Sutradhar
इतिहास पुराण की कथाएं Itihas Puran Ki Kathaye
नमस्कार श्रोताओं ! सूत्रधार आपके लिए लेकर आया है, इतिहास पुराण पोडक्स्ट। इस पॉडकास्ट के माध्यम से हम आप सभी को अनेकों पौराणिक कथाओं से जोड़ने वाले है। ये कथाएं महाभारत, शिव पुराण, रामायण जैसे अनेकों ग्रंथों से ली गयी हैं। हमारे इस पॉडकास्ट को आप सुन पाएंगे हर बुधवार वो भी अपने पसंदीदा ऑडियो प्लेटफार्म पर ! इसी के साथ आप सूत्रधार द्वारा बनाये गए और पोडकास्टस भी सुन सकते हैं। जैसे की नल-दमयंती प्रेम कथा, मिनी टेल्स पॉडकास्ट, श्री राम कथा और वेद व्यास की महाभारत। मिलते हैं बुधवार में हमारे पहले एपिसोड के साथ। Millions of listeners seek out Bingepods (Ideabrew Studios Network content) every day. Ge...
Where to listen?
Podcasts in the app Replaio Radio Coming soonPodcasts are coming to the app soon. Install now and be the first to see a whole new take on podcasts
Episodes
कार्तिकेय का जन्म 03.08.2022 10:51
सतयुग के युग में, तारक (तारक) नामक एक असुर का वास था, जिसने 100 वर्षों तक अत्यधिक तप किया था। हर 100 साल में वह अपनी तपस्या को और कठिन बना देता था। पहले 100 वर्षों तक वह पानी पर जीवित रहा और बाद में, वह केवल हवा में ही जीवित रहा। अत्यधिक तपस्या से प्रभावित होकर, भगवान ब्रह्मा तारकासुर (तारकासुर) को आशीर्वाद देने के लिए उनके सामने प्रकट हुए। "मैं तुम्हारी भक्ति और तप से प्रसन्न हूँ, तुम क्या वरदान...
महाराज परीक्षित और कलियुग 27.07.2022 11:27
पांडवों के महाप्रयाण के बाद अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित हस्तिनापुर के महाराज बने। स्वयं पाण्डव भाइयों के द्वारा शिक्षा प्राप्त परीक्षित सर्वगुण संपन्न महाप्रतापी राजा थे। परीक्षित गुरु कृपाचार्य और युयुत्सु के संरक्षण में भली भांति राजधर्म का पालन करते थे। परीक्षित का विवाह राजा उत्तर की पुत्री इरावती से हुआ और उनको जनमेजय, भीमसेन, श्रुतसेन और उग्रसेन नाम के चार पुत्र हुए। कुलगु...
उर्वशी और पुरुरवा की प्रेमकथा 20.07.2022 12:41
इला व बुध से जो पुत्र हुआ उनका नाम पुरुरवा था। पुरुरवा ने अपने पितामह चंद्र के नाम पर चंद्र वंश की स्थापना की और इला के बाद वह राजा बने। पुरुरवा में देव-सुलभ गुणों का समाहार था और वह प्रचंड बलशाली और प्रतापी राजा थे। पुरुरवा ने एक सौ अश्वमेध यज्ञ करवाकर स्वयं को देवों के समान यशोबल धारी बना दिया था। तीनों लोकों में पुरुरवा की वीरता की गाथाएं कही जाने लगीं। इससे प्रभावित हो कर देव-राज इंद्र ने भी...
ईला और बुध 13.07.2022 10:41
वैवस्वत मनु और महारानी श्रद्धा दीर्घ काल तक निःसंतान रहे। पुत्रहीनता के कष्ट को कम करने हेतु महर्षि वशिष्ठ के परामर्श अनुसार, मनु और श्रद्धा ने भगवान मित्र और वरुण की उपासना करने का निर्णय लिया। वशिष्ठ ऋषि के संरक्षण में ही मनु ने पुत्रेष्टि यज्ञ का आयोजन करवाया। भगवान मित्र-वरुण से मनु ने अपने वंश को आगे चलाने हेतु एक पुत्र की कामना की थी, परंतु विधि का विधान कुछ और ही था। Learn more about your a...
सरस्वती नदी के नन्दा नाम की कथा 06.07.2022 11:27
प्राचीन काल में पृथ्वी लोक में प्रभंजन नामक एक प्रसिद्ध महाबली राजा हुआ करते थे। एक बार वो जंगल में शिकार के उद्देश्य से गए हुए थे। जंगल में घूमते हुए अचानक उनकी दृष्टि झाड़ी के पीछे एक हिरणी पर पड़ी। हिरणी को देखते ही राजा ने उस पर बाण चला दिया। बाण के प्रहार से आहत हुई हिरणी ने जब हाथ में धनुष-बाण लिए राजा प्रभंजन को देखा तो बोली, “अरे मूढ़! यह तूने क्या किया? मैं यहाँ सर नीचे किए हुए, निर्भयता से...
भगवान जगन्नाथ रथयात्रा 30.06.2022 13:40
विश्व में कई धर्म, पन्थ तथा सम्प्रदायों के मानने वाले वास करते हैं। इन सबके द्वारा अपनी अपनी परम्पराएँ , पूजा पद्धति और तरह तरह के अनोखे त्योहार मनाए जाते हैं। इसी तर्ज पर भारत में वैष्णव धर्म के मानने वालों के द्वारा भगवान श्रीहरि विष्णु और उनके दशावतारों की उपासना किए जाने की विधि प्रचलित है। दशावतारों में भगवान श्रीकृष्ण का आधुनिक भारतीय समाज एवं हिन्दू दर्शन पर गहरा प्रभाव दिखाई पड़ता है। जिसक...
