Lokesh Gulyani

इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry)

Society EN ↓ 60 episodes

Spoken word poetry in Hindi by Lokesh Gulyani

Author

Lokesh Gulyani

Category

Society

Podcast website

www.spreaker.com

Latest episode

May 3, 2026

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Episodes

Episode 60 - PSPSPSPS 03.05.2026

रोज़ सुबह नहाते हुए मैं अपने बढे हुए पेट की ढलान से नीचे देखने की कोशिश करता हूँ। वहीं देखकर एक मर्द पता लगा सकता है कि उसका पेट कितना बढ़ गया है। पेट बढ़ा है या नहीं, ये पेट तय नहीं करता है।

Episode 59 - विटामिन डी से दोस्ती 03.05.2026

ये बात मुझे सोचने पर मजबूर करती है कि D3 और B12 की कमी से तो देश की लगभग 80% जनता जूझ रही है तो फिर तो हम पीड़ित लोगों का स्वभाव और दिल का हाल तो मिलना चाहिए था ना!

Episode 58 - ज़हनी पचड़ा 13.04.2026

सच कह रहा हूं मैं, अब पाप करने के बारे में भी सोचने लगा हूं, आख़िर कहीं से तो किक और एड्रीनलीन रश मिले। मुझे बचाने की मत सोचो, अपनी फ़िक्र करो।

Episode 57 - तीसरी घंटी 22.03.2026

मुझे तो याद नहीं पड़ता कोई ऐसा क्षण जिसे मैं कह सकूं कि मैं सही समय पर सही जगह खड़ा था। मैं हमेशा ग़लत समय पर एंट्री - एग्जिट लेता रहा।

Episode 56 - कसप 11.02.2026

वो अभी भी राह देख रहा है उसकी कि वो कभी लौट कर आए और उसे कहे कि ' अब तुम भी आगे बढ़ सकते हो, तुम मुझसे मुक्त हुए ' पर अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं और ये रिश्ता कसप के डीडी की तरह मारगांठ बनकर उसकी कुंडलिनी में उतर गया और उसके अगले जन्म का प्रारब्ध भी बन गया।

Episode 55 - Nervous Ninetees 03.02.2026

दूर कहीं एक मुसाफ़िर इसी ओर आता दिख रहा है। मैं अंगीठी पर कहवा चढ़ा देता हूं। आज कितने दिनों बाद कोई मेरी ड्यौढ़ी चढ़ेगा। बहुत दिन हो गए मुझे किसी हाड़-मांस के पुतले से बात किए हुए।

Episode 54 - Self-Harm 24.01.2026

पहले लिखना बहुत स्वाभाविक रूप से चलता था, अब डराने लगा है। अब कागज़ के आगे बैठते ही लगता है कि क्या लिखूं जो ये कागज़ अमर हो जाए और यही सोचते-सोचते वो कागज़ एक सस्ती मौत मर जाता है।

Episode 53 - दबाओं ना 15.12.2025

दब कर जीने में फ़ायदा है, ऐसा मुझे सिखाया गया। मेरी सीखने की क्षमता अच्छी थी, मैं अच्छे से सीख गया। मैने औरों को सिखाया वे भी सीख गए। हम सब सीखे-सिखाए लोग हैं।

Episode 52 - मलाल 04.12.2025

कभी-कभी लगता है कि मेरे साथ ज़िंदगी ने ठीक ही बर्ताव किया। अगर मुझे इससे कुछ भी ज़्यादा हासिल हो गया होता तो शायद मैं इस मुगालते में रह जाता कि मैं भी एक काबिल इंसान हूं।

Episode 51 - Ex-Lover 04.12.2025

एक समय के बाद आदमी का मन शराब की कड़वाहट को ही झेल सकता है, प्रेम के प्रेत को नहीं।

Episode 50 - नाभि 19.11.2025

चमत्कार की उम्मीद करना उसके घटने की संभावना को क्षीण ही करता है। So, let the universe do the talking while you gaze at the stars.

Episode 49 - कालपुरुष 02.11.2025

पता नहीं कब और कैसे मैं कालपुरुष के सामने आत्मसमर्पण करता चला गया। मुझे याद नहीं पड़ता कि कभी कालपुरुष ने मुझे डराया हो पर किसी पुरुष ने तो डराया ही होगा। बेड़ा गर्क हो इन यूट्यूब चैनल वालों का।

Episode 48 - मन लुच्चा 22.10.2025

पीने के बाद भी मैं सही सलामत घर लौट आता हूं। इसी से पता चल जाता है कि मैं सही हूं, और डिमेंशिया अभी बहुत दूर की कौड़ी है। और फिर मैने इतनी हॉलीवुड फिल्म्स भी नहीं देखी कि सीधे कैरेक्टर में उतर जाऊं।

Episode 47 - The Anti Social 14.10.2025

कई बार बहुत छोटा लगता है, जब मैं अपना सिर उठा कर आकाश की ओर ताकता हूं। लगता है इतनी बड़ी कायनात में मैं कहां खड़ा हूं? इस बात की कोई महत्ता भी है?

