Mukesh Kumar Soni

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Education HI ↓ 32 episodi

Motivation for life

Autore

Mukesh Kumar Soni

Categoria

Education

Ultimo episodio

9 set 2023

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Episodi

Gita with AATMYOG(Episode-16) 09.09.2023

The ultimate Goal of Life

GITA with AATMYOG(Episode-14) 09.09.2023

Must listen

Gita with AATMYOG(Episode-15) 09.09.2023

अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः। निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्।।2.36।। न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति।।4.38।। इच्छाद्वेषसमुत्थेन द्वन्द्वमोहेन भारत। सर्वभूतानि संमोहं सर्गे यान्ति परन्तप।।7.27।। अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते। इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः।।10.8।। निर्मानमोहा जितसङ्गदोषा अध्यात्मनित्या विनिवृत...

Gita with AATMYOG(Episode-12) 09.09.2023

Motivation for life

Gita with AATMYOG(Episode-18) 09.09.2023

योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना। श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः।।6.47।।  साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः। प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः।।7.30।। वेदेषु यज्ञेषु तपःसु चैव दानेषु यत्पुण्यफलं प्रदिष्टम्। अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा योगी परं स्थानमुपैति चाद्यम्।।8.28।। मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः।।9.34।। अथवा बहुनैत...

AATMYOG with Gita(Episode-20) 09.09.2023

यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति। तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्।।7.21।।  तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्। भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्।।12.7।। अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वाऽन्येभ्य उपासते। तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः।।13.25 सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसंभवाः। निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम्।।14.5।। उत्क्रामन्तं स्थितं वापि भुञ्जानं वा ग...

AATMYOG with Gita (Episode-21) 09.09.2023

Great Motivation

Bhagavad Geeta chapter-2 chanting 20.07.2022

Every day

AATMYOG with Gita(Episode-26) 30.05.2021

उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।।6.5।। पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते। नहि कल्याणकृत्कश्िचद्दुर्गतिं तात गच्छति।।6.40।। तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम्। सुखसङ्गेन बध्नाति ज्ञानसङ्गेन चानघ।।14.6।। काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विताः। मोहाद्गृहीत्वासद्ग्राहान्प्रवर्तन्तेऽशुचिव्रताः।।16.10।। यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत्। उच्...

Question Answer Session(Episode-1) 15.02.2021

आपकी हर समस्या का समाधान

PATANJAL YOGSUTRA(40-55) 01.11.2020

शौचात्स्वाङ्गजुगुप्सा परैरसंसर्गः।।2.40।। shauchat svanggajugupsa parairasansargah सत्त्वशुद्धिसौमनस्यैकग्र्येन्द्रियजयात्मदर्शनयोग्यत्वानि च।।2.41।। sattvashuddhisaumanasyaikagryendriyajayatmadars hanayojnatvani cha संतोषादनुत्तमः सुखलाभः।।2.42।। santoshad anuttamah sukhalabhah कायेन्द्रियसिद्धिरशुद्धिक्षयात्तपसः।।2.43।। kayendriyasiddhirashuddhikshayat tapasah स्वाध्यायादिष्टदेवतासंप्रयोगः।।2.44...

बाप बेटे की अद्भुत कहानी 16.10.2020

मोटिवेशनल स्टोरी

PATANJAL YOGSUTRA SADHANPAD(27-39) 09.10.2020

तस्य सप्तधा प्रान्तभूमिः प्रज्ञा।।2.27।। tasya saptadhaa prantabhoomih prajna योगाङ्गानुष्ठानादशुद्धिक्षये ज्ञानदीप्तिरा विवेकख्यातेः।।2.28।। yogangganushthanad ashuddhikshaye jnanadiptira vivekakhyate यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टावङ्गानि।।2.29।। yamaniyamasanapranayamapratyaharadharanadhy anasamadhayo-a-shtava anggani अहिंसासत्यास्तेयब्रह्मचर्यापरिग्रहा यमाः।।2.30।। ahinsasaty...

