है, न उनके जेल से बाहर निकलने के बाद फिर से कोई अपराध करने की आशंका, न देश छो...
व्यक्तित्व में छिपा आभामंडल - Hidden Aura in Personality (Duniya Mere Aage, 12 July 2022) 12.07.2022 4:56
यह सभी के साथ होता है कि कोई व्यक्ति तो बहुत अच्छा लगता है, तो कोई बिलकुल नहीं सुहाता। किसी के पास बैठना बहुत भला लगता है, तो किसी का चेहरा वितृष्णा जगा देता है। कभी किसी की आवाज भर सुन लो, तो मन को शांति मिलती है, पर कोई याद आ जाए, तो मन में बुरे विचार आने लगते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है? दरअसल, इसका सीधा संबंध सामने वाले की मानसिकता से होता है।
आतंक की जड़ें- Jammu Kashmir And The Increasing Terrorism (12 July 2022) 12.07.2022 3:38
कई बार दावा किया गया कि घाटी में आतंकवाद अब समाप्ति की ओर है। मगर खुद गृह मंत्रालय का ताजा आंकड़ा है कि जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन आदि संगठनों ने पिछले चार सालों में जम्मू-कश्मीर में सात सौ युवाओं को भर्ती किया।
जब जब जो जो होना है - Moving with the Flow (Duniya Mere Aage) 11.07.2022 4:56
सीखने की प्रक्रिया के दो आयाम हैं। एक कहता है कि कड़ी मेहनत करो और कुछ पा लो, दूसरा कहता है कि सायास कुछ मत करो, जो जैसा हो रहा है उसे वैसा होने दो। सायास कुछ न करने के गणित को समझने के लिए पहले सायास करना जरूरी है। यह ठीक वैसा ही है जैसे निर्विकार को समझने के लिए पहले किसी आकार पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है।
फूटता गुस्सा- Srilanka Crisis And The Agitated Natives (11 July 2022) 11.07.2022 3:21
श्रीलंका में जनता का गुस्सा अचानक नहीं फूटा। आर्थिक संकट से जूझते देश में जिस तरह की राजनीतिक अस्थिरता भी बनी हुई है, उसमें आज नहीं तो कल यह होना ही था। गुस्साई भीड़ जिस तरह से राष्ट्रपति निवास में घुस गई, उससे साफ है कि जनता अब उन नेताओं को बर्दाश्त नहीं करने वाली जिन पर से उसका भरोसा खत्म हो चुका है।
भुखमरी का दायरा- Increasing Famine and Starvation Worldwide (08 July 2022) 08.07.2022 3:49
इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी कि जिस दौर में दुनिया विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में विकास और प्रयोग की नई ऊंचाइयां छू रही है, उसी में समूचे विश्व में भुखमरी के हालात का सामना करने वाले लोगों की तादाद में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
कड़ियों में गुंथे रिश्ते – Westernization in Relationships (Duniya Mere Aage, 07 July 2022) 07.07.2022 5:16
जब हम सामाजिक-पारिवारिक चिंतन करते हैं तो मुख्य रूप से स्त्री-पुरुष संबंध हमारे सामने आ खड़ा होता है। इसे लेकर बड़े संवाद और बहसें होती हैं कि उनके संबंध कैसे हों। कोई पुरुष में अहंकार और समाज पर उसकी सत्ता दर्शाता है तो दूसरी तरफ स्त्री संसार है, जहां त्याग, लज्जा, शील आदि का भान कराया जाता है। स्त्री-पुरुष का संबंध जरूरी, विचित्र और प्रकृति प्रदत्त है।
संकट से सबक- Srilanka Financial and National Crisis (07 July 2022) 07.07.2022 3:29
सरकार की गलत नीतियां, आर्थिक कुप्रबंधन और सत्ता में परिवारवाद की बीमारी एक खुशहाल देश को कैसे कंगाल बना देती है, इसे आज श्रीलंका में साफ तौर पर देखा जा सकता है। इस मुल्क को लेकर आए दिन जैसी खबरें आ रही हैं, वे भयावह तस्वीर पेश करती हैं। महंगाई और बेरोजगारी की बात दूर, लोग अब दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं। हालत यह है कि लोगों को रसोई गैस तक नहीं मिल रही।
टूटते रिश्ते, छूटते रिश्तेदार – Modernization in Relationships (Duniya Mere Aage, 06 July 2022) 06.07.2022 4:46
पहले ऐसा रिवाज था कि शादी के बाद नजदीकी रिश्तेदार नए जोड़े को निमंत्रण देकर घर बुलाते थे। कुछ हद तक अब भी यह रिवाज बना हुआ है। हालांकि अब बहुत सारे रीति-रिवाज दरकिनार होते जा रहे हैं। उच्च वर्ग में तो यह प्रथा कब की खत्म हो चुकी है। मैं बड़ा और तू छोटा की खाई बीच में आ गई है।
वसूली पर लगाम- Hotels Can't Add Service Tax Automatically (6 July 2022) 06.07.2022 3:31
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि कोई भी होटल या रेस्तरां खान-पान के बिल पर सेवा शुल्क नहीं वसूलेगा। अगर वह ऐसा करता है तो यह गैरकानूनी होगा और ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
जब बुराई करें किसी की – Misunderstanding leads to Evil Thoughts (05 July 2022) 05.07.2022 4:35
आमतौर पर लोग बुराई उसी की करते पाए जाते हैं, जो व्यक्ति उनके अनुरूप नहीं होता या जिसने उनको किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचाया होता है। ऐसे व्यक्ति की आप बेशक बुराई ही करेंगे, लेकिन हकीकत यह भी है कि ज्यादातर मामलों में किसी की बुराई करने से कुछ भी हासिल नहीं होता। हर व्यक्ति किसी के लिए अपनी राय बनाने से पहले यह सोचता है कि उक्त व्यक्ति, जिसे बुरा बताया गया है, उसका हमारे साथ कैसा व्यवहार है।
सबक का वक्त- Political Parties In India And Their Downfall (5 July 2022) 05.07.2022 3:32
हैदराबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई राजनीतिक दलों के अस्तित्व संकट को लेकर जो कहा, वह उचित ही है। यह एक ऐसा प्रासंगिक और गंभीर मुद्दा है जिस पर सभी राजनीतिक दलों को गहराई से मंथन करने की जरूरत है।
भाव की धारा – Stream of Emotions (Duniya Mere Aage, 04 July, 2022) 04.07.2022 4:54
‘नेकी कर दरिया में डालने’ का मुहावरा जिंदगी का आईना हो सकता है। बस इसे किसी से कह देने भर से कुछ नहीं समझ में आ पाता है और न ही सुन लेने से! वैसे ही जैसे ‘जाके पैर न फटे बिवाई, वह क्या जाने पीर पराई’। खुद को ठोकर लगने पर ही दर्द होता है। लोग कहते रहते हैं कि मैंने फलां के लिए क्या-क्या नहीं किया, लेकिन क्या सिला मिला! दरअसल, हम जो कुछ इस दुनिया में करते हैं, वह सब हमें यहीं इसी जन्म में भुगतना पड़त...