Episode 46 - तुम्हारी खुशी के लिए 25.09.2025

तुम इठला कर मेरी ओर बढ़ती हो। तुम अपनी तारीफ़ सुनना चाहती हो। मैं मुंह फेर लेना चाहता हूं। तुम संगीत धीमा करके मेरे क़रीब आती जा रही हो। मैं पशोपेश में हूं कि क्या करूं कि तुम मेरे क़रीब न आओ। मैं तुम्हारे साथ, अकेला रहना चाहता हूं।

Episode 45 - बिल्कुल चुप 05.09.2025

हिम्मत करके मैं एस्केलेटर पर चढ़ कर मेट्रो स्टेशन के बाहर आता हूं, फिर एक ऑटोरिक्शा को हाथ दिखाता हूं और बहुत धीमी आवाज़ में बोलता हूं CP, वो मुझे बिठाता है, मुंह टेढ़ा करके थूकता है। मुझे बुरा लगता है, लगा जैसे ये मेरे हताश व्यक्तित्व पर गिरी थूक थी।

Episode 44 - Rings of Saturn 15.08.2025

कैसे जान लिया जाता है कि किन्हीं दो लोगों के विचार मिलते हैं। वो exact point कौन सा होता है जब हम convince हो जाते हैं की फ़ला व्यक्ति हमारे जैसा सोचता है। और अगर सोचता है तो उस गर्व किया जाना चाहिए या लज्जित होना चाहिए?

Episode 43 - Comfortably Numb 04.08.2025

अकेले में तुम अपनी हथेलियों को मसलते हो। फोन को घूरते हो। सैकड़ों बार व्हाट्सअप चेक करते हो। पर नहीं, एक ब्लू टिक तक नहीं। उसने तुम्हें त्यागा नहीं है, बस भूलना चाहा है।

Episode 42 - Hero 27.07.2025

ये कहना ग़लत होगा कि मुझे मलाल नहीं है। मलाल हैं और बहुत से हैं पर मैं यकीन से नहीं कह सकता कि दो तरफ़ा मलाल कौन-कौन से रहे। जब मैं किसी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा वो, या जब कोई मेरी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा वो।

Episode 41 - Magic 23.07.2025

टाटा मैजिक की पिछली सीट पर बैठा वो शख़्स कुछ बेसाख्ता बुदबुदाए जा रहा था। अब वो प्रार्थना थी या गाली, मैं कह नहीं सकता। उसकी आँखें वहशत से भरी थी। जो दिन बिताया था उसका डर उन आँखों में दिख रहा था, या आने वाले कल का, कहा नहीं जा सकता।

Episode 40 - You फूल 06.07.2025

भटकना तुम्हारी स्वाभाविक प्रवृति थी, the natural you. इसमें तुम्हें आनंद मिलता था, अब ये कह रहे हैं कि भटकने से तुम्हें रोकेंगे। मैं मन ही मन हंस पड़ता हूं।

Episode 39 - बेवकूफ़ DNA 17.06.2025

मैं लाइटर रगड़ कर चिंगारी निकाल लेता हूं और उससे मानवजाति के पूर्वजों को श्रद्धांजलि देता हूं।

Episode 38 - बस दो मिनट 14.05.2025

कहीं-कहीं किसी दीवार, खिड़की या घर को देखकर ऐसा भी लगता है, जैसे मैं यहां पहले भी आया था। इस खिड़की से मैंने भी कभी बाहर को झांका था, घाटी में आवाज़ दी थी। इस दरवाज़े से बाहर निकलते वक्त, आवारा हवा मेरे भी बालों से टकराई थी। इस दीवार पर थक कर कभी मैंने भी पीठ टिकाई थी।

Episode 37 - सबसे गुस्सा 01.05.2025

पूरे घर में वो एक कोना मय्यसर नहीं की मैं सुकून से बैठ कर कुछ पलों के लिए अपनी आँखें बंद कर सकूं। आँखें बंद करने पर चिंताओं की छाया डोलने लगती है, इसलिए मैं आँखें खुली रखता हूं।

Episode 36 - कर लो दुनियां मुट्ठी में 01.05.2025

मुझे ठीक से याद भी नहीं कि मैंने अपने आपको कमज़ोर मानना कब शुरू किया। कब से मैंने ख़ुद के लिए खड़ा होना छोड़ दिया था।

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