प्रेमयोग -भाग 5 03.10.2020

Hindi kavita

दुविधा 30.09.2020

मेरा कमरा छोटा है, पर दो-दो है इसके दरवाजे एक खुला है दूजा है बंद पर बंद दरवाजा ही है मेरी पसंद  मैं बार-बार इससे होकर गुजरना चाहता हूं  और इसके लिए अपना पूरा जोर लगाता हूं  पर कमबख्त खुलता ही नहीं  और जो खुला है  वह मुझे देख हंसता है और कहता है  देखते क्यों नहीं मुझे अपनी आंखों से? छूते क्यों नहीं मुझे अपनी हाथों से? आखिर क्यों मुझसे होकर नहीं जाते? बात क्या है जो मुझसे छुपाते? अब हे प्रभु मुझे ब...

PATANJAL YOGSUTRA SADHNPAD(14-26) 30.09.2020

ते ह्लादपरितापफलाः पुण्यापुण्यहेतुत्वात्।।2.14।। te hladaparitapafalah punyapunyahetutvat परिणाम तापसंस्कार दुःखैर्गुणवृत्तिविरोधाच्च दुःखमेव सर्वं विवेकिनः।।2.15।। parinamatapasanskaraduhkhairgunnavritti -virodhaccha duhkham eva sarvan vivekinah हेयं दुःखमनागतम्।।2.16।। heyan duhkham anagatam द्रष्टृदृश्ययोः संयोगो हेयहेतुः।।2.17।। drashtridrishyayoh sanyogo heyahetuh प्रकाशक्रियास्थितिशीलं भूतेन...

PATANJAL YOGSUTRA SAMADHIPADA(40-51) 26.09.2020

परमाणुपरममहत्त्वान्तोऽस्य वशीकारः।।1.40।। क्षीणवृत्तेरभिजातस्येव मणेर्ग्रहीतृग्रहणग्राह्येषु तत्स्थतदञ्जनता समापत्तिः।।1.41।। तत्र शब्दार्थज्ञानविकल्पैः संकीर्णा सवितर्का समापत्तिः।।1.42।। स्मृतिपरिशुद्धौ स्वरूपशून्येवार्थमात्रनिर्भासा निर्वितर्का।।1.43।। एतयैव सविचारा निर्विचारा च सूक्ष्मविषया व्याख्याता।।1.44।। सूक्ष्मविषयत्त्वं चालिङ्गपर्यवसानम्।।1.45।। ता एव सबीजः समाधिः।।1.46।। निर्विचारवैशार...

PATANJAL YOGSUTRA SAMADHIPAD(27-39) 26.09.2020

तस्य वाचकः प्रणवः।।1.27।। तज्जपस्तदर्थभावनम्।।1.28।। ततः प्रत्यक्चेतनाधिगमोऽप्यन्तरायाभावश्च।।1.29।। व्याधिस्त्यानसंशयमप्रमादालस्याविरतिभ्रान्तिदर्शनालब्धभूमिकत्वानवस्थितत्वानि चित्तविक्षेपास्तेऽन्तरायाः।।1.30।। दुःखदौर्मनस्याङ्गमेजयत्वश्वासप्रश्वासा विक्षेपसहभुवः।।1.31।। तत्प्रतिषेधार्थमेकतत्त्वाभ्यासः।।1.32।। मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां सुखदुःखपुण्यापुण्यविषयाणां भावनातश्चित्तप्रसादनम्।।1.33।। प्...

PATANJAL YOGSUTRA SAMADHIPAD(14-26) 26.09.2020

स तु दीर्घकालनैरंन्तर्यसत्कारासेवितो दृढ़भूमिः।।1.14।। दृष्टानुश्रविकविषयवितृष्णस्य वशीकारसंज्ञा वैराग्यम्।।1.15।। तत्परं पुरुषख्यातेर्गुणवैतृष्ण्यम्।।1.16।। वितर्कविचारानन्दास्मितारूपानुगमात्संप्रज्ञातः।।1.17।। विरामप्रत्ययाभ्यासपूर्वः संस्कारशेषोऽन्यः।।1.18।। भवप्रत्ययो विदेहप्रकृतिलयानाम्।।1.19।। श्रद्धावीर्यस्मृतिसमाधिप्रज्ञापूर्वक इतरेषाम्।।1.20।। तीव्रसंवेगानामासन्नः।।1.21।। मृदुमध्याधिमात्र...