लापरवाह तंत्र- Carelessness of Officials Responsible For Recent Udaipur Murder and Amravati Murder (4 July 2022) 04.07.2022 3:19
उदयपुर में एक दर्जी की हत्या का मामला अभी शांत भी नहीं पड़ा था कि महाराष्ट्र से भी ऐसी ही दहला देने वाली घटना सामने आ गई। हालांकि यह घटना पहले की है, पर खुलासा अब हुआ। पिछले महीने की इक्कीस तारीख को अमरावती में एक दवा विक्रेता की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी।
गुलमोहर गर तुम्हारा नाम होता - The Beauty Of Gulmohar (Duniya Mere Aage, 01 July 2022) 01.07.2022 4:46
चटकीले लाल-नारंगी रंग के फूल ऐसे लगते, मानो सूरज से इसे रंग मिला और चांदनी से यह अनोखी शीतलता, जो इसे देखने वालों की आंखों से उनके जिगर तक को तर कर देती है।
रसोई पर मार- Hike in Prices of Food Items And Daily Use Products (1 July, 2022) 01.07.2022 3:28
किसी न किसी रूप में खाने-पीने का सामान और रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली चीजें जिस तरह से महंगी होती जा रही हैं, उसका सीधा असर आम आदमी पर ही पड़ रहा है। अभी तक तो महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दाम ही बना हुआ था।
सुनिए jansatta.com के संपादक विजय झा का आलेख। 30.06.2022 3:07
उद्धव ऐसा करने में कामयाब नहीं रहे। अब उनके पास विधायक और सत्ता भी नहीं है। उनके पास समय भी कम है। चुनाव में ढाई साल ही बचे हैं। ऐसे में कैडर बचाना-बढ़ाना भी आसान नहीं होगा।
झुकने के संदर्भ – Pros of Politeness (Duniya Mere Aage, 30 June 2022) 30.06.2022 4:51
रोजमर्रा की जिंदगी में व्यक्ति को अलग-अलग वजहों से कई बार झुकना पड़ता है। जूते के फीते बांधने से लेकर जमीन पर पड़ी कोई वस्तु उठाने तक। भोजन करते समय रोटी का कौर मुंह में रखने से लेकर भोजन देने वाले परमात्मा के सामने कृतज्ञता प्रकट करने और अपने मन की बात उस तक पहुंचाने के लिए कई-कई बार झुकना पड़ता है। इस लिहाज से देखें तो झुकना बहुत अच्छी बात है। यह विनम्रता की पहचान है।
जीएसटी का बोझ- GST New Rules And Its Effect on Common Man (30 June 2022) 30.06.2022 3:41
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर और दायरा बढ़ाते हुए जीएसटी परिषद ने खानपान और रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली कई चीजों को कर दायरे में लाकर आम लोगों को बड़ा झटका दे दिया। जबकि कैसीनो, घुड़दौड़, आनलाइन गेमिंग और लाटरी पर अट्ठाईस फीसद कर लगाने के फैसले को यह कहते हुए टाल दिया कि संबंधित पक्षों के साथ अभी और विचार-विमर्श करने की जरूरत है।
विचारों की उपज हमारा अस्तित्व – Existence is the Product of Thoughts (Duniya Mere Aage, 29 June 2022) 29.06.2022 4:47
लेखक अर्ल नाइटिंगेल ने कहा है, ‘हम वही बनते हैं जो हम सोचते हैं।’ यानी हम अपने विचारों की उपज हैं। जैसा सोचेंगे, वैसा ही बन जाएंगे।
मन माने की पीर - Getting Rid of Biases and Prejudice (Duniya Mere Aage - 17 June 2022) 17.06.2022 4:00
पूर्वाग्रहों से मुक्त होने के लिए भी मन से लड़ना पड़ता है।
तरंगों की त्वरा - Internet Speed Problems in India (17 June 2022) 17.06.2022 2:49
पांचवी पीढ़ी की इंटरनेट सेवा शुरू होने से सूचना प्रौद्योगिकी और मनोरंजन के क्षेत्र में काफी तेजी आएगी।
गुलशन का कारोबार - The Business of Corruption (Duniya Mere Aage - 16 June 2022) 16.06.2022 4:18
नई सदी आ गई है, लोगों की समझ बदल गई है और बात का लहजा बदल गया है।
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