Priya Shukla
एक कविता
कविता, शायरी, किताबें और कहानियां बस यही तो हैं इंसान की कमजोरियां।कभी किताबों में तो कभी फिल्मों में सुनते हैं सब आज कुछ पॉडकास्ट पर भी सुन लो मेरी कुछ गुस्ताखियां😎
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Auteur
Priya Shukla
Catégorie
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Dernier épisode
2 juil. 2024
Où écouter ?
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Épisodes
अभी तो चांद देखा है 02.07.2024 1:39
कुमार विश्वास के स्टाइल में मेरी दो पंक्तियां।
बेचैनी 02.09.2023 1:43
कभी कभी कुछ लोग हमारे बहुत करीब होकर भी हमसे बहुत दूर जा चुके होते हैं और कभी कभी इसका उल्टा भी होता है।
मैंने देखा है 29.05.2023 1:34
जिंदगी हमें बहुत कुछ सिखाती और दिखाती है, ये कविता कुछ ऐसी ही बातों का संक्षिप्त वर्णन मात्र है।
इंतज़ार कर 13.03.2023 1:14
नाउम्मीदी से उम्मीद की ओर एक कदम बढ़ाओ तो सही हर मंजिल मिलेगी सब्र अपनाओ तो सही
सुनो M.tech वालों 20.07.2022 3:49
मेरे M.tech wale दोस्तों के लिए। राजेश्वरी सोनकर, निकिता प्रजापति, निधि पांडे, रूचि यादव और श्रृष्टि सिंह के लिए।
मेरे साथ तुम हो 24.03.2022 1:36
मेरे साथ तुम हो
एक और कविता 20.03.2022 1:11
एक और कविता
बेतरतीब शब्द 29.12.2021 2:17
बेतरतीब शब्द
अनजान इश्क 23.12.2021 1:29
अनजान इश्क
उनके बारे 22.12.2021 0:34
उनके बारे
Antima by Manav Kaul 11.09.2021 1:32
This one is a small excerpt from the beautiful novel Antima written by Manav Kaul
दिशाहीन समाज 02.08.2021 0:19
दिशाहीन समाज
भावनाओं की बारिश 16.07.2021 0:32
प्रेम की रूपक बारिश
तन्हाई 13.05.2021 0:19
तन्हाई में भी शोर होता है दोस्तों कभी काम बंद करके सुनना
कोई हमें ढूंढ लो 10.05.2021 0:41
कोई हमें ढूंढ लो
परिचय 28.04.2020 0:23
चलिए खुद से मिलते हैं इससे पहले की देर हो जाए
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