PATANJAL YOGSUTRA SADHANPAD(1-13) 24.09.2020

Formula, that change your life

प्रेमयोग भाग 4 21.09.2020

।।४०।। मुर्झा न पाये जो कभी ऐसी है प्रेम की माला, जीवन है गुलबाग बना, जब से अपने पर डाला। ।।४१।। चुपके से आकर उसने, की है दिल की चोरी लिख डाली प्यार की लिपि, जो थी अभी तक कोरी। ।।४२।। सपनों में उनको देखूं, जाने कैसी है निद्रा प्रेम सुधा बरसाए ऐसी उनकी है मुद्रा। ।।४३।। पाषाण बने कोई दिल से कैसे प्यार को जाने फूलों सा जिनका दिल हो, बस वही प्यार को माने। ।।४४।। लहराये बलखाये, जैसे हो कोई सरिता होठों...

प्रेम योग भाग 3 21.09.2020

।।२७।। हँस-हँस कर, रो-रो कर करता हूँ उनसे बातें। अब उनकी ही यादों में, कटती है अपनी रातें। ।।२८।। वह खूब घड़ी थी शायद जब हमसे वे मिले थे तब मेरे भी बगियाँ में कुछ सुन्दर फूल खिले थे। ।।२९।। हँसने रोने की उनकी, हर एक अदा है निराली, आकर जरा तो देखो है वो कितनी भोली-भाली। ।।३०।। उनके श्यामल छवि का, हो गया हूँ मैं तो कायल, साधारण प्रेमी जैसा, मैं भी हुआ हूँ घायल। ।।३१।। कब सोचा था मैंने, एक ऐसा संसार...

प्रेम योग भाग 2 20.09.2020

।।१४।। अलकों-पलकों की कथाएँ, कहूँ क्या मैं सबको, मैं रोज गगन छूता हूँ मिला हूँ जब से उनको। ।।१५।। सुनाने को सुना मैं दू पर कौन सुनेगा यह कहानी? बात ही कुछ ऐसी है जैसे हो बहता पानी। ।।१६।। कैसे मैं सुनाऊँ सबको, अपनी यह प्रेम कहानी, कोई प्रमाण नहीं है, न है कोई भी निशानी। ।।१७।। दुविधा के उन क्षणों में, जब मैंने उनको देखा, तब से उनको है माना, अपने जीवन की रेखा। ।।१८।। उनकी आँखें अब हर पल, मुझको घेरा...

प्रेमयोग भाग 1 20.09.2020

।।१।। प्रिय मिले जब से, आई जीवन में उमंग, फैल रही है जीवन में, धीरे-धीरे प्रेम रंग । ।।२।। जान लिया मैंने भी तो, प्रेम का अद्भुत रहस्य दूर हो गयी जाने कैसे, मेरे जीवन का आलस्य। ।।३।। कैसे जाने वे आए, हृदय में मेरे एकाएक, हो उठा तन-मन पुलकित, होठों से जब किया अभिषेक। ।।४।। ले जायेगी जो मुझको, मिली मुझे अब वे राहें, पास आ गई मेरी मंजिल, डाली जब अपनी बाँहे। ।।५।। हर वो खुशियाँ पाई मैंने, की थी जो - ज...

हिंसा 17.09.2020

स्टेशन के नीचे एक कौवा एक मरे चूहे को नोच रहा था। तभी ऊपर खड़ा मैं एक कविता सोच रहा था। ना जाने क्या था! जिसे विस्मय से देख रहा था। नोचता नोचता उबता उसका मन। सोचता सोचता मैं पड़ गया जाने किस उलझन? कितना अंतर था हम दोनों की करनी में। लेकिन कुछ तो था, जो गलत था। कौवा हिंसा कर रहा था, मैं उसे देख खड़ा था। पर कोई था। जो बेचारा! बेजान पड़ा था। MUKESH KUMAR SONI NET Qualified in Yoga M.A. in Yoga,M.A....

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