श्रीजगन्नाथ धाम की प्राण-प्रतिष्ठा - Part 4 29.06.2022 16:45
विग्रहों और मंदिर का निर्माण संपन्न हो चुका था। अब केवल उनकी प्रतिष्ठा करनी बाकी थी। लेकिन इसमें भी एक अड़चन थी, जिस भगवान जगन्नाथ की मूर्तियाँ बनाना भी किसी नश्वर के लिए असंभब था, उनकी प्रतिष्ठा भला कोई साधारण ब्राह्मण कैसे कर सकता था। इसके लिए तो शायद देवर्षि नारद अथवा देवगुरु बृहस्पति जैसे दिव्य ऋषियों की आवश्यकता थी। राजा इन्द्रद्युम्न अब तपस्या में बैठ गए। थोड़ी देर बाद किसी के बुलाने पर राजा...
भगवान जगन्नाथ का आगमन (Part - 3) 22.06.2022 12:45
नील कन्दर से वापस लौटे अब कई दिन बीत चुके थे। सबर नगरी में विश्वावसू और अवंति में राजा इन्द्रद्युम्न अपने आराध्य के पुनः दर्शन पाने हेतु व्याकुल हो रहे थे। एक रात सोते समय इन्द्रद्युम्न के सपने में भगवान नीलमाधव आते हैं। पहली बार अपने भगवान की नीलवर्णी प्रतिमा तथा अलौकिक तेज को देखकर राजा भी भक्ति भाव से सराबोर हो उठते हैं। नीलमाधव अब राजा को सही समय आने की सूचना देते हैं और कहते हैं कि, " हे मेरे...
श्रीकृष्ण का नीलमाधव रूप (Part 2) 15.06.2022 24:37
द्वापर युग का समापन होकर अब कलयुग की शुरुआत हुए कुछ वर्ष बीत चुके थे। निषाद राज विश्वावसु का जन्म सबर कुल में हुआ था। वह उत्कल राज्य में एक आदिवासी कबीले के सरदार हुआ करते थे। एक दिन वन में शिकार करने के लिए निकले विश्वावसु देर रात तक भी वापस घर नहीं लौटे, किसी अनहोनी की आशंका से उनकी पत्नी, बेटी और कबीले के बाकी साथी कांपने लगे। कई दिनों तक विश्वावसु की खोज में आदिवासी सैनिकों ने दिन रात एक कर दि...
भगवान जगन्नाथ : श्रीकृष्ण का वैकुंठ गमन (Part 1) 08.06.2022 6:46
द्वापर युग का अंतिम समय आ चुका था, महाभारत युद्ध को हुए छत्तीस वर्ष बीत चुके थे। गांधारी के श्राप के अनुसार सात्यकि और कृतवर्मा की लड़ाई से शुरू हुआ कलह अब पुरे यादव वंश को समाप्त कर चुका था। शेष बचे बलराम के स्वधाम लौटने के बाद अब पूरी तरह से अकेले हो चुके थे भगवान श्रीकृष्ण। अब अपना बाकी का जीवन वह वन में ही बिताने लगे. एक दिन वनवासी जारा शिकार की तलाश में जंगल में घूम रहा था। जारा को झाड़ियों क...
King Mandhata | राजा मांधाता 01.06.2022 10:20
मांधाता, जिसे यौवनश्विन के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है युवनाश्व का पुत्र, एक महान राजा था जिसकी महाभारत में प्रशंसा की गई है। मांधाता के जन्म की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। सौर वंश में युवनाश्व नाम का एक राजा था। उनका राज्य समृद्ध था, सेना मजबूत थी और यहां तक कि उनकी प्रजा भी समर्पित थी। सफलता के बावजूद, राजा युवनाश्व असंतुष्ट थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में सैकड़ों अश्वमेध यज्ञ कि...
Moraya Gosavi 26.05.2022 8:13
मोरया गोसावी महाराज चौदहवीं शताब्दी के गाणपत्य संप्रदाय के संत थे। मोरगांव में जन्म लेने वाले गोसावी जी गणपति की प्रेरणा से पुणे के पास चिंचवड़ में आ बसे। चिंचवड़ में उन्होंने भव्य गणेश मन्दिर का निर्माण किया और यहीं उन्होंने समाधि ली। सूत्रधार की यह प्रस्तुति गणेशभक्त मोरया गोसावी को समर्पित है। कर्नाटक राज्य में, बीदर नाम्क जिले में शाली नाम का एक गांव है। उसी गाँव में वामनभट्ट शालिग्राम और उन...
Trailer 25.05.2022 1:32
सूत्रधार आपके लिए लेकर आया है, इतिहास पुराण की कथाएँ । इस पॉडकास्ट के माध्यम से हम आप सभी को अनेकों पौराणिक कथाओं से जोड़ने वाले है। ये कथाएं महाभारत, शिव पुराण, रामायण जैसे अनेकों ग्रंथों से ली गयी हैं। हमारे इस पॉडकास्ट को आप सुन पाएंगे हर बुधवार वो भी अपने पसंदीदा ऑडियो प्लेटफार्म पर। Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices
Similar podcasts
Replaio is not a podcast publisher; show names, artwork and audio belong to their authors and are distributed through public RSS feeds.